माईगॉव से बढ़ी नीति-निर्माण में नागरिक भागीदारी: जानें कैसे मिल रहा है जनता का योगदान

माईगॉव से बढ़ी नीति-निर्माण में नागरिक भागीदारी: जानें कैसे मिल रहा है जनता का योगदान — MyGov Platform: Citizen Participation Growth (2021-2026)

माईगॉव से बढ़ी नीति-निर्माण में नागरिक भागीदारी: जानें कैसे मिल रहा है जनता का योगदान

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय।  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।
  • Prelims: माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म, ई-गवर्नेंस, नागरिक सहभागिता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, आधार प्रमाणीकरण, सार्वजनिक परामर्श, डिजिटल इंडिया
  • Essay: शासन में जनभागीदारी: लोकतंत्र का आधार और सुशासन की कुंजी।, डिजिटल युग में नागरिक सहभागिता: चुनौतियाँ और अवसर।

त्वरित पुनरावृत्ति: माईगॉव प्लेटफॉर्म भारत सरकार का एक ई-गवर्नेंस पहल है जो नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे भाग लेने और अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे शासन में पारदर्शिता और सहभागिता बढ़ती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार के माईगॉव प्लेटफॉर्म ने नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 6.32 करोड़ से अधिक नागरिक पंजीकृत हुए हैं, जिन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय पहलों जैसे बजट परामर्श, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022 और आधार सुधारों पर सार्वजनिक परामर्शों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। यह प्लेटफॉर्म चर्चाओं, पोल और सर्वेक्षणों के माध्यम से नागरिकों के विचारों और सुझावों को एकत्रित कर उन्हें संबंधित मंत्रालयों और विभागों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे शासन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में शासन को अधिक समावेशी और सहभागी बनाने के उद्देश्य से नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने पर निरंतर बल दिया गया है।
  • पारंपरिक रूप से, नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिकों की सीधी भागीदारी सीमित रही है, जिसमें मुख्य रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों और विशेषज्ञ समितियों के माध्यम से ही परामर्श होता था।
  • डिजिटल क्रांति और ई-गवर्नेंस (e-Governance) पहलों ने नागरिकों को शासन से जोड़ने के नए अवसर प्रदान किए हैं।
  • सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों के निर्माण तथा समीक्षा में नागरिकों के विचारों और सुझावों को शामिल करने की आवश्यकता महसूस की।
  • इसी पृष्ठभूमि में, माईगॉव प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सीधे सरकार से जोड़ना और उन्हें नीति-निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनाना था।
  • यह पहल ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत और ‘डिजिटल इंडिया’ दृष्टिकोण के अनुरूप थी, जिसका लक्ष्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करके शासन को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाना है।

माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म क्या है?

  • माईगॉव भारत सरकार का एक नागरिक सहभागिता प्लेटफॉर्म है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी निकायों और मंत्रालयों के साथ मिलकर नीति-निर्माण की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
  • यह प्लेटफॉर्म जनहित और लोक कल्याण से जुड़े विषयों पर नागरिकों के विचार, सुझाव और रचनात्मक प्रतिक्रियाएँ प्राप्त करता है।
  • माईगॉव नागरिकों को चर्चाओं, रचनात्मक गतिविधियों, पोल, सर्वेक्षणों और जमीनी स्तर की गतिविधियों जैसी विभिन्न सुविधाओं के माध्यम से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
  • यह बहुभाषी सहायता प्रदान करता है, जो अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं सहित कुल 12 भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषाई बाधाएँ दूर होती हैं।
  • प्लेटफॉर्म की पहुँच बढ़ाने के लिए एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में मोबाइल उपयोगकर्ता इससे जुड़ सकें।
  • संकलित राय और सुझावों को संबंधित मंत्रालय/विभाग के साथ नीतियों, योजनाओं या कार्यक्रमों को तैयार करने या उनकी समीक्षा करने के दौरान विचारार्थ साझा किया जाता है।
  • हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022 और केंद्रीय बजट परामर्श जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्वजनिक परामर्श आयोजित किए गए हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बहुभाषी सहायता भाषाई बाधाओं को दूर कर 12 भाषाओं (अंग्रेजी और 11 क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं) में पहुँच सुनिश्चित करना।
मोबाइल पहुँच समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से देश के बड़े मोबाइल उपयोगकर्ता आधार तक पहुँच बनाना।
विस्तारित पहुँच डिजिटल और सोशल मीडिया उपस्थिति को मजबूत करके शासन प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाना।
उपयोगकर्ता अनुभव वेब इंटरफ़ेस को नियमित रूप से अपडेट करके उपयोगकर्ता अनुभव और सामान्य पहुँच में सुधार करना।
चर्चा, पोल और सर्वेक्षण नीति-निर्माण में नागरिकों के विचारों और सुझावों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न माध्यम उपलब्ध कराना।

महत्व

शासन (Governance)

  • माईगॉव प्लेटफॉर्म नागरिक सहभागिता (Citizen Participation) को बढ़ावा देकर सहभागी शासन (Participatory Governance) के सिद्धांतों को मजबूत करता है।
  • यह नागरिकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे शामिल होने का अवसर प्रदान करता है, जिससे नीतियों की स्वीकार्यता और प्रभावशीलता बढ़ती है।
  • पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि नागरिक सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने में सक्षम होते हैं।

सामाजिक (Social)

  • नागरिकों में अपने देश के शासन के प्रति स्वामित्व की भावना (Sense of Ownership) विकसित होती है।
  • यह विभिन्न सामाजिक वर्गों और भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों को एक मंच पर लाकर समावेशिता (Inclusivity) को बढ़ावा देता है।
  • डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और ई-शासन (E-Governance) के प्रति जागरूकता में वृद्धि होती है।

राजनीतिक (Political)

  • यह लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करता है, जिससे सरकार और नागरिकों के बीच की दूरी कम होती है।
  • नीति-निर्माताओं को जनता की वास्तविक आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को समझने में मदद मिलती है, जिससे अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी नीतियां बनती हैं।
  • यह नागरिकों को अपनी राय व्यक्त करने के लिए एक सुरक्षित और सुलभ मंच प्रदान करके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) को सशक्त करता है।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल विभाजन (Digital Divide)

  • भारत में अभी भी एक बड़ा वर्ग डिजिटल पहुँच से वंचित है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और हाशिए पर पड़े समुदायों में।
  • यह डिजिटल विभाजन नीति-निर्माण में सभी नागरिकों की समान भागीदारी सुनिश्चित करने में बाधा उत्पन्न करता है।

2. प्रतिक्रिया का प्रभावी समावेशन

  • नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों और प्रतिक्रियाओं को वास्तविक नीतियों में कितनी प्रभावी ढंग से शामिल किया जाता है, यह एक चुनौती है।
  • मंत्रालयों और विभागों द्वारा कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) की कमी या देरी से नागरिकों का विश्वास कम हो सकता है।

3. जानकारी की गुणवत्ता और प्रामाणिकता

  • ऑनलाइन मंचों पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण कार्य है।
  • गलत सूचना या निहित स्वार्थों से प्रेरित सुझावों को फ़िल्टर करना आवश्यक है।

4. सुरक्षा और डेटा गोपनीयता

  • नागरिकों द्वारा साझा की गई व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) से बचने और विश्वास बनाए रखने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डिजिटल साक्षरता की कमी तकनीकी ज्ञान के अभाव में कई नागरिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करने में असमर्थ हो सकते हैं।
प्रतिनिधित्व का अभाव प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नागरिक आबादी के एक छोटे, शहरी और शिक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिससे व्यापक प्रतिनिधित्व की कमी हो सकती है।
कार्रवाई रिपोर्ट की कमी नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके सुझावों पर क्या कार्रवाई की गई, जिसकी पारदर्शिता अक्सर कम होती है।
सूचना अधिभार (Information Overload) बड़ी संख्या में प्राप्त सुझावों का विश्लेषण और वर्गीकरण करना मंत्रालयों के लिए एक चुनौती हो सकती है।
राजनीतिक इच्छाशक्ति नागरिकों के सुझावों को नीति में शामिल करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (National Education Policy-2020)
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022 (Digital Personal Data Protection Bill-2022)

आगे की राह

  • डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में, ताकि अधिक से अधिक नागरिक माईगॉव जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकें।
  • नागरिकों द्वारा दिए गए सुझावों पर की गई कार्रवाई की स्थिति (Action Taken Report) को सार्वजनिक और पारदर्शी तरीके से नियमित रूप से अपडेट किया जाए।
  • प्लेटफॉर्म को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल (User-Friendly) बनाया जाए, जिसमें सरल भाषा और सहज इंटरफ़ेस का उपयोग हो।
  • विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाए ताकि प्राप्त सुझावों का प्रभावी ढंग से मूल्यांकन और नीतियों में समावेशन हो सके।
  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के लिए मजबूत प्रोटोकॉल लागू किए जाएं और नागरिकों को उनके डेटा के उपयोग के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
  • नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें और सार्थक सुझाव दे सकें।
  • प्लेटफॉर्म की पहुँच को और बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं की संख्या में वृद्धि की जाए और दिव्यांगजनों के लिए सुगम पहुँच सुनिश्चित की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

नागरिक सहभागिता · माईगॉव प्लेटफॉर्म · नीति-निर्माण प्रक्रिया · डिजिटल शासन · लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण · पारदर्शिता · जवाबदेही · सुशासन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 19(1)(a): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (डेटा गोपनीयता के संदर्भ में)

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा नीति-निर्माण के लिए सार्वजनिक परामर्श की आवश्यकता महसूस करना।  →  माईगॉव जैसे नागरिक सहभागिता प्लेटफॉर्म की स्थापना।  →  नागरिकों द्वारा विभिन्न माध्यमों (चर्चा, पोल, सर्वेक्षण) से सुझाव और प्रतिक्रियाएँ देना।  →  माईगॉव द्वारा इन सुझावों को संकलित कर संबंधित मंत्रालयों/विभागों को भेजना।  →  मंत्रालयों/विभागों द्वारा प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन और नीतियों/योजनाओं में उनका समावेशन।  →  बेहतर और अधिक जनोन्मुखी नीतियों का निर्माण तथा सहभागी शासन की मजबूती।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. माईगॉव (MyGov) प्लेटफॉर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक नागरिक सहभागिता प्लेटफॉर्म है जिसे केंद्र सरकार ने नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया था।
2. यह केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है ताकि एकरूपता बनी रहे।
3. यह चर्चाओं, रचनात्मक गतिविधियों, पोल और सर्वेक्षणों जैसी सुविधाओं के माध्यम से नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि माईगॉव को नागरिक सहभागिता के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया गया था। कथन 2 गलत है क्योंकि प्लेटफॉर्म भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए 12 भाषाओं (अंग्रेजी और 11 भारतीय क्षेत्रीय भाषाएं) में उपलब्ध है। कथन 3 सही है क्योंकि यह विभिन्न माध्यमों से नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहलें माईगॉव प्लेटफॉर्म पर हाल ही में सार्वजनिक परामर्श का हिस्सा रही हैं?
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020
2. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022
3. केंद्रीय बजट परामर्श
4. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए ज्ञापन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020, केंद्रीय बजट परामर्श, और 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए ज्ञापन सभी माईगॉव प्लेटफॉर्म पर हालिया सार्वजनिक परामर्शों में शामिल थे। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2022 भी इसमें शामिल था, इसलिए सभी विकल्प सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ माईगॉव (MyGov) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत में नीति-निर्माण प्रक्रिया में नागरिक सहभागिता को किस प्रकार बढ़ा रहे हैं? इन प्लेटफॉर्मों की प्रभावशीलता को और बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, माईगॉव जैसे प्लेटफॉर्मों की भूमिका का विश्लेषण करें कि वे कैसे नागरिकों को नीति-निर्माण में शामिल करते हैं, जैसे कि चर्चा, सर्वेक्षण और सुझावों के माध्यम से। दूसरे भाग में, इन प्लेटफॉर्मों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए बहुभाषी पहुंच, मोबाइल एप्लिकेशन, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और प्राप्त सुझावों पर कार्रवाई की पारदर्शिता जैसे उपायों पर चर्चा करें। सुशासन और जवाबदेही के संदर्भ में निष्कर्ष दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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