सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की मानव-केंद्रित एआई रिपोर्ट: ऊर्जा सुरक्षा व सतत विकास

सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की मानव-केंद्रित एआई रिपोर्ट: ऊर्जा सुरक्षा व सतत विकास

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन
  • Prelims: मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (HCAI), सतत विकास लक्ष्य (SDGs), ऊर्जा सुरक्षा, स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, नैतिक एआई
  • Essay: कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अवसर, चुनौतियाँ और नैतिक विचार, भारत में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रौद्योगिकी की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (HCAI) एआई विकास में मानवीय मूल्यों, समावेशिता और जिम्मेदार शासन को प्राथमिकता देता है, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) ने ‘मानव-केंद्रित एआई और सतत विकास: ऊर्जा सुरक्षा के लिए समग्र मार्ग’ नामक एक तकनीकी रिपोर्ट जारी की है। इस अवसर पर नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष ने ‘तकनीकी क्षेत्र को आकार देने वाले प्रमुख रुझान’ विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान भी दिया, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल नवाचार और भारत के उभरते तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा की गई।

पृष्ठभूमि

  • सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर (CSIR-NIScPR) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक प्रमुख संस्थान है, जो विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान पर केंद्रित है।
  • यह तकनीकी रिपोर्ट इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पूर्व-शिखर कार्यक्रम के रूप में आयोजित ‘मानव-केंद्रित एआई और सतत विकास: ऊर्जा सुरक्षा के लिए समग्र मार्ग’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी से प्राप्त विचारों और अनुशंसाओं का संकलन है।
  • माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान जिम्मेदार एआई विकास और तैनाती के लिए नैतिक और आचार प्रणाली, जवाबदेह शासन, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभ और समावेशी तथा वैध और कानूनी सिद्धांतों पर आधारित एक मानव ढांचा प्रस्तुत किया था।
  • यह रिपोर्ट एआई के विकास में मानवीय मूल्यों, समावेशिता, स्थिरता और जिम्मेदार शासन को केंद्र में रखने वाले मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (HCAI) के दृष्टिकोण पर जोर देती है।
  • ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है, और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का एकीकरण तथा ऊर्जा प्रणालियों की दक्षता बढ़ाना देश के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।

मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (HCAI) क्या है?

  • मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Human-Centric Artificial Intelligence – HCAI) एआई विकास और तैनाती के लिए एक दृष्टिकोण है जो मानवीय मूल्यों, समावेशिता, स्थिरता और जिम्मेदार शासन को प्राथमिकता देता है।
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई प्रणालियाँ समाज के व्यापक हित में कार्य करें और व्यक्तियों तथा समुदायों के कल्याण को बढ़ावा दें।
  • HCAI में नैतिक सुरक्षा उपायों, मानवीय निगरानी (human oversight) और हरित एआई (green AI) प्रथाओं का एकीकरण शामिल है ताकि एआई-सक्षम परिवर्तन न्यायसंगत और भरोसेमंद हों।
  • यह एआई की क्षमता का उपयोग स्मार्ट ग्रिड (smart grids) को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) एकीकरण को गति देने, पूर्वानुमानित रखरखाव (predictive maintenance) में सुधार करने और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों का समर्थन करने में करता है।
  • HCAI का लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा और प्रणाली की लचीलता (system resilience) को बढ़ाना है, जिससे दीर्घकालिक सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) के साथ संरेखण सुनिश्चित हो सके।
  • यह तकनीकी प्रगति को मजबूत नीति और शासन तंत्र द्वारा पूरक करने की वकालत करता है, ताकि एआई का विकास जिम्मेदारीपूर्ण और पारदर्शी तरीके से हो।
  • यह दृष्टिकोण नवाचार क्षमताओं को मजबूत करने, डिजिटल प्रतिभाओं को पोषित करने और सहयोगात्मक शासन को बढ़ावा देने के महत्व पर भी बल देता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मानव-केंद्रित AI (HCAI) दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि AI का विकास मानवीय मूल्यों, समावेशिता, स्थिरता और जिम्मेदार शासन को प्राथमिकता दे।
ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान स्मार्ट ग्रिड को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) एकीकरण को गति देने और ऊर्जा प्रणालियों की लचीलता बढ़ाने में AI की क्षमता को उजागर करता है।
नीति और शासन तंत्र का महत्व तकनीकी प्रगति को नैतिक सुरक्षा उपायों, मानवीय निगरानी और हरित AI प्रथाओं के साथ पूरक करने पर जोर देता है।
जिम्मेदार AI विकास के सिद्धांत प्रधानमंत्री के ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए मानव ढांचा’ के सिद्धांतों – नैतिक, जवाबदेह, संप्रभु, सुलभ और वैध – को समाहित करता है।
सहयोगात्मक नीति निर्माण जिम्मेदार AI के माध्यम से भारत को ज्ञान-आधारित और डिजिटल रूप से सशक्त भविष्य की ओर ले जाने के लिए नवाचार-संचालित साझेदारियों की वकालत करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • AI-सक्षम ऊर्जा परिवर्तन से ऊर्जा दक्षता में वृद्धि होगी, जिससे परिचालन लागत कम होगी और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • स्मार्ट ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण में AI के उपयोग से ऊर्जा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

सामरिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि से भारत की बाहरी ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी, जिससे भू-राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्रीय संप्रभुता (National Sovereignty) मजबूत होगी।
  • AI में आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार विकास भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।

सामाजिक महत्व

  • मानव-केंद्रित AI दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि तकनीकी प्रगति समावेशी हो और समाज के सभी वर्गों को लाभान्वित करे।
  • बेहतर ऊर्जा पहुंच और स्थिरता से जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।

पर्यावरणीय महत्व

  • नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और हरित AI प्रथाओं को बढ़ावा देने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने में मदद मिलेगी।
  • AI-आधारित पूर्वानुमानित रखरखाव और ऊर्जा प्रबंधन से संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग होगा, जिससे पर्यावरणीय क्षरण कम होगा।

चुनौतियाँ

1. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • AI प्रणालियों को बड़ी मात्रा में डेटा की आवश्यकता होती है, जिससे व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों का जोखिम AI-आधारित ऊर्जा प्रणालियों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।

2. नैतिक और जवाबदेही मुद्दे

  • AI एल्गोरिदम में पूर्वाग्रह (Bias) की संभावना है, जिससे अनुचित या भेदभावपूर्ण परिणाम हो सकते हैं, खासकर ऊर्जा वितरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में।
  • AI प्रणालियों द्वारा लिए गए निर्णयों के लिए जवाबदेही तय करना जटिल हो सकता है, विशेषकर स्वायत्त प्रणालियों में।

3. कुशल कार्यबल की कमी

  • AI विकास, तैनाती और रखरखाव के लिए विशेष कौशल वाले पेशेवरों की आवश्यकता होती है, जिनकी भारत में अभी भी कमी है।
  • मौजूदा कार्यबल को AI प्रौद्योगिकियों के साथ काम करने के लिए पुनः कौशल (Reskilling) प्रदान करना एक बड़ी चुनौती है।

4. बुनियादी ढाँचा और निवेश

  • AI-सक्षम ऊर्जा प्रणालियों के लिए उन्नत डिजिटल और संचार बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • अनुसंधान और विकास (R&D) तथा AI प्रौद्योगिकियों के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
AI में पूर्वाग्रह एल्गोरिथम में निहित पूर्वाग्रहों के कारण ऊर्जा पहुंच या वितरण में असमानता की संभावना।
डेटा सुरक्षा ऊर्जा ग्रिड से जुड़े संवेदनशील डेटा की सुरक्षा और साइबर हमलों से बचाव।
नियामक ढांचा AI के तेजी से विकास के साथ तालमेल बिठाने वाले प्रभावी और अनुकूलनीय नियामक ढांचे का अभाव।
डिजिटल विभाजन तकनीकी पहुंच और साक्षरता में असमानता के कारण AI के लाभों से वंचित आबादी।
मानवीय निगरानी AI प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता से मानवीय निर्णय लेने की क्षमता में कमी और महत्वपूर्ण स्थितियों में नियंत्रण का अभाव।

आगे की राह

  • AI विकास के लिए एक मजबूत नैतिक और नियामक ढांचा स्थापित करना, जिसमें डेटा गोपनीयता, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
  • AI और ऊर्जा क्षेत्र में कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश बढ़ाना।
  • AI अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships) को प्रोत्साहित करना।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों सहित पूरे देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार करना ताकि AI के लाभ सभी तक पहुंच सकें।
  • AI-आधारित ऊर्जा समाधानों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।
  • AI प्रणालियों में मानवीय निगरानी और हस्तक्षेप के लिए तंत्र विकसित करना ताकि महत्वपूर्ण निर्णयों में मानवीय नियंत्रण बना रहे।
  • हरित AI प्रथाओं को एकीकृत करना, जिससे AI प्रौद्योगिकियों का पर्यावरणीय पदचिह्न (Environmental Footprint) कम हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

मानव-केंद्रित AI रिपोर्ट जारी  →  AI के नैतिक विकास पर जोर  →  ऊर्जा सुरक्षा में AI का अनुप्रयोग  →  स्मार्ट ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण  →  सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर (CSIR-NIScPR) द्वारा जारी ‘मानव-केंद्रित एआई और सतत विकास: ऊर्जा सुरक्षा के लिए समग्र मार्ग’ रिपोर्ट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह रिपोर्ट एआई विकास के केंद्र में मानवीय मूल्यों, समावेशिता और जिम्मेदार शासन को रखती है।
2. यह स्मार्ट ग्रिड को मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को गति देने में एआई की क्षमता को उजागर करती है।
3. यह रिपोर्ट केवल तकनीकी प्रगति पर ध्यान केंद्रित करती है और नीतिगत ढांचे के महत्व को अनदेखा करती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि रिपोर्ट मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (HCAI) का दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो एआई विकास के केंद्र में मानवीय मूल्यों, समावेशिता, स्थिरता और जिम्मेदार शासन को रखती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि रिपोर्ट स्मार्ट ग्रिड को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को गति देने और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करने में एआई की क्षमता को उजागर करती है। कथन 3 गलत है क्योंकि रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि तकनीकी प्रगति को मजबूत नीति और शासन तंत्र द्वारा पूरक किया जाना चाहिए।

Q2. भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार विकास और तैनाती के संबंध में, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए मानव ढांचा’ में निम्नलिखित में से कौन से मार्गदर्शक सिद्धांत शामिल हैं?
1. नैतिक और आचार प्रणाली
2. जवाबदेह शासन
3. राष्ट्रीय संप्रभुता
4. सुलभ और समावेशी
5. वैध और कानूनी

  1. केवल 1, 2 और 3
  2. केवल 2, 3, 4 और 5
  3. 1, 2, 3, 4 और 5
  4. केवल 1, 3 और 5

उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान व्यक्त किए गए दृष्टिकोण में जिम्मेदार एआई विकास और तैनाती के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में नैतिक और आचार प्रणाली, जवाबदेह शासन, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभ और समावेशी तथा वैध और कानूनी सभी को शामिल किया गया था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव के आलोक में, ‘मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (HCAI) की अवधारणा का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। भारत में ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में HCAI की क्षमता और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, जिम्मेदार एआई शासन के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों और संस्थागत ढांचों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (HCAI) की अवधारणा को परिभाषित करें और इसके प्रमुख सिद्धांतों (मानवीय मूल्य, समावेशिता, स्थिरता, जिम्मेदार शासन) का विश्लेषण करें। दूसरे भाग में, भारत में ऊर्जा सुरक्षा (स्मार्ट ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, पूर्वानुमानित रखरखाव) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में HCAI की क्षमता पर चर्चा करें। इसके साथ ही, HCAI के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों (नैतिक दुविधाएँ, डेटा गोपनीयता, पूर्वाग्रह, कौशल अंतर) को भी उजागर करें। अंत में, जिम्मेदार एआई शासन के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों (नैतिक दिशानिर्देश, नियामक ढाँचे, डेटा सुरक्षा कानून) और संस्थागत ढाँचों (बहु-हितधारक सहयोग, अनुसंधान एवं विकास निवेश, क्षमता निर्माण) पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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