12 Aug यूपीएससी तैयारी: बस परिवहन में सुधार हेतु संसदीय समिति की प्रमुख सिफारिशें
✎ संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट भारत में बस परिवहन को समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बनाने के लिए अखिल भारतीय यात्री परमिट, राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण और राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड जैसे महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था और सामाजिक न्याय | GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण
- Prelims: संसदीय स्थायी समिति, अखिल भारतीय यात्री परमिट, राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण, राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड, फास्टैग, इलेक्ट्रिक बसें, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, सड़क परिवहन
- Essay: भारत में परिवहन क्षेत्र का आधुनिकीकरण और समावेशी विकास, डिजिटल इंडिया और सार्वजनिक सेवाओं का वितरण
त्वरित पुनरावृत्ति: संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट भारत में बस परिवहन को समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बनाने के लिए अखिल भारतीय यात्री परमिट, राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण और राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड जैसे महत्वपूर्ण सुधारों का प्रस्ताव करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Transport, Tourism and Culture) ने अपनी 392वीं रिपोर्ट ‘समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन को सक्षम बनाना: अगली पीढ़ी की गतिशीलता के लिए नीति, विनियमन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ (Enabling Inclusive, Digital and Sustainable Bus Transport: Policy, Regulation and Public-Private Partnership for Next-Gen Mobility) राज्यसभा में प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में बस परिवहन क्षेत्र में सुधार हेतु कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं, जिनमें अखिल भारतीय यात्री परमिट, राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण और राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड का गठन प्रमुख हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में बस परिवहन सार्वजनिक परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो लाखों लोगों को प्रतिदिन सेवा प्रदान करता है, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
- वर्तमान बस परिवहन प्रणाली में अंतर-राज्यीय परमिट, टर्मिनलों के प्रबंधन, डिजिटलीकरण और सुरक्षा मानकों में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं।
- सरकार ने परिवहन क्षेत्र में सुधार और आधुनिकीकरण के लिए कई पहलें की हैं, जैसे कि FASTag का उपयोग और वाहन स्क्रैपेज नीति।
- संसदीय स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा करती हैं और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल को बुनियादी ढाँचे के विकास में तेजी लाने के लिए एक प्रभावी माध्यम माना जाता है।
- सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) को प्राप्त करने के लिए टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणालियों का विकास आवश्यक है।
संसदीय स्थायी समिति की प्रमुख सिफारिशें
- **अखिल भारतीय यात्री परमिट:** समिति ने एक वर्ष के भीतर अखिल भारतीय पर्यटक परमिट को ‘अखिल भारतीय यात्री परमिट’ से प्रतिस्थापित करने की सिफारिश की है, जिसमें इसके अधिकार स्पष्ट रूप से अंकित हों। इसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों जैसे वाहन, FASTag और वाहन स्थान डेटा के माध्यम से पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए।
- **राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण:** हवाईअड्डा प्राधिकरण के मॉडल पर एक समर्पित राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण (National Bus Terminal Authority) के गठन का सुझाव दिया गया है, जो बस टर्मिनलों के स्वामित्व को बस संचालन से अलग करेगा। एक वर्ष के भीतर बस टर्मिनलों के लिए एक राष्ट्रीय संहिता (National Code) तैयार करने की भी सिफारिश की गई है।
- **राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड:** अंतरसंचालनीयता मानकों (Interoperability Standards) को एक वर्ष के भीतर अधिसूचित करने और भारतीय रेलवे के अनुरूप एक सार्वजनिक लाइव-ट्रैकिंग, एकीकृत बुकिंग प्रणाली, परमिट डेटाबेस से जुड़ी क्राउडसोर्स्ड रेटिंग प्रणाली और एक cVIGIL-पैटर्न नागरिक सतर्कता चैनल विकसित करने का प्रस्ताव है।
- **संचालक-केंद्रित सुरक्षा:** छह महीने के भीतर स्वचालित परीक्षण स्टेशनों (Automated Testing Stations) के लिए जिलावार योजना बनाने, प्रत्येक फिटनेस परीक्षण पर अग्नि सुरक्षा और निकास उपकरणों का सत्यापन करने, स्लीपर और स्कूल बसों के लिए रेट्रोफिटमेंट की जाँच करने और आपातकालीन चेतावनी प्रणाली को एक वर्ष के भीतर कार्यशील बनाने की सिफारिश की गई है।
- **फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट:** पंजीकृत स्क्रैपिंग सुविधाओं पर ‘स्क्रैप-एंड-लीज’ (Scrap-and-Lease) के माध्यम से बसों के संचालन की सुविधा प्रदान करने, निजी स्क्रैपिंग प्रोत्साहन की समीक्षा करने और इलेक्ट्रिक बसों (Electric Buses) के लिए एक समयबद्ध योजना बनाने का सुझाव दिया गया है।
- **महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित सेवाएँ:** छह महीने के भीतर महिला बस चालकों और महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित व्यस्त समय की सेवाओं का एक कार्यक्रम शुरू करने, नई बसों में सीसीटीवी लगाने, अलर्ट सिस्टम कार्यक्रम को पूरा करने और बस बॉडी कोड के अंतर्गत बसों में शौचालयों का मानकीकरण करने की सिफारिश की गई है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अखिल भारतीय यात्री परमिट | बस परिवहन को सुव्यवस्थित करना और अंतर-राज्यीय यात्रा को सरल बनाना। |
| राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण | बस टर्मिनलों के प्रबंधन में दक्षता और मानकीकरण लाना, हवाईअड्डा प्राधिकरण मॉडल पर आधारित। |
| राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड | सार्वजनिक और निजी बस ऑपरेटरों के बीच एकीकृत बुकिंग, लाइव ट्रैकिंग और बेहतर यात्री अनुभव प्रदान करना। |
| संचालक-केंद्रित सुरक्षा | यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बसों में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन प्रणालियों को मजबूत करना। |
| फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट | इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने और पुराने बेड़े को स्क्रैप करने के माध्यम से टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देना। |
| महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित सेवाएं | महिला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाना, साथ ही महिला चालकों को सशक्त बनाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- बेहतर बस परिवहन प्रणाली से व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
- टर्मिनल और डिजिटल ग्रिड के विकास में निवेश से रोजगार सृजन होगा।
- इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने से ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
सामाजिक महत्व
- महिलाओं द्वारा संचालित सेवाओं से महिला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में वृद्धि होगी, जिससे उनकी गतिशीलता बढ़ेगी।
- समावेशी और सुलभ बस परिवहन से समाज के सभी वर्गों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को लाभ होगा।
- बेहतर सुरक्षा मानकों से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, जिससे जनहानि और चोटों में कमी आएगी।
पर्यावरणीय महत्व
- इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जिससे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण होगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
- पुराने वाहनों को स्क्रैप करने से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा।
शासन और प्रशासनिक महत्व
- अखिल भारतीय यात्री परमिट और राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण जैसे सुधारों से अंतर-राज्यीय परिवहन का विनियमन और प्रबंधन बेहतर होगा।
- डिजिटल ग्रिड और नागरिक सतर्कता चैनल से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- मानकीकरण और नीतिगत ढांचे से परिवहन क्षेत्र में एकरूपता और दक्षता आएगी।
चुनौतियाँ
1. राज्यों के बीच समन्वय
- अखिल भारतीय यात्री परमिट और सीमा चौकियों को हटाने के लिए विभिन्न राज्यों के बीच सहमति और समन्वय स्थापित करना एक चुनौती हो सकती है।
- राष्ट्रीय नीति और मानकों को सभी राज्यों में समान रूप से लागू करना मुश्किल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. बुनियादी ढाँचा और वित्तपोषण
- नए बस टर्मिनलों का निर्माण और मौजूदा टर्मिनलों का उन्नयन करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और भूमि की आवश्यकता होगी।
- इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और क्षेत्रीय विनिर्माण क्लस्टर स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी
3. डिजिटल एकीकरण और डेटा प्रबंधन
- विभिन्न सार्वजनिक और निजी ऑपरेटरों के बीच अंतरसंचालनीयता मानकों को लागू करना और एक एकीकृत डिजिटल ग्रिड बनाना तकनीकी रूप से जटिल हो सकता है।
- बड़ी मात्रा में डेटा का प्रबंधन, सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया
4. निजी क्षेत्र की भागीदारी
- निजी बस ऑपरेटरों को नए नियमों, डिजिटल एकीकरण और इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू करना।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक-निजी भागीदारी, आर्थिक सुधार
5. सुरक्षा और निगरानी
- बसों में सुरक्षा मानकों का नियमित सत्यापन और आपातकालीन चेतावनी प्रणालियों को कार्यशील बनाना सुनिश्चित करना।
- संचालकों की सुरक्षा रेटिंग और नागरिक सतर्कता चैनलों की विश्वसनीयता बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अंतर-राज्यीय परमिटों का मानकीकरण | राज्यों के बीच अलग-अलग नियमों के कारण यात्रियों और ऑपरेटरों को होने वाली कठिनाई। |
| बस टर्मिनलों का अव्यवस्थित प्रबंधन | यात्रियों के लिए असुविधा, भीड़भाड़ और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ। |
| डिजिटल एकीकरण का अभाव | लाइव ट्रैकिंग, एकीकृत बुकिंग और यात्री प्रतिक्रिया प्रणाली की कमी। |
| यात्री सुरक्षा मानक | बसों में अग्नि सुरक्षा, निकास और आपातकालीन चेतावनी प्रणालियों की अपर्याप्तता। |
| पुराने बेड़े और प्रदूषण | पुराने डीजल बसों से होने वाला वायु प्रदूषण और ईंधन दक्षता की कमी। |
| महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा | सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के लिए सुरक्षित और आरामदायक यात्रा विकल्पों की कमी। |
आगे की राह
- अखिल भारतीय यात्री परमिट को एक वर्ष के भीतर लागू करने के लिए राज्यों के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित किया जाए और शेष सीमा चौकियों को समाप्त किया जाए।
- राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण की स्थापना के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए और बस टर्मिनलों के लिए राष्ट्रीय संहिता को एक वर्ष के भीतर अधिसूचित किया जाए।
- राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड के लिए अंतरसंचालनीयता मानकों को छह महीने के भीतर अधिसूचित किया जाए और चरणबद्ध तरीके से सार्वजनिक व निजी ऑपरेटरों को इसमें शामिल किया जाए।
- संचालक-केंद्रित सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए, जिसमें स्वचालित परीक्षण स्टेशनों की स्थापना और आपातकालीन चेतावनी प्रणालियों को एक वर्ष के भीतर कार्यशील बनाना शामिल है।
- इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने के लिए एक समयबद्ध योजना तैयार की जाए, जिसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और क्षेत्रीय विनिर्माण क्लस्टर शामिल हों।
- महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित सेवाओं को छह महीने के भीतर शुरू किया जाए और नई बसों में सीसीटीवी व शौचालयों के मानकीकरण को सुनिश्चित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समावेशी बस परिवहन · डिजिटल गतिशीलता · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · अखिल भारतीय यात्री परमिट · राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण · राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड · संचालक-केंद्रित सुरक्षा · फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट · महिला-संचालित बस सेवाएं · संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}
अवधारणा प्रवाह
संसदीय समिति की रिपोर्ट → बस परिवहन में सुधार की सिफारिशें → नीतिगत और नियामक परिवर्तन → बुनियादी ढाँचा और डिजिटल एकीकरण → बेहतर यात्री अनुभव और सुरक्षा → आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट केवल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से संबंधित है।
2. ‘अखिल भारतीय यात्री परमिट’ का उद्देश्य अखिल भारतीय पर्यटक परमिट को प्रतिस्थापित करना है।
3. ‘राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड’ का लक्ष्य भारतीय रेलवे के विनिर्देशों के अनुरूप सार्वजनिक लाइव-ट्रैकिंग और एकीकृत बुकिंग प्रणाली स्थापित करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि समिति की रिपोर्ट परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी विभाग से संबंधित है, जिसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय एक हिस्सा है। कथन 2 सही है, रिपोर्ट में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट को अखिल भारतीय यात्री परमिट से प्रतिस्थापित करने की सिफारिश की गई है। कथन 3 भी सही है, राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड का उद्देश्य भारतीय रेलवे के विनिर्देशों के अनुरूप सार्वजनिक लाइव-ट्रैकिंग और एकीकृत बुकिंग प्रणाली स्थापित करना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट’ के प्रमुख घटकों में से एक है/हैं?
1. पंजीकृत स्क्रैपिंग सुविधाओं पर बसों की स्क्रैप-एंड-लीज सुविधा।
2. इलेक्ट्रिक बसों के लिए समयबद्ध योजना और चार्जिंग व्यवस्था।
3. इलेक्ट्रिक बसों और बैटरियों के लिए एंड-ऑफ-लाइफ फ्रेमवर्क।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट में ये सभी घटक शामिल हैं। इसमें पंजीकृत स्क्रैपिंग सुविधाओं पर स्क्रैप-एंड-लीज के माध्यम से बसों के संचालन की सुविधा, इलेक्ट्रिक बसों के लिए एक समयबद्ध योजना और संचालन के स्थान के अनुरूप चार्जिंग व्यवस्था, तथा इलेक्ट्रिक बसों और बैटरियों के लिए एक एंड-ऑफ-लाइफ फ्रेमवर्क शामिल है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति की हालिया रिपोर्ट में ‘समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन’ को सक्षम बनाने के लिए की गई प्रमुख सिफारिशों का विश्लेषण कीजिए। भारत में सार्वजनिक बस परिवहन क्षेत्र के आधुनिकीकरण में ये सिफारिशें किस प्रकार सहायक हो सकती हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के संदर्भ और उसके मुख्य विषय (समावेशी, डिजिटल और टिकाऊ बस परिवहन) का संक्षिप्त उल्लेख।
2. प्रमुख सिफारिशों का विश्लेषण:
क. अखिल भारतीय यात्री परमिट: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कार्यान्वयन, निगरानी केंद्र, सीमा चौकियों का उन्मूलन।
ख. राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण: टर्मिनल स्वामित्व को बस संचालन से अलग करना, हवाईअड्डे प्राधिकरण मॉडल पर गठन, राष्ट्रीय संहिता।
ग. राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड: अंतरसंचालनीयता मानक, एकीकृत बुकिंग, लाइव-ट्रैकिंग, नागरिक सतर्कता चैनल।
घ. संचालक-केंद्रित सुरक्षा: स्वचालित परीक्षण स्टेशन, अग्नि सुरक्षा, रेट्रोफिटमेंट जांच, आपातकालीन चेतावनी प्रणाली।
ङ. फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट: स्क्रैप-एंड-लीज, इलेक्ट्रिक बसों के लिए योजना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एंड-ऑफ-लाइफ फ्रेमवर्क।
च. महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित सेवाएं: महिला चालकों का कार्यक्रम, सीसीटीवी, अलर्ट सिस्टम, बसों में शौचालय।
3. सार्वजनिक बस परिवहन क्षेत्र के आधुनिकीकरण में सहायता: इन सिफारिशों का मूल्यांकन करते हुए बताएं कि ये कैसे दक्षता बढ़ाएंगी, सुरक्षा में सुधार करेंगी, पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देंगी, यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएंगी और डिजिटल एकीकरण को बढ़ावा देंगी। विशेष रूप से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दें।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों (वित्तपोषण, समन्वय, तकनीकी क्षमता) का संक्षिप्त उल्लेख और उनके समाधान के लिए सुझाव।
5. निष्कर्ष: भारत में एक आधुनिक, कुशल और समावेशी बस परिवहन प्रणाली के महत्व पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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