29 Jul राज्यसभा ने पास किया ‘वंदे मातरम’ अपमान विधेयक, जानिए क्या है पूरा मामला
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
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- Prelims: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, वंदे मातरम, राज्यसभा, राष्ट्रीय प्रतीक, मौलिक कर्तव्य, संविधान का सम्मान
- Essay: राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका, संसदीय कार्यवाही में व्यवधान और लोकतंत्र पर इसका प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 का विस्तार करते हुए राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के अनादर को भी दंडनीय बनाना है, जो राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, राज्यसभा ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव करता है, ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के प्रति अनादर के कृत्यों के साथ-साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालने वाले कृत्यों के लिए भी दंड का विस्तार किया जा सके। विपक्षी दलों के सदस्यों की अनुपस्थिति में यह विधेयक पारित किया गया, जिन्होंने NEET पेपर लीक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस बल के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया था।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है।
- यह अधिनियम मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज और भारत के संविधान के अनादर को दंडित करता है।
- ‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखा गया था और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह एक प्रेरणादायक गीत बन गया।
- 1937 में, कांग्रेस नेता जवाहरलाल नेहरू ने ‘वंदे मातरम’ के केवल दो छंदों को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाने का निर्णय लिया था।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर के कृत्यों के लिए दंड के दायरे का विस्तार करना है।
- संशोधन के माध्यम से, राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के प्रति अनादर के कृत्यों को भी दंडनीय बनाया जाएगा।
- विशेष रूप से, ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालने वाले कृत्यों को भी इस विधेयक के तहत दंडित किया जा सकेगा।
- विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सुनिश्चित करना और भारत की सांस्कृतिक विरासत तथा राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा देना है।
- यह विधेयक अभी लोकसभा में विचार और पारित होने के लिए जाएगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 | यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। |
| वंदे मातरम को राष्ट्रीय प्रतीकों के समान दर्जा | यह विधेयक राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान के समान ही ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालने को भी दंडनीय बनाता है। |
| दंडात्मक प्रावधानों का विस्तार | पहले से मौजूद राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के लिए दंडात्मक प्रावधानों का विस्तार अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर भी लागू होगा। |
| लोकसभा में विचाराधीन | राज्यसभा से पारित होने के बाद, विधेयक अब लोकसभा में विचार और पारित होने के लिए जाएगा। |
| राष्ट्रीय गीत का सम्मान | विधेयक का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना और इसके अपमान को रोकना है। |
महत्व
सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व
- यह विधेयक ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक के रूप में मान्यता देता है।
- यह राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान सुनिश्चित करके देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का प्रयास करता है।
कानूनी महत्व
- यह राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 का विस्तार करता है, जिसमें राष्ट्रीय गीत को भी शामिल किया गया है।
- यह राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के लिए दंडात्मक प्रावधानों को ‘वंदे मातरम’ के अपमान तक विस्तारित करता है।
राजनीतिक महत्व
- विधेयक पर चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच ‘वंदे मातरम’ के महत्व और इसके विरोध को लेकर तीखी बहस हुई।
- यह विधेयक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े राजनीतिक विमर्श को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सम्मान
- यह विधेयक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) के अधिकार और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को बनाए रखने की आवश्यकता के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती प्रस्तुत करता है।
- विरोध प्रदर्शनों और असहमति को राष्ट्रीय अपमान के रूप में व्याख्यायित करने की संभावना पर चिंताएं उठ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: संविधान: मौलिक अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार
2. कानूनी व्याख्या और कार्यान्वयन
- ‘अपमान’ या ‘बाधा’ की परिभाषा को लेकर कानूनी अस्पष्टताएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे इसके कार्यान्वयन में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के माध्यम से इन प्रावधानों की संवैधानिकता पर सवाल उठाए जा सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: संविधान: न्यायिक समीक्षा, कानून का शासन
3. राजनीतिक ध्रुवीकरण
- यह विधेयक राजनीतिक दलों के बीच ‘राष्ट्रवाद’ और ‘देशभक्ति’ की परिभाषाओं को लेकर और अधिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकता है।
- विपक्षी दलों द्वारा विधेयक का विरोध और सरकार द्वारा इसकी व्याख्या राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजनीति: राजनीतिक दल, राष्ट्रवाद
4. अधिनियम का दायरा
- यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है कि विधेयक का दायरा केवल वास्तविक अपमान तक सीमित रहे, न कि वैध आलोचना या असहमति तक।
- अधिनियम के दुरुपयोग की संभावना पर चिंताएं उठ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: कानून: विधायी प्रक्रिया, मानवाधिकार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता | क्या यह विधेयक नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को सीमित कर सकता है? |
| ‘अपमान’ की परिभाषा | ‘वंदे मातरम’ के अपमान या गायन में बाधा डालने की कानूनी परिभाषा क्या होगी? |
| राजनीतिक दुरुपयोग | क्या इस विधेयक का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है? |
| संवैधानिकता | क्या विधेयक के प्रावधान संविधान के मौलिक अधिकारों के अनुरूप हैं? |
| कार्यान्वयन में अस्पष्टता | कानून के कार्यान्वयन में अस्पष्टताएँ और मनमानी की संभावनाएँ हो सकती हैं। |
आगे की राह
- विधेयक के प्रावधानों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए ताकि ‘अपमान’ और ‘बाधा’ की व्याख्या में कोई अस्पष्टता न रहे।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय सम्मान के बीच एक उचित संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए।
- यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कानून का दुरुपयोग राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए न हो।
- विधेयक के कार्यान्वयन के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
- नागरिकों को राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व और उनके सम्मान के बारे में शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
- न्यायिक समीक्षा के माध्यम से विधेयक के प्रावधानों की संवैधानिकता की जांच की जानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय सम्मान · वंदे मातरम · राष्ट्रीय गीत · राष्ट्रीय प्रतीक · संवैधानिक नैतिकता · संसदीय प्रक्रिया · मौलिक कर्तव्य · अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता · कानूनी प्रावधान · राष्ट्रवाद
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘Article’: ‘अनुच्छेद 51A(a)’, ‘नोट’: ‘संविधान का पालन और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान’}
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश → विधेयक का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ के अपमान को दंडनीय बनाना → राज्यसभा द्वारा विधेयक पारित → लोकसभा में विधेयक पर विचार और पारित होना → कानून बनने पर ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर दंडात्मक प्रावधान लागू → राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को बढ़ावा देना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव करता है।
2. यह विधेयक राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान के लिए दंड का विस्तार ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालने वाले कृत्यों तक करता है।
3. ‘वंदे मातरम’ गीत बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखा गया था।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक 1971 के अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव करता है। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान के साथ-साथ ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालने वाले कृत्यों के लिए भी दंड का विस्तार करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि ‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखा गया था।
Q2. अभिकथन (A): राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर के कृत्यों के लिए दंड का विस्तार करना है।
कारण (R): यह विधेयक ‘वंदे मातरम’ को कानूनी सुरक्षा प्रदान करके भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना चाहता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि विधेयक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर के कृत्यों के लिए दंड का विस्तार करना है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है क्योंकि विधेयक ‘वंदे मातरम’ को कानूनी सुरक्षा प्रदान करके राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का प्रयास करता है, जैसा कि गृह राज्य मंत्री ने उल्लेख किया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों की चर्चा कीजिए। राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने में ऐसे कानूनों का क्या महत्व है, और क्या ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का संक्षिप्त परिचय दें और इसके उद्देश्य को स्पष्ट करें।
2. **प्रमुख प्रावधान:** विधेयक के मुख्य प्रावधानों का विस्तार से वर्णन करें, विशेष रूप से राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में प्रस्तावित संशोधनों और ‘वंदे मातरम’ को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित करें।
3. **महत्व:** राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने में ऐसे कानूनों के महत्व पर प्रकाश डालें। इसमें राष्ट्रवाद, एकता, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को बनाए रखने में इनकी भूमिका शामिल हो सकती है।
4. **अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव:** इस बात का विश्लेषण करें कि क्या ऐसे कानून संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें उचित प्रतिबंधों (अनुच्छेद 19(2)) और उनके दुरुपयोग की संभावना पर चर्चा करें।
5. **समालोचनात्मक परीक्षण:** विधेयक के पक्ष और विपक्ष में तर्कों का संतुलन प्रस्तुत करें। इसमें कानूनी अस्पष्टता, राजनीतिकरण, और नागरिक स्वतंत्रता पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के संदर्भ में भी चर्चा की जा सकती है।
6. **निष्कर्ष:** एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो राष्ट्रीय सम्मान और नागरिक स्वतंत्रता के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दे।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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