27 Jul माईगॉव से नीति निर्माण में नागरिक भागीदारी: जानिए कैसे बढ़ा जन-शासन में योगदान
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय। | GS Paper IV — लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नैतिकता, शासन में ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचार संहिता।
- Prelims: माईगॉव प्लेटफॉर्म, नागरिक सहभागिता, ई-गवर्नेंस, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, आधार प्रमाणीकरण, सुशासन
- Essay: लोकतंत्र में नागरिक सहभागिता का महत्व और ई-गवर्नेंस की भूमिका।, डिजिटल इंडिया पहल के माध्यम से सुशासन की दिशा में भारत के प्रयास।
त्वरित पुनरावृत्ति: माईगॉव प्लेटफॉर्म भारत सरकार की एक पहल है जो नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे भाग लेने और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए एक ऑनलाइन मंच प्रदान करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार के माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म ने नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई 2026 तक 6.32 करोड़ से अधिक नागरिक इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय पहलों जैसे बजट परामर्श, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) और डेटा संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार और सुझाव दिए हैं। यह प्लेटफॉर्म चर्चाओं, पोल और सर्वेक्षणों के माध्यम से नागरिकों को सरकार के साथ सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करता है, जिससे शासन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
पृष्ठभूमि
- माईगॉव प्लेटफॉर्म की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा नागरिक सहभागिता (Citizen Engagement) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
- इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न सरकारी निकायों और मंत्रालयों के साथ मिलकर नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
- यह प्लेटफॉर्म जनहित और लोक कल्याण से जुड़े विषयों पर नागरिकों के विचार और सुझाव प्राप्त करने का एक सीधा माध्यम प्रदान करता है।
- माईगॉव चर्चा, रचनात्मक गतिविधियों, पोल, सर्वेक्षण और जमीनी स्तर की गतिविधियों जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराता है।
- प्लेटफॉर्म ने अपने उपयोगकर्ता आधार और जुड़ाव के आंकड़ों में निरंतर वृद्धि दर्ज की है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
- स्वतंत्र तृतीय-पक्ष प्रभाव आकलन अध्ययनों ने माईगॉव की जन-भागीदारी के दायरे को उल्लेखनीय रूप से विस्तारित करने की पुष्टि की है।
माईगॉव प्लेटफॉर्म क्या है?
- माईगॉव भारत सरकार का एक नागरिक सहभागिता प्लेटफॉर्म है जिसे 2014 में लॉन्च किया गया था।
- इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं के निर्माण तथा कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए एक मंच प्रदान करना है।
- यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को नागरिकों से सीधे प्रतिक्रिया, सुझाव और विचार प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
- प्लेटफॉर्म चर्चा मंचों, ऑनलाइन सर्वेक्षणों, पोल, ब्लॉग और रचनात्मक प्रतियोगिताओं जैसे विभिन्न सहभागिता उपकरणों का उपयोग करता है।
- माईगॉव बहुभाषी सहायता प्रदान करता है, जो इसे अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं सहित 12 भाषाओं में उपलब्ध कराता है, जिससे भाषाई बाधाएं दूर होती हैं।
- मोबाइल उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए, एक समर्पित माईगॉव मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया गया है।
- नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों और प्रतिक्रियाओं को संबंधित मंत्रालयों/विभागों के साथ साझा किया जाता है ताकि उन्हें नीति-निर्माण और समीक्षा प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।
- यह प्लेटफॉर्म ई-गवर्नेंस (e-Governance) और सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नागरिक सहभागिता मंच | नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिकों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करता है। |
| बहुभाषी सहायता | भाषाई बाधाओं को दूर कर व्यापक समावेशिता और पहुंच सुनिश्चित करता है (12 भाषाओं में उपलब्ध)। |
| मोबाइल पहुंच | समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से देश के बड़े मोबाइल उपयोगकर्ता आधार तक पहुंच बढ़ाता है। |
| विस्तारित डिजिटल और सोशल मीडिया उपस्थिति | शासन प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाए रखने के लिए पहुंच और जुड़ाव को मजबूत करता है। |
| विविध सहभागिता प्रणालियाँ | चर्चा, पोल, सर्वेक्षण और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से जन-भागीदारी के दायरे का विस्तार करता है। |
| मंत्रालयों/विभागों के साथ समन्वय | नागरिकों के सुझावों को संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाकर नीतिगत निर्णय लेने में सहायता करता है। |
महत्व
शासन और राजनीति
- यह मंच सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) को बढ़ावा देता है, जहाँ नागरिक केवल मतदाता नहीं बल्कि नीति-निर्माता प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार होते हैं।
- यह सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाता है, जिससे शासन में जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित होती है।
- नागरिकों की प्रतिक्रिया के आधार पर नीतियों में सुधार से उनकी स्वीकार्यता बढ़ती है और कार्यान्वयन अधिक प्रभावी होता है।
सामाजिक
- यह विभिन्न सामाजिक समूहों और क्षेत्रों से विचारों को एकत्रित कर समावेशी नीति-निर्माण को बढ़ावा देता है।
- शिक्षा, डेटा संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर जनमत संग्रह से बेहतर और अधिक प्रासंगिक नीतियां बनती हैं।
- यह नागरिकों में अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, जिससे एक सूचित नागरिक समाज का निर्माण होता है।
प्रशासनिक
- माईगॉव जैसे मंच सरकारी विभागों को सीधे नागरिकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का एक कुशल और लागत प्रभावी तरीका प्रदान करते हैं।
- यह नीतिगत कमियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने में मदद करता है, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार होता है।
- यह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि वे साझा मंच पर नागरिकों से इनपुट प्राप्त करते हैं।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल डिवाइड और पहुंच
- भारत में अभी भी एक बड़ा वर्ग डिजिटल रूप से साक्षर नहीं है या उसके पास इंटरनेट तक पहुंच नहीं है, जिससे सभी नागरिकों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों और वंचित समुदायों की आवाजें डिजिटल माध्यम से प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सीमित रहती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. प्रतिक्रिया का प्रभावी एकीकरण
- नागरिकों से प्राप्त बड़ी मात्रा में सुझावों और प्रतिक्रियाओं को व्यवस्थित करना, विश्लेषण करना और उन्हें नीतिगत निर्णयों में प्रभावी ढंग से एकीकृत करना एक जटिल कार्य है।
- यह सुनिश्चित करना कि सभी प्रासंगिक सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए और केवल लोकप्रिय विचारों को ही प्राथमिकता न दी जाए, एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
3. प्रतिनिधित्व और वैधता
- माईगॉव पर सक्रिय नागरिक एक विशिष्ट जनसांख्यिकीय का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या उनकी राय पूरे देश का सटीक प्रतिनिधित्व करती है।
- कुछ सुझावों की गुणवत्ता और व्यवहार्यता का आकलन करना और यह सुनिश्चित करना कि वे जनहित में हों, एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका
4. कार्रवाई प्रतिवेदन (ATR) और प्रभाव
- नागरिकों के सुझावों पर मंत्रालयों/विभागों द्वारा की गई कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- यह सुनिश्चित करना कि प्राप्त सुझावों से वास्तव में नीतियों और कार्यक्रमों में बदलाव आए, केवल प्रतीकात्मक भागीदारी न हो, एक निरंतर चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-II: पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल साक्षरता और पहुंच का अभाव | ग्रामीण और वंचित वर्गों की भागीदारी में कमी, जिससे समावेशिता प्रभावित होती है। |
| सुझावों का विश्लेषण और एकीकरण | बड़ी मात्रा में डेटा को प्रभावी ढंग से संसाधित करने और नीति में शामिल करने की क्षमता। |
| प्रतिनिधित्व की वैधता | माईगॉव उपयोगकर्ताओं का जनसांख्यिकीय प्रतिनिधित्व और क्या यह पूरे देश का सटीक प्रतिबिंब है। |
| कार्रवाई प्रतिवेदन (ATR) की पारदर्शिता | नागरिकों के सुझावों पर की गई कार्रवाई की स्पष्टता और जवाबदेही का अभाव। |
| प्रतीकात्मक भागीदारी का जोखिम | यह सुनिश्चित करना कि नागरिक सुझावों से वास्तविक नीतिगत परिवर्तन हों, न कि केवल दिखावटी सहभागिता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022
- आधार प्रमाणीकरण नियम-2020
आगे की राह
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार करना और ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच में सुधार करना।
- माईगॉव प्लेटफॉर्म को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना, विशेषकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल रूप से कम साक्षर हैं।
- नागरिकों से प्राप्त सुझावों के विश्लेषण और एकीकरण के लिए उन्नत AI और डेटा एनालिटिक्स उपकरणों का उपयोग करना।
- कार्रवाई प्रतिवेदन (ATR) प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाना, ताकि नागरिक अपनी प्रतिक्रियाओं पर हुई प्रगति को ट्रैक कर सकें।
- विभिन्न जनसांख्यिकीय समूहों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए लक्षित आउटरीच कार्यक्रम और ऑफलाइन सहभागिता तंत्र विकसित करना।
- नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में शिक्षित करना, ताकि वे अधिक सूचित और प्रभावी सुझाव दे सकें।
- माईगॉव जैसे मंचों की प्रभावशीलता का नियमित रूप से स्वतंत्र मूल्यांकन करना और प्राप्त सिफारिशों के आधार पर सुधार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नागरिक सहभागिता · ई-शासन · लोक नीति निर्माण · माईगॉव प्लेटफॉर्म · डिजिटल इंडिया · पारदर्शिता · जवाबदेही · सुशासन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 19(1)(a): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
- अनुच्छेद 38: लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा नीतिगत मुद्दों पर सार्वजनिक परामर्श की आवश्यकता महसूस करना। → माईगॉव प्लेटफॉर्म पर विभिन्न मंत्रालयों द्वारा चर्चा/पोल/सर्वेक्षण शुरू करना। → नागरिकों द्वारा प्लेटफॉर्म पर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करना। → माईगॉव द्वारा प्राप्त प्रतिक्रियाओं को संकलित और विश्लेषण करना। → संकलित सुझावों को संबंधित मंत्रालयों/विभागों को भेजना। → मंत्रालयों/विभागों द्वारा नीति/योजना/कार्यक्रम तैयार करते समय सुझावों पर विचार करना। → नागरिकों की भागीदारी से बेहतर और अधिक समावेशी नीतियों का निर्माण।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह विभिन्न सरकारी निकायों और मंत्रालयों के साथ मिलकर नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करता है।
2. यह केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है ताकि एकरूपता बनी रहे।
3. इसके माध्यम से प्राप्त सुझावों को संबंधित मंत्रालय/विभाग द्वारा नीतियों में शामिल करना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है क्योंकि माईगॉव का मुख्य उद्देश्य नीति-निर्माण में नागरिक सहभागिता बढ़ाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह प्लेटफॉर्म 12 भाषाओं (अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाएं) में उपलब्ध है। कथन 3 गलत है क्योंकि नागरिकों के सुझावों को नीतियों में शामिल करना संबंधित मंत्रालयों और विभागों का विशेषाधिकार बना रहता है, अनिवार्य नहीं।
Q2. माईगॉव प्लेटफॉर्म पर नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी सुविधाएं उपलब्ध हैं?
1. चर्चाएँ
2. रचनात्मक गतिविधियाँ
3. पोल
4. सर्वेक्षण
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — माईगॉव प्लेटफॉर्म नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए चर्चा, रचनात्मक गतिविधियों, पोल, सर्वेक्षण तथा जमीनी स्तर की गतिविधियों जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ई-शासन (e-governance) के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म भारत में लोक नीति निर्माण में नागरिक सहभागिता को किस प्रकार सुदृढ़ कर रहा है? इस प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताओं और चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में माईगॉव प्लेटफॉर्म की भूमिका को समझाना है कि यह कैसे नीति-निर्माण में नागरिकों को शामिल करता है। इसमें इसकी विभिन्न गतिविधियों (चर्चा, पोल, सर्वेक्षण) और बहुभाषी तथा मोबाइल पहुंच जैसी विशेषताओं का उल्लेख किया जा सकता है। दूसरे भाग में इसकी प्रमुख विशेषताओं जैसे पारदर्शिता, पहुंच और समावेशन पर प्रकाश डालना है। अंत में, चुनौतियों का विश्लेषण करना है, जैसे कि प्राप्त सुझावों को नीतियों में शामिल करने की बाध्यता का अभाव और डिजिटल डिवाइड के कारण सीमित पहुंच।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments