लोकसभा ने कोयला खदान विधेयक पारित किया, जानें प्रमुख बदलाव और विवाद

लोकसभा ने कोयला खदान विधेयक पारित किया, जानें प्रमुख बदलाव और विवाद — Coal Mines Bill 2014 passage

लोकसभा ने कोयला खदान विधेयक पारित किया, जानें प्रमुख बदलाव और विवाद

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, खनिज संसाधन
  • Prelims: कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014, कोयला ब्लॉक आवंटन रद्द, सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय, कोयला इंडिया लिमिटेड (CIL), राज्यों के अधिकार, नीलामी प्रक्रिया, संघवाद
  • Essay: भारत में ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास, संसाधन आवंटन में पारदर्शिता और जवाबदेही

त्वरित पुनरावृत्ति: कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 204 कोयला ब्लॉकों का पारदर्शी नीलामी के माध्यम से पुन: आवंटन करना है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और कोयला क्षेत्र में दक्षता लाई जा सके।

यह खबर चर्चा में क्यों?

लोकसभा ने हाल ही में कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 पारित किया है। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 204 कोयला ब्लॉकों के नए सिरे से आवंटन के लिए नीलामी का प्रावधान करता है। सरकार ने इस विधेयक को ‘अध्यादेश’ के स्थान पर पेश किया, जिसका उद्देश्य रोजगार के नुकसान की आशंकाओं को दूर करना और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना था। विपक्ष ने विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे व्यापक सार्वजनिक बहस का विषय बताते हुए इस मांग को खारिज कर दिया।

पृष्ठभूमि

  • सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में 204 कोयला ब्लॉकों के आवंटन को रद्द कर दिया था, जिसे अनियमितताओं के कारण ‘मनमाना और अवैध’ करार दिया गया था।
  • इस निर्णय के बाद, सरकार ने कोयला क्षेत्र में अनिश्चितता को समाप्त करने और बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था।
  • यह विधेयक उसी अध्यादेश का स्थान लेता है और रद्द किए गए ब्लॉकों के पारदर्शी और समयबद्ध पुन: आवंटन के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • कोयला भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है, और इसके खनन तथा आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना देश की आर्थिक संवृद्धि के लिए आवश्यक है।
  • विधेयक का उद्देश्य कोयला उत्पादन को बढ़ाना, निवेश को आकर्षित करना और कोयला क्षेत्र में दक्षता लाना है।
  • विपक्ष ने विधेयक में ‘अंतिम उपयोग’ (end use) खंड पर चिंता व्यक्त की है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा किसी अन्य उपयोग को निर्दिष्ट करने का प्रावधान है, जिसे वे विवेकाधीन शक्तियों के लिए द्वार मानते हैं।

कोयला खदान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 क्या है?

  • यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 204 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी पुन: आवंटन का प्रावधान करता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य इन ब्लॉकों को नीलामी या आवंटन के माध्यम से फिर से आवंटित करना है ताकि कोयला उत्पादन में निरंतरता बनी रहे।
  • विधेयक में यह सुनिश्चित करने का प्रावधान है कि कोयला इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd. – CIL) का राष्ट्रीयकरण (denationalisation) नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे और मजबूत किया जाएगा।
  • यह विधेयक उन राज्यों को राजस्व का एक हिस्सा प्रदान करता है जहाँ ये कोयला खदानें स्थित हैं, जिससे केंद्र-राज्य संबंधों में वित्तीय पहलू भी शामिल होते हैं।
  • विधेयक में ‘अंतिम उपयोग’ की परिभाषा शामिल है, जो केंद्र सरकार को किसी अन्य उपयोग को निर्दिष्ट करने की शक्ति देती है, जिस पर विपक्ष ने चिंता जताई है।
  • यह कोयला क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने और खनन प्रक्रियाओं को अधिक वैज्ञानिक तथा लागत-कुशल बनाने का लक्ष्य रखता है।
  • विधेयक का उद्देश्य कोयले की कमी को कम करना और देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है।
  • यह उन कंपनियों को अंतरिम व्यवस्था के तहत खनन जारी रखने की अनुमति देता है जिनके आवंटन रद्द कर दिए गए थे, जब तक कि नए आवंटन नहीं हो जाते।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक · कोयला ब्लॉक आवंटन · सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय · संघवाद · राजकोषीय संघवाद · संसदीय प्रक्रिया · अध्यादेश · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम · कोयला क्षेत्र सुधार · पर्यावरण प्रभाव आकलन · खनन नीति · न्यायिक समीक्षा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में कोयले के खनन और आवंटन को विनियमित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
2. कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए कोयला ब्लॉकों की पुनः नीलामी का प्रावधान करता है।
3. भारत में कोयला खानों का राष्ट्रीयकरण 1970 के दशक में किया गया था।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। भारत में कोयला खानों का स्वामित्व राज्यों के पास है, हालांकि केंद्र सरकार खनन और आवंटन को विनियमित करती है। कथन 2 सही है। विधेयक का मुख्य उद्देश्य रद्द किए गए ब्लॉकों की पुनः नीलामी करना था। कथन 3 सही है। भारत में कोयला खानों का राष्ट्रीयकरण 1970 के दशक में दो चरणों में किया गया था।

Q2. अभिकथन (A): केंद्र सरकार ने कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 को शीघ्रता से पारित करने पर जोर दिया।
कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने 204 कोयला ब्लॉकों के आवंटन को रद्द कर दिया था, जिससे बिजली आपूर्ति और रोजगार के नुकसान की आशंका थी।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सरकार ने विधेयक को शीघ्रता से पारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कारण (R) भी सही है और A का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण उत्पन्न स्थिति को संबोधित करने के लिए अध्यादेश और फिर विधेयक की आवश्यकता थी।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 के पारित होने के संदर्भ में, भारत में कोयला क्षेत्र के विनियमन में केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों की प्रकृति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह विधेयक सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 का संक्षिप्त परिचय और इसके पारित होने का संदर्भ (सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 204 कोयला ब्लॉकों का रद्द होना)।
2. केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों की प्रकृति का परीक्षण:
a. संवैधानिक प्रावधान: संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत खनन का विषय (राज्य सूची और समवर्ती सूची के निहितार्थ)।
b. ऐतिहासिक संदर्भ: कोयला खानों का राष्ट्रीयकरण और केंद्र का बढ़ता नियंत्रण (कोयला इंडिया लिमिटेड की भूमिका)।
c. विधेयक के प्रावधान: रद्द किए गए ब्लॉकों की नीलामी, राजस्व का राज्यों को हस्तांतरण, ‘अंतिम उपयोग’ (end use) की परिभाषा पर राज्यों की आपत्तियां।
d. राज्यों की चिंताएँ: खनन राज्यों द्वारा राजस्व पर अधिकार का दावा, केंद्र द्वारा ‘दान’ के आरोप, नीति निर्माण में परामर्श की कमी।
3. सहकारी संघवाद पर प्रभाव:
a. सकारात्मक पहलू: राजस्व का राज्यों को हस्तांतरण, राज्यों की वित्तीय स्थिति में सुधार की संभावना।
b. नकारात्मक पहलू: नीति निर्माण में राज्यों की सीमित भूमिका, ‘अंतिम उपयोग’ खंड में केंद्र के विवेकाधिकार पर चिंताएं, राज्यों के प्राकृतिक संसाधनों पर उनके पूर्ण नियंत्रण के अधिकार का क्षरण।
c. संघवाद की चुनौतियाँ: केंद्र द्वारा अध्यादेश मार्ग का उपयोग, संसदीय स्थायी समिति को विधेयक भेजने की मांग को अस्वीकार करना।
4. निष्कर्ष: भारत में कोयला क्षेत्र के विनियमन में केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन की आवश्यकता पर बल, जिसमें राज्यों की स्वायत्तता और उनके संसाधनों पर अधिकार का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और दक्षता के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। भविष्य में अधिक परामर्श और सहभागिता की आवश्यकता।

स्रोत: The Hindu


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