23 Sep यूपीएससी तैयारी: स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं की कमी, 5 करोड़ बच्चे प्रभावित

✎ संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट दर्शाती है कि स्वच्छ भारत मिशन के बावजूद, भारत में 5 करोड़ बच्चों को अभी भी विद्यालयों में स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच प्राप्त नहीं है, जो सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय (शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव संसाधन से संबंधित मुद्दे) | GS Paper III — पर्यावरण (सतत विकास लक्ष्य)
- Prelims: स्वच्छ भारत मिशन, सतत विकास लक्ष्य (SDGs), WHO/UNICEF संयुक्त निगरानी कार्यक्रम (JMP), विद्यालयों में WASH (जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य), बच्चों के अधिकार, पेयजल सुविधा
- Essay: स्वच्छता और शिक्षा: भारत के विकास की आधारशिला, सतत विकास लक्ष्य: चुनौतियाँ और भारत की प्रगति
त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट दर्शाती है कि स्वच्छ भारत मिशन के बावजूद, भारत में 5 करोड़ बच्चों को अभी भी विद्यालयों में स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच प्राप्त नहीं है, जो सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट ‘प्रोग्रेस ऑन ड्रिंकिंग वाटर, सैनिटेशन एंड हाइजीन इन स्कूल्स 2015-2025’ के अनुसार, भारत में अभी भी 5 करोड़ स्कूली बच्चों को विद्यालयों में स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच प्राप्त नहीं है। यह रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के तहत जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत के सामने आने वाली प्रगति और चुनौतियों को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- यह रिपोर्ट WHO/UNICEF के संयुक्त निगरानी कार्यक्रम (JMP) का हिस्सा है, जो विद्यालयों में जल आपूर्ति, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) पर केंद्रित है।
- रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक विश्व स्तर पर कुल 24.4 करोड़ बच्चों में से 5 करोड़ भारतीय बच्चों को विद्यालयों में स्वच्छता सेवाएँ उपलब्ध नहीं थीं, जो विश्व में सर्वाधिक संख्या है।
- भारत ने 2015 से 2025 के बीच विद्यालयों में स्वच्छता सेवाओं के अभाव में 14% की कमी दर्ज की है, जिसे स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के प्रभाव के रूप में देखा जा सकता है।
- वैश्विक स्तर पर 36.2 करोड़ बच्चों को 2025 में विद्यालयों में स्वास्थ्य (Hygiene) सेवाएँ नहीं मिलीं, जिनमें से 2 करोड़ भारत से थे।
- पेयजल के मोर्चे पर, भारत उन 28 देशों में शामिल है जो 2030 तक विद्यालयों में बुनियादी पेयजल कवरेज के सार्वभौमिक लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर हैं।
- 2025 तक, विश्व के 25.8 करोड़ बच्चों को विद्यालयों में पेयजल सेवाएँ उपलब्ध नहीं थीं, जिनमें से 1.2 करोड़ भारतीय बच्चे थे।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)
- स्वच्छ भारत मिशन (SBM) भारत सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
- इसका मुख्य उद्देश्य ‘खुले में शौच मुक्त’ (Open Defecation Free – ODF) भारत प्राप्त करना और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
- यह मिशन दो उप-मिशनों में विभाजित है: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), जिन्हें क्रमशः पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों (Individual Household Latrines – IHHLs) के निर्माण को बढ़ावा देना और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों की स्थापना करना है।
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करना तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों में सुधार करना है।
- मिशन के तहत व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाया जा सके।
- इस मिशन ने स्वच्छता कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि की है और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार में योगदान दिया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 5 करोड़ भारतीय बच्चों को स्कूलों में स्वच्छता सेवा तक पहुँच नहीं | यह संख्या वैश्विक कुल 24.4 करोड़ बच्चों में से है, जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती को दर्शाती है। |
| भारत में 2 करोड़ बच्चों को स्कूलों में स्वच्छता सेवा नहीं | यह वैश्विक स्तर पर 36.2 करोड़ बच्चों में से है जिन्हें स्कूलों में स्वच्छता सेवा नहीं मिलती। |
| स्कूलों में स्वच्छता सेवा रहित स्कूलों में 14% की कमी | यह स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के तहत हुई प्रगति को दर्शाता है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। |
| भारत 2030 तक स्कूलों में बुनियादी पेयजल की सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करने की राह पर | यह एक सकारात्मक उपलब्धि है, जहाँ भारत 62 देशों में से 28 में शामिल है। |
| पेयजल सेवा से वंचित 1.2 करोड़ भारतीय बच्चे | यह वैश्विक स्तर पर 25.8 करोड़ बच्चों में से है, जो अभी भी पेयजल तक पहुँच के अंतर को दर्शाता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण पर सीधा प्रभाव: स्वच्छता और पेयजल की कमी से जल-जनित बीमारियाँ फैल सकती हैं, जिससे बच्चों की उपस्थिति और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है।
- लैंगिक समानता: लड़कियों के लिए स्कूलों में अलग और स्वच्छ शौचालयों की कमी अक्सर उनकी शिक्षा छोड़ने का एक प्रमुख कारण बनती है।
- मानव पूंजी विकास: स्वस्थ और शिक्षित बच्चे देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानव पूंजी का निर्माण करते हैं।
आर्थिक महत्व
- स्वास्थ्य देखभाल लागत: खराब स्वच्छता के कारण होने वाली बीमारियों से स्वास्थ्य देखभाल पर सरकारी और व्यक्तिगत खर्च बढ़ता है।
- उत्पादकता हानि: बीमारियों के कारण बच्चों और उनके माता-पिता की उत्पादकता प्रभावित होती है।
- सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) की प्राप्ति: SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) की प्राप्ति के लिए यह महत्वपूर्ण है।
शासन और नीतिगत महत्व
- सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन: यह रिपोर्ट स्वच्छ भारत मिशन जैसे प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों की प्रगति और चुनौतियों का आकलन करने में मदद करती है।
- डेटा अंतराल: रिपोर्ट भारत में स्वच्छता डेटा की कमी को उजागर करती है, जो प्रभावी नीति निर्माण और निगरानी के लिए एक बाधा है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं, विशेष रूप से SDGs के प्रति उसकी प्रगति को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी स्वच्छता तक पहुँच का अभाव
- 5 करोड़ भारतीय बच्चों को अभी भी स्कूलों में स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच नहीं है, जो एक बड़ी संख्या है।
- यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और शिक्षा में बाधाओं का कारण बनता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य और शिक्षा
2. स्वच्छता सेवाओं की कमी
- 2 करोड़ भारतीय बच्चों को स्कूलों में स्वच्छता (Hygiene) सेवा नहीं मिलती, जिसमें हाथ धोने की सुविधा आदि शामिल है।
- यह बीमारियों के प्रसार को बढ़ाता है और बच्चों के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे
3. डेटा अंतराल
- रिपोर्ट में भारत के लिए पर्याप्त हालिया डेटा की कमी को उजागर किया गया है, विशेष रूप से स्वच्छता कवरेज के अनुमानों के लिए।
- यह प्रभावी नीति निर्माण, निगरानी और लक्षित हस्तक्षेपों को बाधित करता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही
4. ग्रामीण-शहरी और विभिन्न स्कूल स्तरों के बीच अंतर
- हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पेयजल के लिए यह अंतर लागू नहीं होता, लेकिन स्वच्छता और स्वच्छता सेवाओं के लिए ऐसे अंतर मौजूद हो सकते हैं।
- यह समावेशी विकास और सभी बच्चों के लिए समान पहुँच सुनिश्चित करने में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं की कमी | 5 करोड़ बच्चों को पहुँच नहीं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और शिक्षा में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं। |
| स्वच्छता सेवाओं का अभाव | 2 करोड़ बच्चों को स्वच्छता (हाथ धोने आदि) सेवा नहीं, जिससे बीमारियों का प्रसार बढ़ता है। |
| डेटा की अपर्याप्तता | भारत के लिए स्वच्छता कवरेज पर पर्याप्त हालिया डेटा की कमी, प्रभावी नीति निर्माण में बाधा। |
| लड़कियों की शिक्षा पर प्रभाव | स्वच्छ शौचालयों की कमी से लड़कियों की स्कूल छोड़ने की दर बढ़ सकती है। |
| सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा | SDG 4 और SDG 6 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में धीमी प्रगति। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)
आगे की राह
- स्कूलों में शौचालयों के निर्माण और रखरखाव पर ध्यान केंद्रित करना, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में।
- हाथ धोने की सुविधाओं सहित बुनियादी स्वच्छता सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बच्चों में स्वच्छता व्यवहार को बढ़ावा देना।
- स्वच्छता और स्वच्छता पर विश्वसनीय और अद्यतन डेटा संग्रह प्रणालियों को मजबूत करना ताकि प्रभावी नीतियों का निर्माण हो सके।
- लड़कियों के लिए अलग और कार्यात्मक शौचालयों की उपलब्धता सुनिश्चित करके लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
- पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता (WASH) सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन और उनके कुशल उपयोग को सुनिश्चित करना।
- स्थानीय समुदायों, माता-पिता और स्कूल प्रबंधन समितियों को WASH सुविधाओं के रखरखाव और निगरानी में शामिल करना।
- शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों को स्वच्छता और स्वच्छता के महत्व के बारे में प्रशिक्षित करना ताकि वे बच्चों को शिक्षित कर सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छ भारत मिशन · सतत विकास लक्ष्य (SDG) · स्कूलों में स्वच्छता · बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा · जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) · सार्वभौमिक पहुंच · नीतिगत चुनौतियाँ · बुनियादी ढाँचा · सामाजिक-आर्थिक विकास · अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
स्कूलों में स्वच्छता और पेयजल की कमी → बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव (बीमारियाँ) → स्कूल में उपस्थिति और सीखने की क्षमता में कमी → शिक्षा की गुणवत्ता और शैक्षिक परिणामों पर असर → मानव पूंजी विकास और सामाजिक-आर्थिक प्रगति में बाधा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ‘प्रोग्रेस ऑन ड्रिंकिंग वाटर, सैनिटेशन एंड हाइजीन इन स्कूल्स 2015-2025’ के अनुसार, भारत में 2025 तक स्कूलों में स्वच्छता सेवा से वंचित बच्चों की संख्या विश्व में सर्वाधिक थी।
2. स्वच्छ भारत मिशन, जो 2 अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया था, ने स्कूलों में स्वच्छता सेवा से वंचित स्कूलों में 14% की कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
3. भारत 2030 तक स्कूलों में बुनियादी पेयजल की सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करने की राह पर है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2025 तक 5 करोड़ बच्चे स्कूलों में स्वच्छता सेवा से वंचित थे, जो विश्व में सर्वाधिक है। कथन 2 सही है। रिपोर्ट में स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्कूलों में स्वच्छता सेवा से वंचित स्कूलों में 14% की कमी का उल्लेख किया गया है। कथन 3 सही है। रिपोर्ट बताती है कि भारत उन 28 देशों में से है जो 2030 तक स्कूलों में बुनियादी पेयजल की सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करने की राह पर हैं।
Q2. जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा सतत विकास लक्ष्य (SDG) सीधे स्कूलों में स्वच्छता सेवाओं से संबंधित है?
- SDG 3: अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण
- SDG 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- SDG 6: स्वच्छ जल और स्वच्छता
- SDG 10: असमानताओं में कमी
उत्तर: SDG 6: स्वच्छ जल और स्वच्छता — SDG 6 विशेष रूप से सभी के लिए स्वच्छ जल और स्वच्छता की उपलब्धता और सतत प्रबंधन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, जिसमें स्कूलों में स्वच्छता सेवाएं भी शामिल हैं। हालांकि अन्य SDG भी अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित हो सकते हैं, SDG 6 सबसे सीधा संबंध रखता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के आलोक में, भारत में स्कूलों में स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच की स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, स्वच्छ भारत मिशन जैसे सरकारी कार्यक्रमों की भूमिका और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्षों का संक्षिप्त उल्लेख करें, जिसमें भारत में स्कूलों में स्वच्छता की कमी पर प्रकाश डाला गया हो (5 करोड़ बच्चे)।
2. **वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **सकारात्मक पहलू:** रिपोर्ट में उल्लिखित प्रगति, जैसे स्कूलों में स्वच्छता सेवा से वंचित स्कूलों में 14% की कमी और पेयजल में सुधार।
* **नकारात्मक पहलू/चुनौतियाँ:** 5 करोड़ बच्चों का अभी भी स्वच्छता से वंचित होना, स्वच्छता सुविधाओं की गुणवत्ता और रखरखाव, लिंग-विशिष्ट शौचालयों की कमी, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुविधाओं का अभाव, ग्रामीण-शहरी अंतर, डेटा गैप (विशेषकर स्वच्छता के लिए)।
3. **सरकारी कार्यक्रमों की भूमिका (स्वच्छ भारत मिशन):**
* **उद्देश्य और उपलब्धियाँ:** स्वच्छ भारत मिशन (2 अक्टूबर 2014) का शुभारंभ, खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति प्राप्त करने के प्रयास, स्कूलों में शौचालयों के निर्माण पर जोर।
* **प्रभाव:** रिपोर्ट में उल्लिखित 14% की कमी जैसे ठोस परिणाम।
* **सीमाएँ:** केवल निर्माण पर जोर, रखरखाव और व्यवहार परिवर्तन में कमी, गुणवत्ता और निरंतरता की चुनौती।
4. **सतत विकास लक्ष्य (SDGs) और चुनौतियाँ:**
* **प्रासंगिक SDG:** SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) से सीधा संबंध।
* **चुनौतियाँ:** इन लक्ष्यों को 2030 तक प्राप्त करने में भारत के सामने आने वाली बाधाएँ (वित्तीय संसाधन, जागरूकता की कमी, निगरानी तंत्र, कार्यान्वयन में क्षेत्रीय असमानताएँ)।
5. **आगे की राह/सुझाव:**
* बुनियादी ढाँचे के निर्माण के साथ-साथ रखरखाव और व्यवहार परिवर्तन पर समान जोर।
* डेटा संग्रह और निगरानी प्रणालियों में सुधार।
* सार्वजनिक-निजी भागीदारी और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना।
* स्वच्छता शिक्षा को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाना।
* विशेष रूप से लड़कियों और दिव्यांग बच्चों की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करना।
6. **निष्कर्ष:** स्कूलों में स्वच्छता तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, जो बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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