29 Sep पीएम ई-ड्राइव योजना: जीएआरसी ने ऑटोमोटिव परीक्षण क्षमता में किया बड़ा उन्नयन
✎ पीएम ई-ड्राइव योजना भारत में इलेक्ट्रिक और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के परीक्षण तथा प्रमाणन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper II — शासन, नीतियां एवं हस्तक्षेप
- Prelims: पीएम ई-ड्राइव योजना, ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC), राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम), होमोलोगेशन, AIS-156, AIS-004 पार्ट 3 रिवाईज्ड .1
- Essay: भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति और आत्मनिर्भरता, उन्नत प्रौद्योगिकी और भारत का आर्थिक विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम ई-ड्राइव योजना भारत में इलेक्ट्रिक और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के परीक्षण तथा प्रमाणन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) ने प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत अपनी ऑटोमोटिव परीक्षण क्षमताओं को बढ़ाया है। यह उन्नयन भारत में उभरती हुई इलेक्ट्रिक और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के लिए स्वदेशी परीक्षण और प्रमाणन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) चेन्नई के ओरगडम में स्थित है और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 126 के तहत एक अधिकृत परीक्षण एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
- GARC वाहनों और उनके कल-पुर्जों का परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास, होमोलोगेशन (Homologation) और प्रमाणन करता है, जिसमें पावरट्रेन, उत्सर्जन, विद्युतचुंबकीय अनुकूलता (Electromagnetic Compatibility), टिकाऊपन, इलेक्ट्रिक वाहन और सुरक्षा परीक्षण शामिल हैं।
- भारत सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए कुल 10,900 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया है, जिसमें परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।
- यह योजना 31 मार्च 2028 तक लागू रहेगी, जिसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना है।
- GARC को इस योजना के तहत 221.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन एवं ईवी बैटरी परीक्षण सुविधा, ईवी EMI/EMC परीक्षण सुविधा, भारी वाणिज्यिक वाहन परीक्षण सुविधा और उन्नत पैसिव सेफ्टी परीक्षण सुविधा जैसी प्रमुख सुविधाओं को स्थापित या उन्नत करने में किया जा रहा है।
- उन्नत ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) परीक्षण सुविधा और ऑटोमोटिव कल-पुर्जों के परीक्षण की सुविधा भी इस उन्नयन का हिस्सा हैं, जो भारत के अगली पीढ़ी के ऑटोमोटिव इकोसिस्टम को समर्थन देंगी।
पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है?
- पीएम ई-ड्राइव योजना का पूरा नाम प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट है।
- यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक और उन्नत वाहन प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देना है।
- योजना का कुल परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है, जिसमें से 780 करोड़ रुपये विशेष रूप से परीक्षण एजेंसियों की क्षमताओं को उन्नत करने के लिए निर्धारित किए गए हैं।
- यह योजना 31 मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगी और इसका क्रियान्वयन भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
- इसका लक्ष्य भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और संबंधित प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक विनिर्माण और परीक्षण केंद्र बनाना है।
- यह योजना स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देती है और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता करती है।
- सुरक्षित, तकनीकी रूप से उन्नत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग के विकास में योगदान देना इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| AIS-156 के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन एवं ईवी बैटरी परीक्षण सुविधा | इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और उनकी बैटरियों की सुरक्षा एवं प्रदर्शन मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना। |
| AIS-004 पार्ट 3 रिवाईज्ड .1 के तहत ईवी EMI/EMC परीक्षण सुविधा | इलेक्ट्रिक वाहनों में विद्युतचुंबकीय अनुकूलता (Electromagnetic Compatibility) सुनिश्चित करना, जिससे अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। |
| भारी वाणिज्यिक वाहन परीक्षण सुविधा | भारी वाहनों के लिए विशिष्ट परीक्षण क्षमताएं विकसित करना, जो सड़क सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) परीक्षण सुविधा | आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों जैसे ADAS का परीक्षण करना, जिससे वाहनों की सुरक्षा और चालक सहायता में सुधार हो। |
| हाई स्पीड और हाई रिजॉल्यूशन इमेजिंग सिस्टम | क्रैश परीक्षणों के दौरान वाहन के विरूपण, यात्रियों की गतिविधियों और एयरबैग के खुलने जैसी घटनाओं का विस्तृत विश्लेषण करना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- स्वदेशी परीक्षण और प्रमाणन क्षमताओं को मजबूत करने से आयात पर निर्भरता कम होगी तथा भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा।
- इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत वाहनों के उत्पादन से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा तथा बाजार का विस्तार होगा।
सामरिक महत्व
- भारत को ऑटोमोटिव परीक्षण और अनुसंधान में एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करना, जिससे तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी।
- उभरती हुई ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और ADAS, में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
- सड़क सुरक्षा में सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
सामाजिक महत्व
- उन्नत सुरक्षा परीक्षण सुविधाओं से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, जिससे जनहानि और चोटों में कमी आएगी।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलने से वायु प्रदूषण कम होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
- तकनीकी प्रगति से उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और कुशल वाहन उपलब्ध होंगे।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधन
- उन्नत परीक्षण सुविधाओं के संचालन और रखरखाव के लिए उच्च कुशल तकनीकी विशेषज्ञों की आवश्यकता।
- ऑटोमोटिव क्षेत्र में तेजी से बदलती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन विकास
2. मानकीकरण और नियामक ढाँचा
- उभरती हुई प्रौद्योगिकियों, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहनों और ADAS के लिए अद्यतन और व्यापक मानकीकरण की आवश्यकता।
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों के साथ सामंजस्य स्थापित करने और उन्हें भारतीय संदर्भ में लागू करने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: शासन, औद्योगिक नीति
3. बुनियादी ढाँचे का विस्तार
- देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी परीक्षण सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
- परीक्षण उपकरणों के नियमित उन्नयन और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, औद्योगिक विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी उन्नयन की गति | ऑटोमोटिव उद्योग में तीव्र तकनीकी परिवर्तनों के साथ परीक्षण अवसंरचना को अद्यतन रखने की आवश्यकता। |
| अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा | वैश्विक ऑटोमोटिव परीक्षण केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा में बने रहने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने का दबाव। |
| पर्याप्त वित्तपोषण | दीर्घकालिक रूप से परीक्षण सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए निरंतर और पर्याप्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता। |
| उद्योग-अकादमिक सहयोग | अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना
आगे की राह
- तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों के कौशल विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना।
- अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाना।
- इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों के लिए एक गतिशील नियामक और मानकीकरण ढाँचा विकसित करना।
- घरेलू ऑटोमोटिव उद्योग को अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- परीक्षण सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देना।
- ऑटोमोटिव क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम ई-ड्राइव योजना · ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) · इलेक्ट्रिक वाहन (EV) · ऑटोमोटिव परीक्षण अवसंरचना · केंद्रीय मोटर वाहन नियम · आत्मनिर्भर भारत · विनिर्माण क्षेत्र · तकनीकी उन्नयन · सड़क सुरक्षा · पर्यावरण संरक्षण · मेक इन इंडिया · निर्यात संवर्धन
अवधारणा प्रवाह
पीएम ई-ड्राइव योजना का शुभारंभ → GARC को योजना के तहत आवंटन → परीक्षण अवसंरचना का उन्नयन → इलेक्ट्रिक/उन्नत वाहनों का परीक्षण एवं प्रमाणन → स्वदेशी क्षमता में वृद्धि, सड़क सुरक्षा में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना भारी उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यान्वित की जा रही है।
2. इस योजना का कुल परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है, जिसमें परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।
3. यह योजना 31 मार्च 2028 तक लागू है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही नहीं है क्योंकि योजना भारी उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यान्वित की जा रही है, लेकिन प्रश्न में ‘केवल’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है, इसलिए इसे सही माना जा सकता है। कथन 2 और 3 प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बिल्कुल सही हैं।
Q2. ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. GARC चेन्नई के ओरगडम में स्थित है।
2. यह केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 126 के तहत एक अधिकृत परीक्षण एजेंसी है।
3. GARC में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का परीक्षण किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि GARC में इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ पावरट्रेन, उत्सर्जन, विद्युतचुंबकीय अनुकूलता, टिकाऊपन और सुरक्षा परीक्षण से संबंधित अन्य वाहनों एवं उनके कल-पुर्जों का भी परीक्षण किया जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र के विकास में परीक्षण अवसंरचना के उन्नयन के महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना किस प्रकार सहायक सिद्ध हो रही है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में EV क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और इसके विकास की आवश्यकता पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
मुख्य भाग 1: परीक्षण अवसंरचना के उन्नयन के महत्व का परीक्षण करें। इसमें शामिल होंगे:
सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना (AIS-156, AIS-004 पार्ट 3 रिवाइज्ड .1 जैसे मानकों का उल्लेख)।
गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार।
अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना।
स्वदेशी विनिर्माण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को प्रोत्साहन।
निर्यात क्षमता में वृद्धि।
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण।
उपभोक्ता विश्वास बढ़ाना।
मुख्य भाग 2: पीएम ई-ड्राइव योजना की भूमिका का विश्लेषण करें। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल होने चाहिए:
योजना का उद्देश्य और कुल परिव्यय (10,900 करोड़ रुपये)।
परीक्षण एजेंसियों (जैसे GARC) के उन्नयन के लिए विशेष प्रावधान (780 करोड़ रुपये)।
GARC में स्थापित की जा रही नई सुविधाओं का उल्लेख (EV बैटरी परीक्षण, EMI/EMC परीक्षण, ADAS, उन्नत पैसिव सेफ्टी परीक्षण आदि)।
यह योजना कैसे भारत को अगली पीढ़ी के ऑटोमोटिव इकोसिस्टम के लिए तैयार कर रही है।
तकनीकी रूप से उन्नत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग के विकास में योगदान।
निष्कर्ष: भारत के EV लक्ष्यों को प्राप्त करने और वैश्विक ऑटोमोटिव मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरने में ऐसी योजनाओं और अवसंरचनात्मक विकास के महत्व को दोहराएं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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