18 Oct माई भारत-एनएसएस ने शुरू किया ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ का दूसरा चरण
✎ मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए संविधान का अनुच्छेद 47 (राज्य नीति का निदेशक तत्व) जन-स्वास्थ्य और नशीली दवाओं पर रोक का दायित्व देता है, जबकि विधिक ढांचा NDPS अधिनियम, 1985 है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, युवा कल्याण और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएँ | GS Paper II — सामाजिक न्याय: दुर्बल वर्गों और जन-स्वास्थ्य से संबंधित योजनाएँ तथा नीतियाँ | GS Paper I — भारतीय समाज: युवा, महिलाओं की सहभागिता और सामुदायिक संगठन की भूमिका
- Prelims: माई भारत (MY Bharat) — युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का युवा संगठन और मंच, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) — स्थापना वर्ष 1969; आदर्श वाक्य ‘स्वयं से पहले आप’, अनुच्छेद 47 — पोषण स्तर, जन-स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेयों व नशीली दवाओं पर प्रतिबंध (राज्य नीति का निदेशक तत्व), नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टांसेज़ (NDPS) अधिनियम, 1985 — मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्ज़े, व्यापार और सेवन से संबंधित विधि, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) — गृह मंत्रालय के अधीन मादक पदार्थ-विरोधी प्रमुख केंद्रीय एजेंसी, नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) — सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की मांग-न्यूनीकरण पहल, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस — 21 जून (संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित), फिट इंडिया आंदोलन — खेल मंत्रालय की शारीरिक सक्रियता से जुड़ी पहल
- Essay: युवा शक्ति और राष्ट्र-निर्माण: स्वास्थ्य, अनुशासन और नशा-मुक्त समाज की भूमिका, स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन: जन-भागीदारी आधारित नीतियाँ कितनी प्रभावी हैं?
त्वरित पुनरावृत्ति: मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए संविधान का अनुच्छेद 47 (राज्य नीति का निदेशक तत्व) जन-स्वास्थ्य और नशीली दवाओं पर रोक का दायित्व देता है, जबकि विधिक ढांचा NDPS अधिनियम, 1985 है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने माई भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के माध्यम से 16 अक्टूबर, 2026 को ‘योग एवं आत्म-सुरक्षा दिवस’ के राष्ट्रव्यापी आयोजन के साथ ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत 100 सप्ताह संकल्प अभियान’ के दूसरे माह की शुरुआत की। पांचवें सप्ताह के कार्यक्रम में 183 शैक्षणिक संस्थानों, एनएसएस इकाइयों और गोद लिए गए गांवों में 91,179 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें योग के 332 सत्रों में 34,290, आत्मरक्षा के 311 प्रदर्शनों में 31,507 तथा 180 सामुदायिक जागरूकता गतिविधियों में 25,391 प्रतिभागी रहे। कुल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 57.1 प्रतिशत रही। यह अभियान शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास को मादक पदार्थों की रोकथाम के आधार के रूप में बढ़ावा देता है।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की स्थापना 1969 में हुई थी। यह युवाओं को सामुदायिक सेवा से जोड़ने वाला कार्यक्रम है, जो अब युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- माई भारत (MY Bharat) अक्टूबर 2023 में युवाओं के लिए एक एकीकृत डिजिटल और संस्थागत मंच के रूप में शुरू किया गया, जो विभिन्न युवा पहलों को एक साथ लाता है।
- संविधान का अनुच्छेद 47 राज्य को जन-स्वास्थ्य सुधारने और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेयों तथा नशीली दवाओं के सेवन पर रोक लगाने का निर्देश देता है। यह राज्य नीति का निदेशक तत्व है और न्यायोचित नहीं है।
- NDPS अधिनियम, 1985 मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए मुख्य विधिक ढांचा है, जबकि मांग-न्यूनीकरण (demand reduction) के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) जैसी पहलें चलाई जाती हैं।
- आपूर्ति-नियंत्रण और मांग-न्यूनीकरण, दोनों दृष्टियों से नीति के लिए जन-जागरूकता, परामर्श और पुनर्वास को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी कारण सामुदायिक और शैक्षिक संस्थानों की भागीदारी आवश्यक समझी जाती है।
नशा मुक्त युवा अभियान क्या है?
- यह ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत 100 सप्ताह संकल्प अभियान’ है, जिसे प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया था। इसका विषय ‘स्वस्थ युवा, नशा मुक्त युवा (शक्ति एवं सेवा)’ है।
- अभियान का उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाकर मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना है।
- इसका क्रियान्वयन माई भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के माध्यम से युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
- इसके प्रमुख घटक हैं: योग सत्र (सामान्य योग प्रोटोकॉल और विश्राम तकनीकें), आत्मरक्षा प्रदर्शन (व्यावहारिक सुरक्षा और परिस्थितिजन्य जागरूकता) तथा सामुदायिक जागरूकता गतिविधियाँ।
- स्थानीय प्रशासन, पुलिस, खेल प्राधिकरण, चिकित्सा विशेषज्ञ और प्रमाणित योग प्रशिक्षक इन गतिविधियों में सहयोग करते हैं।
- अनुव्रत विश्व भारती सोसाइटी, बीएपीएस, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स और माई भारत केंद्र जैसे सहयोगी संगठन आयोजन में योगदान देते हैं।
- अभियान का डिजिटल पक्ष हैशटैग #NashaMuktYuva के माध्यम से है, जिसके तहत इस आयोजन से संबंधित 4,197 सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए गए।
- एनएसएस का आदर्श वाक्य ‘स्वयं से पहले आप’ है, जो सेवा-भाव और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को व्यक्त करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अभियान का स्वरूप | ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत 100 सप्ताह संकल्प अभियान’ के दूसरे माह में 16 अक्टूबर, 2026 को ‘योग एवं आत्म-सुरक्षा दिवस’ का राष्ट्रव्यापी आयोजन हुआ। यह अभियान प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया था और इसका विषय ‘स्वस्थ युवा, नशा मुक्त युवा (शक्ति एवं सेवा)’ है। |
| संस्थागत आधार | माई भारत (MY Bharat) और राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) के माध्यम से आयोजन हुआ। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय इसका नोडल मंत्रालय है। शैक्षणिक संस्थान, एनएसएस इकाइयाँ और गोद लिए गए गाँव आयोजन के मुख्य स्थल रहे। |
| भागीदारी के आँकड़े | पाँचवें सप्ताह के कार्यक्रम में 183 स्थलों पर 91,179 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें योग के 332 सत्रों में 34,290, आत्मरक्षा के 311 प्रदर्शनों में 31,507 और 180 जागरूकता गतिविधियों में 25,391 प्रतिभागी रहे। |
| महिला सहभागिता | कुल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 57.1 प्रतिशत रही। योग में 19,882 और आत्मरक्षा में 18,364 महिलाएँ शामिल हुईं। दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, पटना और त्रिवेंद्रम के क्षेत्रीय निदेशालयों में भी महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज हुई। |
| बहु-हितधारक सहयोग | स्थानीय नेतृत्व, पुलिस अधिकारी, खेल प्राधिकरण, चिकित्सा विशेषज्ञ और प्रमाणित योग प्रशिक्षक एक साथ जुड़े। अनुव्रत विश्व भारती सोसाइटी, बीएपीएस और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जैसे सहयोगी संगठनों ने भी योगदान दिया। |
| डिजिटल पहुँच | अभियान के हैशटैग #NashaMuktYuva के अंतर्गत 4,197 सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए गए। इससे जागरूकता संदेश भौतिक आयोजनों से आगे बढ़कर व्यापक जनसमूह तक पहुँचा। |
महत्व
सामाजिक-स्वास्थ्य महत्व
- योग के सामान्य प्रोटोकॉल और विश्राम तकनीकों से शारीरिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को बढ़ावा दिया गया। नशे की प्रवृत्ति के पीछे अक्सर मानसिक दबाव और तनाव होता है, इसलिए यह पहल रोकथाम के मनोवैज्ञानिक पक्ष को भी संबोधित करती है।
- नशा मुक्ति को केवल प्रवर्तन का विषय न मानकर जीवनशैली और व्यक्तिगत अनुशासन से जोड़ना, मादक पदार्थों की माँग-पक्षीय रोकथाम (demand reduction) की दृष्टि से उपयोगी है।
लैंगिक और सुरक्षा आयाम
- आत्मरक्षा प्रदर्शनों में व्यावहारिक सुरक्षा तकनीकों और परिस्थिति-जागरूकता पर ध्यान दिया गया, जो विशेष रूप से युवा महिलाओं के लिए उपयोगी है।
- 57.1 प्रतिशत महिला सहभागिता यह दर्शाती है कि सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रम प्रभावी मंच बन सकते हैं।
युवा नेतृत्व और सामुदायिक सहभागिता
- एनएसएस के आदर्श वाक्य ‘स्वयं से पहले आप’ की भावना के अनुरूप युवा स्वयंसेवक समुदाय के भीतर नेतृत्व और सेवा की भूमिका निभाते हैं।
- गोद लिए गए गाँवों तक पहुँच से शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में जागरूकता का विस्तार होता है और संस्थागत सीमाएँ पार होती हैं।
संवैधानिक और नीतिगत संदर्भ
- यह पहल राज्य नीति के निदेशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) की भावना से जुड़ती है, विशेषकर जनस्वास्थ्य सुधार और मादक पदार्थों के निषेध के उद्देश्य से।
- मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) में निहित स्वस्थ और अनुशासित नागरिकता के आदर्श को व्यवहार में लाने का प्रयास भी इसमें दिखता है।
चुनौतियाँ
1. मादक पदार्थों की उपलब्धता और आपूर्ति-श्रृंखला
- जागरूकता अभियान तभी प्रभावी होते हैं जब आपूर्ति-पक्ष पर भी कड़ाई हो। मादक पदार्थों की तस्करी, ऑनलाइन और सीमावर्ती मार्गों से आपूर्ति जैसी चुनौतियाँ इस अभियान के दायरे से बाहर हैं।
- नशा मुक्ति के लिए प्रवर्तन, पुनर्वास और जागरूकता का समन्वय आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा; नशीले पदार्थों की तस्करी; सामाजिक न्याय
2. दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन
- 91,179 प्रतिभागियों और 4,197 सोशल मीडिया पोस्ट जैसे आँकड़े गतिविधि की पहुँच बताते हैं, परंतु व्यवहार में स्थायी बदलाव (नशे की दर में कमी) मापने का कोई सीधा संकेतक इस विज्ञप्ति में नहीं है।
- एक सप्ताह या एक माह के आयोजनों के बाद निरंतरता बनाए रखना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: लोक नीति का मूल्यांकन; सुशासन में परिणाम-आधारित दृष्टिकोण
3. नशे के कारणों का बहुआयामी स्वरूप
- नशे की प्रवृत्ति के पीछे बेरोज़गारी, पारिवारिक दबाव, सहपाठी प्रभाव और मनोवैज्ञानिक तनाव जैसे कारक होते हैं। योग और आत्मरक्षा इन सभी कारणों को समान रूप से नहीं छू पाते।
- सामाजिक-आर्थिक कारणों के समाधान के बिना केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं होती।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप; युवा नीति
4. क्षेत्रीय और सामाजिक असमानता
- गोद लिए गए गाँवों और शैक्षणिक संस्थानों में पहुँच अधिक होती है, परंतु दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक नियमित सेवा पहुँचाना कठिन है।
- शहरी और ग्रामीण युवाओं के बीच डिजिटल पहुँच में अंतर से ऑनलाइन जागरूकता का लाभ असमान रूप से पहुँचता है।
यूपीएससी लिंक: समावेशी विकास; डिजिटल विभाजन
5. स्वयंसेवकों और प्रशिक्षकों की गुणवत्ता
- योग और आत्मरक्षा के सत्रों की प्रभावशीलता प्रशिक्षकों की योग्यता और प्रमाणन पर निर्भर करती है। प्रमाणित प्रशिक्षकों का समान वितरण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- स्वयंसेवी संगठनों के समन्वय में मानकीकरण की कमी से गुणवत्ता में अंतर आ सकता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन प्रबंधन; गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| आपूर्ति-पक्ष नियंत्रण | जागरूकता के साथ तस्करी और अवैध आपूर्ति पर रोक न हो तो मांग-पक्षीय प्रयास अधूरे रहते हैं। |
| प्रभाव का मापन | प्रतिभागी संख्या से व्यवहारिक परिवर्तन का आकलन नहीं होता; नशे की दर में कमी के संकेतक स्पष्ट नहीं हैं। |
| निरंतरता | एक माह के आयोजन के बाद गतिविधियों का सतत स्वरूप सुनिश्चित करना कठिन है। |
| मूल कारणों का संबोधन | बेरोज़गारी, तनाव और सामाजिक दबाव जैसे कारणों पर अभियान का सीधा प्रभाव सीमित है। |
| डिजिटल और भौगोलिक अंतर | दूरस्थ क्षेत्रों और डिजिटल रूप से वंचित युवाओं तक पहुँच असमान रह सकती है। |
| प्रशिक्षण की गुणवत्ता | प्रशिक्षकों और स्वयंसेवकों के मानकीकरण के अभाव से सत्रों की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme)
- माई भारत (MY Bharat)
- नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan)
आगे की राह
- योग और आत्मरक्षा जैसे सत्रों को विद्यालयों और महाविद्यालयों के नियमित पाठ्यक्रम गतिविधियों में शामिल किया जाए, ताकि प्रभाव एक माह तक सीमित न रहे।
- प्रतिभागी संख्या के साथ-साथ नशे की प्रवृत्ति में कमी, परामर्श-सेवा की पहुँच और व्यवहारिक परिवर्तन जैसे परिणाम-संकेतकों की व्यवस्थित निगरानी की जाए।
- मादक पदार्थों की आपूर्ति-श्रृंखला पर प्रवर्तन एजेंसियों, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय को सुदृढ़ किया जाए।
- पुनर्वास केंद्रों, परामर्श सेवाओं और मनोवैज्ञानिक सहायता को जागरूकता अभियानों के साथ जोड़ा जाए।
- दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों के लिए स्थानीय भाषाओं में सामग्री तैयार की जाए और ऑफ़लाइन माध्यमों का भी उपयोग हो।
- प्रशिक्षकों और स्वयंसेवकों के लिए मानकीकृत प्रशिक्षण और प्रमाणन व्यवस्था लागू की जाए।
- स्थानीय निकायों और पंचायतों को अभियान की योजना और निगरानी में औपचारिक भूमिका दी जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशा मुक्त भारत (Nasha Mukt Bharat) और मादक पदार्थ दुरुपयोग की रोकथाम · अनुच्छेद 47 और राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) · सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) और राज्य की भूमिका · राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) · माई भारत (MY Bharat) और युवा सहभागिता · मादक पदार्थ नियंत्रण अधिनियम, 1985 (NDPS Act) · मांग में कमी बनाम आपूर्ति में कमी (Demand Reduction and Supply Reduction) · मानसिक कल्याण और शारीरिक स्वास्थ्य का संबंध · लैंगिक समावेशन और महिलाओं की आत्मरक्षा · सामुदायिक सहभागिता और स्वैच्छिक संगठन · योग और जीवनशैली आधारित रोकथाम · विकसित भारत और युवा नेतृत्व
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 47 — जनस्वास्थ्य सुधार और मादक पदार्थों के निषेध का निदेश
- अनुच्छेद 21 — स्वास्थ्य और व्यक्तिगत सुरक्षा का विस्तारित अधिकार
अवधारणा प्रवाह
प्रधानमंत्री द्वारा ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत 100 सप्ताह संकल्प अभियान’ का प्रारंभ → माई भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से संस्थानों और गोद लिए गए गाँवों में आयोजन की योजना → दूसरे माह में 16 अक्टूबर, 2026 को योग और आत्मरक्षा दिवस का राष्ट्रव्यापी आयोजन → स्थानीय प्रशासन, पुलिस, खेल प्राधिकरणों और सहयोगी संगठनों के साथ सहभागिता से 91,179 प्रतिभागियों तक पहुँच → स्वास्थ्य, मानसिक दृढ़ता और व्यक्तिगत सुरक्षा के माध्यम से मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम → डिजिटल माध्यमों पर जागरूकता का विस्तार और युवाओं में नशा मुक्त जीवनशैली के दीर्घकालिक लक्ष्य की ओर प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 37 के अनुसार राज्य के नीति निदेशक तत्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
2. अनुच्छेद 47 राज्य को मादक पेय और ऐसी औषधियों के उपभोग पर रोक लगाने का निर्देश देता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, केवल औषधीय प्रयोजन के अपवाद के साथ।
3. अनुच्छेद 47 मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है और इसे अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सीधे लागू कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 47 के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य सुधार और मादक पेय व हानिकारक औषधियों के निषेध का निर्देश है। कथन 3 गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 47 नीति निदेशक तत्वों (भाग IV) में आता है, मौलिक अधिकारों (भाग III) में नहीं; इसलिए अनुच्छेद 32 के अंतर्गत इसका सीधा प्रवर्तन नहीं होता।
Q2. निम्नलिखित स्तंभों का मिलान कीजिए:
स्तंभ I (संवैधानिक प्रावधान): A. अनुच्छेद 37 B. अनुच्छेद 47 C. अनुच्छेद 51क
स्तंभ II (विषय): 1. नीति निदेशक तत्वों का गैर-न्यायसंगत स्वरूप 2. लोक स्वास्थ्य सुधार और हानिकारक मादक पदार्थों के निषेध का दायित्व 3. मौलिक कर्तव्य
सही मिलान चुनिए:
- A-1, B-2, C-3
- A-2, B-1, C-3
- A-3, B-2, C-1
- A-1, B-3, C-2
उत्तर: A-1, B-2, C-3 — अनुच्छेद 37 नीति निदेशक तत्वों के गैर-न्यायसंगत स्वरूप से संबंधित है (A-1)। अनुच्छेद 47 लोक स्वास्थ्य और मादक पदार्थों के निषेध का निर्देश देता है (B-2)। अनुच्छेद 51क भाग IVक में मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान करता है (C-3)।
Q3. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): अनुच्छेद 47 के अंतर्गत मादक पदार्थों के निषेध का दायित्व राज्य पर है, फिर भी इसे न्यायालय में सीधे लागू नहीं कराया जा सकता।
कारण (R): अनुच्छेद 37 नीति निदेशक तत्वों को गैर-न्यायसंगत घोषित करता है, किंतु इन्हें शासन में मूलभूत माना गया है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अनुच्छेद 47 राज्य के नीति निदेशक तत्वों में आता है, अतः इसका प्रवर्तन न्यायालय द्वारा नहीं होता। अनुच्छेद 37 इसी गैर-न्यायसंगत स्वरूप का स्रोत है, और अनुच्छेद 37 यह भी स्पष्ट करता है कि ये तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं। इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम केवल विधिक प्रवर्तन (Enforcement) से संभव नहीं है; इसके लिए युवाओं की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सहभागिता आवश्यक है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या स्वैच्छिक युवा संगठनों और सामुदायिक कार्यक्रमों की भूमिका नीति के प्रवर्तन-उन्मुख दृष्टिकोण का पूरक बन सकती है? चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 47 (राज्य का दायित्व: लोक स्वास्थ्य सुधार; हानिकारक मादक पेय और औषधियों के निषेध का निर्देश, औषधीय प्रयोजन को अपवाद)। अनुच्छेद 37 (नीति निदेशक तत्वों का गैर-न्यायसंगत स्वरूप)। अनुच्छेद 51क (मौलिक कर्तव्य, विशेषकर मानवतावाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के संदर्भ में)।
2. विधिक और संस्थागत ढाँचा: मादक पदार्थ नियंत्रण अधिनियम, 1985 (NDPS Act) का प्रवर्तन-उन्मुख स्वरूप; राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (NCB) की समन्वयकारी भूमिका; नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) से इस अभियान का अंतर स्पष्ट करें।
3. नीति-चिंतन: मांग में कमी (Demand Reduction), आपूर्ति में कमी (Supply Reduction) और क्षति न्यूनीकरण (Harm Reduction) के बीच संतुलन; प्रवर्तन बनाम सार्वजनिक स्वास्थ्य-आधारित दृष्टिकोण पर विद्वानों की बहस।
4. प्रस्तुत तथ्य (समसामयिक संदर्भ): यह अभियान ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत 100 सप्ताह संकल्प अभियान’ के रूप में योग एवं आत्मरक्षा दिवस (16 अक्टूबर, 2026) के साथ दूसरे माह में प्रवेश; 183 संस्थानों व सामुदायिक स्थलों पर 91,179 प्रतिभागी; योग के 332 सत्र (34,290 प्रतिभागी) और आत्मरक्षा के 311 प्रदर्शन (31,507 प्रतिभागी); कुल प्रतिभागियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 57.1%; सहयोगी संगठन: अनुव्रत विश्व भारती सोसाइटी, बीएपीएस, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, माई भारत केंद्र।
5. सहभागिता का विश्लेषण: राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के आदर्श वाक्य ‘स्वयं से पहले आप’ की भूमिका; सामुदायिक जागरूकता बनाम प्रवर्तन की सीमाएँ; महिलाओं की भागीदारी का लैंगिक समावेशन पक्ष; डिजिटल माध्यमों (हैशटैग #NashaMuktYuva, 4,197 पोस्ट) की सीमित पहुँच।
6. संतुलित निष्कर्ष: प्रवर्तन आवश्यक है, किंतु दीर्घकालिक रोकथाम के लिए मांग-पक्ष, स्वास्थ्य-आधारित और सहभागिता-आधारित उपाय साथ चलने चाहिए; आलोचनाएँ (कार्यक्रम-प्रभाव का मापन, प्रतिभागी-संख्या बनाम व्यवहारिक परिवर्तन) भी उल्लेख करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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