पंद्रहवें वित्त आयोग के सशर्त अनुदान: उपयोग और चुनौतियाँ

पंद्रहवें वित्त आयोग के अंतर्गत प्रदत्त सशर्त अनुदान का उपयोग — concept mind map

पंद्रहवें वित्त आयोग के सशर्त अनुदान: उपयोग और चुनौतियाँ

✎ पंद्रहवें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों को पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और स्वच्छता के लिए 1.42 लाख करोड़ रुपये के सशर्त अनुदान की अनुशंसा की थी, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर इन सेवाओं में सुधार करना था।

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वित्त आयोग अनुदान प्रवाह

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ  |  GS Paper III — सरकारी बजट
  • Prelims: वित्त आयोग, अनुच्छेद 280, ग्रामीण स्थानीय निकाय, सशर्त अनुदान, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, पंचायती राज संस्थाएँ, राजकोषीय संघवाद, केंद्रीय बजट
  • Essay: भारत में राजकोषीय संघवाद: चुनौतियाँ और आगे की राह, स्थानीय स्वशासन का सशक्तिकरण: लोकतंत्र और विकास का आधार

त्वरित पुनरावृत्ति: पंद्रहवें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों को पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और स्वच्छता के लिए 1.42 लाख करोड़ रुपये के सशर्त अनुदान की अनुशंसा की थी, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर इन सेवाओं में सुधार करना था।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पंद्रहवें वित्त आयोग (XV-FC) के अंतर्गत ग्रामीण स्थानीय निकायों को प्रदत्त सशर्त (Tied) अनुदानों के उपयोग से संबंधित जानकारी जारी की गई है। यह जानकारी विशेष रूप से आंध्र प्रदेश राज्य को आवंटित और जारी किए गए अनुदानों पर केंद्रित है, जिसमें इन निधियों के उपयोग की स्थिति और संबंधित विभागों द्वारा केंद्रीय स्तर पर संधारित न की जाने वाली विस्तृत जानकारी पर प्रकाश डाला गया है। यह समाचार वित्त आयोग की अनुशंसाओं और केंद्र तथा राज्यों के बीच वित्तीय हस्तांतरण के तंत्र को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 280 (Article 280) के तहत प्रत्येक पाँच वर्ष पर एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन किया जाता है, जिसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण की अनुशंसा करना है।
  • पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट दो चरणों में प्रस्तुत की: वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए अंतरिम रिपोर्ट और 2021-26 की अवधि के लिए अंतिम रिपोर्ट।
  • आयोग ने 28 राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies – RLBs) को वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए कुल 2.36 लाख करोड़ रुपये की अनुशंसा की थी। इसमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं जहाँ पंचायतें होना आवश्यक नहीं है (पाँचवीं एवं छठी अनुसूची के क्षेत्र तथा छूट प्राप्त क्षेत्र)।
  • इस कुल राशि का 60 प्रतिशत (1.42 लाख करोड़ रुपये) सशर्त अनुदान के रूप में निर्धारित किया गया था, जिसका उपयोग पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण तथा स्वच्छता एवं खुले में शौच से मुक्त (ODF) स्थिति के अनुरक्षण जैसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए किया जाना था।
  • सशर्त अनुदान का आवंटन ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के कार्यान्वयन हेतु जारी परिचालन दिशानिर्देशों में उल्लिखित निर्धारित मानदंडों की पूर्ति के आधार पर किया जाता है।
  • पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, पंद्रहवें वित्त आयोग के सशर्त अनुदानों के कार्यान्वयन हेतु नोडल विभाग है।

वित्त आयोग और सशर्त अनुदान

  • वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय संबंधों को परिभाषित करता है। यह भारत में राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
  • आयोग की मुख्य अनुशंसाओं में केंद्रीय करों के शुद्ध आगमों का राज्यों के बीच वितरण, राज्यों को सहायता अनुदान (Grants-in-aid) के सिद्धांत और राज्य वित्त आयोगों द्वारा की गई अनुशंसाओं के आधार पर पंचायतों और नगरपालयों के संसाधनों की अनुपूर्ति के लिए राज्य की संचित निधि को बढ़ाने हेतु आवश्यक उपाय शामिल हैं।
  • सशर्त अनुदान (Tied Grants) वे अनुदान होते हैं जो केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को विशिष्ट उद्देश्यों या कार्यक्रमों के लिए दिए जाते हैं। इन निधियों का उपयोग केवल उन्हीं निर्दिष्ट क्षेत्रों में किया जा सकता है जिनके लिए वे आवंटित किए गए हैं।
  • पंद्रहवें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों को जल एवं स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों के लिए सशर्त अनुदान की अनुशंसा की थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में इन महत्वपूर्ण सेवाओं में सुधार करना था।
  • इन अनुदानों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर शासन को मजबूत करना, बुनियादी ढाँचे का विकास करना और नागरिकों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान करना है, जिससे पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) की भूमिका सशक्त होती है।
  • अनुदानों का वितरण व्यय विभाग द्वारा राज्यों को किया जाता है, और फिर राज्य सरकारें इन निधियों को ग्रामीण स्थानीय निकायों/छूट प्राप्त क्षेत्रों को हस्तांतरित करती हैं।
  • पंद्रहवें वित्त आयोग की अवधि 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो चुकी है, और इस अवधि के समाप्त होने के साथ ही राज्यों की लंबित अनुदान राशि लैप्स हो गई है।
  • सोलहवें वित्त आयोग (Sixteenth Finance Commission) के अंतर्गत भी ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं को जल एवं स्वच्छता संबंधी उपयोग हेतु सशर्त अनुदान प्रदान किए जाने की संभावना है, जिसके लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तकनीकी परामर्श/मार्गदर्शन जारी कर रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
पंद्रहवें वित्त आयोग (XV-FC) की सिफारिशें ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय हस्तांतरण के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास को बढ़ावा मिलता है।
सशर्त अनुदान (Tied Grants) विशिष्ट उद्देश्यों (जैसे पेयजल, स्वच्छता) के लिए निधियों का आवंटन सुनिश्चित करता है, जिससे लक्षित विकास संभव होता है।
ग्रामीण स्थानीय निकाय (RLBs) स्थानीय शासन की मूलभूत इकाइयाँ हैं, जिन्हें विकास कार्यों के कार्यान्वयन के लिए वित्त आयोग से सीधे सहायता मिलती है।
पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण सशर्त अनुदान के प्रमुख घटक, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।
स्वच्छता एवं खुले में शौच से मुक्त (ODF) स्थिति का अनुरक्षण सशर्त अनुदान का दूसरा प्रमुख घटक, जो ग्रामीण स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वच्छता में सुधार करता है।
वित्तीय वर्ष 2021-26 की अवधि पंद्रहवें वित्त आयोग की अंतिम रिपोर्ट द्वारा अनुशंसित अनुदानों की कार्यान्वयन अवधि।

महत्व

शासन और विकेंद्रीकरण

  • वित्त आयोग के अनुदान संघवाद (Federalism) के सिद्धांत को मजबूत करते हैं, जिससे राज्यों और स्थानीय निकायों को वित्तीय स्वायत्तता मिलती है।
  • सशर्त अनुदान ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies – RLBs) को उनकी प्राथमिकताओं के अनुसार विकास कार्य करने में सक्षम बनाते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर शासन में सुधार होता है।
  • यह स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, क्योंकि निधियों का उपयोग विशिष्ट उद्देश्यों के लिए होता है।

सामाजिक-आर्थिक विकास

  • पेयजल और स्वच्छता पर केंद्रित सशर्त अनुदान ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करते हैं, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • जल सुरक्षा और स्वच्छता में निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है और गरीबी उन्मूलन में सहायता मिलती है।
  • यह सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है, विशेषकर SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) और SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) के संदर्भ में।

वित्तीय प्रबंधन

  • सशर्त अनुदान केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय हस्तांतरण को सुव्यवस्थित करते हैं, जिससे ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए एक स्थिर निधि प्रवाह सुनिश्चित होता है।
  • यह राज्यों को अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं को निर्धारित करने और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार संसाधनों का आवंटन करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • अनुदानों का समय पर उपयोग और निगरानी वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है।

चुनौतियाँ

1. निधियों के उपयोग में देरी

  • राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों को निधियों के हस्तांतरण में देरी से परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विलंब होता है।
  • स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक क्षमता की कमी भी निधियों के प्रभावी उपयोग में बाधा डालती है।

2. कार्यान्वयन संबंधी कमियाँ

  • परियोजनाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों का अभाव।
  • स्थानीय स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधनों की कमी से योजनाओं का कुशल कार्यान्वयन प्रभावित होता है।

3. डेटा संधारण का अभाव

  • केंद्रीय स्तर पर जिला-वार, मंडल-वार और ग्राम पंचायत-वार उपयोग किए गए अनुदानों का विवरण उपलब्ध न होना, जिससे जवाबदेही और निगरानी में कमी आती है।
  • अप्रयुक्त निधियों और कार्यान्वयन संबंधी कमियों की जानकारी का अभाव नीति निर्माण और भविष्य की योजना में बाधा डालता है।

4. वित्त आयोग चक्र की समाप्ति पर निधियों का लैप्स होना

  • वित्त आयोग की अवधि समाप्त होने पर अप्रयुक्त निधियों का लैप्स हो जाना, जिससे राज्यों को आवंटित संसाधनों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।
  • यह राज्यों को समय पर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है, लेकिन अप्रयुक्त निधियों का नुकसान भी होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
निधियों के हस्तांतरण में देरी राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों को निधियों के समय पर हस्तांतरण में विलंब से परियोजना कार्यान्वयन प्रभावित होता है।
केंद्रीय स्तर पर डेटा का अभाव पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जिला-वार/ग्राम पंचायत-वार उपयोग किए गए अनुदानों का विवरण संधारित न करना, जिससे निगरानी और मूल्यांकन कठिन हो जाता है।
कार्यान्वयन क्षमता की कमी स्थानीय स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञता, मानव संसाधन और प्रशासनिक क्षमता का अभाव परियोजनाओं के कुशल कार्यान्वयन में बाधा डालता है।
अप्रयुक्त निधियों का लैप्स होना वित्त आयोग की अवधि समाप्त होने पर अप्रयुक्त अनुदान राशि का लैप्स हो जाना, जिससे संसाधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता।
निगरानी और मूल्यांकन सशर्त अनुदानों के उपयोग और उनके प्रभाव की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों का अभाव।
पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता सशर्त अनुदानों की प्रकृति पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता को कुछ हद तक सीमित कर सकती है, क्योंकि निधियां विशिष्ट उद्देश्यों के लिए निर्धारित होती हैं।

आगे की राह

  • राज्य सरकारों को ग्रामीण स्थानीय निकायों को निधियों का समय पर और सीधा हस्तांतरण सुनिश्चित करना चाहिए।
  • केंद्रीय और राज्य स्तर पर सशर्त अनुदानों के उपयोग, व्यय और कार्यान्वयन की प्रगति का विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिए।
  • ग्रामीण स्थानीय निकायों की प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
  • परियोजनाओं के कार्यान्वयन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
  • स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं के लचीलेपन को बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि सशर्त अनुदानों का अधिकतम उपयोग हो सके।
  • सोलहवें वित्त आयोग के तहत जल एवं स्वच्छता संबंधी अनुदानों के लिए स्पष्ट और व्यवहार्य दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए।
  • पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को और बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पंद्रहवाँ वित्त आयोग · सशर्त अनुदान · ग्रामीण स्थानीय निकाय · पेयजल आपूर्ति · स्वच्छता · खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) · संघीय राजकोषीय संबंध · पंचायती राज संस्थाएँ · राज्यों को वित्त हस्तांतरण · स्थानीय स्वशासन · अनुच्छेद 280 · सोलहवाँ वित्त आयोग

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन और कार्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243I’, ‘note’: ‘राज्य वित्त आयोग का गठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के क्षेत्राधिकार के विषय’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्र सरकार द्वारा वित्त आयोग का गठन  →  वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अनुदानों की सिफारिश  →  अनुदानों का सशर्त और असशर्त भागों में विभाजन  →  व्यय विभाग द्वारा राज्यों को निधियां जारी करना  →  राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों को निधियां हस्तांतरित करना  →  ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा जल और स्वच्छता परियोजनाओं का कार्यान्वयन  →  स्थानीय स्तर पर विकास और सेवा वितरण में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट दो चरणों में प्रस्तुत की, जिसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए अंतरिम रिपोर्ट और 2021-26 के लिए अंतिम रिपोर्ट शामिल है।
2. पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों को अनुशंसित कुल राशि का 60 प्रतिशत सशर्त अनुदान के रूप में पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और स्वच्छता के लिए निर्धारित किया गया था।
3. सशर्त अनुदान का उपयोग केवल जल एवं स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों के लिए ही किया जाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट दो चरणों में प्रस्तुत की: 2020-21 के लिए अंतरिम रिपोर्ट और 2021-26 के लिए अंतिम रिपोर्ट। कथन 2 सही है। कुल अनुशंसित राशि का 60% (1.42 लाख करोड़ रुपये) सशर्त अनुदान के रूप में जल और स्वच्छता संबंधी उद्देश्यों के लिए निर्धारित किया गया था। कथन 3 सही है। सशर्त अनुदान का उपयोग केवल जल एवं स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों के लिए ही किया जाना है, जैसा कि दिशानिर्देशों में निर्दिष्ट है।

Q2. पंद्रहवें वित्त आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसका गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत किया जाता है।
  2. पंद्रहवें वित्त आयोग ने 28 राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों को 2.36 लाख करोड़ रुपये की अनुशंसा की थी।
  3. सशर्त अनुदानों के कार्यान्वयन हेतु पेयजल एवं स्वच्छता विभाग नोडल विभाग है।
  4. पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित सभी अनुदानों का जिला-वार, मंडल-वार और ग्राम पंचायत-वार विवरण केंद्रीय स्तर पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा संधारित किया जाता है।

उत्तर: पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित सभी अनुदानों का जिला-वार, मंडल-वार और ग्राम पंचायत-वार विवरण केंद्रीय स्तर पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा संधारित किया जाता है। — विकल्प (d) सही नहीं है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा केंद्रीय स्तर पर जिला-वार, मंडल-वार तथा ग्राम पंचायत-वार विवरण संधारित नहीं किया जाता है। अन्य सभी कथन सही हैं। वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है (अनुच्छेद 280), पंद्रहवें वित्त आयोग ने 28 राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों को 2.36 लाख करोड़ रुपये की अनुशंसा की थी, और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग सशर्त अनुदानों के कार्यान्वयन हेतु नोडल विभाग है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों को दिए गए सशर्त अनुदानों के महत्व और कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ये अनुदान स्थानीय स्वशासन को सशक्त करने में सफल रहे हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में पंद्रहवें वित्त आयोग (XV-FC) की भूमिका और अनुच्छेद 280 के तहत इसकी संवैधानिक स्थिति का संक्षिप्त परिचय दें।

महत्व:
1. **वित्तीय हस्तांतरण:** ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLB) को 2.36 लाख करोड़ रुपये की अनुशंसा, जिसमें से 1.42 लाख करोड़ रुपये सशर्त अनुदान के रूप में।
2. **उद्देश्य-उन्मुख व्यय:** पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और स्वच्छता (खुले में शौच से मुक्त स्थिति का अनुरक्षण) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना।
3. **स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति:** स्थानीय स्तर पर जल और स्वच्छता संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देना।
4. **जवाबदेही:** सशर्त प्रकृति के कारण निधियों के उपयोग में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना।
5. **सतत विकास लक्ष्य (SDGs):** जल और स्वच्छता से संबंधित SDGs की प्राप्ति में योगदान।

चुनौतियाँ:
1. **निधियों के उपयोग की निगरानी:** केंद्रीय स्तर पर जिला-वार, मंडल-वार और ग्राम पंचायत-वार उपयोग विवरण का अभाव, जिससे प्रभावी निगरानी में कमी।
2. **कार्यान्वयन में देरी:** राज्यों द्वारा निधियों के हस्तांतरण और उपयोग में संभावित देरी।
3. **अप्रयुक्त निधियाँ:** पंद्रहवें वित्त आयोग की अवधि समाप्त होने पर लंबित अनुदान राशि का लैप्स होना, जो निधियों के पूर्ण उपयोग में कमी को दर्शाता है।
4. **राज्य सरकारों पर निर्भरता:** व्यय विभाग और राज्य सरकारों के माध्यम से निधियों के प्रवाह पर निर्भरता।
5. **क्षमता निर्माण:** ग्रामीण स्थानीय निकायों में परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और निधियों का प्रबंधन करने की क्षमता का अभाव।
6. **स्थानीय आवश्यकताओं से भिन्नता:** कभी-कभी सशर्तता स्थानीय निकायों की विशिष्ट प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाती।

स्थानीय स्वशासन को सशक्त करने में सफलता का मूल्यांकन:
1. **सकारात्मक प्रभाव:** जल और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधन प्रदान कर बुनियादी सेवाओं में सुधार।
2. **सीमित सशक्तिकरण:** केंद्रीय स्तर पर निगरानी की कमी और निधियों के उपयोग में देरी जैसी चुनौतियों के कारण पूर्ण सशक्तिकरण में बाधाएँ।
3. **क्षमता और स्वायत्तता:** सशर्तता के कारण स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता कुछ हद तक सीमित होती है, हालांकि यह विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित करती है।

निष्कर्ष में, सशर्त अनुदानों ने स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया है, लेकिन प्रभावी निगरानी, समय पर उपयोग और स्थानीय निकायों की क्षमता निर्माण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि वे वास्तव में सशक्त हो सकें। सोलहवें वित्त आयोग के लिए तकनीकी परामर्श/मार्गदर्शन जारी करने का उल्लेख करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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