ब्रिक्स पारंपरिक खेल 2026: मांडविया करेंगे अहमदाबाद में उद्घाटन

ब्रिक्स पारंपरिक खेल 2026: मांडविया करेंगे अहमदाबाद में उद्घाटन

ब्रिक्स पारंपरिक खेल 2026: मांडविया करेंगे अहमदाबाद में उद्घाटन

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ब्रिक्स पारंपरिक खेल आयोजन प्रक्रिया

✎ ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में अहमदाबाद में आयोजित एक गैर-प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य सदस्य और भागीदार देशों के पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper I — भारतीय संस्कृति और विरासत  |  GS Paper II — सामाजिक न्याय (खेल और युवा विकास)
  • Prelims: ब्रिक्स (BRICS), पारंपरिक खेल, स्वदेशी खेल, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, खेल कूटनीति, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, अहमदाबाद
  • Essay: अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका, खेलों के माध्यम से सॉफ्ट पावर का प्रयोग और विरासत का संरक्षण

त्वरित पुनरावृत्ति: ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में अहमदाबाद में आयोजित एक गैर-प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य सदस्य और भागीदार देशों के पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा सहयोग को बढ़ावा देना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने अहमदाबाद में ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 के शुभारंभ की घोषणा की है। भारत सरकार का युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, गुजरात सरकार के सहयोग से, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में 12 अक्टूबर 2026 को वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, अहमदाबाद में इस कार्यक्रम का आयोजन करेगा। यह आयोजन ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों को पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रथाओं को प्रदर्शित करने और खेल के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विरासत संरक्षण और लोगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक साथ लाएगा।

पृष्ठभूमि

  • ब्रिक्स (BRICS) विश्व की पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – के समूह का संक्षिप्त रूप है।
  • यह समूह वैश्विक आर्थिक विकास, राजनीतिक संवाद और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
  • भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रमों और पहलों की योजना बनाई गई है।
  • खेल और युवा मामले ब्रिक्स सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं, जो सदस्य देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को बढ़ावा देते हैं।
  • पारंपरिक और स्वदेशी खेलों का संरक्षण और संवर्धन सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो आधुनिक खेलों के साथ अक्सर उपेक्षित हो जाता है।
  • यह आयोजन एक गैर-प्रतिस्पर्धी मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक खेल प्रथाओं के प्रदर्शन, प्रलेखन और आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करना है, जिसमें सांस्कृतिक महत्व, व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण पर जोर दिया जाएगा।

ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 क्या हैं?

  • ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 एक गैर-प्रतिस्पर्धी आयोजन है, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों की समृद्ध खेल विरासत को प्रदर्शित करना है।
  • यह आयोजन 12 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित किया जाएगा।
  • इन खेलों का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रथाओं को प्रदर्शित करना, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और खेल के माध्यम से विरासत संरक्षण तथा लोगों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
  • भाग लेने वाले देशों से विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और स्वदेशी खेल और सांस्कृतिक प्रथाओं का प्रदर्शन करने की उम्मीद है, जैसे भारत से मल्लखांब, योगासन और कलरिपयट्टू।
  • यह मंच सांस्कृतिक महत्व, व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण पर विशेष जोर देगा, जिससे पारंपरिक खेलों के दस्तावेजीकरण और आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
  • इन खेलों के दौरान ब्रिक्स ढांचे के भीतर खेल में सहयोग को मजबूत करने और पारंपरिक एवं स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देने के अवसरों का पता लगाने के लिए द्विपक्षीय बैठकों की भी योजना बनाई गई है।
  • यह आयोजन ब्रिक्स देशों के बीच आपसी समझ, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करेगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आयोजन तिथि और स्थान 12 अक्टूबर 2026 को वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, अहमदाबाद में आयोजित।
आयोजक भारत सरकार का युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, गुजरात सरकार के सहयोग से।
उद्देश्य पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रथाओं का प्रदर्शन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विरासत संरक्षण को बढ़ावा देना।
प्रारूप एक गैर-प्रतिस्पर्धी मंच, जो सांस्कृतिक महत्व, व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण पर केंद्रित है।
भागीदार देश ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देश (जैसे बेलारूस, बोलीविया, ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, ईरान, कजाखस्तान, रूस, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात)।
भारत का प्रतिनिधित्व मल्लखांब, योगासन, कलरिपयट्टू जैसे पारंपरिक खेल।

महत्व

सांस्कृतिक महत्व

  • यह आयोजन ब्रिक्स देशों की समृद्ध खेल विरासत का जश्न मनाने और पारंपरिक तथा स्वदेशी खेल प्रथाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।
  • यह विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ और सम्मान को बढ़ावा देता है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विरासत संरक्षण को बल मिलता है।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध और कूटनीति

  • ब्रिक्स ढांचे के भीतर खेल में सहयोग को मजबूत करने और पारंपरिक तथा स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देने के अवसरों का पता लगाने के लिए द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की जाएंगी।
  • यह ‘पीपल-टू-पीपल’ (लोगों के बीच) संबंधों को बढ़ावा देता है, जिससे ब्रिक्स देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग में वृद्धि होती है।

खेल और युवा विकास

  • यह युवाओं को पारंपरिक खेलों से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने के लिए प्रेरित करता है।
  • यह पारंपरिक खेलों के प्रलेखन और ज्ञान-साझाकरण को प्रोत्साहित करता है, जिससे इन खेलों का भविष्य सुरक्षित होता है।

चुनौतियाँ

1. पारंपरिक खेलों की पहचान और मानकीकरण

  • विभिन्न देशों के पारंपरिक खेलों में नियमों, तकनीकों और प्रदर्शन मानकों में भिन्नता हो सकती है, जिससे एक समान मंच पर प्रदर्शन में चुनौतियां आ सकती हैं।
  • इन खेलों को आधुनिक दर्शकों के लिए आकर्षक और सुलभ बनाने के लिए मानकीकरण आवश्यक है, लेकिन इससे उनकी प्रामाणिकता प्रभावित हो सकती है।

2. वित्तीय और लॉजिस्टिक बाधाएँ

  • इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और कुशल लॉजिस्टिक प्रबंधन की आवश्यकता होती है, जिसमें परिवहन, आवास और सुरक्षा शामिल है।
  • भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों के लिए यात्रा और ठहरने की व्यवस्था में समन्वय एक जटिल कार्य हो सकता है।

3. सांस्कृतिक संवेदनशीलता और प्रतिनिधित्व

  • यह सुनिश्चित करना कि सभी भागीदार देशों की सांस्कृतिक संवेदनशीलता का सम्मान किया जाए और उनके पारंपरिक खेलों को उचित रूप से प्रस्तुत किया जाए, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
  • किसी भी सांस्कृतिक गलतफहमी या अनुचित प्रतिनिधित्व से बचने के लिए सावधानीपूर्वक योजना और समन्वय की आवश्यकता होती है।

4. स्थायी प्रभाव और विरासत

  • यह सुनिश्चित करना कि यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन न होकर, पारंपरिक खेलों के दीर्घकालिक संरक्षण और संवर्धन में योगदान दे, एक चुनौती है।
  • आयोजन के बाद इन खेलों को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी तंत्र विकसित करना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पारंपरिक खेलों का संरक्षण आधुनिक खेलों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण पारंपरिक खेलों का लुप्त होना।
अंतर्राष्ट्रीय समन्वय विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और खेल प्रथाओं में सामंजस्य स्थापित करना।
जागरूकता और भागीदारी इन खेलों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना।
वित्तीय व्यवहार्यता ऐसे आयोजनों के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण और प्रायोजन सुनिश्चित करना।
बुनियादी ढांचा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विकास।

आगे की राह

  • पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक स्थायी नीति ढांचा विकसित करना।
  • स्कूलों और कॉलेजों में पारंपरिक खेलों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर युवा पीढ़ी को इनसे जोड़ना।
  • पारंपरिक खेलों के प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का उपयोग करके पारंपरिक खेलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों में पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन और समावेश को प्रोत्साहित करना।
  • पारंपरिक खेलों के नियमों और तकनीकों का मानकीकरण करना ताकि उन्हें वैश्विक स्तर पर अधिक स्वीकार्य बनाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ब्रिक्स सहयोग · पारंपरिक खेल · सांस्कृतिक आदान-प्रदान · स्वदेशी खेल · खेल कूटनीति · विरासत संरक्षण · लोगों से लोगों का संपर्क · युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय

अवधारणा प्रवाह

ब्रिक्स अध्यक्षता में भारत द्वारा पारंपरिक खेलों के आयोजन की घोषणा।  →  ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों का अहमदाबाद में आगमन।  →  पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रथाओं का गैर-प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन।  →  सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण।  →  ब्रिक्स देशों के बीच खेल में सहयोग और ‘पीपल-टू-पीपल’ संबंधों का सुदृढ़ीकरण।  →  पारंपरिक खेलों का संरक्षण और वैश्विक मंच पर उनकी पहचान में वृद्धि।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में किया जाएगा।
2. यह खेल एक प्रतिस्पर्धी मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पदक जीतना है।
3. मल्लखांब और योगासन भारत के पारंपरिक खेल हैं जिन्हें इन खेलों में प्रदर्शित किया जाएगा।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। कथन 2 गलत है क्योंकि यह खेल एक गैर-प्रतिस्पर्धी मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि मल्लखांब और योगासन भारत के पारंपरिक खेल हैं जिन्हें इन खेलों में प्रदर्शित किया जाएगा।

Q2. ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच खेल प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।
  2. यह सांस्कृतिक महत्व, व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण पर केंद्रित एक गैर-प्रतिस्पर्धी मंच है।
  3. यह केवल ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए खुला है, भागीदार देशों के लिए नहीं।
  4. इसका आयोजन केवल भारत के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है, किसी राज्य सरकार के सहयोग के बिना।

उत्तर: यह सांस्कृतिक महत्व, व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण पर केंद्रित एक गैर-प्रतिस्पर्धी मंच है। — यह खेल एक गैर-प्रतिस्पर्धी मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसका ध्यान सांस्कृतिक महत्व, व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण पर है। यह ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों दोनों के प्रतिनिधिमंडलों को एक साथ लाएगा। इसका आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, गुजरात सरकार के सहयोग से कर रहा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल जैसे आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने में कैसे सहायक होते हैं? भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति में ऐसे खेलों के महत्व का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का संक्षिप्त उल्लेख, इसके उद्देश्य और गैर-प्रतिस्पर्धी प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए।
2. सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने में भूमिका:
क. पारंपरिक खेल प्रथाओं का प्रदर्शन: विभिन्न देशों की अनूठी खेल विरासत को साझा करना।
ख. विरासत संरक्षण: स्वदेशी खेलों के दस्तावेजीकरण और आदान-प्रदान के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।
ग. आपसी समझ और सम्मान: विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ और सहिष्णुता को बढ़ावा देना।
घ. व्यवसायी बातचीत और ज्ञान-साझाकरण: खेल से संबंधित पेशेवरों और विशेषज्ञों के बीच संवाद को सुगम बनाना।
ङ. सांस्कृतिक कूटनीति: खेल के माध्यम से देशों के बीच सद्भावना और मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना।
3. भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति में महत्व:
क. सांस्कृतिक प्रभाव का विस्तार: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (जैसे योगासन, मल्लखांब) को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना।
ख. वैश्विक छवि निर्माण: भारत को एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और समावेशी राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करना।
ग. द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंध मजबूत करना: ब्रिक्स देशों के साथ संबंधों को गहरा करना और नए भागीदार देशों के साथ जुड़ाव बनाना।
घ. युवा जुड़ाव: युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और वैश्विक नागरिकता को बढ़ावा देना।
ङ. आर्थिक और पर्यटन लाभ: सांस्कृतिक आयोजनों से पर्यटन और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा मिलना।
4. निष्कर्ष: ऐसे आयोजनों के दीर्घकालिक लाभों और भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने में उनकी भूमिका पर बल देते हुए।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा अहमदाबाद में प्रस्तावित ‘ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

  1. A. यह खेल केवल गुजरात राज्य के पारंपरिक खेलों तक सीमित रहेगा।
  2. B. इस आयोजन का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेलों के माध्यम से आपसी संबंधों को मजबूत करना है।
  3. C. इस खेल का आयोजन केवल गुजरात सरकार द्वारा किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी।
  4. D. यह आयोजन 2025 में आयोजित किया जाएगा।

उत्तर: B. इस आयोजन का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेलों के माध्यम से आपसी संबंधों को मजबूत करना है। — ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेलों के माध्यम से आपसी संबंधों को मजबूत करना है।

Mains: ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 के आयोजन से गुजरात राज्य को मिलने वाले संभावित लाभों और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों की चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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