मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मांगी सीईसी रिपोर्ट, अगली सुनवाई कब?

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मांगी सीईसी रिपोर्ट, अगली सुनवाई कब?

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केन-बेतवा परियोजना विवाद प्रक्रिया

✎ केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत का भौतिक भूगोल, जल संसाधन)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, न्यायपालिका की भूमिका)  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (पर्यावरण प्रभाव आकलन, जैव विविधता संरक्षण, नदी जोड़ो परियोजनाएं)
  • Prelims: केन-बेतवा लिंक परियोजना, पन्ना टाइगर रिजर्व, केन घड़ियाल अभयारण्य, सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC), नदी जोड़ो परियोजनाएं, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), बुंदेलखंड क्षेत्र, अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद
  • Essay: विकास बनाम पर्यावरण: संतुलन की चुनौती, भारत में जल प्रबंधन और नदी जोड़ो परियोजनाओं का भविष्य

त्वरित पुनरावृत्ति: केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों से संबंधित एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। याचिका में दावा किया गया है कि इस परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो सकता है और लगभग 60 लाख पेड़ों की कटाई हो सकती है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और विचरण गलियारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

पृष्ठभूमि

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाना है।
  • इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य बुंदेलखंड क्षेत्र के सूखाग्रस्त इलाकों में सिंचाई और पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना है, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों में फैला हुआ है।
  • परियोजना में एक बांध (दौधन बांध) का निर्माण, नहर प्रणाली और बिजली उत्पादन शामिल है।
  • पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों द्वारा परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों, विशेषकर पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
  • सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) पर्यावरण और वन संबंधी मामलों में उच्चतम न्यायालय को सलाह देने वाली एक विशेषज्ञ समिति है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना क्या है?

  • यह भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है।
  • इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में केन नदी के अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश में बेतवा नदी तक स्थानांतरित करना है।
  • परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के सूखाग्रस्त जिलों जैसे छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना (मध्य प्रदेश) और झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा (उत्तर प्रदेश) को लाभ मिलने की उम्मीद है।
  • इसमें दौधन बांध का निर्माण, 221 किलोमीटर लंबी नहर, दो बिजलीघर और कई अन्य संरचनाएं शामिल हैं।
  • परियोजना का लक्ष्य लगभग 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करना, लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और 103 मेगावाट जलविद्युत उत्पन्न करना है।
  • इस परियोजना को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (National Water Development Agency) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • परियोजना को पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंजूरी के साथ-साथ जनजातीय मामलों के मंत्रालय से भी अनुमोदन प्राप्त हुआ है, हालांकि इन मंजूरियों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना
पर्यावरणीय प्रभाव पन्ना टाइगर रिजर्व के आधे से अधिक हिस्से का डूबना और 60 लाख पेड़ों की कटाई का दावा
सामाजिक प्रभाव आदिवासियों और किसानों के विस्थापन तथा उनके अधिकारों का मुद्दा
न्यायिक हस्तक्षेप मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट तलब करना
वन्यजीव संरक्षण पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह मामला विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती को उजागर करता है।
  • पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों पर बड़े पैमाने की परियोजनाओं के प्रभाव का आकलन आवश्यक है।
  • वन कटाई से स्थानीय जलवायु, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना महत्वपूर्ण है।

सामाजिक महत्व

  • परियोजना से प्रभावित होने वाले आदिवासियों और किसानों के अधिकारों, आजीविका और विस्थापन के मुद्दों को संबोधित करना आवश्यक है।
  • विकास परियोजनाओं में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और उनकी चिंताओं को सुनना समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
  • प्रशासनिक दबाव के आरोपों की जांच और प्रभावित लोगों के साथ न्याय सुनिश्चित करना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है।

शासन और न्यायिक महत्व

  • उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि न्यायपालिका पर्यावरण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रही है।
  • सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट की मांग पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठना परियोजना मूल्यांकन प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. पर्यावरण और विकास का संतुलन

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के पर्यावरणीय लागत और आर्थिक लाभों के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • विकास की आवश्यकता और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के बीच सामंजस्य बिठाना, विशेषकर संरक्षित क्षेत्रों में, जटिल है।

2. वन्यजीव संरक्षण

  • पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव आवासों पर परियोजना के संभावित प्रतिकूल प्रभावों को कम करना।
  • बाघों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और विचरण गलियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

3. सामाजिक न्याय और विस्थापन

  • परियोजना से प्रभावित होने वाले आदिवासियों और किसानों के विस्थापन, पुनर्वास और आजीविका के मुद्दों का समाधान करना।
  • स्थानीय समुदायों के विरोध और प्रशासनिक दबाव के आरोपों को निष्पक्ष रूप से संबोधित करना।

4. पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की विश्वसनीयता

  • वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठना और तथ्यात्मक त्रुटियों के आरोप।
  • स्वतंत्र और वैज्ञानिक आकलन की आवश्यकता ताकि परियोजना के वास्तविक प्रभावों का सही मूल्यांकन हो सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वृक्षों की कटाई 60 लाख पेड़ों की संभावित कटाई से बुंदेलखंड के पर्यावरण और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव
पन्ना टाइगर रिजर्व पर प्रभाव रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आने और बाघों सहित वन्यजीवों के आवास पर असर की आशंका
केन घड़ियाल अभयारण्य घड़ियालों के प्राकृतिक आवास पर परियोजना के संभावित नकारात्मक प्रभाव
पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट 2017 की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल और तथ्यात्मक त्रुटियों के आरोप
स्थानीय समुदायों का विरोध छतरपुर जिले में आदिवासियों और किसानों के आंदोलन तथा प्रशासनिक दबाव के आरोप

आगे की राह

  • परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का एक स्वतंत्र, व्यापक और वैज्ञानिक आकलन कराया जाना चाहिए।
  • सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट में उठाई गई चिंताओं और कथित अनियमितताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
  • पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य की जैव विविधता और पारिस्थितिक अखंडता की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय किए जाने चाहिए।
  • परियोजना से प्रभावित होने वाले स्थानीय समुदायों, विशेषकर आदिवासियों और किसानों के साथ सार्थक परामर्श किया जाना चाहिए।
  • विस्थापित होने वाले लोगों के लिए उचित पुनर्वास और आजीविका के वैकल्पिक साधन सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
  • पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जानी चाहिए ताकि ऐसी रिपोर्टों की विश्वसनीयता बनी रहे।
  • विकास परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

केन-बेतवा लिंक परियोजना · पर्यावरणीय प्रभाव आकलन · पन्ना टाइगर रिजर्व · केन घड़ियाल अभयारण्य · सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) · नदी जोड़ो परियोजनाएँ · पर्यावरण संरक्षण · वन्यजीव संरक्षण · सतत विकास · न्यायिक समीक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन का अधिकार, जिसमें स्वच्छ पर्यावरण शामिल’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य’}

अवधारणा प्रवाह

केन-बेतवा लिंक परियोजना का प्रस्ताव  →  परियोजना से पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की आशंका  →  पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य पर खतरा  →  जनहित याचिका (PIL) द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती  →  उच्च न्यायालय द्वारा सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) रिपोर्ट की मांग  →  न्यायिक समीक्षा और पर्यावरणीय न्याय की स्थापना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है।
2. यह परियोजना पन्ना टाइगर रिजर्व के एक हिस्से को प्रभावित कर सकती है।
3. सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) पर्यावरण संबंधी मामलों में सर्वोच्च न्यायालय को सलाह देने वाली एक वैधानिक निकाय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है क्योंकि परियोजना का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ाना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि याचिका में दावा किया गया है कि परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि CEC सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एक समिति है, न कि एक वैधानिक निकाय।

Q2. केन-बेतवा लिंक परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से संभावित पर्यावरणीय प्रभाव हो सकता/सकते है/हैं?
1. बड़े पैमाने पर वनों की कटाई।
2. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का विस्थापन।
3. स्थानीय जलवायु में परिवर्तन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — याचिका में 60 लाख पेड़ों की कटाई, पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित असर (वन्यजीवों के आवास का विस्थापन) और वन कटाई से बुंदेलखंड के पर्यावरण और स्थानीय जलवायु पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की ओर अदालत का ध्यान दिलाया गया है। अतः तीनों कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी नदी जोड़ो परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में ऐसी परियोजनाओं की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: केन-बेतवा लिंक परियोजना का संक्षिप्त परिचय और इसका उद्देश्य।
2. पर्यावरणीय प्रभाव: वनों की कटाई, वन्यजीव आवासों का विनाश (पन्ना टाइगर रिजर्व, केन घड़ियाल अभयारण्य का उदाहरण), जैव विविधता पर असर, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन, स्थानीय जलवायु पर प्रभाव। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की विश्वसनीयता पर सवाल।
3. सामाजिक प्रभाव: स्थानीय समुदायों (आदिवासियों, किसानों) का विस्थापन, आजीविका पर असर, विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक दबाव के आरोप।
4. नदी जोड़ो परियोजनाओं के लाभ: सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल, बाढ़ नियंत्रण, बिजली उत्पादन।
5. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से संबंध: SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता), SDG 13 (जलवायु कार्रवाई), SDG 15 (भूमि पर जीवन) के संदर्भ में परियोजनाओं का मूल्यांकन। पर्यावरणीय और सामाजिक लागतों को संतुलित करने की आवश्यकता।
6. आगे की राह: स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन, व्यापक मूल्यांकन, हितधारकों की भागीदारी, पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, वैकल्पिक समाधानों पर विचार।
7. निष्कर्ष: विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: amarujala.com


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