मिशन पोषण 2.0: कुपोषण मुक्ति का सरकारी नवाचार, जानें पूरा विश्लेषण

मिशन पोषण 2.0, कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का नवीनतम प्रयास है, जो पिछले कार् — diagram

मिशन पोषण 2.0: कुपोषण मुक्ति का सरकारी नवाचार, जानें पूरा विश्लेषण

Map of Andhra Pradesh, Telangana, Madhya Pradesh, Bihar, Uttar Prad highlighted on the map of India — मिशन पोषण 2.0…
मानचित्र व माइंड-मैप: मिशन पोषण 2.0: प्रमुख राज्य और इसकी मुख्य विशेषताएं

✎ मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का एक समन्वित और सुदृढ़ प्रयास है, जो 'पोषण ट्रैकर' जैसे डिजिटल उपकरणों के माध्यम से प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन से संबंधित विषय  |  GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ एवं इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन
  • Prelims: मिशन पोषण 2.0, पोषण ट्रैकर, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, कुपोषण, बौनापन, एनीमिया, पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाएँ
  • Essay: भारत में कुपोषण की चुनौती और उसके समाधान में सरकारी योजनाओं की भूमिका, बाल विकास और महिला सशक्तिकरण: एक समावेशी दृष्टिकोण

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का एक समन्वित और सुदृढ़ प्रयास है, जो ‘पोषण ट्रैकर’ जैसे डिजिटल उपकरणों के माध्यम से प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी दी कि मिशन पोषण 2.0, कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का नवीनतम प्रयास है। यह पिछले कार्यक्रमों पर आधारित एक समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण अपनाता है। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा वर्ष 2025 में किए गए परिणाम-आधारित मूल्यांकन अध्ययन ने भी इस मिशन की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को दर्शाया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, विशेषकर बच्चों और महिलाओं में बौनापन (Stunting) और एनीमिया (Anemia) की व्यापकता चिंताजनक है।
  • कुपोषण के कारण बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और भविष्य की उत्पादकता प्रभावित होती है।
  • सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए हैं, जिनमें एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (Integrated Child Development Services – ICDS) और पोषण अभियान (Poshan Abhiyan) प्रमुख हैं।
  • पोषण अभियान का तृतीय-पक्ष मूल्यांकन 2020 में नीति आयोग द्वारा किया गया था, जिसमें इसकी प्रासंगिकता को संतोषजनक पाया गया।
  • विश्व बैंक ने 2021 में 11 राज्यों में पोषण अभियान के तहत एक सर्वेक्षण किया, जिसमें पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार और कार्यक्रम के संदेशों की व्यापक पहुँच सामने आई।
  • मिशन पोषण 2.0 इन्हीं पूर्ववर्ती कार्यक्रमों की सीख और सफलताओं पर आधारित एक उन्नत और एकीकृत पहल है।

मिशन पोषण 2.0 क्या है?

  • मिशन पोषण 2.0 भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य कुपोषण से समग्र रूप से निपटना और बाल विकास को बढ़ावा देना है।
  • यह मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का एक एकीकृत कार्यक्रम है, जो पिछले पोषण अभियान की सफलताओं पर आधारित है।
  • इसका दृष्टिकोण समन्वित और सुदृढ़ है, जिसमें पूरक पोषण (Supplementary Nutrition), विकास निगरानी (Growth Monitoring) और परामर्श (Counselling) जैसी आंगनवाड़ी सेवाओं को शामिल किया गया है।
  • मिशन का लक्ष्य लाभार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाना और पोषण संबंधी व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ (Poshan Tracker) नामक एक डिजिटल एप्लिकेशन लॉन्च किया है।
  • पोषण ट्रैकर एक ICT (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) आधारित शासन उपकरण है जो मंत्रालय और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा करने में मदद करता है।
  • इस एप्लिकेशन में फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) और आधार आधारित ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ शामिल हैं ताकि सेवा वितरण की अंतिम चरण की ट्रैकिंग सुनिश्चित की जा सके और फर्जी प्रविष्टियों को रोका जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
समग्र दृष्टिकोण यह कुपोषण से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक समन्वित और सुदृढ़ रणनीति अपनाता है, जिसमें पिछले कार्यक्रमों के अनुभवों का लाभ उठाया गया है।
पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन यह ICT आधारित शासन उपकरण है जो लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा करता है, जिससे योजना के कार्यान्वयन में सुधार संभव होता है।
फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) पोषण ट्रैकर में FRS को शामिल किया गया है ताकि घर ले जाने वाले राशन (Take-Home Ration) का वितरण सुनिश्चित किया जा सके और लाभ केवल लक्षित लाभार्थी को ही मिले।
आधार आधारित ट्रैकिंग यह लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करता है, डेटा लीक को रोकता है और फर्जी प्रविष्टियों को समाप्त करने में मदद करता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
परिणाम-आधारित मूल्यांकन नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा आवधिक मूल्यांकन यह सुनिश्चित करता है कि कार्यक्रम अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर रहा है और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
व्यवहार परिवर्तन पर जोर कार्यक्रम पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार लाने और जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है, जैसा कि स्तनपान और पोषण संदेशों की पहुंच से स्पष्ट है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • कुपोषण, विशेषकर बच्चों में बौनापन (Stunting) और महिलाओं में एनीमिया (Anaemia) जैसी समस्याओं का समाधान करके सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
  • बाल विकास को बढ़ावा देता है, जिससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, जो राष्ट्र के मानव पूंजी निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार लाने और जागरूकता बढ़ाने से समुदायों में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।

आर्थिक महत्व

  • कुपोषण के कारण होने वाली बीमारियों और उत्पादकता हानि को कम करके स्वास्थ्य देखभाल लागत को कम करता है।
  • स्वस्थ कार्यबल का निर्माण करके देश की आर्थिक उत्पादकता और विकास क्षमता को बढ़ाता है।

शासन और प्रौद्योगिकी महत्व

  • पोषण ट्रैकर जैसे ICT उपकरणों का उपयोग करके सेवा वितरण में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
  • आधार आधारित ट्रैकिंग और FRS जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके लाभार्थियों की सही पहचान और लीकेज को रोकने में मदद करता है, जिससे सरकारी योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन होता है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ

  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेष रूप से SDG 2 (भूख समाप्त करना) और SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) को प्राप्त करने में भारत के प्रयासों का समर्थन करता है।

चुनौतियाँ

1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • पोषण ट्रैकर और FRS जैसी डिजिटल प्रणालियों में बड़ी मात्रा में संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा एकत्र किया जाता है। इस डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
  • डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) या दुरुपयोग की संभावना हमेशा बनी रहती है, जिससे लाभार्थियों के अधिकारों का हनन हो सकता है।

2. डिजिटल डिवाइड और पहुंच

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण सभी लाभार्थियों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल उपकरणों के उपयोग में पर्याप्त प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करना आवश्यक है।

3. कार्यान्वयन में एकरूपता और निगरानी

  • विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यक्रम के कार्यान्वयन में एकरूपता बनाए रखना और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • स्थानीय स्तर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर काम का बोझ और संसाधनों की कमी कार्यक्रम की सफलता को प्रभावित कर सकती है।

4. व्यवहार परिवर्तन की धीमी गति

  • पोषण संबंधी व्यवहारों में स्थायी परिवर्तन लाना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर परामर्श और सामुदायिक जुड़ाव की आवश्यकता होती है।
  • सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक कारक भी पोषण संबंधी आदतों को प्रभावित कर सकते हैं।

5. संसाधन आवंटन और क्षमता निर्माण

  • कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का आवंटन महत्वपूर्ण है।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य हितधारकों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
डेटा गोपनीयता संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग या लीक होने का जोखिम।
डिजिटल पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की कमी।
कार्यान्वयन की एकरूपता विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम के असमान क्रियान्वयन की संभावना।
व्यवहार परिवर्तन पोषण संबंधी आदतों में स्थायी बदलाव लाने में कठिनाई।
संसाधन की कमी कार्यक्रम के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का अभाव।
तकनीकी प्रशिक्षण आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल उपकरणों के उपयोग में पर्याप्त प्रशिक्षण की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन पोषण 2.0 (Mission Poshan 2.0)
  • पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan)
  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (Mission Saksham Anganwadi and Poshan 2.0)

आगे की राह

  • डिजिटल डिवाइड को पाटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।
  • पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित और व्यापक प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कानूनी और तकनीकी ढांचा स्थापित करना।
  • सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन संचार रणनीतियों को मजबूत करना ताकि पोषण संबंधी आदतों में स्थायी सुधार लाया जा सके।
  • कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना।
  • विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यक्रम के कार्यान्वयन की एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र विकसित करना।
  • पोषण अभियान के तहत सेवाओं की अंतिम मील तक डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन पोषण 2.0 · कुपोषण · बाल विकास · पोषण अभियान · महिला एवं बाल विकास मंत्रालय · पोषण ट्रैकर · समग्र दृष्टिकोण · आधार आधारित ट्रैकिंग · आंगनवाड़ी सेवाएँ · व्यवहार परिवर्तन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता)
  • अनुच्छेद 39(e) (बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर)
  • अनुच्छेद 39(f) (बच्चों को शोषण से बचाना)
  • अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार)

अवधारणा प्रवाह

कुपोषण और बाल विकास की चुनौतियाँ  →  मिशन पोषण 2.0 का शुभारंभ  →  ICT आधारित पोषण ट्रैकर का उपयोग  →  आधार और FRS आधारित लाभार्थियों की पहचान  →  सेवा वितरण और व्यवहार परिवर्तन  →  बेहतर पोषण परिणाम और बाल विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. मिशन पोषण 2.0 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह कुपोषण से समग्र रूप से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार का नवीनतम प्रयास है।
2. पोषण ट्रैकर डिजिटल एप्लिकेशन का उपयोग लाभार्थियों को दी जा रही सेवाओं की निगरानी और समीक्षा के लिए किया जाता है।
3. इस मिशन के तहत, पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 80% से कम पाया गया।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से निपटने का नवीनतम सरकारी प्रयास है। कथन 2 भी सही है क्योंकि पोषण ट्रैकर एक ICT-आधारित उपकरण है। कथन 3 गलत है क्योंकि सर्वेक्षण में 81% महिलाओं ने पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान कराया, जो 80% से अधिक है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से मिशन पोषण 2.0 का/के प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. कुपोषण से समग्र रूप से निपटना।
2. बाल विकास को बढ़ावा देना।
3. महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता को कम करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — मिशन पोषण 2.0 का मुख्य उद्देश्य कुपोषण से समग्र रूप से निपटना और बाल विकास को बढ़ावा देना है। महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता को कम करना भी इसके व्यापक लक्ष्यों में से एक है, जैसा कि पोषण अभियान के तहत विश्व बैंक के सर्वेक्षण से पता चलता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन पोषण 2.0 कुपोषण से निपटने और बाल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। इस कथन के आलोक में, मिशन के प्रमुख घटकों और इसके कार्यान्वयन में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: मिशन पोषण 2.0 का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्यों और पिछले कार्यक्रमों पर आधारित होने का उल्लेख।
2. मिशन के प्रमुख घटक: पूरक पोषण, विकास निगरानी, परामर्श सेवाएँ, आंगनवाड़ी सेवाओं का उपयोग और स्वीकार्यता।
3. समन्वित और सुदृढ़ दृष्टिकोण: विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के बीच समन्वय, अभिसरण, जन आंदोलन और व्यवहार परिवर्तन पर जोर।
4. ICT की भूमिका: ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन का विवरण, इसकी कार्यप्रणाली (जैसे FRS, आधार आधारित ट्रैकिंग), निगरानी और समीक्षा में इसकी उपयोगिता, डेटा लीक की रोकथाम और फर्जी प्रविष्टियों का उन्मूलन।
5. प्रभावशीलता और चुनौतियाँ: मूल्यांकन अध्ययनों (नीति आयोग, विश्व बैंक) के निष्कर्षों का उल्लेख, पोषण संबंधी व्यवहार में सुधार, जागरूकता में वृद्धि। संभावित चुनौतियों पर भी संक्षिप्त चर्चा।
6. निष्कर्ष: कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मिशन पोषण 2.0 के महत्व पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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