31 Aug सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकॉन 2.0 योजना को अधिसूचित किया, जानिए पूरा विवरण
✎ सेमीकॉन 2.0 योजना भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की एक सरकारी पहल है, जो चिप उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को कवर करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: सेमीकंडक्टर, सेमीकॉन 2.0 योजना, चिप विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया
- Essay: भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता का मार्ग: चुनौतियाँ और अवसर, आर्थिक विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: सेमीकॉन 2.0 योजना भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की एक सरकारी पहल है, जो चिप उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को कवर करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने देश में चिप विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (chip manufacturing ecosystem) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को अधिसूचित किया है। इस योजना के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है, जो सेमीकंडक्टर उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (value chain) में विभिन्न क्षेत्रों को राजकोषीय सहायता प्रदान करेगा।
पृष्ठभूमि
- सेमीकंडक्टर (Semiconductor) आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के मूलभूत घटक हैं, जो स्मार्टफोन से लेकर ऑटोमोबाइल और रक्षा प्रणालियों तक सभी में उपयोग किए जाते हैं।
- वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में व्यवधानों ने विभिन्न उद्योगों पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे भारत सहित कई देशों को घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने की आवश्यकता महसूस हुई है।
- भारत सरकार ने पहले भी सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की थीं, जिनका उद्देश्य देश को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना था।
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक पूंजी-गहन और अत्यधिक तकनीकी क्षेत्र है, जिसके लिए बड़े निवेश, उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) और कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है।
- यह योजना राष्ट्रीय रणनीतिक और महत्वपूर्ण अवसंरचना (critical infrastructure) के लिए लचीली, विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के निर्माण पर केंद्रित है।
- इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर आईपी कोर (IP cores), चिप्स, सिस्टम-ऑन-चिप्स (SoCs) और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए मॉड्यूल का स्थानीय विकास करना है।
सेमीकॉन 2.0 योजना क्या है?
- यह योजना भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए एक व्यापक पहल है।
- इसका कुल परिव्यय 1.27 लाख करोड़ रुपये है, जो इस क्षेत्र में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- योजना को छह खंडों में विभाजित किया गया है, जिसमें भारतीय फर्मों द्वारा चिप डिजाइनिंग, चिप उत्पादन के लिए आवश्यक पूंजीगत उपकरणों की इकाइयों की स्थापना, सेमीकंडक्टर फैब (fabs), चिप असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण शामिल हैं।
- यह सेमीकंडक्टर उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में विभिन्न क्षेत्रों को राजकोषीय सहायता प्रदान करती है।
- योजना का लक्ष्य राष्ट्रीय महत्व और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर लक्षित खंड प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और परिनियोजन (deployment) पर ध्यान केंद्रित करके लचीली, विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों का निर्माण करना है।
- यह विभिन्न प्रकार के कंप्यूट, मेमोरी, आरएफ (RF), पावर, नेटवर्किंग, सेंसर आदि के लिए मानक आईपी (Standard IPs) सहित बिल्डिंग ब्लॉक विकसित करेगी।
- इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कुल परिव्यय | सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (Semiconductor Ecosystem) के विकास के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का वित्तीय आवंटन। |
| योजना के खंड | चिप डिजाइन, पूंजीगत उपकरण निर्माण, सेमीकंडक्टर फैब (Fab) स्थापना, चिप असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण सहित छह खंडों में विभाजित। |
| नीतिगत समर्थन | भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन प्रदान करने का निर्णय। |
| मूल्य श्रृंखला कवरेज | चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन (Fabrication) और पैकेजिंग तक सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला में वित्तीय सहायता। |
| रणनीतिक फोकस | राष्ट्रीय रणनीतिक और महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए लचीली, विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के निर्माण पर ध्यान। |
| बौद्धिक संपदा (IP) विकास | सेमीकंडक्टर IP कोर, चिप्स, सिस्टम-ऑन-चिप्स (SoCs) और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए मॉड्यूल के स्थानीय विकास का लक्ष्य। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और निर्यात क्षमता बढ़ेगी।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से रोजगार सृजन होगा और उच्च-तकनीकी कौशल का विकास होगा, जो भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
- सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश से संबंधित उद्योगों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, दूरसंचार और ऑटोमोबाइल में भी वृद्धि होगी।
रणनीतिक महत्व
- सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय में।
- यह योजना महत्वपूर्ण अवसंरचना और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए विश्वसनीय और सुरक्षित चिप्स की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, जिससे बाहरी जोखिम कम होंगे।
- स्थानीय IP विकास पर जोर देने से भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और नवाचार में अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तकनीकी महत्व
- यह योजना अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी, जिससे भारत में तकनीकी प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।
- चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत तकनीकी नवाचार के केंद्र के रूप में उभरेगा।
- मानक IP (जैसे कंप्यूट, मेमोरी, RF, पावर, नेटवर्किंग और सेंसर) के विकास से विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए एक मजबूत आधार तैयार होगा।
चुनौतियाँ
1. उच्च पूंजीगत आवश्यकता
- सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने और संचालित करने के लिए अत्यधिक पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, जो अरबों डॉलर में हो सकता है।
- भारत में निजी क्षेत्र के लिए इतना बड़ा निवेश जुटाना एक चुनौती हो सकती है, भले ही सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करे।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति और निवेश मॉडल
2. तकनीकी विशेषज्ञता और कौशल की कमी
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक अत्यधिक जटिल और विशेषज्ञता वाला क्षेत्र है जिसके लिए उन्नत तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है।
- भारत में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की कमी एक बड़ी बाधा हो सकती है, जिसके लिए व्यापक कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: कौशल विकास और रोजगार
3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखला
- वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार पर कुछ प्रमुख खिलाड़ियों का प्रभुत्व है, और नए प्रवेशकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।
- कच्चे माल और विशेष उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जटिल और संवेदनशील है, जिससे व्यवधानों का खतरा रहता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वैश्विक व्यापार और निवेश
4. पानी और बिजली की उपलब्धता
- सेमीकंडक्टर फैब को बड़ी मात्रा में स्वच्छ पानी और निरंतर बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है।
- भारत के कुछ क्षेत्रों में इन संसाधनों की कमी या अस्थिरता विनिर्माण इकाइयों के लिए एक चुनौती बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: संसाधन और अवसंरचना
5. अनुसंधान एवं विकास (R&D) का अभाव
- भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण में अनुसंधान एवं विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है, जिससे नवाचार की गति धीमी है।
- उन्नत प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और पेटेंट प्राप्त करने के लिए मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: नवाचार और अनुसंधान
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पूंजी की गहनता | सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना के लिए अत्यधिक वित्तीय निवेश की आवश्यकता। |
| विशेषज्ञ जनशक्ति | सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक उच्च-कुशल इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की कमी। |
| तकनीकी जटिलता | सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रक्रिया की अत्यधिक जटिलता और निरंतर तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता। |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | स्थापित वैश्विक खिलाड़ियों और उनकी विशाल उत्पादन क्षमताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करना। |
| बुनियादी ढांचा | पानी, बिजली और लॉजिस्टिक्स जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे की पर्याप्त और विश्वसनीय उपलब्धता। |
| दीर्घकालिक प्रतिबद्धता | सेमीकंडक्टर उद्योग में सफलता के लिए निरंतर और दीर्घकालिक सरकारी समर्थन और नीतिगत स्थिरता की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सेमीकॉन 2.0 योजना (Semicon 2.0 Scheme)
आगे की राह
- सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक समर्पित कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना, जिसमें विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शामिल हों।
- घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कर प्रोत्साहन, सब्सिडी और आसान नियामक प्रक्रियाओं सहित एक आकर्षक निवेश माहौल बनाना।
- सेमीकंडक्टर डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को मजबूत करना।
- पानी, बिजली और लॉजिस्टिक्स सहित विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का विकास करना, जो सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
- वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना ताकि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और ज्ञान साझाकरण को सुगम बनाया जा सके।
- सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए एक स्थिर और दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा सुनिश्चित करना, जो वैश्विक बाजार की गतिशीलता के अनुकूल हो और निवेशकों को विश्वास दिलाए।
- सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और महत्वपूर्ण घटकों के लिए घरेलू स्रोतों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा सेमीकॉन 2.0 योजना की अधिसूचना → ₹1.27 लाख करोड़ का वित्तीय परिव्यय और नीतिगत समर्थन → चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग में निवेश → घरेलू सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास → आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता में वृद्धि → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सेमीकॉन 2.0 योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में चिप विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।
2. यह योजना केवल चिप डिजाइनिंग और फैब्रिकेशन इकाइयों की स्थापना के लिए राजकोषीय सहायता प्रदान करती है।
3. इसका लक्ष्य राष्ट्रीय रणनीतिक और महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों का निर्माण करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का प्राथमिक उद्देश्य भारत में चिप विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है। कथन 2 गलत है क्योंकि योजना चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण सहित सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला में सहायता प्रदान करती है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना का एक प्रमुख लक्ष्य राष्ट्रीय रणनीतिक और महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों का निर्माण करना है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का/के घटक है/हैं?
1. चिप डिजाइनिंग
2. पूंजीगत उपकरण उत्पादन
3. सेमीकंडक्टर फैब्स (Fabs)
4. चिप असेंबली और परीक्षण
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — चिप डिजाइनिंग, पूंजीगत उपकरण उत्पादन, सेमीकंडक्टर फैब्स (Fabs), और चिप असेंबली, पैकेजिंग एवं परीक्षण, ये सभी सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं। सेमीकॉन 2.0 योजना इन सभी खंडों को कवर करती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए सेमीकॉन 2.0 योजना के महत्व का परीक्षण कीजिए। यह योजना देश की रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक संवृद्धि में किस प्रकार योगदान दे सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सेमीकॉन 2.0 योजना का संक्षिप्त परिचय दें, इसके परिव्यय और मुख्य उद्देश्य का उल्लेख करें।
2. **योजना का महत्व:**
* **आत्मनिर्भरता और संप्रभुता:** राष्ट्रीय रणनीतिक और महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए विश्वसनीय और संप्रभु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के निर्माण में भूमिका।
* **आर्थिक संवृद्धि और रोजगार:** उच्च-तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना, रोजगार सृजन और निर्यात क्षमता बढ़ाना।
* **मूल्य श्रृंखला का विकास:** चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग और परीक्षण तक पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना।
* **बौद्धिक संपदा (IP) विकास:** घरेलू सेमीकंडक्टर IP कोर, चिप्स और सिस्टम-ऑन-चिप्स (SoCs) के स्थानीय विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
* **वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति:** वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करना और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करना।
3. **रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक संवृद्धि में योगदान:**
* **सुरक्षा और रक्षा:** महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों और संचार उपकरणों के लिए स्वदेशी चिप्स की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
* **डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा:** इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल सेवाओं के लिए आवश्यक घटकों की घरेलू आपूर्ति।
* **अनुसंधान और विकास:** सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना।
* **निवेश और साझेदारी:** विदेशी निवेश और तकनीकी सहयोग को आकर्षित करना।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह (संक्षिप्त):** योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों (जैसे उच्च पूंजीगत लागत, कुशल जनशक्ति की कमी, तकनीकी जटिलता) का संक्षिप्त उल्लेख करें और उनके समाधान के लिए सुझाव दें।
5. **निष्कर्ष:** भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने में योजना की क्षमता पर बल देते हुए एक सकारात्मक निष्कर्ष दें।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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