राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना: अनुसूचित जाति/जनजाति उद्यमियों को सशक्त बना रही है

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना: अनुसूचित जाति/जनजाति उद्यमियों को सशक्त बना रही है

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मानचित्र व माइंड-मैप: National SC-ST Hub Scheme impact across states

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, कमजोर वर्गों का उत्थान  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, औद्योगिक नीतियाँ
  • Prelims: राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), सार्वजनिक खरीद नीति, विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS), व्यापार त्वरण कार्यक्रम (BAP), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमी
  • Essay: समावेशी विकास और उद्यमिता की भूमिका, भारत में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करना, सरकारी नीतियां और उनका प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना SC/ST उद्यमियों को सार्वजनिक खरीद में भागीदारी बढ़ाने, प्रौद्योगिकी अपनाने और क्षमता निर्माण के माध्यम से सशक्त बनाकर समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उद्यमियों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग को सक्षम करके, व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाकर और सार्वजनिक खरीद में उनकी भागीदारी को सुगम बनाकर विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं, रोजगार सृजन और भारत के औद्योगिक परिवेश में SC/ST उद्यमियों की भागीदारी में वृद्धि कर रही है। हाल ही में, वरुण एंटरप्राइजेज और राजू थंगावेलु जैसे उद्यमों की सफलता की कहानियों ने इस योजना के सकारात्मक प्रभाव को उजागर किया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में SC/ST समुदाय ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित रहे हैं, जिससे उद्यमिता और मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी सीमित रही है।
  • सरकार ने SC/ST उद्यमियों को बढ़ावा देने और उन्हें सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में शामिल करने के लिए विभिन्न नीतियां और कार्यक्रम शुरू किए हैं।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (MSMED Act, 2006) MSME क्षेत्र के विकास और संवर्धन के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • सार्वजनिक खरीद नीति, 2012 (Public Procurement Policy, 2012) में केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के लिए MSME से 25 प्रतिशत वार्षिक खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें SC/ST स्वामित्व वाले MSME के लिए 4 प्रतिशत का उप-लक्ष्य शामिल है।
  • SC/ST उद्यमियों के सामने पूंजी तक पहुंच, तकनीकी ज्ञान की कमी, बाजार संपर्क और क्षमता निर्माण जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
  • NSSHS को इन चुनौतियों का समाधान करने और SC/ST उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे वे राष्ट्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं का हिस्सा बन सकें।

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) क्या है?

  • यह योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises – MSME) के अंतर्गत संचालित होती है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य SC/ST उद्यमियों को सार्वजनिक खरीद नीति, 2012 के तहत निर्धारित 4 प्रतिशत खरीद लक्ष्य को पूरा करने में सहायता करना है।
  • यह योजना SC/ST उद्यमियों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग, व्यावसायिक क्षमताओं के विकास और बाजार पहुंच को सुगम बनाने पर केंद्रित है।
  • NSSHS के तहत, विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (Special Credit Linked Capital Subsidy Scheme – SCLCSS) जैसे कार्यक्रम उद्यमियों को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करते हैं ताकि वे उन्नत मशीनरी और उपकरण खरीद सकें।
  • यह योजना व्यापार त्वरण कार्यक्रम (Business Acceleration Program – BAP) जैसे माध्यमों से क्षमता निर्माण, कौशल विकास और उद्यमों को परिचालन बाधाओं को दूर करने में सहायता प्रदान करती है।
  • NSSHS SC/ST उद्यमियों को संस्थागत खरीदारों, जैसे कि सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के साथ जुड़ने में मदद करती है, जिससे उन्हें बड़े खरीद ऑर्डर प्राप्त हो सकें।
  • यह योजना देश भर में SC/ST उद्यमियों के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रयास करती है, जो उन्हें दीर्घकालिक विकास और स्थिरता के लिए सशक्त बनाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग एससी-एसटी उद्यमियों को प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद/सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाता है।
व्यावसायिक क्षमताओं में वृद्धि उद्यमों को परिचालन बाधाओं को दूर करने, दक्षता बढ़ाने और बड़े बाजारों तक पहुँचने में मदद करता है।
सार्वजनिक क्रय में भागीदारी सरकारी और संस्थागत खरीदारों के लिए विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में एससी-एसटी उद्यमों की विश्वसनीयता स्थापित करता है।
विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) उद्यमों को उन्नत मशीनरी और बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (BAP) उद्यमियों को व्यावसायिक विकास, अनुपालन और बाजार पहुंच के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सशक्त बनाकर आर्थिक समावेशिता को बढ़ावा देती है, जिससे वे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बन सकें।
  • उद्यमों को आधुनिक तकनीकों और उन्नत उपकरणों को अपनाने में सहायता करके, यह उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि करती है, जिससे राष्ट्रीय औद्योगिक उत्पादन में योगदान होता है।
  • विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में मदद करती है, जिससे बड़े संस्थागत खरीदारों, जैसे कि सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।

सामाजिक महत्व

  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन में वृद्धि करती है, जिससे इन समुदायों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर पैदा होते हैं।
  • यह योजना सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने में सहायक है, क्योंकि यह वंचित समुदायों के व्यक्तियों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करती है।
  • एससी-एसटी उद्यमियों को सशक्त बनाकर, यह उनके आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिति को बढ़ाती है, जिससे समाज में अधिक समावेशी विकास होता है।

रणनीतिक महत्व

  • सार्वजनिक खरीद में एससी-एसटी उद्यमियों की भागीदारी को बढ़ावा देकर, यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को मजबूत करती है।
  • यह योजना भारत के औद्योगिक परिवेश में विविधता लाती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है।
  • क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करके, यह देश के समग्र औद्योगिक आधार को मजबूत करती है और वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती है।

चुनौतियाँ

1. वित्तीय संसाधनों तक पहुँच

  • एससी-एसटी उद्यमियों को अक्सर पूंजी और ऋण तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जो उनके व्यवसायों के विस्तार और आधुनिकीकरण में बाधा डालता है।
  • उद्यमों के लिए उन्नत मशीनरी और प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए पर्याप्त वित्त की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

2. तकनीकी उन्नयन और कौशल विकास

  • आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने और उसे संचालित करने के लिए आवश्यक कौशल की कमी एससी-एसटी उद्यमियों के लिए एक चुनौती है।
  • तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में प्रासंगिक बने रहने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता होती है।

3. बाजार पहुँच और प्रतिस्पर्धा

  • छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के रूप में, एससी-एसटी उद्यमियों को बड़े और स्थापित खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
  • सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की जटिलता और बड़े संस्थागत बाजारों तक पहुँचने के लिए आवश्यक नेटवर्क की कमी भी एक चुनौती है।

4. अनुपालन और नियामक बाधाएँ

  • सरकारी खरीद और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यक नियामक अनुपालन और दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया अक्सर जटिल और समय लेने वाली होती है।
  • छोटे उद्यमियों के लिए इन अनुपालनों को पूरा करने के लिए विशेषज्ञता और संसाधनों की कमी एक बाधा हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
क्रेडिट तक सीमित पहुंच उद्यमों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक पूंजी की कमी।
तकनीकी अंतराल उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करने वाली पुरानी तकनीक का उपयोग।
कौशल की कमी आधुनिक उपकरणों और प्रक्रियाओं को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित कार्यबल का अभाव।
बाजार पहुंच में बाधाएँ बड़े संस्थागत और सरकारी बाजारों तक पहुँचने में कठिनाई।
नियामक जटिलताएँ सरकारी खरीद और अन्य व्यावसायिक अनुपालनों को पूरा करने में चुनौतियाँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (Special Credit Linked Capital Subsidy Scheme – SCLCSS)
  • बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (Business Acceleration Program – BAP)

आगे की राह

  • एससी-एसटी उद्यमियों के लिए वित्तीय संस्थानों तक पहुँच को और सुगम बनाना, विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों के लिए अनुकूलित ऋण उत्पादों का विकास करना।
  • उन्नत प्रौद्योगिकी और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएँ आयोजित करना।
  • सरकारी खरीद में एससी-एसटी उद्यमियों की भागीदारी को और बढ़ाने के लिए खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाना और जागरूकता अभियान चलाना।
  • उद्यमियों को व्यावसायिक योजना, विपणन और अनुपालन में सहायता प्रदान करने के लिए एक मजबूत मेंटरशिप (परामर्श) कार्यक्रम विकसित करना।
  • एससी-एसटी उद्यमियों के उत्पादों और सेवाओं के लिए एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस (बाजार) विकसित करना, जिससे उन्हें व्यापक ग्राहक आधार तक पहुँचने में मदद मिल सके।
  • योजना के तहत लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को प्रचारित करना ताकि अन्य उद्यमियों को प्रेरणा मिले और योजना के प्रति विश्वास बढ़े।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय · समावेशी विकास · उद्यमिता संवर्धन · सार्वजनिक क्रय नीति · क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी · रोजगार सृजन · आपूर्ति श्रृंखला · क्षमता निर्माण · तकनीकी उन्नयन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 15(4)’, ‘note’: ‘सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 16(4)’, ‘note’: ‘राज्य के अधीन सेवाओं में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना का कार्यान्वयन  →  एससी-एसटी उद्यमियों को वित्तीय और तकनीकी सहायता  →  उन्नत प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण  →  उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि  →  सार्वजनिक खरीद और रोजगार सृजन में भागीदारी  →  एससी-एसटी उद्यमियों का सशक्तिकरण और समावेशी विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत संचालित होती है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सार्वजनिक क्रय में अधिक भागीदारी हेतु सशक्त बनाना है।
3. विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) इसका एक घटक है जो आधुनिक तकनीकों को अपनाने में सहायता करती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि NSSHS सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि इसका एक प्रमुख लक्ष्य SC/ST उद्यमियों को सार्वजनिक क्रय में शामिल करना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि SCLCSS NSSHS का एक हिस्सा है जो उद्यमियों को तकनीकी उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

Q2. भारत में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना का उद्देश्य SC/ST उद्यमियों को बाजार पहुंच और क्षमता निर्माण में सहायता करना है।
2. सार्वजनिक क्रय नीति, 2012 के तहत केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए SC/ST स्वामित्व वाले MSME से एक निश्चित प्रतिशत क्रय करना अनिवार्य है।
3. यह योजना केवल विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमियों पर केंद्रित है, सेवा क्षेत्र को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि NSSHS का लक्ष्य SC/ST उद्यमियों को बाजार पहुंच, क्षमता निर्माण और तकनीकी उन्नयन में सहायता करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि सार्वजनिक क्रय नीति, 2012 के तहत MSME से क्रय का लक्ष्य है, लेकिन इसमें SC/ST स्वामित्व वाले MSME के लिए कोई विशेष अनिवार्य प्रतिशत नहीं है, बल्कि यह SC/ST MSME को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि NSSHS विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों को सहायता प्रदान करती है, जैसा कि पेट्रोलियम लॉजिस्टिक्स के उदाहरण से स्पष्ट है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास में किस प्रकार सहायक है? चर्चा कीजिए कि यह योजना विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और रोजगार सृजन में कैसे योगदान करती है। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना के उद्देश्यों और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के सशक्तिकरण में इसकी भूमिका को स्पष्ट करें। इसमें योजना के विभिन्न घटकों जैसे विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) और बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (BAP) का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, चर्चा करें कि यह योजना आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग, क्षमता निर्माण और बाजार पहुंच के माध्यम से विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को कैसे मजबूत करती है और रोजगार सृजन में कैसे योगदान देती है। उदाहरणों का उपयोग करते हुए अपने उत्तर को पुष्ट करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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