भारत-यूरोपीय संघ सहयोग: कुमारस्वामी ने आईटीआरई प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में जोर दिया EV, बैटरी और डीकार्बोनाइजेशन पर

केंद्रीय मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने यूरोपीय संसद के आईटीआरई प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की — labelled illustration

भारत-यूरोपीय संघ सहयोग: कुमारस्वामी ने आईटीआरई प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में जोर दिया EV, बैटरी और डीकार्बोनाइजेशन पर

✎ भारत और यूरोपीय संघ औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत कर रहे हैं, जो वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
  • Prelims: भारत-यूरोपीय संघ संबंध, मुक्त व्यापार समझौता (FTA), उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, हरित इस्पात
  • Essay: वैश्विक सहयोग के माध्यम से सतत विकास, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत और यूरोपीय संघ औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत कर रहे हैं, जो वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने यूरोपीय संसद की उद्योग, अनुसंधान और ऊर्जा समिति (ITRE) के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली में बैठक की। इस बैठक में औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन (Industrial Decarbonisation) में भारत-यूरोपीय संघ (EU) सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की गई। यह बैठक भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है, विशेष रूप से जनवरी 2026 में हुए 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद, जिसमें मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) की वार्ताओं का समापन हुआ था।

पृष्ठभूमि

  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, जो व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित हैं।
  • जनवरी 2026 में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने एक संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा अपनाया था और मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं को अंतिम रूप दिया था।
  • भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles – EVs) को बढ़ावा देने, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए कई पहल कर रही है।
  • भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) ने ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजना तथा एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स (Advanced Chemistry Cells – ACCs) के लिए पीएलआई योजना जैसी प्रमुख योजनाएं शुरू की हैं।
  • भारत ने औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं, जिसमें हरित इस्पात (Green Steel) उत्पादन और स्क्रैप रीसाइक्लिंग जैसे तरीके शामिल हैं।
  • यूरोपीय संघ भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है और स्वच्छ ऊर्जा, सतत गतिशीलता (Sustainable Mobility) तथा उन्नत ऊर्जा समाधानों में सहयोग बढ़ाने में रुचि रखता है।

भारत-यूरोपीय संघ सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • औद्योगिक विकास: दोनों पक्ष औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोग कर रहे हैं, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है।
  • स्वच्छ ऊर्जा: स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा के विकास तथा उपयोग में सहयोग पर जोर दिया जा रहा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास में सहयोग के माध्यम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility) को गति देना।
  • औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन: उद्योगों से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रौद्योगिकियों और रणनीतियों पर सहयोग, जिसमें हरित इस्पात उत्पादन, कार्बन कैप्चर और उपयोग शामिल हैं।
  • एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स (ACCs): भारत ने यूरोपीय उद्योगों को स्थिरता/स्थिर भंडारण ऊर्जा प्रणालियों के लिए 10 GWh की ACC विनिर्माण की वैश्विक बोली प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
  • हरित इस्पात: इस्पात क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन के लिए स्क्रैप रीसाइक्लिंग, स्टील स्लैग के उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) के तरीकों को अपनाना।
  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA): दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एफटीए वार्ताओं का समापन एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भारत-यूरोपीय संघ सहयोग औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में संबंधों को मजबूत करना।
16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन जनवरी 2026 में आयोजित, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वार्ताओं का समापन और संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडा को अपनाना।
भारी उद्योग मंत्रालय की पहलें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए PLI योजना, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स (ACC) के लिए PLI योजना, और पीएम ई-ड्राइव।
औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन BHEL की स्वदेशी गैसीकरण तकनीक, स्क्रैप रीसाइक्लिंग, स्टील स्लैग का उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी के माध्यम से स्टील क्षेत्र का हरितीकरण।
ACC मैन्युफैक्चरिंग के लिए वैश्विक बोली यूरोपीय उद्योगों को 10 GWh की ACC मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे दोनों क्षेत्रों की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और बैटरी निर्माण में सहयोग से घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और हरित इस्पात (Green Steel) उत्पादन में सहयोग से भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) में उनकी स्थिति मजबूत होगी।

सामरिक महत्व

  • यह सहयोग भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडा को मजबूत करेगा, जो भू-राजनीतिक स्थिरता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition) में साझेदारी से ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित होगी और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  • प्रौद्योगिकी सहयोग से भारत को उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में विशेषज्ञता हासिल करने में सहायता मिलेगी।

पर्यावरणीय महत्व

  • औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और हरित इस्पात उत्पादन पर जोर देने से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions) में कमी आएगी, जिससे भारत के जलवायु परिवर्तन शमन प्रयासों में योगदान मिलेगा।
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने से वायु प्रदूषण (Air Pollution) कम होगा और शहरी क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) के तरीकों को अपनाने से संसाधनों का कुशल उपयोग होगा और अपशिष्ट (Waste) में कमी आएगी।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी हस्तांतरण और मानकीकरण

  • यूरोपीय संघ से भारत में उन्नत स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के प्रभावी हस्तांतरण को सुनिश्चित करना।
  • विभिन्न तकनीकी मानकों और विनियमों (Regulations) के बीच सामंजस्य स्थापित करना ताकि निर्बाध सहयोग हो सके।

2. वित्तपोषण और निवेश

  • बड़े पैमाने पर औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तपोषण जुटाना एक चुनौती हो सकती है।
  • यूरोपीय संघ के निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना और निवेश के माहौल को और अनुकूल बनाना।

3. मुक्त व्यापार समझौते की चुनौतियाँ

  • मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वार्ताओं के समापन के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में व्यापार बाधाओं (Trade Barriers) और शुल्कों को कम करने पर सहमति बनाना।
  • दोनों पक्षों के बीच व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance) को संबोधित करना और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना।

4. कौशल विकास और क्षमता निर्माण

  • हरित प्रौद्योगिकियों और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) का विकास करना।
  • भारतीय उद्योगों में अनुसंधान और विकास क्षमताओं को मजबूत करना ताकि वे यूरोपीय संघ के साथ प्रभावी ढंग से सहयोग कर सकें।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी एकीकरण यूरोपीय संघ और भारत के बीच विभिन्न तकनीकी मानकों और विनियमों को एकीकृत करना।
निवेश प्रवाह हरित प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में बड़े पैमाने पर यूरोपीय निवेश को आकर्षित करना।
प्रतिस्पर्धा घरेलू उद्योगों को यूरोपीय संघ के उन्नत उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करना।
नीतिगत निरंतरता दीर्घकालिक सहयोग के लिए दोनों पक्षों की नीतिगत स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित करना।
भू-राजनीतिक जोखिम वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों का सहयोग पर संभावित प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना
  • एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स (ACC) के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना

आगे की राह

  • मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना ताकि व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सके।
  • स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन और बैटरी भंडारण में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता देना।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम के विकास में यूरोपीय संघ के साथ सहयोग बढ़ाना।
  • औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए पायलट परियोजनाओं को लागू करना, जिसमें हरित इस्पात और सीमेंट उत्पादन शामिल हैं।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से हरित उद्योगों के लिए मानव पूंजी का निर्माण करना।
  • दोनों पक्षों के बीच नियमित उच्च-स्तरीय संवाद और विशेषज्ञ आदान-प्रदान को जारी रखना ताकि सहयोग के नए रास्ते तलाशे जा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत-यूरोपीय संघ संबंध · मुक्त व्यापार समझौता · औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन · इलेक्ट्रिक वाहन (EV) · उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना · स्वच्छ ऊर्जा · सर्कुलर इकोनॉमी · हरित इस्पात · एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स (ACC) · ऊर्जा संक्रमण

अवधारणा प्रवाह

केंद्रीय मंत्री की यूरोपीय संसद प्रतिनिधिमंडल से बातचीत  →  भारत-यूरोपीय संघ सहयोग पर जोर (EV, बैटरी, डीकार्बोनाइजेशन)  →  PLI योजनाओं और PM ई-ड्राइव जैसी पहलों पर प्रकाश  →  यूरोपीय उद्योगों को ACC मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के लिए निमंत्रण  →  औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और हरित इस्पात पर भारत के प्रयासों की सराहना  →  स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और ई-मोबिलिटी में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता जनवरी 2026 में 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में संपन्न हुई थी।
2. भारी उद्योग मंत्रालय की PLI योजनाएँ केवल ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए हैं।
3. औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में स्टील स्लैग का उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी के तरीके शामिल हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में एफटीए वार्ताओं का समापन हुआ था। कथन 2 गलत है। PLI योजनाएँ एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स के लिए भी हैं। कथन 3 सही है। औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में स्टील स्लैग का उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी के तरीकों को बढ़ावा दिया जाता है।

Q2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: 1 और 2 दोनों — राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो और डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा मिले। अतः दोनों कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत और यूरोपीय संघ के बीच औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग के महत्व का परीक्षण कीजिए। भारत सरकार की प्रमुख पहलें इस दिशा में कैसे योगदान दे रही हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में भारत-यूरोपीय संघ संबंधों और हालिया सहयोग के संदर्भ का उल्लेख करें। मुख्य भाग में, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग के महत्व को विभिन्न आयामों (तकनीकी हस्तांतरण, निवेश, नवाचार, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला) में समझाएं। भारत सरकार की प्रमुख पहलों जैसे PLI योजना (ऑटोमोबाइल, ACC), PM ई-ड्राइव, BHEL की गैसीफिकेशन तकनीक, स्क्रैप रीसाइक्लिंग, स्टील स्लैग का उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी के तरीकों का विस्तार से वर्णन करें कि वे कैसे इस सहयोग को मजबूत कर रही हैं। निष्कर्ष में, भविष्य की संभावनाओं और सतत विकास के लिए इस साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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