29 Jul लोकसभा ने 204 कोयला ब्लॉकों की नीलामी के लिए पारित किया विधेयक
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, संघवाद, संसद | GS Paper III — अर्थव्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, खनिज संसाधन
- Prelims: कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014, कोयला ब्लॉक आवंटन, सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), राजस्व साझाकरण, संघवाद
- Essay: भारत में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास, संसाधन आवंटन और शासन में पारदर्शिता
त्वरित पुनरावृत्ति: कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 204 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी पुन: आवंटन का मार्ग प्रशस्त करता है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और राज्यों के लिए राजस्व बढ़ाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
लोकसभा ने हाल ही में कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 पारित किया है। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 204 कोयला ब्लॉकों के नए सिरे से आवंटन का प्रावधान करता है। सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि यह विधेयक कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited – CIL) का निजीकरण नहीं करेगा, बल्कि इसे और मजबूत करेगा। विधेयक का उद्देश्य कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता लाना और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है, विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व के निर्णय के बाद उत्पन्न हुई स्थिति को देखते हुए।
पृष्ठभूमि
- सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 में 1993 से आवंटित सभी 204 कोयला ब्लॉकों के आवंटन को रद्द कर दिया था, इसे ‘मनमाना और अवैध’ करार दिया था।
- इस निर्णय के बाद, सरकार को कोयला क्षेत्र में अनिश्चितता को दूर करने और बिजली उत्पादन तथा अन्य उद्योगों के लिए कोयले की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने पड़े।
- सरकार ने पहले एक अध्यादेश (Ordinance) जारी किया था, जिसे अब इस विधेयक के माध्यम से कानून का रूप दिया जा रहा है।
- विधेयक का मुख्य उद्देश्य रद्द किए गए कोयला ब्लॉकों का पारदर्शी तरीके से पुन: आवंटन करना है, जिससे राजस्व अधिकतम हो सके और राज्यों को इसका लाभ मिल सके।
- विपक्ष ने विधेयक को स्थायी समिति (Standing Committee) को भेजने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण ‘तत्परता’ की आवश्यकता का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया।
- विधेयक में कोयला खनिकों की कार्य परिस्थितियों में सुधार या कोल इंडिया लिमिटेड को मजबूत करने के प्रावधानों की कमी पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 क्या है?
- यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 204 कोयला ब्लॉकों के नए सिरे से आवंटन का प्रावधान करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य कोयला ब्लॉकों का पारदर्शी तरीके से नीलामी या आवंटन करना है, जिससे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
- विधेयक में यह सुनिश्चित करने का प्रावधान है कि कोयला ब्लॉकों के पुन: आवंटन से प्राप्त राजस्व उन राज्यों को मिले जहां ये खानें स्थित हैं।
- यह विधेयक पहले जारी किए गए अध्यादेश का स्थान लेता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद उत्पन्न हुई स्थिति को संबोधित करने के लिए लाया गया था।
- विधेयक में ‘अंतिम उपयोग’ (end use) की परिभाषा को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई हैं, क्योंकि यह केंद्र सरकार को ‘किसी अन्य उपयोग’ को निर्दिष्ट करने की शक्ति देता है, जिससे विवेकाधीन प्रथाओं की संभावना बढ़ सकती है।
- सरकार ने आश्वासन दिया है कि कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का निजीकरण नहीं किया जाएगा और यह विधेयक वास्तव में इसे मजबूत करेगा।
- विधेयक में कोयला खनिकों की कार्य परिस्थितियों में सुधार या कोल इंडिया लिमिटेड को सीधे मजबूत करने के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान शामिल नहीं हैं।
- यह विधेयक कोयला क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करता है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 · कोयला ब्लॉक आवंटन · सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय · राष्ट्रीयकरण · संघवाद · राज्य के अधिकार · अध्यादेश मार्ग · संसदीय प्रक्रिया · स्थायी समिति · राजस्व अधिकतमकरण · पर्यावरण प्रभाव आकलन · खनन सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए 204 कोयला ब्लॉकों की फिर से नीलामी का प्रावधान करता है।
2. यह विधेयक कोयला क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd.) के राष्ट्रीयकरण को समाप्त करता है।
3. भारत में कोयला खदानें केवल केंद्र सरकार के स्वामित्व में हैं, राज्यों का उन पर कोई अधिकार नहीं है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। विधेयक का मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए गए कोयला ब्लॉकों की नीलामी करना था। कथन 2 गलत है। सरकार ने स्पष्ट किया था कि कोल इंडिया लिमिटेड का राष्ट्रीयकरण समाप्त नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे और मजबूत किया जाएगा। कथन 3 गलत है। भारत में खनिज संपदा, जिसमें कोयला भी शामिल है, राज्यों की संपत्ति मानी जाती है, हालांकि खनन के नियमन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
Q2. अभिकथन (A): सरकार ने कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 को पारित करने में ‘तत्परता’ दिखाई।
कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय के 204 कोयला ब्लॉकों के आवंटन को रद्द करने के आदेश के कारण नौकरी के नुकसान और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की आशंकाओं को दूर करने के लिए अध्यादेश मार्ग अपनाना पड़ा था।
- A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सरकार ने विधेयक को जल्दी पारित करने पर जोर दिया था। कारण (R) भी सही है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्पन्न स्थिति से निपटने और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अध्यादेश लाया गया था, जिसे बाद में विधेयक के रूप में पारित किया गया। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि अध्यादेश की आवश्यकता ही सरकार की तत्परता का कारण थी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 के मुख्य प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, भारत में खनिज संसाधनों के स्वामित्व और विनियमन से जुड़े संघवाद के मुद्दों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 का संक्षिप्त परिचय, इसके पारित होने का संदर्भ (सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 204 कोयला ब्लॉकों का रद्द होना) और इसका प्राथमिक उद्देश्य (नीलामी)।
2. **विधेयक के मुख्य प्रावधान:**
* रद्द किए गए कोयला ब्लॉकों की फिर से नीलामी का तंत्र।
* नीलामी प्रक्रिया और राजस्व अधिकतमकरण का लक्ष्य (विनियमित बनाम अनियमित संस्थाओं के लिए)।
* ‘अंतिम उपयोग’ (End Use) खंड और इसमें निहित विवेकाधीन शक्तियों का उल्लेख।
* कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd.) के राष्ट्रीयकरण को बनाए रखने का आश्वासन।
* अध्यादेश के स्थान पर विधेयक का आना।
3. **संघवाद के मुद्दे:**
* **राज्य का स्वामित्व:** संविधान के तहत खनिज संसाधनों पर राज्यों का स्वामित्व (अनुच्छेद 297, भूमि और खनिज राज्य सूची का विषय)।
* **केंद्र का विनियमन:** खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957) के तहत केंद्र सरकार की नियामक शक्तियाँ।
* **राजस्व का बँटवारा:** खनन से प्राप्त राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी और केंद्र द्वारा निर्धारित रॉयल्टी दरें।
* **विधेयक पर राज्यों की चिंताएँ:** राज्यों द्वारा यह तर्क कि केंद्र उनके संसाधनों से राजस्व अर्जित कर रहा है, और ‘अंतिम उपयोग’ जैसे प्रावधानों में केंद्र के विवेकाधिकार पर आपत्ति।
* **सहकारी संघवाद का महत्व:** खनिज संसाधनों के प्रबंधन में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता।
4. **निष्कर्ष:** केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल, ताकि संसाधनों का कुशल दोहन हो सके और संघवाद के सिद्धांतों का भी सम्मान किया जा सके।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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