03 Sep सहकारिता से मजबूत होगा विकेंद्रित अनाज भंडारण: जानिए योजना की पूरी जानकारी
✎ सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से खाद्यान्न भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण को सुदृढ़ करके भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक एकीकृत…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — कृषि | GS Paper III — खाद्य सुरक्षा
- Prelims: सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (पैक्स), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, कृषि अवसंरचना कोष (AIF), कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME)
- Essay: भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में विकेंद्रीकृत भंडारण का महत्व, सहकारिता मॉडल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से खाद्यान्न भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण को सुदृढ़ करके भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक एकीकृत प्रयास है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार द्वारा सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को देश भर में विस्तारित किया जा रहा है। वर्ष 2023 में एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू की गई इस योजना के तहत जुलाई 2026 तक 313 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है। यह पहल देश के बढ़ते कृषि उत्पादन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत लगभग 80 करोड़ लोगों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार 376.563 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष से 5.3 प्रतिशत अधिक है।
- बढ़ते कृषि उत्पादन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत व्यापक कवरेज के कारण आधुनिक और विकेंद्रीकृत भंडारण सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ गई है।
- पारंपरिक भंडारण पद्धतियों के साथ-साथ भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों द्वारा प्रबंधित केंद्रीकृत भंडारण अवसंरचना भी देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- सहकारिता मंत्रालय ने उत्पादन केंद्रों के निकट भंडारण की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि परिवहन लागत कम हो, खाद्यान्न की बर्बादी रुके और खाद्य सुरक्षा मजबूत हो।
- प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (पैक्स) ग्रामीण स्तर पर अल्पकालिक ऋण और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण संस्थाएँ हैं।
सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना क्या है?
- यह योजना प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से देश भर में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण अवसंरचना को मजबूत करने पर केंद्रित है।
- इसका मुख्य उद्देश्य खाद्यान्न की बर्बादी को कम करना, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों को फसल का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करना है।
- यह योजना खरीद केंद्रों, भंडारगृहों और उचित मूल्य की दुकानों के बीच परिवहन लागत को घटाने में सहायक है।
- यह कृषि गतिविधियों के विविधीकरण के माध्यम से पैक्स की भूमिका का विस्तार करती है, जिससे ग्रामीणों के लिए उच्च आय के अवसर पैदा होते हैं।
- यह एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें कृषि अवसंरचना कोष (AIF) जैसी मौजूदा सरकारी योजनाओं का संमिलन किया गया है।
- योजना का लक्ष्य पैक्स स्तर पर एकीकृत कृषि अवसंरचना का निर्माण करना है, जिसमें भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों में सुधार शामिल है।
- प्रारंभ में 9,750 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के साथ 11 राज्यों/पैक्स में प्रायोगिक परियोजनाओं के रूप में शुरू की गई, इसका अब व्यापक विस्तार हो रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से क्रियान्वयन | ग्रामीण स्तर पर विकेंद्रीकृत भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों को सुदृढ़ करना। |
| एकीकृत और सहकारिता संचालित दृष्टिकोण | मौजूदा सरकारी योजनाओं का समन्वय कर खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय में वृद्धि। |
| पायलट परियोजनाओं से राष्ट्रव्यापी विस्तार | योजना की सफलता और व्यवहार्यता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से देश भर में भंडारण क्षमता का निर्माण। |
| गुणवत्ता मानकों, पारदर्शिता और परिचालन व्यवहार्यता पर जोर | अनाज भंडारण में दक्षता, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना। |
| उत्पादन केंद्रों के नजदीक भंडारण | परिवहन लागत में कमी, खाद्यान्न की बर्बादी में कमी और खाद्य सुरक्षा को मजबूती। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे वे जल्दबाजी में बिक्री से बच सकते हैं।
- परिवहन लागत में कमी आती है, जिससे खरीद केंद्रों, भंडारगृहों और उचित मूल्य की दुकानों के बीच दक्षता बढ़ती है।
- कृषि गतिविधियों के विविधीकरण के माध्यम से पैक्स की भूमिका का विस्तार होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
खाद्य सुरक्षा
- खाद्यान्न की बर्बादी को कम करके राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करता है, विशेषकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत।
- विकेंद्रीकृत भंडारण से आपदाओं या आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के दौरान स्थानीय स्तर पर खाद्य उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
शासन और संस्थागत
- विभिन्न सरकारी योजनाओं (जैसे कृषि अवसंरचना कोष, कृषि विपणन अवसंरचना योजना) को एक साथ लाकर एक समन्वित दृष्टिकोण प्रदान करता है।
- सहकारी ढांचे को मजबूत करता है और ग्रामीण स्तर पर संस्थागत क्षमता का निर्माण करता है।
चुनौतियाँ
1. अवसंरचना का अभाव
- आधुनिक भंडारण सुविधाओं की कमी, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- मौजूदा पारंपरिक भंडारण विधियों में गुणवत्ता नियंत्रण और कीट प्रबंधन की चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: कृषि अवसंरचना, खाद्य प्रसंस्करण
2. वित्तीय व्यवहार्यता
- पैक्स और किसानों के लिए भंडारण सुविधाओं के निर्माण और रखरखाव हेतु पर्याप्त पूंजी तक पहुंच।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए भंडारण लागत वहन करना।
यूपीएससी लिंक: कृषि वित्त, ग्रामीण विकास
3. प्रबंधन और संचालन
- भंडारण सुविधाओं के कुशल प्रबंधन और संचालन के लिए पैक्स में तकनीकी विशेषज्ञता की कमी।
- भंडारण में गुणवत्ता मानकों और पारदर्शिता बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: सहकारिता, ग्रामीण प्रशासन
4. बाजार संपर्क
- भंडारित अनाज को बाजार तक पहुंचाने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने में चुनौतियाँ।
- बिचौलियों की भूमिका और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी।
यूपीएससी लिंक: कृषि विपणन, किसान आय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बढ़ता कृषि उत्पादन | मौजूदा भंडारण क्षमता का अपर्याप्त होना और अतिरिक्त उत्पादन के प्रबंधन की चुनौती। |
| खाद्यान्न की बर्बादी | खराब भंडारण सुविधाओं के कारण कटाई के बाद होने वाला नुकसान, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है। |
| परिवहन लागत | उत्पादन केंद्रों से केंद्रीय भंडारण तक अनाज के परिवहन में लगने वाली उच्च लागत और समय। |
| किसानों को कम आय | भंडारण विकल्पों की कमी के कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना। |
| पैक्स की सीमित भूमिका | ग्रामीण स्तर पर पैक्स की गतिविधियों का केवल ऋण तक सीमित होना, जिससे उनकी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (National Food Security Act 2013)
- कृषि अवसंरचना कोष (Agricultural Infrastructure Fund – AIF) योजना
आगे की राह
- पैक्स को तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान करना ताकि वे भंडारण सुविधाओं का प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर सकें।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल को बढ़ावा देना ताकि आधुनिक भंडारण अवसंरचना के निर्माण में निजी निवेश को आकर्षित किया जा सके।
- भंडारण सुविधाओं को ई-नाम (e-NAM) जैसे डिजिटल कृषि बाजारों से जोड़ना ताकि किसानों को बेहतर मूल्य और व्यापक बाजार पहुंच मिल सके।
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए भंडारण लागत को कम करने हेतु सब्सिडी और रियायती ऋण योजनाओं का विस्तार करना।
- भंडारण के साथ-साथ प्रसंस्करण इकाइयों को एकीकृत करना ताकि किसानों को मूल्य संवर्धन (value addition) के अवसर मिलें और उनकी आय बढ़े।
- गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी के लिए मजबूत तंत्र स्थापित करना ताकि भंडारित अनाज की गुणवत्ता सुनिश्चित हो और बर्बादी कम हो।
- जलवायु-स्मार्ट भंडारण समाधानों को अपनाना जो बदलते मौसम पैटर्न और कीटों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सहकारिता क्षेत्र · विकेंद्रित अनाज भंडारण · प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (पैक्स) · खाद्य सुरक्षा · कृषि अवसंरचना कोष (AIF) · कृषि विपणन अवसंरचना योजना (AMI) · प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) · अनाज की बर्बादी में कमी · किसानों की आय में वृद्धि · परिवहन लागत में कमी · एकीकृत अवसंरचना · राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘राज्य द्वारा अनुसरणीय नीति के सिद्धांत’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करना’}
अवधारणा प्रवाह
बढ़ता कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा आवश्यकताएँ → आधुनिक विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण की आवश्यकता → सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना का शुभारंभ → पैक्स स्तर पर एकीकृत कृषि अवसंरचना का निर्माण → खाद्यान्न की बर्बादी में कमी और किसानों की आय में वृद्धि → राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों में सुधार करना है।
2. यह योजना केवल नई भंडारण सुविधाओं के निर्माण पर केंद्रित है और मौजूदा सरकारी योजनाओं के साथ इसका कोई संबंध नहीं है।
3. यह योजना खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और किसानों को फसल का बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य पैक्स के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों में सुधार करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना मौजूदा सरकारी योजनाओं जैसे AIF, AMI और PMFME को एकीकृत करती है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना का एक प्रमुख उद्देश्य खाद्यान्न की बर्बादी घटाकर खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी योजना ‘सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना’ के साथ एकीकृत नहीं है?
- कृषि अवसंरचना कोष (AIF) योजना
- कृषि विपणन अवसंरचना योजना (AMI)
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME)
उत्तर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) फसल बीमा से संबंधित है और सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना के साथ एकीकृत नहीं है। अन्य सभी योजनाएँ (AIF, AMI, PMFME) इस भंडारण योजना के साथ एकीकृत हैं ताकि एक व्यापक और समन्वित दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में विकेंद्रित अनाज भंडारण की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, ‘सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना’ के उद्देश्यों और एकीकृत अवसंरचना फ्रेमवर्क पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन के महत्व को बताते हुए विकेंद्रित अनाज भंडारण की आवश्यकता पर संक्षिप्त चर्चा।
मुख्य भाग 1: विकेंद्रित अनाज भंडारण की भूमिका:
• खाद्य सुरक्षा: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत 80 करोड़ लोगों को कवर करने में महत्व।
• बर्बादी में कमी: उत्पादन केंद्रों के पास भंडारण से परिवहन लागत और खाद्यान्न की बर्बादी में कमी।
• किसानों का सशक्तिकरण: हड़बड़ी में बिक्री से बचना, बेहतर मूल्य प्राप्त करना।
• स्थानीय अर्थव्यवस्था: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा।
• आपूर्ति श्रृंखला दक्षता: खरीद, भंडारण और वितरण में सुधार।
मुख्य भाग 2: ‘सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रित अनाज भंडारण योजना’:
• उद्देश्य: खाद्यान्न की बर्बादी घटाना, खाद्य सुरक्षा मजबूत करना, किसानों को बेहतर मूल्य, परिवहन लागत में कमी, पैक्स की भूमिका का विस्तार, किसानों की आय में वृद्धि।
• एकीकृत अवसंरचना और संमिलन फ्रेमवर्क: विभिन्न सरकारी योजनाओं का एकीकरण:
• कृषि अवसंरचना कोष (AIF) योजना: वित्तपोषण और ब्याज में छूट।
• कृषि विपणन अवसंरचना योजना (AMI): पूंजीगत सब्सिडी।
• कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM): कस्टम हायरिंग सेंटर और कृषि मशीनों तक पहुंच।
• प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME): सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का विकास।
निष्कर्ष: विकेंद्रित भंडारण योजना के माध्यम से खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और ग्रामीण विकास पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को संक्षेप में बताते हुए भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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