रक्षा मंत्री श्रीलंका दौरे पर: भारत-श्रीलंका संबंधों में नया अध्याय

रक्षा मंत्री ने द्वीपीय देश श्रीलंका की अपनी पहली यात्रा की शुरुआत करते हुए कहा कि संकट की किसी भी घड़ी में भारत हमेशा म — diagram

रक्षा मंत्री श्रीलंका दौरे पर: भारत-श्रीलंका संबंधों में नया अध्याय

भारत-श्रीलंका संबंधों में अंतरभारतश्रीलंकाआर्थिक स्थिति2 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्थागंभीर आर्थिक संकटरक्षा क्षमताआत्मनिर्भर, निर्यात में वृद्धिसीमित रक्षा क्षमतासंकट में समर्थनमजबूत सहायता देने वालासंकट से गुजर रहारणनीतिक भूमिकाहिंद महासागर में प्रमुख भागीदाररणनीतिक भागीदारनीतिपड़ोसी प्रथम नीतिआर्थिक एवं राजनीतिक चुनौतियाँ
भारत-श्रीलंका संबंधों में अंतर

✎ भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और रक्षा क्षमताएं उसकी 'पड़ोसी प्रथम' नीति को मजबूत करती हैं, जिससे श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध और प्रगाढ़ होते हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत और उसके पड़ोसी-संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
  • Prelims: भारत-श्रीलंका संबंध, द्विपक्षीय व्यापार समझौते, मुक्त व्यापार समझौता (FTA), रक्षा निर्यात, मोबाइल फोन विनिर्माण, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम
  • Essay: भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक कूटनीति पर इसके निहितार्थ, पड़ोसी प्रथम नीति: भारत के क्षेत्रीय संबंधों को आकार देना

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और रक्षा क्षमताएं उसकी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को मजबूत करती हैं, जिससे श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध और प्रगाढ़ होते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंका की अपनी पहली यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत संकट की किसी भी घड़ी में श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक मंच पर बढ़ती विश्वसनीयता पर भी प्रकाश डाला, जो दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और श्रीलंका के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जो बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के माध्यम से सदियों से जुड़े हुए हैं।
  • दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता बनाए रखने में साझा हित रखते हैं।
  • श्रीलंका हाल के वर्षों में गंभीर आर्थिक संकट से गुजरा है, जिसमें भारत ने मानवीय सहायता और वित्तीय समर्थन के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति (Neighbourhood First Policy) श्रीलंका के साथ संबंधों को प्राथमिकता देती है, जिसमें आर्थिक सहयोग, विकास सहायता और रक्षा साझेदारी शामिल है।
  • द्विपक्षीय व्यापार और निवेश दोनों देशों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें भारत श्रीलंका के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है।
  • रक्षा सहयोग में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों का आदान-प्रदान शामिल है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है।

भारत की आर्थिक प्रगति और विदेश नीति पर इसके निहितार्थ

  • भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो वैश्विक आर्थिक विकास में 16 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहा है।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2014 में लगभग 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर पिछले एक दशक में लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है।
  • वित्त वर्ष (FY) 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की सुदृढ़ वृद्धि दर्ज की है, जो वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद एक मजबूत प्रदर्शन है।
  • पिछले 12 वर्षों में औसत मुद्रास्फीति दर (Inflation Rate) लगभग 4.7 प्रतिशत रही है, जबकि इससे पहले यह 10-11 प्रतिशत के स्तर पर थी, जो व्यापक आर्थिक स्थिरता में सुधार को दर्शाता है।
  • भारत का वस्तु एवं सेवा निर्यात 2014 में लगभग 45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 79 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
  • भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता देश बन गया है, जिसकी विनिर्माण इकाइयाँ 2014 में दो से बढ़कर अब 300 से अधिक हो गई हैं।
  • रक्षा निर्यात 2014 में 600 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 39,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
  • भारत ने पिछले 12 वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें आठ प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements – FTA) शामिल हैं, जो इसकी बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक क्षमता को प्रदर्शित करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भारत-श्रीलंका संबंध गहरे सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंध द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त आधार प्रदान करते हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक, वैश्विक आर्थिक विकास में 16 प्रतिशत से अधिक का योगदान।
विनिर्माण क्षेत्र में प्रगति इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और ऑटोमोबाइल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि, भारत दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता।
व्यापार समझौते पिछले 12 वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापार समझौते, जिनमें 8 FTA शामिल हैं, वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका।
रक्षा निर्यात में वृद्धि रक्षा उपकरण निर्यात 600 करोड़ रुपये से बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये हुआ, आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर अग्रसर।
स्टार्ट-अप इकोसिस्टम दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होना, वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना दर्शाता है।
  • विनिर्माण और निर्यात में वृद्धि (विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन) ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता और घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि को रेखांकित करती है।
  • मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) की संख्या में वृद्धि वैश्विक व्यापार में भारत की सक्रिय भागीदारी और आर्थिक कूटनीति के विस्तार को दर्शाती है।

सामरिक महत्व

  • श्रीलंका के साथ भारत की एकजुटता का आश्वासन क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में।
  • रक्षा निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि भारत को एक महत्वपूर्ण रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करती है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा कूटनीति के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।
  • श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करते हैं।

कूटनीतिक महत्व

  • रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत के सक्रिय कूटनीतिक प्रयासों को दर्शाती है।
  • भारत की बढ़ती वैश्विक विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी बात सुने जाने का उल्लेख, एक जिम्मेदार वैश्विक हितधारक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
  • भारतीय प्रवासियों को दोनों देशों के बीच सेतु के रूप में मान्यता देना, प्रवासी कूटनीति के महत्व और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता

  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।
  • प्रमुख व्यापारिक भागीदारों में मंदी का खतरा भारत के निर्यात लक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।

2. विनिर्माण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अन्य विनिर्माण हब से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, जिससे निर्यात वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
  • तकनीकी उन्नयन और नवाचार की निरंतर आवश्यकता, ताकि वैश्विक मानकों पर खरा उतरा जा सके।

3. पड़ोसी देशों के साथ संबंध

  • श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में आंतरिक स्थिरता और आर्थिक संकट भारत के क्षेत्रीय हितों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • क्षेत्र में अन्य बड़ी शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के लिए चुनौतियाँ पेश कर सकती है।

4. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

  • रक्षा उत्पादन में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) में बड़े निवेश और उन्नत प्रौद्योगिकी के अधिग्रहण की आवश्यकता है।
  • रक्षा निर्यात को और बढ़ाने के लिए गुणवत्ता, लागत-प्रभावशीलता और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वैश्विक आर्थिक मंदी निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव और घरेलू आर्थिक वृद्धि में संभावित कमी।
भू-राजनीतिक तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार मार्गों पर संभावित प्रभाव, ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
विनिर्माण में गुणवत्ता और नवाचार अंतर्राष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहने की चुनौती।
पड़ोसी देशों की आंतरिक स्थिरता श्रीलंका जैसे देशों में आर्थिक या राजनीतिक अस्थिरता का भारत के क्षेत्रीय हितों पर प्रभाव।
रक्षा प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण महंगी अनुसंधान एवं विकास लागत और उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच की चुनौती।

आगे की राह

  • श्रीलंका के साथ आर्थिक और सामरिक सहयोग को और गहरा करना, विशेषकर समुद्री सुरक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में।
  • विनिर्माण क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना और नवाचार को प्रोत्साहित करना ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाई जा सके।
  • नए बाजारों की तलाश करना और मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का अधिकतम लाभ उठाना ताकि निर्यात वृद्धि को गति मिल सके।
  • रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ाना और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना ताकि रक्षा निर्यात के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की व्यापक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना, विशेषकर मुद्रास्फीति नियंत्रण और राजकोषीय विवेक के माध्यम से।
  • स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अनुकूल नीतियां और वित्तपोषण के अवसर प्रदान करना, जिससे युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिले।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत-श्रीलंका संबंध · आर्थिक कूटनीति · मुक्त व्यापार समझौता · रक्षा निर्यात · विनिर्माण क्षेत्र · आर्थिक संवृद्धि · मुद्रास्फीति प्रबंधन · वैश्विक आर्थिक योगदान · स्टार्ट-अप इकोसिस्टम · आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र

अवधारणा प्रवाह

रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा  →  भारत द्वारा श्रीलंका को संकट में समर्थन का आश्वासन  →  भारत की बढ़ती आर्थिक और रक्षा क्षमता का प्रदर्शन  →  विनिर्माण और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि  →  वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती विश्वसनीयता और प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत ने पिछले 12 वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें आठ प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) शामिल हैं।
2. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता देश बन गया है।
3. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की सुदृढ़ वृद्धि दर्ज की।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई भी नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। रक्षा मंत्री के अनुसार, भारत ने पिछले 12 वर्षों में 38 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें आठ प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) शामिल हैं। कथन 2 सही है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता देश बनकर उभरा है। कथन 3 सही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष (FY) 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की सुदृढ़ वृद्धि दर्ज की है।

Q2. अभिकथन (A): भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंध हैं।
कारण (R): ये संबंध दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त आधार प्रदान करते हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, परन्तु R गलत है।
  4. A गलत है, परन्तु R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक रूप से गहरे सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंध रहे हैं। कारण (R) भी सही है, क्योंकि ये गहरे संबंध ही दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक मजबूत नींव का काम करते हैं। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की आर्थिक संवृद्धि और विदेश नीति के बीच अंतर्संबंधों का विश्लेषण कीजिए, विशेष रूप से श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के संदर्भ में। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत की आर्थिक संवृद्धि और विदेश नीति के बीच मूलभूत संबंध को संक्षेप में परिभाषित करें।
2. आर्थिक संवृद्धि के प्रमुख बिंदु: हाल के वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करें (जैसे GDP वृद्धि, मुद्रास्फीति नियंत्रण, निर्यात वृद्धि, विनिर्माण क्षेत्र में प्रगति – मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल)।
3. आर्थिक संवृद्धि का विदेश नीति पर प्रभाव: बताएं कि कैसे मजबूत अर्थव्यवस्था भारत को वैश्विक मंच पर अधिक विश्वसनीय और प्रभावशाली बनाती है। आर्थिक कूटनीति, व्यापार समझौतों (FTA), और सॉफ्ट पावर के महत्व पर प्रकाश डालें।
4. श्रीलंका के संदर्भ में विश्लेषण: भारत-श्रीलंका संबंधों में आर्थिक कारकों की भूमिका का वर्णन करें। संकट के समय भारत द्वारा प्रदान की गई सहायता, व्यापार और निवेश संबंधों, तथा सांस्कृतिक संबंधों को आर्थिक कूटनीति के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें।
5. रक्षा क्षेत्र का योगदान: रक्षा निर्यात में वृद्धि और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र कैसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करता है, इस पर चर्चा करें।
6. निष्कर्ष: आर्थिक शक्ति और विदेश नीति के सहजीवी संबंध को दोहराते हुए, भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और वैश्विक भूमिका को मजबूत करने में इसके महत्व पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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