27 Sep सीबीएन ने मध्य प्रदेश के जावरा में युवाओं को नशामुक्त बनाने के लिए आयोजित किया अभियान
✎ केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है और 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत 'मिशन युवा रक्षा' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने तथा अवैध तस्करी पर अंकुश लगाने में…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य और मानव संसाधन | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), नशा मुक्त भारत अभियान, मिशन युवा रक्षा, मादक पदार्थ नियंत्रण, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
- Essay: नशामुक्त समाज: चुनौतियाँ और समाधान, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है और ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत ‘मिशन युवा रक्षा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने तथा अवैध तस्करी पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने हाल ही में मध्य प्रदेश के जावरा में ‘मिशन युवा रक्षा’ के तहत छात्रों के लिए नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया है। इसके अतिरिक्त, CBN ने नीमच और मंदसौर में अफीम उत्पादकों की शिकायतों के निवारण के लिए जन सुनवाई कार्यक्रम भी आयोजित किए, जो मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने और एक स्वस्थ, नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में इसके बहुआयामी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में मादक पदार्थों का दुरुपयोग एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या है, जो विशेष रूप से युवाओं को प्रभावित करती है।
- सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न पहलें शुरू की हैं, जिनमें ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ प्रमुख है।
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत कार्य करता है और मादक पदार्थों की खेती, उत्पादन और व्यापार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985, भारत में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों को नियंत्रित करने वाला मुख्य कानून है।
- जागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ, CBN अफीम उत्पादकों की शिकायतों का निवारण करके वैध अफीम उत्पादन को विनियमित करने में भी मदद करता है, जिससे अवैध व्यापार पर अंकुश लगता है।
- ‘मिशन युवा रक्षा’ विशेष रूप से युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करने और उन्हें नशामुक्त जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) और नशा मुक्त भारत अभियान
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक केंद्रीय एजेंसी है।
- इसका मुख्य कार्य नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों को लागू करना है, जिसमें मादक पदार्थों की खेती, उत्पादन, व्यापार और उपभोग पर नियंत्रण शामिल है।
- CBN भारत में वैध अफीम और कोका पत्ती की खेती का पर्यवेक्षण और नियंत्रण करता है, और अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत भारत के दायित्वों को पूरा करता है।
- ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक प्रमुख अभियान है, जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग को कम करना और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास को बढ़ावा देना है।
- यह अभियान जागरूकता फैलाने, समुदाय आधारित हस्तक्षेपों को मजबूत करने और उपचार व पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच में सुधार पर केंद्रित है।
- ‘मिशन युवा रक्षा’ CBN द्वारा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत शुरू की गई एक पहल है, जिसका विशेष ध्यान युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करना है।
- CBN प्रवर्तन गतिविधियों के साथ-साथ निवारक जागरूकता कार्यक्रम और हितधारकों तक पहुंच बनाने की पहल भी करता है, जिसमें अफीम उत्पादक और युवा शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मिशन युवा रक्षा | छात्रों और युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना। |
| जन सुनवाई कार्यक्रम | अफीम उत्पादकों की शिकायतों का त्वरित और सुलभ निवारण सुनिश्चित करना, बिचौलियों की भूमिका को कम करना। |
| जागरूकता कार्यक्रम | मादक पदार्थों की अवैध तस्करी और दुरुपयोग के खिलाफ जन जागरूकता बढ़ाना, स्वस्थ समाज का निर्माण। |
| हितधारकों तक पहुंच | सीबीएन और ब्रह्माकुमारीज़ जैसे संगठनों के बीच सहयोग से व्यापक पहुंच और प्रभाव। |
| नशामुक्ति की शपथ | व्यक्तियों में नशामुक्ति के प्रति प्रतिबद्धता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- मादक पदार्थों के दुरुपयोग से समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना, विशेषकर युवा पीढ़ी में।
- नशामुक्त समाज के निर्माण में नागरिकों, विशेषकर छात्रों और अफीम उत्पादकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, अपराध और सामाजिक विघटन को रोकने में सहायक।
शासनिक महत्व
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) जैसी प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका को केवल दंडात्मक कार्रवाई से निवारक और जागरूकता कार्यक्रमों तक विस्तारित करना।
- जन सुनवाई कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी तंत्र और नागरिकों के बीच विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाना।
- नीति निर्माण और कार्यान्वयन में जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में मदद।
आर्थिक महत्व
- मादक पदार्थों के दुरुपयोग से होने वाले आर्थिक नुकसान (उत्पादकता में कमी, स्वास्थ्य देखभाल लागत) को कम करना।
- अफीम उत्पादकों की शिकायतों का समाधान करके वैध कृषि गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।
चुनौतियाँ
1. मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग
- अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को पूरी तरह से बाधित करना एक जटिल चुनौती है।
- युवाओं में मादक पदार्थों के सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकना और उन्हें वैकल्पिक गतिविधियों की ओर मोड़ना।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक मुद्दे
2. जागरूकता का अभाव
- समाज के सभी वर्गों, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, मादक पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में पर्याप्त जागरूकता फैलाना।
- नशामुक्ति कार्यक्रमों में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, शासन
3. अफीम उत्पादकों की शिकायतें
- अफीम उत्पादकों की वैध शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी तरीके से समाधान करना ताकि वे अवैध गतिविधियों की ओर प्रवृत्त न हों।
- बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना और उत्पादकों को सीधे सरकारी तंत्र से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी लिंक: कृषि, शासन
4. अंतर-एजेंसी समन्वय
- मादक पदार्थों के नियंत्रण में विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
- प्रवर्तन और निवारक उपायों के बीच संतुलन बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: शासन, आंतरिक सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति | सीमा पार से तस्करी और घरेलू उत्पादन पर नियंत्रण की आवश्यकता। |
| युवाओं में नशाखोरी | शैक्षणिक संस्थानों और कमजोर समूहों में बढ़ती लत, भविष्य की पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव। |
| अफीम उत्पादकों का शोषण | बिचौलियों द्वारा उत्पादकों का शोषण और उनकी शिकायतों का समाधान न होना, जिससे अवैध खेती को बढ़ावा मिल सकता है। |
| जागरूकता कार्यक्रमों की पहुंच | ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों की सीमित पहुंच। |
| पुनर्वास और परामर्श | नशा पीड़ितों के लिए पर्याप्त पुनर्वास सुविधाओं और परामर्श सेवाओं का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नशा मुक्त भारत अभियान
- मिशन युवा रक्षा
आगे की राह
- जागरूकता कार्यक्रमों को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से विस्तारित करना, विशेषकर शैक्षणिक संस्थानों में।
- अफीम उत्पादकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना, बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त करना।
- मादक पदार्थों के दुरुपयोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए पुनर्वास और परामर्श केंद्रों की संख्या बढ़ाना और उनकी गुणवत्ता में सुधार करना।
- प्रवर्तन एजेंसियों, स्वास्थ्य विभागों और नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत करना।
- युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रखने के लिए खेल, कला और कौशल विकास जैसे वैकल्पिक सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
- मादक पदार्थों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए सीमा सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझाकरण को सुदृढ़ करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नशा मुक्त भारत अभियान · केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) · मादक पदार्थों की तस्करी · निवारक जागरूकता · युवाओं में नशामुक्ति · अफीम उत्पादक · जन सुनवाई कार्यक्रम · मादक पदार्थ नियंत्रण · सामाजिक कल्याण · कानून प्रवर्तन
अवधारणा प्रवाह
सीबीएन द्वारा जागरूकता कार्यक्रम और जन सुनवाई → मादक पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता → अफीम उत्पादकों की शिकायतों का निवारण → नशामुक्ति की शपथ और प्रतिबद्धता → अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति नेटवर्क में बाधा → मादक पदार्थों का दुरुपयोग रोकना → स्वस्थ और नशामुक्त समाज का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. CBN वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
2. यह भारत में अफीम की खेती को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार है।
3. CBN केवल मादक पदार्थों की तस्करी के प्रवर्तन पर ध्यान केंद्रित करता है, निवारक जागरूकता पर नहीं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। CBN वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। कथन 2 सही है। CBN अफीम की खेती के विनियमन और लाइसेंसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कथन 3 गलत है। CBN प्रवर्तन के साथ-साथ निवारक जागरूकता कार्यक्रमों और हितधारकों तक पहुँचने की पहल भी करता है, जैसा कि ‘मिशन युवा रक्षा’ कार्यक्रम में देखा गया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ का प्राथमिक उद्देश्य है?
- केवल मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना।
- अफीम उत्पादकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- युवाओं और समुदाय के बीच मादक पदार्थों के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें रोकना।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों के व्यापार को विनियमित करना।
उत्तर: युवाओं और समुदाय के बीच मादक पदार्थों के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें रोकना। — ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं और समुदाय के बीच मादक पदार्थों के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें रोकना है, ताकि एक स्वस्थ और नशामुक्त समाज का निर्माण हो सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) द्वारा ‘नशा मुक्त भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपनाई जा रही बहुआयामी रणनीति का विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, निवारक जागरूकता कार्यक्रमों और हितधारक जुड़ाव के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) और उसके जनादेश का संक्षिप्त परिचय।
2. CBN की बहुआयामी रणनीति: प्रवर्तन (अवैध तस्करी पर अंकुश) और निवारक जागरूकता (मिशन युवा रक्षा, जन सुनवाई) दोनों का उल्लेख।
3. निवारक जागरूकता कार्यक्रम: ‘मिशन युवा रक्षा’ जैसे कार्यक्रमों का विवरण, छात्रों और युवाओं को लक्षित करना, हानिकारक प्रभावों के बारे में जानकारी देना, शपथ दिलाना।
4. हितधारक जुड़ाव: अफीम उत्पादकों के साथ जन सुनवाई कार्यक्रम, उनकी शिकायतों का निवारण, बिचौलियों से बचने की सलाह। ब्रह्माकुमारीज जैसे संगठनों के साथ सहयोग का उल्लेख।
5. महत्व: निवारक जागरूकता और हितधारक जुड़ाव क्यों महत्वपूर्ण हैं (मांग में कमी, सामाजिक भागीदारी, समस्या के मूल कारणों को संबोधित करना)।
6. निष्कर्ष: ‘नशा मुक्त भारत’ के लक्ष्य की दिशा में CBN के प्रयासों का समग्र मूल्यांकन।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Madhya Pradesh PCS (MPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सीबीएन (केंद्रीय ब्यूरो ऑफ नार्कोटिक्स) द्वारा मध्य प्रदेश के जावरा में आयोजित ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के अंतर्गत ‘मिशन युवा रक्षा’ के तहत किस आयु वर्ग के छात्रों के लिए नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया?
- A. 10-15 वर्ष
- B. 12-18 वर्ष
- C. 15-25 वर्ष
- D. 18-30 वर्ष
उत्तर: C. 15-25 वर्ष — कार्यक्रम का आयोजन 15-25 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों के लिए किया गया, जो नशा मुक्ति अभियान का प्रमुख लक्ष्य समूह है।
Mains: मध्य प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ‘मिशन युवा रक्षा’ जैसी पहलों की आवश्यकता एवं महत्व पर 250 शब्दों में चर्चा कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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