29 Jul राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ अपमान रोकने वाला विधेयक पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना | GS Paper II — संसद और राज्य विधायिकाएँ – संरचना, कार्यकरण, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय
- Prelims: राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026, वंदे मातरम, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय ध्वज, भारत का संविधान, राष्ट्रीय गान, राज्यों का संघ, मौलिक कर्तव्य
- Essay: राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान और राष्ट्रवाद की अवधारणा, कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है, इसके अपमान को आपराधिक अपराध बनाता है और तीन साल तक के कारावास का प्रावधान करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राज्यसभा ने हाल ही में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 (Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026) को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को एक आपराधिक अपराध बनाता है और इसे राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। विपक्षी दलों ने NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से जवाब की मांग करते हुए विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन से वॉकआउट किया।
पृष्ठभूमि
- यह विधेयक 24 जुलाई, 2026 को संसद में पेश किया गया था।
- विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान सहित देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर या अपमान को आपराधिक अपराध बनाना है।
- इसमें दोषी पाए जाने पर तीन साल तक के कारावास का प्रावधान है।
- सरकार का मानना है कि ‘वंदे मातरम’ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के वादे के लिए आवश्यक है और इसका सम्मान देश की एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को एक आपराधिक अपराध बनाता है।
- यह ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है।
- विधेयक राष्ट्रीय ध्वज, भारत के संविधान और राष्ट्रीय गान सहित देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर या अपमान को भी आपराधिक अपराध की श्रेणी में लाता है।
- इसके तहत राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने पर तीन साल तक के कारावास का प्रावधान है।
- यह विधेयक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन करता है, जो पहले से ही राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान को दंडनीय बनाता है।
- सरकार का तर्क है कि यह विधेयक राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करके राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देगा।
- विधेयक के समर्थकों का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक अभिन्न अंग रहा है और इसका सम्मान करना देशभक्ति का प्रतीक है।
- आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा सकता है और राष्ट्रवाद की संकीर्ण परिभाषा को बढ़ावा दे सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को वैधानिक संरक्षण | यह विधेयक ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। |
| अपमान को आपराधिक अपराध बनाना | राष्ट्रीय गीत का अनादर या अपमान करने पर आपराधिक दंड का प्रावधान करता है। |
| तीन साल तक के कारावास का प्रावधान | अपमान के दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल के कारावास का प्रावधान है, जो अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। |
| राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 | यह विधेयक राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करता है। |
| ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की प्रतिज्ञा से जुड़ाव | सरकार का मानना है कि यह विधेयक राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करेगा। |
महत्व
राष्ट्रीय एकता और अखंडता
- यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को वैधानिक संरक्षण प्रदान करके राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने का प्रयास करता है।
- राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
कानूनी और संवैधानिक महत्व
- यह विधेयक ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी दर्जा देता है, जिससे राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित होता है।
- राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को आपराधिक अपराध बनाने से इन प्रतीकों की पवित्रता और गरिमा बनी रहती है।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
- यह विधेयक स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है, जहाँ कई स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे अपने अंतिम शब्दों के रूप में इस्तेमाल किया था।
- यह नागरिकों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण होता है।
चुनौतियाँ
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव
- कुछ आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) पर अंकुश लगा सकता है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत एक मौलिक अधिकार है।
- यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि ‘अपमान’ क्या है और क्या नहीं, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान, मौलिक अधिकार
2. राजनीतिक ध्रुवीकरण
- विधेयक पर विपक्ष का विरोध और सदन से वॉकआउट राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाता है, जिससे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आम सहमति बनाना मुश्किल हो सकता है।
- सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर तनाव बढ़ा सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजनीति, संघवाद
3. कानून का क्रियान्वयन और दुरुपयोग
- ‘अपमान’ की परिभाषा में अस्पष्टता कानून के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ पैदा कर सकती है और इसके दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।
- पुलिस और न्यायपालिका पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि कानून का उपयोग केवल वास्तविक अपमान के मामलों में हो, न कि असहमति को दबाने के लिए।
यूपीएससी लिंक: शासन, न्यायिक समीक्षा
4. संवैधानिकता पर प्रश्न
- कुछ विपक्षी दलों ने विधेयक को असंवैधानिक बताया है, जिससे इसकी वैधता पर कानूनी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- यह देखना होगा कि क्या यह विधेयक संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है या नहीं।
यूपीएससी लिंक: संविधान, मौलिक अधिकार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता | कानून के दुरुपयोग से नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित हो सकती है। |
| ‘अपमान’ की परिभाषा | अस्पष्ट परिभाषा से कानून के मनमाने क्रियान्वयन की संभावना। |
| राजनीतिक विरोध | विधेयक पर राजनीतिक ध्रुवीकरण और विपक्ष का विरोध। |
| कानूनी चुनौतियाँ | विधेयक की संवैधानिकता पर सवाल उठने की संभावना। |
| प्रशासनिक क्रियान्वयन | कानून को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौती। |
आगे की राह
- ‘अपमान’ की परिभाषा को स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ बनाना ताकि कानून के दुरुपयोग को रोका जा सके।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संतुलन स्थापित करना।
- कानून के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- जनता में राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व और उनके सम्मान के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- विधेयक से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास करना।
- न्यायपालिका द्वारा कानून की संवैधानिकता की समीक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम · वंदे मातरम · राष्ट्रीय प्रतीक · संवैधानिक नैतिकता · अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता · संसदीय प्रक्रिया · संघवाद · मौलिक कर्तव्य · न्यायिक समीक्षा · राष्ट्रीय एकता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(ए)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51ए(ए)’, ‘note’: ‘संविधान का पालन और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान’}
अवधारणा प्रवाह
राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा। → विधेयक का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ के अपमान को आपराधिक अपराध बनाना। → विधेयक राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करता है। → विपक्ष द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विधेयक की संवैधानिकता पर चिंता व्यक्त की गई। → विधेयक ध्वनि मत से पारित, लेकिन राजनीतिक ध्रुवीकरण जारी। → कानून का प्रभावी क्रियान्वयन और मौलिक अधिकारों के साथ संतुलन एक चुनौती। → यह विधेयक राष्ट्रीय एकता और प्रतीकों के सम्मान को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था।
2. राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करता है।
3. भारत के संविधान का अनुच्छेद 51A मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है, जिसमें राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना शामिल है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 और 2 सही हैं। ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था। राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 51A मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना शामिल है, लेकिन इसमें ‘राष्ट्रीय प्रतीकों’ का सामान्य उल्लेख नहीं है, बल्कि विशिष्ट प्रतीकों का उल्लेख है।
Q2. अभिकथन (A): राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को एक आपराधिक अपराध बनाना है।
कारण (R): यह विधेयक ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के वादे को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि विधेयक का मुख्य उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ के अपमान को आपराधिक अपराध बनाना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने विधेयक के समर्थन में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के वादे का उल्लेख किया था। हालाँकि, R, A की ‘सही व्याख्या’ नहीं है, बल्कि विधेयक के पीछे एक राजनीतिक और भावनात्मक तर्क प्रस्तुत करता है। विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य कानूनी संरक्षण प्रदान करना है, जबकि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ एक व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य है जिससे विधेयक को जोड़ा गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के मुख्य प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को कानूनी संरक्षण प्रदान करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करने में राज्य की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और ‘वंदे मातरम’ को दिए जाने वाले संरक्षण पर प्रकाश डालना।
2. **विधेयक के मुख्य प्रावधान:**
* राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के समान वैधानिक संरक्षण।
* राष्ट्रीय प्रतीकों (राष्ट्रीय ध्वज, संविधान, राष्ट्रगान, वंदे मातरम) के अनादर या अपमान को आपराधिक अपराध बनाना।
* अपमान के लिए तीन साल तक के कारावास का प्रावधान।
* राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन।
3. **राज्य की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण:**
* **राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का महत्व:** राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशभक्ति को बढ़ावा देने में प्रतीकों की भूमिका। स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व।
* **कानूनी संरक्षण की आवश्यकता:** प्रतीकों के अपमान को रोकने और राष्ट्रीय भावना को बनाए रखने के लिए कानूनी ढाँचा।
* **अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) से टकराव:**
* क्या यह विधेयक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ‘उचित प्रतिबंध’ (अनुच्छेद 19(2)) के दायरे में आता है?
* ‘अपमान’ या ‘अनादर’ की परिभाषा में अस्पष्टता की संभावना और इसके दुरुपयोग का जोखिम।
* नागरिकों के असंतोष या विरोध प्रदर्शनों पर संभावित प्रभाव।
* **न्यायिक समीक्षा का संदर्भ:** सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख जहाँ राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है (जैसे कि राष्ट्रगान के संबंध में)।
* **संतुलन स्थापित करने के उपाय:** राज्य को राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों, विशेषकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, का भी ध्यान रखना चाहिए। कानून का स्पष्ट और संकीर्ण दायरा, दुरुपयोग से बचाव के लिए दिशानिर्देश।
4. **निष्कर्ष:** राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन कानून का क्रियान्वयन ऐसा होना चाहिए जो संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखे। राष्ट्रीय एकता को केवल कानूनी दंड से नहीं, बल्कि शिक्षा और जागरूकता से भी मजबूत किया जा सकता है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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