18 Sep यूपी के कैप्टिव कोयला ब्लॉक सहरपुर जमरपानी का विकास क्यों है जरूरी? जानिए पूरा मामला
✎ कैप्टिव कोयला ब्लॉक विशिष्ट अंतिम उपयोग के लिए आवंटित खदानें हैं जो संबंधित उद्योगों को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करती हैं, और इनके विकास में देरी से बाहरी स्रोतों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना (ऊर्जा) | GS Paper II — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
- Prelims: कैप्टिव कोयला ब्लॉक, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015, प्लांट लोड फैक्टर (PLF), ऊर्जा सुरक्षा, कोयला मंत्रालय
- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: कैप्टिव कोयला ब्लॉक विशिष्ट अंतिम उपयोग के लिए आवंटित खदानें हैं जो संबंधित उद्योगों को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करती हैं, और इनके विकास में देरी से बाहरी स्रोतों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कोयला मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपने कैप्टिव कोयला ब्लॉक, सहरपुर जमरपानी के विकास में तेजी लाने का आग्रह किया है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी का कारण कोयले की आपूर्ति में व्यवधान नहीं है, बल्कि राज्य द्वारा अपने आवंटित कैप्टिव ब्लॉक को विकसित करने में देरी और परिचालन संबंधी बाधाएँ हैं। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) राज्य की कोयले की आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पृष्ठभूमि
- उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) को कोयला मंत्रालय द्वारा 13 अगस्त, 2015 को झारखंड में सहरपुर जमरपानी कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया था।
- इस ब्लॉक में 973 मिलियन टन से अधिक का अनुमानित कोयला भंडार है और इसे विशेष रूप से UPRVUNL की तापीय ऊर्जा परियोजनाओं की कोयले की आवश्यकता को पूरा करने के लिए आवंटित किया गया था।
- आवंटन के एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, UPRVUNL द्वारा आवश्यक पहल की कमी के कारण ब्लॉक के संचालन में कोई प्रगति नहीं हुई है।
- परिणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश के बिजली संयंत्रों की कोयले की आवश्यकता मुख्य रूप से कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) द्वारा पूरी की जा रही है।
- अन्य चौदह कैप्टिव कोयला ब्लॉक, जो सहरपुर जमरपानी के आवंटन की तारीख को या उसके बाद विद्युत क्षेत्र में आंतरिक उपयोग के लिए आवंटित किए गए थे, पहले ही कार्यान्वित हो चुके हैं और अपने-अपने संयंत्रों के लिए कोयला उत्पादन शुरू कर चुके हैं।
- कोयला मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश को बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने और अपने विद्युत संयंत्रों के लिए दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सहरपुर जमरपानी ब्लॉक के विकास के लिए तत्काल कदम उठाने की सलाह दी है।
कैप्टिव कोयला ब्लॉक क्या हैं?
- कैप्टिव कोयला ब्लॉक वे कोयला खदानें होती हैं जिन्हें किसी विशिष्ट अंतिम उपयोग (जैसे बिजली उत्पादन, इस्पात निर्माण, सीमेंट उत्पादन) के लिए किसी कंपनी या राज्य इकाई को आवंटित किया जाता है।
- इन ब्लॉकों से उत्पादित कोयले का उपयोग मुख्य रूप से आवंटनकर्ता के अपने संयंत्रों या परियोजनाओं में किया जाता है, न कि खुले बाजार में बेचा जाता है।
- भारत में कैप्टिव कोयला ब्लॉकों का आवंटन कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 (Coal Mines (Special Provisions) Act, 2015) के तहत किया जाता है, जो कोयला ब्लॉक आवंटन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करता है।
- इनका मुख्य उद्देश्य संबंधित उद्योगों को दीर्घकालिक और स्थिर कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करके ऊर्जा सुरक्षा और लागत दक्षता बढ़ाना है।
- कैप्टिव ब्लॉकों का विकास अक्सर राज्य सरकारों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को आवंटित किया जाता है ताकि वे अपने राज्यों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
- इन ब्लॉकों के सफल संचालन से आयात पर निर्भरता कम होती है और घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
- हालांकि, इन ब्लॉकों के विकास में देरी से संबंधित राज्य या इकाई को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जैसा कि उत्तर प्रदेश के मामले में देखा गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कैप्टिव कोयला ब्लॉक (Captive Coal Block) | यह एक कोयला खदान है जो किसी विशेष उद्योग या बिजली संयंत्र की कोयले की आवश्यकता को पूरा करने के लिए आवंटित की जाती है, जिससे बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम होती है और ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित होती है। |
| सहरपुर जमरपानी कोयला ब्लॉक | यह उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) को आवंटित एक कैप्टिव कोयला ब्लॉक है, जिसमें 973 मिलियन टन से अधिक का भंडार है, जिसका उद्देश्य राज्य की तापीय ऊर्जा परियोजनाओं की कोयले की आवश्यकता को पूरा करना है। |
| कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 | यह अधिनियम कोयला ब्लॉकों के आवंटन और परिचालन को विनियमित करता है, विशेष रूप से उन ब्लॉकों के लिए जो रद्द कर दिए गए थे, ताकि देश में कोयला उत्पादन और आपूर्ति को सुव्यवस्थित किया जा सके। |
| प्लांट लोड फैक्टर (PLF) | यह किसी ताप विद्युत संयंत्र की दक्षता का एक माप है, जो एक निश्चित अवधि में उसके अधिकतम संभव उत्पादन के सापेक्ष वास्तविक उत्पादन को दर्शाता है। कम पीएलएफ अपर्याप्त उत्पादन का संकेत दे सकता है, भले ही कोयले का भंडार पर्याप्त हो। |
| कोयले का भंडार | यह ताप विद्युत संयंत्रों में उपलब्ध कोयले की मात्रा को संदर्भित करता है, जो बिजली उत्पादन के लिए ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण है। |
महत्व
ऊर्जा सुरक्षा
- कैप्टिव कोयला ब्लॉकों का विकास राज्यों को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है, जिससे दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- स्थानीय कोयला उत्पादन बिजली संयंत्रों को समय पर और पर्याप्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करके बिजली उत्पादन में स्थिरता लाता है।
आर्थिक महत्व
- स्थानीय कोयला उत्पादन से परिवहन लागत कम होती है, जिससे बिजली उत्पादन की कुल लागत में कमी आती है और अंततः उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलती है।
- कोयला खनन और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
राजकोषीय प्रभाव
- आत्मनिर्भरता से कोयले के आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है और देश के व्यापार संतुलन में सुधार होता है।
- राज्य के भीतर कोयला उत्पादन से राज्य सरकार को रॉयल्टी और अन्य कर राजस्व प्राप्त हो सकता है, जिससे राज्य के वित्त में वृद्धि होती है।
शासन और नीति
- यह मामला केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और नीति कार्यान्वयन के महत्व को उजागर करता है, विशेष रूप से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में।
- यह कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 जैसे कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल देता है, ताकि आवंटित ब्लॉकों का समय पर विकास सुनिश्चित किया जा सके।
चुनौतियाँ
1. परियोजना कार्यान्वयन में देरी
- सहरपुर जमरपानी ब्लॉक के आवंटन के दस साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, इसके संचालन की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।
- परियोजना कार्यान्वयन में देरी से ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लाभों की प्राप्ति में बाधा आती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएँ, बुनियादी ढाँचा
2. परिचालन संबंधी बाधाएँ
- विभिन्न संयंत्रों में माल उतारने संबंधी बाधाओं के कारण रेलवे द्वारा रैकों की तैनाती पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जिससे कोयले की आपूर्ति में वृद्धि सीमित हो जाती है।
- कम प्लांट लोड फैक्टर (PLF) इंगित करता है कि पर्याप्त कोयला भंडार होने के बावजूद संयंत्र पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं, जो परिचालन संबंधी अक्षमताओं का संकेत है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा क्षेत्र, औद्योगिक नीति
3. केंद्र-राज्य समन्वय
- कोयला मंत्रालय द्वारा राज्य को कैप्टिव ब्लॉक के विकास में तेजी लाने के आग्रह से केंद्र और राज्य के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
- परियोजनाओं के समय पर कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
4. ऊर्जा सुरक्षा पर निर्भरता
- कैप्टिव ब्लॉक के निष्क्रिय रहने के कारण राज्य अपनी कोयले की आवश्यकता के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) जैसे बाहरी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भर है।
- यह निर्भरता भविष्य में आपूर्ति व्यवधानों या मूल्य अस्थिरता के प्रति राज्य को संवेदनशील बनाती है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कैप्टिव कोयला ब्लॉक का निष्क्रिय रहना | उत्तर प्रदेश के सहरपुर जमरपानी ब्लॉक का दस साल से अधिक समय से निष्क्रिय रहना राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को कमजोर करता है और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाता है। |
| कम प्लांट लोड फैक्टर (PLF) | कोयले का पर्याप्त भंडार होने के बावजूद यूपीआरवीयूएनएल के ताप विद्युत संयंत्रों का लगभग 48 प्रतिशत पीएलएफ परिचालन संबंधी अक्षमताओं और बिजली उत्पादन में कमी का संकेत देता है। |
| माल उतारने संबंधी बाधाएँ | संयंत्रों में कोयला उतारने में आने वाली बाधाएँ रेलवे द्वारा रैकों की तैनाती को सीमित करती हैं, जिससे कोयले की आपूर्ति में और वृद्धि बाधित होती है। |
| दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा का अभाव | अपने स्वयं के कैप्टिव ब्लॉक को विकसित करने में विफलता राज्य के बिजली संयंत्रों के लिए दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने में बाधा डालती है। |
आगे की राह
- उत्तर प्रदेश सरकार को सहरपुर जमरपानी कोयला ब्लॉक के विकास के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने चाहिए, जिसमें सभी आवश्यक नियामक स्वीकृतियाँ प्राप्त करना और खनन कार्य शुरू करना शामिल है।
- यूपीआरवीयूएनएल को अपने ताप विद्युत संयंत्रों में परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना चाहिए, विशेष रूप से कोयले को माल उतारने की क्षमता में सुधार करना चाहिए, ताकि कोयले की आपूर्ति और उपयोग को अधिकतम किया जा सके।
- राज्य सरकार को उपलब्ध कोयले के भंडार का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और बिजली उत्पादन में सुधार के लिए संयंत्रों के प्लांट लोड फैक्टर (PLF) को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं के समय पर कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाया जा सके।
- कोयला मंत्रालय को कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के आवंटियों के प्रदर्शन की नियमित निगरानी करनी चाहिए और निष्क्रिय ब्लॉकों के लिए जवाबदेही तय करने हेतु तंत्र स्थापित करना चाहिए।
- राज्य को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवल कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश जैसे विविधीकरण रणनीतियों का पता लगाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कैप्टिव कोयला ब्लॉक · ऊर्जा सुरक्षा · कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 · राज्य विद्युत उत्पादन निगम · दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा · प्लांट लोड फैक्टर (PLF) · कोयला आपूर्ति श्रृंखला · बुनियादी ढांचा विकास · राजकोषीय संघवाद · खनन क्षेत्र का विनियमन · आर्थिक संवृद्धि · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा किए गए व्यय’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ सूची (खनन), राज्य सूची (बिजली)’}
अवधारणा प्रवाह
कोयला मंत्रालय द्वारा यूपीआरवीयूएनएल को कैप्टिव कोयला ब्लॉक का आवंटन। → आवंटन के बावजूद ब्लॉक का दस साल से अधिक समय तक निष्क्रिय रहना। → राज्य की कोयले की आवश्यकता के लिए CIL पर निरंतर निर्भरता। → संयंत्रों में परिचालन संबंधी बाधाएँ और कम प्लांट लोड फैक्टर (PLF)। → कोयला मंत्रालय द्वारा ब्लॉक के विकास में तेजी लाने का आग्रह। → दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015, कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के आवंटन और विनियमन का प्रावधान करता है।
2. कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) भारत में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है।
3. प्लांट लोड फैक्टर (PLF) किसी विद्युत संयंत्र की दक्षता को मापता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि यह अधिनियम कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के आवंटन के लिए एक पारदर्शी ढाँचा प्रदान करता है। कथन 2 भी सही है, CIL भारत में कोयले का प्रमुख उत्पादक है। कथन 3 भी सही है, PLF विद्युत संयंत्र के वास्तविक उत्पादन और उसकी अधिकतम संभावित उत्पादन क्षमता का अनुपात होता है, जो उसकी दक्षता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
Q2. अभिकथन (A): कोयला मंत्रालय ने राज्यों को अपने कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के विकास में तेजी लाने का आग्रह किया है।
कारण (R): कैप्टिव कोयला ब्लॉक राज्यों को अपने ताप विद्युत संयंत्रों के लिए दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं और बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करते हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि कोयला मंत्रालय ने राज्यों को अपने कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के विकास में तेजी लाने का आग्रह किया है। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि कैप्टिव ब्लॉक राज्यों को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और बाहरी निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के महत्व पर चर्चा कीजिए। साथ ही, इन ब्लॉकों के विकास में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान हेतु आवश्यक कदमों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** कैप्टिव कोयला ब्लॉकों की संक्षिप्त परिभाषा और ऊर्जा सुरक्षा में उनकी भूमिका का उल्लेख।
2. **महत्व:**
* ताप विद्युत संयंत्रों के लिए विश्वसनीय और सस्ती ईंधन आपूर्ति।
* बाहरी स्रोतों (जैसे CIL) पर निर्भरता में कमी।
* लागत दक्षता और विद्युत उत्पादन की स्थिरता।
* राज्य-विशिष्ट ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति।
* आयात पर निर्भरता कम करके विदेशी मुद्रा की बचत।
3. **चुनौतियाँ:**
* पर्यावरणीय और वन संबंधी स्वीकृतियाँ प्राप्त करने में देरी।
* भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के मुद्दे।
* राज्य सरकारों द्वारा आवश्यक पहल की कमी (उदाहरण के लिए, सहरपुर जमरपानी ब्लॉक)।
* बुनियादी ढाँचे के विकास में निवेश की कमी।
* तकनीकी विशेषज्ञता और परिचालन क्षमता का अभाव।
* नियामक और प्रशासनिक बाधाएँ।
4. **समाधान हेतु आवश्यक कदम:**
* अनुमोदन प्रक्रियाओं का सरलीकरण और समयबद्धता।
* राज्य सरकारों को कैप्टिव ब्लॉकों के विकास के लिए प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता।
* सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देना।
* पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) को मजबूत करना।
* खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और डिजिटलीकरण का उपयोग।
* कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 जैसे कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन।
5. **निष्कर्ष:** ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संवृद्धि के लिए कैप्टिव ब्लॉकों के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तर प्रदेश में कैप्टिव कोयला ब्लॉक के विकास में तेजी लाने के लिए कोयला मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. कैप्टिव कोयला ब्लॉक का विकास राज्य सरकार द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित किया जाएगा।
- B. कोयला मंत्रालय ने राज्य में कोयले की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए सीआईएल (कोल इंडिया लिमिटेड) को विशेष निर्देश दिए हैं।
- C. उत्तर प्रदेश में कैप्टिव कोयला ब्लॉक के विकास में केंद्र सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
- D. सीआईएल द्वारा राज्य में कोयले के उत्पादन में कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्तर: B. कोयला मंत्रालय ने राज्य में कोयले की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए सीआईएल (कोल इंडिया लिमिटेड) को विशेष निर्देश दिए हैं। — कोयला मंत्रालय ने राज्य में कोयले की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए सीआईएल को प्रतिबद्ध किया है, जिससे कैप्टिव कोयला ब्लॉक के विकास में तेजी आएगी।
Mains: उत्तर प्रदेश में कैप्टिव कोयला ब्लॉक के विकास में तेजी लाने के लिए कोयला मंत्रालय और सीआईएल द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए। राज्य के औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर इसके प्रभाव का आकलन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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