16 Sep पीएम विश्वकर्मा योजना के तीन वर्ष: 30 लाख कारीगरों को मिला लाभ, जानें प्रमुख उपलब्धियां
✎ पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक भारतीय कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल उन्नयन, रियायती ऋण, आधुनिक उपकरण और बाजार संपर्क प्रदान कर सशक्त बनाने की एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय
- Prelims: पीएम विश्वकर्मा योजना, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार, कौशल विकास, रियायती ऋण, टूलकिट प्रोत्साहन, बाजार संपर्क, ग्राम पंचायतों/शहरी स्थानीय निकायों (ULB), सामान्य सेवा केंद्र (CSC)
- Essay: भारत में पारंपरिक कौशल का संरक्षण और संवर्धन: चुनौतियाँ और अवसर, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक भारतीय कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल उन्नयन, रियायती ऋण, आधुनिक उपकरण और बाजार संपर्क प्रदान कर सशक्त बनाने की एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की तीसरी वर्षगांठ 17 सितंबर, 2026 को मनाई जाएगी। इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा कोलकाता में एक समारोह का आयोजन किया जाएगा। योजना के शुभारंभ के तीन वर्षों के भीतर ही 30 लाख से अधिक कारीगरों और शिल्पकारों का पंजीकरण हो चुका है, जो इस योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार, जिन्हें ‘विश्वकर्मा’ कहा जाता है, सदियों से देश की सांस्कृतिक विरासत और अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग रहे हैं।
- ये कारीगर विभिन्न हस्तशिल्प, कलाकृतियाँ और पारंपरिक वस्तुएँ बनाते हैं, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
- आधुनिक औद्योगिकरण और बाजार की बदलती मांगों के कारण इन पारंपरिक कारीगरों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था, जिनमें पूंजी की कमी, आधुनिक उपकरणों तक पहुंच का अभाव, कौशल उन्नयन की आवश्यकता और बाजार संपर्क की कमी शामिल थी।
- इन चुनौतियों का समाधान करने और पारंपरिक कौशल को संरक्षित व संवर्धित करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की।
- यह योजना 17 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च की गई थी, जिसका लक्ष्य इन कारीगरों को व्यापक सहायता प्रदान कर उनकी उद्यमशीलता क्षमताओं को मजबूत करना है।
पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
- योजना 18 चिन्हित व्यवसायों में लगे कारीगरों को लक्षित करती है, जिनमें बढ़ई, नाव निर्माता, लोहार, कुम्हार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, धोबी, दर्जी, मालाकार, नाई, सुनार आदि शामिल हैं।
- योजना के तहत लाभार्थियों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाती है।
- इसमें कौशल उन्नयन (बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण), आधुनिक टूलकिट खरीदने के लिए प्रोत्साहन, और रियायती ब्याज दर पर ऋण सहायता (प्रथम चरण में 1 लाख रुपये तक) शामिल है।
- डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन और बाजार संपर्क के लिए विपणन सहायता भी प्रदान की जाती है, जिससे कारीगरों को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
- योजना का कार्यान्वयन ग्राम पंचायतों/शहरी स्थानीय निकायों (ULB) और सामान्य सेवा केंद्रों (CSC) के माध्यम से किया जाता है, जिससे जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| लक्ष्य समूह | पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार (विश्वकर्मा समुदाय) जिनकी संख्या 18 चिन्हित व्यवसायों में है। |
| उद्देश्य | कारीगरों और शिल्पकारों को व्यापक और समग्र सहायता प्रदान करके उनकी आजीविका और उद्यमशीलता क्षमताओं को मजबूत करना। |
| प्रदान की जाने वाली सहायता | संस्थागत सहायता, आधुनिक उपकरण, वित्त तक पहुँच, कौशल उन्नयन, बाजार संपर्क, पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, टूलकिट प्रोत्साहन, ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और विपणन सहायता। |
| वित्तीय सहायता | 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक का ऋण। |
| कौशल विकास | बुनियादी कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। |
| पंजीकरण | तीन चरणों की सत्यापन प्रक्रिया के बाद 30 लाख लाभार्थियों का पंजीकरण। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की आय में वृद्धि करके उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
- आधुनिक उपकरणों और कौशल उन्नयन के माध्यम से उत्पादकता में वृद्धि होती है, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
- रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराकर कारीगरों को अपना व्यवसाय शुरू करने या उसका विस्तार करने में मदद मिलती है, जिससे सूक्ष्म उद्यमशीलता (Micro-entrepreneurship) को प्रोत्साहन मिलता है।
सामाजिक महत्व
- यह योजना पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को संरक्षित और बढ़ावा देती है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं।
- विश्वकर्मा समुदाय को पहचान और सम्मान प्रदान करती है, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान में मदद मिलती है।
- कौशल विकास और वित्तीय समावेशन के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने में सहायक है।
शासनिक महत्व
- यह योजना सरकार की समावेशी विकास (Inclusive Growth) की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहाँ समाज के सभी वर्गों को विकास प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
- डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और इंडिया पोस्ट के माध्यम से टूलकिट वितरण जैसी पहलें सुशासन (Good Governance) और सेवाओं की कुशल डिलीवरी सुनिश्चित करती हैं।
- यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का एक उदाहरण है, जैसा कि पश्चिम बंगाल में इसके कार्यान्वयन से स्पष्ट होता है।
चुनौतियाँ
1. जागरूकता और पहुँच
- दूरदराज के क्षेत्रों में कारीगरों तक योजना की जानकारी पहुँचाना और उन्हें पंजीकरण प्रक्रिया में सहायता प्रदान करना एक चुनौती है।
- डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण ऑनलाइन पंजीकरण और डिजिटल लेनदेन को अपनाने में कठिनाई हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, सरकारी योजनाएँ
2. कौशल उन्नयन और आधुनिकीकरण
- पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीकों और बाजार की मांगों के अनुरूप ढालने के लिए प्रभावी प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करना।
- कारीगरों को आधुनिक उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना और उन्हें इन उपकरणों तक पहुँच प्रदान करना।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास, आर्थिक विकास
3. बाजार संपर्क और प्रतिस्पर्धा
- छोटे कारीगरों के उत्पादों को बड़े बाजारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ना ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके।
- बड़े पैमाने पर उत्पादित वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा का सामना करने में कारीगरों की मदद करना।
यूपीएससी लिंक: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), व्यापार
4. वित्तीय समावेशन और ऋण वितरण
- छोटे और सीमांत कारीगरों को बिना किसी बाधा के रियायती ऋण उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना।
- ऋण के दुरुपयोग को रोकना और यह सुनिश्चित करना कि इसका उपयोग केवल उत्पादक उद्देश्यों के लिए हो।
यूपीएससी लिंक: वित्तीय समावेशन, बैंकिंग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| योजना की जानकारी का अभाव | दूरदराज के क्षेत्रों में कारीगरों तक पहुँच और डिजिटल साक्षरता की कमी। |
| कौशल उन्नयन की गुणवत्ता | प्रशिक्षण को बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप बनाए रखना और आधुनिक तकनीकों का समावेश। |
| बाजार तक सीमित पहुँच | छोटे कारीगरों के उत्पादों को बड़े बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने में कठिनाई। |
| ऋण वितरण में बाधाएँ | छोटे और सीमांत कारीगरों के लिए ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाना। |
| पारंपरिक बनाम आधुनिक | पारंपरिक कौशल को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए कारीगरों को प्रेरित करना। |
| राज्य सरकारों का सहयोग | सभी राज्यों में योजना के समान और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- पीएम विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana)
आगे की राह
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएँ, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाजार की वर्तमान और भविष्य की मांगों के अनुरूप अद्यतन किया जाए, जिसमें आधुनिक तकनीकों और डिजाइन को शामिल किया जाए।
- कारीगरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए विशेष विपणन सहायता और डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएँ।
- ऋण वितरण प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए, जिससे छोटे कारीगरों को आसानी से वित्तीय सहायता मिल सके।
- स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से प्रदर्शनियों और मेलों का आयोजन किया जाए।
- योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए ताकि कमियों को दूर किया जा सके और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।
- कारीगरों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे बीमा और पेंशन से जुड़ाव सुनिश्चित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम विश्वकर्मा योजना · पारंपरिक कारीगर · शिल्पकार · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) · कौशल विकास · वित्तीय समावेशन · बाजार संपर्क · उद्यमशीलता · आत्मनिर्भर भारत · ग्रामीण अर्थव्यवस्था
अवधारणा प्रवाह
पारंपरिक कारीगरों की पहचान → कौशल उन्नयन और प्रशिक्षण → आधुनिक उपकरण और टूलकिट → रियायती ऋण तक पहुँच → बाजार संपर्क और विपणन सहायता → उत्पादकता और आय में वृद्धि → आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पीएम विश्वकर्मा योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए है।
2. योजना के तहत लाभार्थियों को 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की रियायती ब्याज दर पर ऋण प्रदान किया जाता है।
3. इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कौशल को मजबूत करना और आधुनिक उपकरणों तक पहुंच प्रदान करना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह योजना शहरी स्थानीय निकायों (ULB) के प्रतिनिधियों को भी शामिल करती है, जिसका अर्थ है कि यह शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को भी कवर करती है। कथन 2 सही है, योजना के तहत 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। कथन 3 सही है, योजना का लक्ष्य विश्वकर्माओं को संस्थागत सहायता, आधुनिक उपकरण, वित्त तक पहुंच, कौशल उन्नयन और बाजार संपर्क प्रदान करके उनके पारंपरिक कौशल को मजबूत करना है।
Q2. पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत, निम्नलिखित में से कौन सी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं?
1. प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र
2. कौशल उन्नयन प्रशिक्षण
3. टूलकिट प्रोत्साहन
4. डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन
5. विपणन सहायता
सही विकल्प चुनें:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — पीएम विश्वकर्मा योजना में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाणपत्रों और पहचान पत्रों के माध्यम से मान्यता, कौशल उन्नयन, टूलकिट प्रोत्साहन, ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता सहित व्यापक सहायता पैकेज प्रदान किया गया है। अतः सभी पांचों सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण करें और बताएं कि यह योजना भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समावेशी विकास में किस प्रकार योगदान दे सकती है। (15 अंक)
रूपरेखा: परिचय: पीएम विश्वकर्मा योजना का संक्षिप्त परिचय दें, इसके मुख्य उद्देश्य और लक्षित लाभार्थियों (पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार) पर प्रकाश डालें।
मुख्य भाग:
1. योजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाणपत्र, कौशल उन्नयन (बुनियादी और उन्नत), टूलकिट प्रोत्साहन, रियायती ऋण (1 लाख रुपये तक 5% ब्याज पर), डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन, और विपणन सहायता का उल्लेख करें।
2. सशक्तिकरण का समालोचनात्मक परीक्षण: योजना के सकारात्मक प्रभावों पर चर्चा करें जैसे कि पारंपरिक कौशल का संरक्षण, आय में वृद्धि, आधुनिक उपकरणों तक पहुंच, वित्तीय समावेशन और उद्यमशीलता को बढ़ावा। साथ ही, कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियों जैसे जागरूकता की कमी, प्रौद्योगिकी अपनाने में बाधाएं, बाजार की बदलती मांग के साथ अनुकूलन, और ऋण तक पहुंच में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी संक्षेप में चर्चा करें।
3. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समावेशी विकास में योगदान: इस बात पर विस्तार से बताएं कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, पलायन को कम करने, महिला सशक्तिकरण (यदि लागू हो) और हाशिए पर पड़े समुदायों को मुख्यधारा में लाने में कैसे मदद कर सकती है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे सरकारी अभियानों के साथ इसके तालमेल को भी उजागर करें।
निष्कर्ष: योजना के महत्व को दोहराएं और इसके सफल कार्यान्वयन के लिए आगे की राह पर सुझाव दें, जैसे कि निरंतर निगरानी, क्षमता निर्माण और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार अनुकूलन।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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