18 Sep भूमि संसाधन विभाग ने शुरू किया ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान, जानिए कैसे करें योगदान
✎ 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक सामूहिक उत्तरदायित्व बनाने और उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, नागरिक चार्टर | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन, संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन
- Prelims: स्वच्छता ही सेवा अभियान, भूमि संसाधन विभाग (DoLR), ग्रामीण विकास मंत्रालय, अपशिष्ट प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी, ई-वेस्ट प्रबंधन, जन-भागीदारी
- Essay: स्वच्छता एक सामूहिक उत्तरदायित्व: व्यक्तिगत प्रयासों से राष्ट्र निर्माण, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में जन-भागीदारी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक सामूहिक उत्तरदायित्व बनाने और उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने 17 सितंबर 2026 को ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल का शुभारंभ किया है। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता, उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन और जनसेवा की संस्कृति को बढ़ावा देना है, जिसमें स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित किया गया है। यह अभियान अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने कार्यस्थलों तथा आसपास के परिसरों को स्वच्छ रखने के लिए प्रोत्साहित करता है, साथ ही व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्तर पर कचरा फैलाने की प्रवृत्ति को कम करने पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने देश भर में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न अभियानों और पहलों की शुरुआत की है, जिनमें ‘स्वच्छ भारत अभियान’ प्रमुख है।
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान, ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसे जन-भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
- इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करना और उन्हें अपने आसपास के वातावरण की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करना है।
- यह पहल केवल सार्वजनिक स्थानों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अपशिष्ट के उत्तरदायी प्रबंधन, विशेषकर प्लास्टिक कचरे और ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक कचरे) पर भी जोर दिया जाता है।
- सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देना भी इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें अनुपयोगी वस्तुओं के पुन: उपयोग, मरम्मत और रीसायकल पर बल दिया जाता है।
‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान क्या है?
- ‘स्वच्छता ही सेवा’ एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जिसका उद्देश्य स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाना और इसे जन-भागीदारी के माध्यम से मजबूत करना है।
- यह अभियान मुख्य रूप से ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य भारत को स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त बनाना है।
- इस पहल का फोकस केवल सफाई कर्मचारियों पर निर्भर रहने के बजाय, प्रत्येक नागरिक को स्वच्छता के प्रति अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है।
- इसमें कार्यालयों, घरों और समुदायों में स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ कचरा कम करने, कूड़ा न फैलाने और अपशिष्ट के उत्तरदायी प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाता है।
- यह अभियान प्लास्टिक कचरे और ई-वेस्ट जैसे विशिष्ट अपशिष्ट प्रकारों के प्रबंधन के महत्व पर भी प्रकाश डालता है, जिसमें उनके पुन: उपयोग, मरम्मत और रीसायकल को प्रोत्साहित किया जाता है।
- इसका उद्देश्य सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को बढ़ावा देना है, जहाँ संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाता है और अपशिष्ट को न्यूनतम किया जाता है।
- यह पहल जनसेवा और जिम्मेदार नागरिकता के व्यापक दृष्टिकोण के साथ जुड़ी हुई है, जिसमें स्वच्छता को एक सामाजिक कर्तव्य के रूप में देखा जाता है।
- भूमि संसाधन विभाग द्वारा शुरू किया गया वर्तमान अभियान इस व्यापक पहल का एक हिस्सा है, जो विभाग के भीतर और उसके आसपास स्वच्छता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सामूहिक जिम्मेदारी पर बल | स्वच्छता को केवल कुछ व्यक्तियों का कार्य न मानकर, सभी नागरिकों की साझा जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना। |
| कार्यस्थल से परे | केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर, व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा देना। |
| उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन | प्लास्टिक और ई-कचरे सहित सभी प्रकार के अपशिष्ट के उचित निपटान, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर जोर। |
| जनसेवा से जुड़ाव | स्वच्छता को जनसेवा का अभिन्न अंग मानना, जिससे नागरिक सहभागिता बढ़े। |
| सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा | कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने के उदाहरणों के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करना। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह पहल नागरिकों में स्वच्छता के प्रति सामूहिक चेतना और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देती है, जिससे एक स्वच्छ समाज का निर्माण होता है।
- यह व्यक्तिगत आदतों में सुधार लाने और कचरा फैलाने की प्रवृत्ति को कम करने में सहायक है, जिससे सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनी रहती है।
- स्वच्छता को जनसेवा से जोड़कर, यह नागरिकों को अपने समुदायों और राष्ट्र के प्रति अधिक उत्तरदायी बनने के लिए प्रेरित करती है।
पर्यावरणीय महत्व
- यह उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन (Responsible Waste Management) पर जोर देती है, जिसमें प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-waste) का उचित निपटान शामिल है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
- पुन: उपयोग (Reuse), मरम्मत (Repair) और रीसाइक्लिंग (Recycle) के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होता है।
- स्वच्छ वातावरण बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद करता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
शासनिक महत्व
- यह सरकारी विभागों और उनके कर्मचारियों को स्वच्छता अभियान में सक्रिय रूप से शामिल करके, शासन में जनभागीदारी का एक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
- यह पहल सरकारी कार्यालयों और उनके आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता मानकों को बेहतर बनाने में मदद करती है, जिससे एक सकारात्मक कार्य संस्कृति विकसित होती है।
- यह ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसे बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक है, जो समग्र शासन एजेंडा का हिस्सा है।
चुनौतियाँ
1. व्यवहार परिवर्तन की चुनौती
- लोगों की पुरानी आदतों को बदलना और उन्हें स्वच्छता को दैनिक आचरण का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना कठिन हो सकता है।
- केवल अभियानों के दौरान सक्रियता दिखाना और उसके बाद उदासीन हो जाना एक सामान्य प्रवृत्ति है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शासन
2. अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना
- ठोस अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए पर्याप्त और प्रभावी अवसंरचना (Infrastructure) की कमी।
- विशेषकर प्लास्टिक और ई-कचरे के लिए उन्नत रीसाइक्लिंग सुविधाओं की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, अवसंरचना
3. निगरानी और प्रवर्तन
- स्वच्छता नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र का अभाव।
- कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रशासनिक चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोक प्रशासन
4. संसाधनों की कमी
- स्वच्छता अभियानों और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का आवंटन।
- स्थानीय निकायों की क्षमता निर्माण में कमी।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, स्थानीय स्वशासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जनभागीदारी में निरंतरता | अभियानों के बाद जन उत्साह में कमी आना, जिससे दीर्घकालिक प्रभाव प्रभावित होता है। |
| अपशिष्ट पृथक्करण | घरों और कार्यालयों में कचरे को स्रोत पर ही अलग करने की आदत का अभाव, जिससे रीसाइक्लिंग प्रक्रिया बाधित होती है। |
| ई-कचरा प्रबंधन | इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित संग्रहण, पुनर्चक्रण और निपटान के लिए विशिष्ट प्रणालियों की आवश्यकता। |
| प्लास्टिक कचरा | सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और उसके प्रभावी प्रबंधन की चुनौती। |
| स्वच्छता कर्मियों पर निर्भरता | स्वच्छता की पूरी जिम्मेदारी केवल सफाई कर्मचारियों पर छोड़ने की मानसिकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (Swachh Bharat Mission (Gramin))
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission (Urban))
आगे की राह
- नागरिकों में व्यवहार परिवर्तन लाने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जाएं, जो स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने पर केंद्रित हों।
- अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक अवसंरचना का विकास किया जाए, जिसमें कचरा पृथक्करण, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग की सुविधाएँ शामिल हों।
- प्लास्टिक और ई-कचरे के उत्तरदायी प्रबंधन के लिए विशेष नीतियाँ और प्रोत्साहन योजनाएँ लागू की जाएं।
- स्थानीय निकायों को स्वच्छता प्रबंधन के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए, ताकि उनकी क्षमता बढ़ाई जा सके।
- स्वच्छता नियमों के प्रभावी प्रवर्तन के लिए मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं पर उचित कार्रवाई की जाए।
- सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि कचरे को संसाधन में बदला जा सके।
- स्वच्छता को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, ताकि बच्चों में कम उम्र से ही स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छता ही सेवा अभियान · सामूहिक जिम्मेदारी · उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन · सर्कुलर इकोनॉमी · जन-भागीदारी · प्लास्टिक कचरा प्रबंधन · ई-कचरा प्रबंधन · सतत अभ्यास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण के संरक्षण का राज्य का कर्तव्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
भूमि संसाधन विभाग ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान शुरू किया। → यह स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित करता है। → अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने कार्यस्थलों व आसपास को स्वच्छ रखने हेतु प्रोत्साहित किया जाता है। → उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन (प्लास्टिक, ई-कचरा) और सर्कुलर इकोनॉमी पर बल दिया जाता है। → यह जनसेवा और सतत अभ्यासों को बढ़ावा देता है। → व्यक्तिगत छोटे कदम सामूहिक रूप से बड़े बदलाव में योगदान करते हैं।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा शुरू किया गया है।
2. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल कार्यस्थल की स्वच्छता तक सीमित है।
3. यह पहल प्लास्टिक कचरे और ई-कचरे के उत्तरदायी प्रबंधन पर भी जोर देती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि यह अभियान भूमि संसाधन विभाग द्वारा शुरू किया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह पहल कार्यस्थल के साथ-साथ व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर की आदतों पर भी केंद्रित है। कथन 3 सही है क्योंकि यह अभियान प्लास्टिक और ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष बल देता है।
Q2. अभिकथन (A): ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल का उद्देश्य स्वच्छता को एक सामूहिक जिम्मेदारी बनाना है।
कारण (R): यह पहल अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने कार्यालयों व आसपास के परिसरों को स्वच्छ रखने तथा एक स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि अभियान का मूल विचार स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बनाना है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी ही सामूहिक जिम्मेदारी के लक्ष्य को प्राप्त करने का माध्यम है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में स्वच्छता अभियानों में जन-भागीदारी के महत्व पर चर्चा कीजिए। ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसी पहलें किस प्रकार ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ के सिद्धांतों को बढ़ावा दे सकती हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय में स्वच्छता अभियानों और जन-भागीदारी के महत्व को संक्षेप में बताएं। पहले भाग में, भारत में स्वच्छता अभियानों की सफलता के लिए जन-भागीदारी की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा करें, जिसमें व्यवहार परिवर्तन, स्वामित्व की भावना और सतत परिणामों जैसे बिंदुओं को शामिल करें। दूसरे भाग में, ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसी पहलों के माध्यम से ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ (चक्रीय अर्थव्यवस्था) के सिद्धांतों जैसे अपशिष्ट में कमी, पुन: उपयोग, मरम्मत और रीसाइक्लिंग को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, इस पर प्रकाश डालें। प्लास्टिक और ई-कचरा प्रबंधन के विशिष्ट उदाहरणों का उल्लेख करें। निष्कर्ष में, इन पहलों के व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों को रेखांकित करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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