पीएम मोदी ने चेन्नई में ₹13,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया शुभारंभ

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अवसंरचना विकास प्रक्रिया

✎ अवसंरचना विकास आर्थिक संवृद्धि, रोज़गार सृजन और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहयोगी संघवाद के माध्यम से केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से साकार होता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — अवसंरचना  |  GS Paper II — संघवाद
  • Prelims: अवसंरचना विकास, आर्थिक संवृद्धि, रोज़गार सृजन, शहरीकरण, मेट्रो रेल, पत्तन विकास
  • Essay: आधुनिक अवसंरचना के माध्यम से भारत का आर्थिक विकास, सहयोगी संघवाद और राज्य-केंद्र संबंध

त्वरित पुनरावृत्ति: अवसंरचना विकास आर्थिक संवृद्धि, रोज़गार सृजन और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहयोगी संघवाद के माध्यम से केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से साकार होता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री ने चेन्नई, तमिलनाडु में ₹13,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं में सड़क, रेल, पत्तन (Port) और शहरी अवसंरचना से संबंधित पहलें शामिल हैं, जिनका उद्देश्य राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और रोज़गार के अवसर पैदा करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार देश भर में समग्र अवसंरचना विकास पर ज़ोर दे रही है, जिसमें परिवहन, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
  • अवसंरचना विकास को आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और समावेशी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक माना जाता है।
  • पिछले दशक में, देश में मेट्रो नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है ताकि शहरी गतिशीलता में सुधार हो सके।
  • पत्तन अवसंरचना को भी मज़बूत किया जा रहा है ताकि पोत परिवहन (Shipping) क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू सके और व्यापार को बढ़ावा मिले।
  • सहयोगी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत के तहत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर विकास परियोजनाओं को लागू करती हैं।
  • इन परियोजनाओं का लक्ष्य रोज़मर्रा के आवागमन को आसान बनाना, उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देना तथा युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करना है।

अवसंरचना विकास और इसका महत्व

  • अवसंरचना विकास में भौतिक संरचनाओं का निर्माण और उन्नयन शामिल है, जैसे सड़कें, रेलवे, हवाई अड्डे, पत्तन, बिजली संयंत्र और दूरसंचार नेटवर्क।
  • यह किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है, जो वस्तुओं और सेवाओं की कुशल आवाजाही को सुगम बनाता है।
  • बेहतर अवसंरचना से निवेश आकर्षित होता है, उत्पादन लागत कम होती है और व्यापार प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ती है।
  • शहरी अवसंरचना, जैसे मेट्रो रेल, शहरों में भीड़भाड़ कम करने, वायु प्रदूषण घटाने और नागरिकों के लिए यात्रा समय बचाने में मदद करती है।
  • पत्तन विकास अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे आयात-निर्यात को बढ़ावा मिलता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मज़बूत होती है।
  • अवसंरचना परियोजनाओं से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
  • यह जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है, लोगों को बेहतर सुविधाओं और सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है।
  • सरकार की ‘गति शक्ति’ योजना का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करके अवसंरचना परियोजनाओं के नियोजन और कार्यान्वयन को गति देना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
₹13,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाएँ तमिलनाडु में आर्थिक गतिविधियों और रोज़गार सृजन को बढ़ावा।
पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं का उद्घाटन तत्काल लाभ और नागरिकों के जीवन में सुधार।
नई परियोजनाओं का शिलान्यास भविष्य के विकास और अवसंरचनात्मक विस्तार की नींव।
मेट्रो नेटवर्क का विस्तार शहरी गतिशीलता में सुधार, भीड़भाड़ में कमी और प्रदूषण नियंत्रण।
पत्तन अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण पोत परिवहन क्षेत्र को बढ़ावा, व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि।
आईआईटी मद्रास में मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र जन स्वास्थ्य में वैज्ञानिक प्रगति और नवाचार को प्रोत्साहन।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • परियोजनाओं से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश होगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
  • अवसंरचना विकास से उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • पत्तन अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण से निर्यात और आयात में वृद्धि होगी, जो राज्य और देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

सामाजिक महत्व

  • मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से शहरी निवासियों के लिए आवागमन आसान होगा, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • रोज़गार के अवसरों के सृजन से युवाओं को लाभ मिलेगा, जिससे सामाजिक असमानता कम हो सकती है।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान, विशेषकर जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में, समाज के कल्याण में योगदान देगा।

अवसंरचनात्मक महत्व

  • आधुनिक अवसंरचना का विकास भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगा।
  • परियोजनाएँ देश की सांस्कृतिक ताकत और वैज्ञानिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करती हैं, जो समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
  • समग्र अवसंरचना विकास शहरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

शासनिक महत्व

  • सहयोगी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत को मज़बूती मिलती है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हैं।
  • राज्य के विकास के माध्यम से देश के विकास का मंत्र सुशासन (Good Governance) के लिए एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है।

चुनौतियाँ

1. परियोजना कार्यान्वयन में चुनौतियाँ

  • भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंज़ूरी में देरी से परियोजनाओं की लागत और समय-सीमा प्रभावित हो सकती है।
  • परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कुशल जनशक्ति और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

2. वित्तीय स्थिरता

  • इतनी बड़ी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
  • राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और मुद्रास्फीति (Inflation) पर परियोजनाओं के प्रभाव का प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

3. शहरी नियोजन और सतत विकास

  • शहरी अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ सतत शहरी नियोजन (Sustainable Urban Planning) सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) और शमन उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन महत्वपूर्ण है।

4. क्षेत्रीय असमानताएँ

  • विकास परियोजनाओं का लाभ सभी क्षेत्रों और वर्गों तक समान रूप से पहुँचे, यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों को भी अवसंरचना विकास से जोड़ना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परियोजना निष्पादन में देरी लागत में वृद्धि और अपेक्षित लाभों में विलंब।
पर्यावरणीय प्रभाव बड़े पैमाने पर निर्माण से पारिस्थितिकी पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
वित्तीय प्रबंधन परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता और उसका कुशल उपयोग।
सामाजिक विस्थापन अवसंरचना परियोजनाओं के कारण स्थानीय आबादी का संभावित विस्थापन।
तकनीकी और मानव संसाधन आधुनिक परियोजनाओं के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और कुशल श्रमिकों की कमी।

आगे की राह

  • परियोजनाओं के समयबद्ध और कुशल कार्यान्वयन के लिए एक मज़बूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए ताकि देरी को कम किया जा सके।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और शमन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
  • स्थानीय समुदायों को विकास परियोजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए और उनके हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) मॉडल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि वित्तीय बोझ को साझा किया जा सके और विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सके।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को निरंतर समर्थन दिया जाना चाहिए ताकि जन स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति हो सके।
  • शहरी नियोजन में सतत विकास के सिद्धांतों को एकीकृत किया जाना चाहिए ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अवसंरचना विकास · सहयोगी संघवाद · आर्थिक संवृद्धि · रोज़गार सृजन · शहरीकरण · क्षेत्रीय विकास · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · सतत विकास · राष्ट्रीय विकास · मेगा परियोजनाएं

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 282: केंद्र और राज्यों द्वारा अनुदान
  • अनुच्छेद 292: भारत सरकार द्वारा उधार लेना
  • सातवीं अनुसूची: संघ और राज्य सूची में विषय

अवधारणा प्रवाह

अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश  →  आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि  →  रोज़गार के अवसरों का सृजन  →  जीवन की गुणवत्ता में सुधार  →  समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार केवल बड़े महानगरों तक ही सीमित है।
2. पत्तन अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण पोत परिवहन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने में सहायक है।
3. अवसंरचना परियोजनाओं का उद्देश्य रोज़गार के अवसर पैदा करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि भारत में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार बड़े महानगरों के अलावा अन्य शहरों में भी किया जा रहा है, जिससे शहरी गतिशीलता में सुधार हो रहा है। कथन 2 सही है, पत्तन अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण समुद्री व्यापार और पोत परिवहन क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। कथन 3 भी सही है, अवसंरचना परियोजनाएं न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाती हैं बल्कि निर्माण और संबंधित क्षेत्रों में रोज़गार भी पैदा करती हैं, जिससे आर्थिक संवृद्धि होती है।

Q2. अभिकथन (A): केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में अवसंरचना परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन सहयोगी संघवाद का एक उदाहरण है।
कारण (R): सहयोगी संघवाद का अर्थ है केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सहयोग।
निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में परियोजनाओं का क्रियान्वयन केंद्र और राज्य के बीच समन्वय और सहयोग को दर्शाता है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि सहयोगी संघवाद का मूल सिद्धांत यही है कि केंद्र और राज्य मिलकर राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करें।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में अवसंरचना विकास राष्ट्रीय संवृद्धि और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है? सहयोगी संघवाद के संदर्भ में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के महत्व का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: अवसंरचना विकास की परिभाषा और राष्ट्रीय विकास में इसकी भूमिका का संक्षिप्त उल्लेख।
मुख्य भाग 1: राष्ट्रीय संवृद्धि में अवसंरचना के महत्व पर चर्चा करें। इसमें आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, रोज़गार सृजन, निवेश आकर्षित करना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना और उत्पादकता बढ़ाना शामिल है। उदाहरण के तौर पर सड़क, रेल, पत्तन, हवाई अड्डे और शहरी मेट्रो परियोजनाओं का उल्लेख करें।
मुख्य भाग 2: क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में अवसंरचना की भूमिका का विश्लेषण करें। इसमें पिछड़े क्षेत्रों तक पहुँच बढ़ाना, आर्थिक अवसरों का विस्तार करना और सामाजिक सेवाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य) तक पहुँच में सुधार करना शामिल है।
मुख्य भाग 3: सहयोगी संघवाद के संदर्भ में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के महत्व पर प्रकाश डालें। इसमें संयुक्त वित्तपोषण, परियोजना नियोजन, भूमि अधिग्रहण और कार्यान्वयन में सहयोग के लाभों पर चर्चा करें। यह बताएं कि कैसे केंद्र और राज्य मिलकर बड़ी परियोजनाओं को कुशलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं।
निष्कर्ष: अवसंरचना विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में सुदृढ़ करें और सहयोगी संघवाद के माध्यम से इसके सतत और समावेशी विकास पर जोर दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चेन्नई, तमिलनाडु में उद्घाटित एवं लोकार्पित की गई विकास परियोजनाओं का कुल अनुमानित व्यय क्या है?

  1. ₹10,000 करोड़
  2. ₹13,000 करोड़
  3. ₹15,000 करोड़
  4. ₹12,000 करोड़

उत्तर: ₹13,000 करोड़ — प्रधानमंत्री द्वारा चेन्नई में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए कुल ₹13,000 करोड़ से अधिक का व्यय किया गया।

Mains: तमिलनाडु में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन करते हुए, राज्य के विकास में केंद्र सरकार की भूमिका पर एक टिप्पणी लिखिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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