11 Aug भारत बना जहाज रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेता: नियामकीय सुधार और उपलब्धियाँ 2025
✎ भारत ने नियामक सुधारों और आधुनिकीकरण के माध्यम से जहाज रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त किया है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था, संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (मानव भूगोल: उद्योग) | GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक नीति, आधारभूत संरचना), पर्यावरण (प्रदूषण और निम्नीकरण), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (पुनर्चक्रण तकनीक)
- Prelims: जहाज रीसाइक्लिंग, अलंग-सोसिया क्लस्टर, हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, संसाधन सुरक्षा, समुद्री प्रदूषण, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, UNCTAD
- Essay: चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास में जहाज रीसाइक्लिंग की भूमिका, भारत के आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता में समुद्री क्षेत्र का योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत ने नियामक सुधारों और आधुनिकीकरण के माध्यम से जहाज रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त किया है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था, संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत का जहाज रीसाइक्लिंग (Ship Recycling) क्षेत्र आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग के रूप में विकसित हुआ है। 2025 में, भारत विश्व का अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बन गया, जिसकी वैश्विक बाजार में भागीदारी 2024 के 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35.4 प्रतिशत हो गई। रीसाइक्लिंग की मात्रा में भी लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो व्यापक कानूनों, हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते (Hong Kong International Convention) के साथ संयोजन और यार्ड आधुनिकीकरण के माध्यम से सुरक्षा, अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुदृढ़ीकरण को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- जहाज रीसाइक्लिंग समुद्री जीवनचक्र का एक अभिन्न अंग है, जो जहाजों को उनके परिचालन जीवन के अंत में सुरक्षित, पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत और संसाधन-कुशल विनष्टीकरण (Dismantling) में सक्षम बनाती है।
- यह स्टील और अन्य पुन: प्रयोज्य सामग्रियों की रिकवरी के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के उद्देश्यों में सहायता करती है, साथ ही श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए पर्यावरण की भी रक्षा करती है।
- मजबूत कानून और बढ़ी हुई संस्थागत निगरानी ने पारंपरिक विनष्टीकरण कार्यप्रणालियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग में परिवर्तन को प्रेरित किया है, जिसमें अनुपालन, स्थिरता और श्रमिक सुरक्षा अब इसके प्रचालन के केंद्र में हैं।
- गुजरात में अलंग-सोसिया क्लस्टर भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ बना हुआ है, जो देश की वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- पुनर्नवीकृत स्टील को प्राथमिक इस्पात उत्पादन की तुलना में बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी कम होता है, जो भारत की स्थिरता और डीकार्बोनाइजेशन उद्देश्यों में सहायता करता है।
जहाज रीसाइक्लिंग क्या है?
- जहाज रीसाइक्लिंग वह प्रक्रिया है जिसमें जहाजों को उनके परिचालन जीवन के अंत में सुरक्षित, पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत और संसाधन-कुशल तरीके से विनष्ट किया जाता है।
- इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जहाजों से प्राप्त होने वाले स्टील, धातु और अन्य उपयोगी सामग्रियों को पुनर्प्राप्त करना और उन्हें पुन: उपयोग के लिए तैयार करना है।
- यह समुद्री और तटीय प्रदूषण के जोखिम को कम करती है, क्योंकि यह जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है।
- जहाज रीसाइक्लिंग घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है, जिससे आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम होती है और आपूर्ति सुरक्षा मजबूत होती है।
- यह क्षेत्र व्यापक स्तर पर रोजगार सृजित करता है, जिसमें विनष्टीकरण, प्रसंस्करण और सामग्री पुनर्प्राप्ति कार्यकलापों में शामिल श्रमिक शामिल होते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौता (Hong Kong International Convention for the Safe and Environmentally Sound Recycling of Ships) जहाज रीसाइक्लिंग के लिए सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को निर्धारित करता है।
- भारत में, मजबूत नियामक ढांचा और बढ़ी हुई संस्थागत निगरानी ने इस उद्योग को पारंपरिक तरीकों से आधुनिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग में बदल दिया है।
- यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है, क्योंकि यह घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन में सहायता करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वैश्विक नेतृत्व | भारत 2025 में जहाज रीसाइक्लिंग में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बना, वैश्विक बाजार में 35.4% हिस्सेदारी। |
| मात्रा में वृद्धि | रीसाइक्लिंग मात्रा 2024 में 1.86 मिलियन सकल टन से बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन सकल टन हुई (लगभग 60% वृद्धि)। |
| नियामकीय ढाँचा | हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते के साथ व्यापक कानून और बढ़ी हुई संस्थागत निगरानी ने सुरक्षा और अनुपालन को सुदृढ़ किया। |
| अलंग-सोसिया क्लस्टर | भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है, जो इस क्षेत्र के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाता है। |
| चक्रीय अर्थव्यवस्था | स्टील और अन्य पुन: प्रयोज्य सामग्रियों की रिकवरी के माध्यम से संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के उद्देश्यों को बढ़ावा। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- विनियमित जहाज रीसाइक्लिंग जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है, जिससे समुद्री और तटीय प्रदूषण का जोखिम कम होता है।
- खतरनाक सामग्रियों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करती है, पर्यावरण की रक्षा करती है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करती है।
संसाधन महत्व
- घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है, जिससे आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम होती है।
- इस्पात की पुनर्प्राप्ति और पुन: उपयोग कुशल संसाधन उपयोग में सहायता करती है तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है।
आर्थिक और औद्योगिक महत्व
- व्यापक स्तर पर रोजगार सृजित करती है, जिसमें विनष्टीकरण, प्रसंस्करण और सामग्री पुनर्प्राप्ति कार्यकलापों में शामिल श्रमिक शामिल हैं।
- परिवहन, री-रोलिंग मिल, उपकरण आपूर्तिकर्ता और अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं जैसे संबद्ध उद्योगों के एक विस्तृत नेटवर्क को बनाए रखती है।
- घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन में सहायता करती है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है।
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रौद्योगिकी उन्नयन | जहाज रीसाइक्लिंग प्रक्रियाओं में नवीनतम और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता। |
| श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य | खतरनाक सामग्रियों के संपर्क में आने वाले श्रमिकों के लिए बेहतर सुरक्षा उपायों और स्वास्थ्य सुविधाओं की निरंतर आवश्यकता। |
| अपशिष्ट प्रबंधन | रीसाइक्लिंग प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले खतरनाक और गैर-खतरनाक अपशिष्टों के प्रभावी और सुरक्षित निपटान की चुनौती। |
| अंतर्राष्ट्रीय अनुपालन | अंतर्राष्ट्रीय समझौतों और मानकों के साथ पूर्ण अनुपालन बनाए रखना, विशेषकर उभरते हुए वैश्विक मानदंडों के साथ। |
| आधारभूत संरचना | बढ़ती रीसाइक्लिंग क्षमता को संभालने के लिए अलंग-सोसिया जैसे क्लस्टरों में आधारभूत संरचना का निरंतर विकास। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मेक इन इंडिया (Make in India)
- आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat)
आगे की राह
- जहाज रीसाइक्लिंग सुविधाओं में उन्नत और स्वचालित प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करना ताकि दक्षता और सुरक्षा में सुधार हो सके।
- श्रमिकों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वास्थ्य निगरानी और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) सुनिश्चित करना।
- खतरनाक अपशिष्टों के सुरक्षित भंडारण, उपचार और निपटान के लिए मजबूत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों का विकास।
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ निरंतर संरेखण सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचे की नियमित समीक्षा और अद्यतन।
- रीसाइक्लिंग उद्योग में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि नई, अधिक टिकाऊ और लागत प्रभावी विधियों की खोज की जा सके।
- घरेलू इस्पात उद्योग और अन्य पुनर्चक्रण उद्योगों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना ताकि पुनर्नवीनीकृत सामग्री के लिए स्थिर बाजार सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जहाज रीसाइक्लिंग · चक्रीय अर्थव्यवस्था · हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौता · संसाधन सुरक्षा · पर्यावरण स्थिरता · आर्थिक संवृद्धि · अलंग-सोसिया क्लस्टर · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत · समुद्री औद्योगिक परिदृश्य
अवधारणा प्रवाह
जहाज का परिचालन जीवन समाप्त होना → जहाज रीसाइक्लिंग सुविधा में आगमन → सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विनष्टीकरण → स्टील और अन्य सामग्री की रिकवरी → घरेलू उद्योगों को पुनर्नवीनीकृत सामग्री की आपूर्ति → चक्रीय अर्थव्यवस्था और संसाधन सुरक्षा में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत में जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 2025 में भारत विश्व का अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बन गया।
2. अलंग-सोसिया क्लस्टर भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है।
3. जहाज रीसाइक्लिंग घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, 2025 में भारत विश्व का अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बन गया। कथन 2 सही है क्योंकि अलंग-सोसिया क्लस्टर भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ बना हुआ है। कथन 3 सही है क्योंकि जहाज रीसाइक्लिंग घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है, जिससे आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम होती है।
Q2. जहाज रीसाइक्लिंग के पर्यावरणीय महत्व के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है, पर्यावरण पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता।
- यह जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है और समुद्री प्रदूषण को कम करती है।
- यह केवल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बढ़ाती है।
- यह खतरनाक सामग्रियों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित नहीं करती है।
उत्तर: यह जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है और समुद्री प्रदूषण को कम करती है। — जहाज रीसाइक्लिंग जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है, जिससे समुद्री और तटीय प्रदूषण का जोखिम कम होता है। उचित रीसाइक्लिंग प्रथाएं सख्त नियामकीय पर्यवेक्षण के तहत खतरनाक सामग्रियों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करती हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र के नियामकीय रूपांतरण और वैश्विक नेतृत्व पर चर्चा कीजिए। यह किस प्रकार देश की चक्रीय अर्थव्यवस्था के उद्देश्यों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल में योगदान देता है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र के महत्व और हालिया वैश्विक नेतृत्व पर प्रकाश डालना।
नियामकीय रूपांतरण: हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते के साथ संयोजन में व्यापक कानूनों और बढ़ी हुई संस्थागत निगरानी का उल्लेख। सुरक्षा, अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार पर जोर।
वैश्विक नेतृत्व: 2025 में भारत के विश्व के अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बनने के डेटा (वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी 35.4%, रीसाइक्लिंग मात्रा में 60% वृद्धि) का उल्लेख। अलंग-सोसिया क्लस्टर की भूमिका।
चक्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान: इस्पात और अन्य पुन: प्रयोज्य सामग्रियों की रिकवरी के माध्यम से संसाधन उपयोग की दक्षता, आयातित कच्चे माल पर निर्भरता में कमी, और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल में योगदान: व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन, घरेलू इस्पात उद्योग को लौह स्क्रैप की आपूर्ति, संबद्ध उद्योगों का समर्थन (परिवहन, री-रोलिंग मिल, उपकरण आपूर्तिकर्ता, अपशिष्ट प्रबंधन सेवाएं)।
निष्कर्ष: भारत के जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र के भविष्य की संभावनाओं और सतत विकास में इसकी भूमिका का संक्षिप्त सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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