28 Jul राज्यसभा सांसद ने NEET प्रदर्शन में चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली और सामाजिक न्याय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास और आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: निजता का अधिकार, अनुच्छेद 21, पुट्टास्वामी निर्णय, चेहरे की पहचान तकनीक (FRT), आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022, जन निगरानी, डेटा सुरक्षा
- Essay: डिजिटल युग में निजता का अधिकार: चुनौतियाँ और समाधान, लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार और राज्य की निगरानी: संतुलन की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: उच्चतम न्यायालय ने निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार माना है, और चेहरे की पहचान तकनीक (FRT) का उपयोग बिना किसी व्यापक कानून के इस अधिकार का उल्लंघन कर सकता है, विशेषकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में।
यह खबर चर्चा में क्यों?
एक राज्यसभा सांसद ने NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा चेहरे की पहचान तकनीक (Facial Recognition Technology – FRT) और संबंधित जन निगरानी उपायों के उपयोग के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में इस प्रकार की निगरानी को असंवैधानिक घोषित करने और बिना किसी वैध कानून के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इसके उपयोग को रोकने की मांग की गई है।
पृष्ठभूमि
- याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने CCTV कैमरों, ड्रोन, मोबाइल कमांड और कंट्रोल वाहन, और हैंड-हेल्ड उपकरणों के माध्यम से वीडियो और तस्वीरें प्राप्त करके व्यापक बायोमेट्रिक निगरानी की है।
- इस निगरानी में ‘इक्षणा’ वाहन और ‘अजनालेंस’ स्मार्ट चश्मे का उपयोग करके स्वचालित चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से फुटेज की वास्तविक समय पर प्रोसेसिंग शामिल है।
- इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ‘अभिज्ञान’ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उंगलियों के निशान एकत्र किए गए और राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) से मिलान किया गया।
- याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह निगरानी एक ‘पूर्ण कानूनी शून्य’ में की जा रही है, क्योंकि न तो दिल्ली पुलिस के अपने स्थायी आदेश और न ही आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 (Criminal Procedure (Identification) Act, 2022) वैध सभा में भाग लेने वाले व्यक्तियों की बायोमेट्रिक निगरानी को अधिकृत करते हैं।
- दिल्ली पुलिस के RTI जवाबों से पुष्टि हुई है कि कोई निजता प्रभाव आकलन (Privacy Impact Assessment) नहीं किया गया है, और 80% समानता स्कोर को एक सकारात्मक मिलान माना जाता है।
- याचिका में हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बायोमेट्रिक पहचानकर्ताओं के स्वचालित, एल्गोरिथम निष्कर्षण और मिलान, तथा ऐसे डेटा को स्थायी राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस के साथ जोड़ने की चुनौती पर जोर दिया गया है।
निजता का अधिकार और चेहरे की पहचान तकनीक
- निजता का अधिकार (Right to Privacy) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अंतर्निहित हिस्सा है।
- वर्ष 2017 में के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार को एक मौलिक अधिकार घोषित किया था।
- इस निर्णय में, न्यायालय ने कहा था कि निजता पर कोई भी प्रतिबंध कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए, वैध राज्य हित को पूरा करना चाहिए और आनुपातिक होना चाहिए।
- चेहरे की पहचान तकनीक (FRT) एक ऐसी तकनीक है जो डिजिटल छवियों या वीडियो फ्रेम से मानव चेहरों की पहचान या सत्यापन करती है। यह बायोमेट्रिक डेटा का उपयोग करती है।
- भारत में, FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाला कोई विशिष्ट और व्यापक कानून नहीं है, जिससे इसके उपयोग को लेकर ‘कानूनी शून्य’ की स्थिति बनी हुई है।
- आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 पुलिस को कुछ अपराधों के संबंध में व्यक्तियों के बायोमेट्रिक डेटा (जैसे उंगलियों के निशान, पैरों के निशान और आईरिस स्कैन) एकत्र करने की अनुमति देता है, लेकिन यह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की जन निगरानी को स्पष्ट रूप से अधिकृत नहीं करता है।
- जन निगरानी (Mass Surveillance) और FRT का उपयोग निजता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।
- डेटा सुरक्षा (Data Protection) और FRT द्वारा एकत्र किए गए संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा आवश्यक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चेहरे की पहचान तकनीक (Facial Recognition Technology – FRT) | यह एक बायोमेट्रिक तकनीक है जो डिजिटल छवियों या वीडियो से व्यक्तियों की पहचान करती है। इसका उपयोग सुरक्षा, निगरानी और पहचान सत्यापन के लिए किया जाता है। |
| सामूहिक निगरानी (Mass Surveillance) | यह बड़े पैमाने पर लोगों की गतिविधियों और डेटा की व्यवस्थित निगरानी है, अक्सर सरकारी एजेंसियों द्वारा। यह गोपनीयता और नागरिक स्वतंत्रता के लिए चिंताएँ बढ़ाती है। |
| आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 (Criminal Procedure (Identification) Act, 2022) | यह अधिनियम पुलिस को कुछ अपराधों के संबंध में व्यक्तियों के बायोमेट्रिक और अन्य डेटा एकत्र करने का अधिकार देता है। याचिका में कहा गया है कि यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर लागू नहीं होता। |
| न्यायिक घोषणा (Judicial Declaration) | यह न्यायालय द्वारा किसी कानूनी स्थिति या अधिकार की औपचारिक घोषणा है। याचिका में FRT के उपयोग को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। |
| गोपनीयता प्रभाव आकलन (Privacy Impact Assessment – PIA) | यह किसी परियोजना या प्रणाली के गोपनीयता प्रभावों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने FRT के लिए ऐसा कोई आकलन नहीं किया। |
महत्व
शासन और विधि का शासन
- यह मामला कानून के शासन (Rule of Law) और सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रौद्योगिकी के उपयोग की सीमाओं पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।
- यह दर्शाता है कि कैसे नई प्रौद्योगिकियाँ नागरिक स्वतंत्रता और राज्य की सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
नागरिक स्वतंत्रता और अधिकार
- यह विरोध करने के अधिकार (Right to Protest), निजता के अधिकार (Right to Privacy) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) जैसे मौलिक अधिकारों पर राज्य की निगरानी के संभावित प्रभाव को उजागर करता है।
- यह शांतिपूर्ण सभा के अधिकार पर FRT के उपयोग के निरोधात्मक प्रभाव (Chilling Effect) के बारे में चिंताएँ पैदा करता है।
न्यायपालिका की भूमिका
- सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) और मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करती है।
- न्यायालय का निर्णय भविष्य में भारत में निगरानी प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।
चुनौतियाँ
1. निजता का अधिकार बनाम राज्य की सुरक्षा
- राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता और व्यक्तियों के निजता के मौलिक अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।
- बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के बड़े पैमाने पर बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, संविधान, सामाजिक न्याय
2. कानूनी और नियामक शून्यता
- भारत में FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाले किसी विशिष्ट कानून की अनुपस्थिति एक बड़ी समस्या है, जिससे इसके दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है।
- मौजूदा कानून, जैसे आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर FRT के उपयोग को स्पष्ट रूप से अधिकृत नहीं करते हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, कानून और व्यवस्था
3. प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग और सटीकता
- FRT की सटीकता, विशेष रूप से भीड़-भाड़ वाले स्थानों में, एक चिंता का विषय है, क्योंकि गलत मिलान से निर्दोष व्यक्तियों को निशाना बनाया जा सकता है।
- डेटा के संग्रह, भंडारण और उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
4. लोकतांत्रिक विरोध का दमन
- विरोध प्रदर्शनों में FRT का उपयोग नागरिकों को वैध रूप से विरोध करने से हतोत्साहित कर सकता है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।
- यह भय और आत्म-सेंसरशिप का माहौल बना सकता है, जो स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सभा के अधिकार के लिए हानिकारक है।
यूपीएससी लिंक: संविधान, सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| FRT का कानूनी आधार | शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में FRT के उपयोग को अधिकृत करने वाले किसी विशिष्ट कानून का अभाव। |
| निजता का उल्लंघन | बिना सहमति और कानूनी अधिकार के व्यक्तियों के बायोमेट्रिक डेटा का बड़े पैमाने पर संग्रह निजता के अधिकार का उल्लंघन। |
| डेटा का दुरुपयोग | एकत्रित बायोमेट्रिक डेटा को स्थायी राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से जोड़ने और उसके संभावित दुरुपयोग का जोखिम। |
| लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रभाव | FRT के उपयोग से विरोध करने के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर निरोधात्मक प्रभाव। |
| पारदर्शिता और जवाबदेही | FRT के उपयोग में गोपनीयता प्रभाव आकलन की कमी और 80% समानता स्कोर को ‘सकारात्मक मिलान’ मानने की मनमानी। |
आगे की राह
- FRT के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानून बनाना, जो निजता के अधिकार और अन्य मौलिक अधिकारों का सम्मान करता हो।
- FRT के उपयोग से पहले अनिवार्य गोपनीयता प्रभाव आकलन (PIA) और सार्वजनिक परामर्श सुनिश्चित करना।
- FRT प्रणालियों की सटीकता, पूर्वाग्रह और प्रभावशीलता का स्वतंत्र ऑडिट और सत्यापन करना।
- नागरिकों के बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह, भंडारण, उपयोग और साझाकरण के लिए सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल और दिशानिर्देश स्थापित करना।
- FRT के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना, जिसमें उपयोग के मामलों, डेटा स्रोतों और मिलान मानदंडों का सार्वजनिक खुलासा शामिल हो।
- विरोध प्रदर्शनों में FRT के उपयोग को केवल असाधारण परिस्थितियों तक सीमित करना, जब कोई स्पष्ट और सिद्ध सुरक्षा खतरा हो, और वह भी न्यायिक निगरानी के तहत।
- पुलिस बल को FRT के नैतिक और कानूनी उपयोग पर उचित प्रशिक्षण प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चेहरे की पहचान तकनीक · निजता का अधिकार · अनुच्छेद 21 · अनुच्छेद 19 · सामूहिक निगरानी · आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 · पुट्टस्वामी निर्णय · कानूनी शून्यता · न्यायिक समीक्षा · विरोध का अधिकार · डेटा सुरक्षा · मौलिक अधिकार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(b)’, ‘note’: ‘शांतिपूर्ण और निहत्थे सभा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
NEET-UG परीक्षा लीक के विरोध प्रदर्शन → दिल्ली पुलिस द्वारा FRT का उपयोग → बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह और मिलान → निजता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन → सर्वोच्च न्यायालय में याचिका → FRT के उपयोग की संवैधानिकता पर न्यायिक समीक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत में चेहरे की पहचान तकनीक (Facial Recognition Technology – FRT) के उपयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाला कोई विशिष्ट कानून नहीं है।
2. आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 विरोध प्रदर्शनों में व्यक्तियों की बायोमेट्रिक निगरानी को स्पष्ट रूप से अधिकृत करता है।
3. पुट्टस्वामी निर्णय ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया, जो FRT के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है। वर्तमान में, भारत में FRT के उपयोग को नियंत्रित करने वाला कोई विशिष्ट कानून नहीं है, जिसके कारण ‘कानूनी शून्यता’ की स्थिति है। कथन 2 गलत है। याचिका में कहा गया है कि आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 विरोध प्रदर्शनों में व्यक्तियों की बायोमेट्रिक निगरानी को अधिकृत नहीं करता है। कथन 3 सही है। के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निजता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया, जो FRT जैसे निगरानी उपकरणों के उपयोग के लिए कानूनी और संवैधानिक चुनौतियों का आधार बनता है।
Q2. भारत के संविधान के निम्नलिखित में से कौन से अनुच्छेद विरोध प्रदर्शनों में चेहरे की पहचान तकनीक के उपयोग के खिलाफ याचिका में उठाए गए मौलिक अधिकारों से सीधे संबंधित हैं?
1. अनुच्छेद 14
2. अनुच्छेद 19
3. अनुच्छेद 21
4. अनुच्छेद 32
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2 और 3
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 2 और 3 — याचिका में मुख्य रूप से विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार (अनुच्छेद 19), निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) और समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) के उल्लंघन का तर्क दिया गया है। अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय में मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए संवैधानिक उपचार का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन यह सीधे तौर पर उन मौलिक अधिकारों से संबंधित नहीं है जिनका उल्लंघन FRT के उपयोग से होता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हाल ही में NEET विरोध प्रदर्शनों में चेहरे की पहचान तकनीक (FRT) के उपयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के आलोक में, भारत में FRT के बढ़ते उपयोग से उत्पन्न होने वाले संवैधानिक और नैतिक मुद्दों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, निजता के अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए एक मजबूत डेटा संरक्षण कानून की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, FRT के संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा करें, जिसमें अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन शामिल है। निजता के अधिकार पर पुट्टस्वामी निर्णय के प्रभाव को उजागर करें। नैतिक मुद्दों में सामूहिक निगरानी, डेटा के दुरुपयोग की संभावना और नागरिक स्वतंत्रता पर इसके प्रभाव को शामिल करें। दूसरे भाग में, एक मजबूत डेटा संरक्षण कानून की आवश्यकता पर बल दें, यह बताते हुए कि यह कैसे मौलिक अधिकारों की रक्षा कर सकता है और FRT के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित कर सकता है। सरकारी निगरानी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने के लिए नियामक ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- अक्टूबर में आएगा एयर इंडिया विमान दुर्घटना का अंतिम रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट को बताया - July 28, 2026
- Supreme Court Seeks Final Air India Crash Report by October 2024 - July 28, 2026
- राज्यसभा सांसद ने NEET प्रदर्शन में चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की - July 28, 2026

No Comments