सुप्रीम कोर्ट ने CBSE OSM गड़बड़ियों पर सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE OSM गड़बड़ियों पर सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट — CBSE OSM Glitches: Supreme Court Intervention

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE OSM गड़बड़ियों पर सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (सूचना प्रौद्योगिकी)  |  GS Paper IV — नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि (शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही)
  • Prelims: सर्वोच्च न्यायालय, सीबीएसई, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM), न्यायिक समीक्षा, क्षमता निर्माण आयोग, शिक्षा नीति, डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस
  • Essay: तकनीकी प्रगति और शिक्षा में चुनौतियाँ: भारत के संदर्भ में, न्यायिक सक्रियता और शासन में सुधार: एक आवश्यक संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीएसई की OSM प्रणाली में तकनीकी खामियों पर छात्रों की ‘निराशा’ को संबोधित करते हुए सरकार से जांच समिति की स्थिति रिपोर्ट मांगी है, जो डिजिटल शिक्षा में जवाबदेही और सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीएसई की कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में तकनीकी खामियों और अनियमितताओं के कारण छात्रों द्वारा अनुभव की गई ‘निराशा’ पर केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है। न्यायालय ने सरकार से सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. राधा चौहान की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय जांच समिति द्वारा की गई प्रगति का विवरण प्रस्तुत करने को कहा है, जिसका उद्देश्य इन तकनीकी दोषों के कारणों का पता लगाना है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2026 में, सीबीएसई ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की थी।
  • इस प्रणाली के कार्यान्वयन के दौरान कई तकनीकी खामियां और अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं की अस्पष्ट स्कैनिंग और कुछ उत्तरों का अचिह्नित रहना शामिल था।
  • इन अनियमितताओं के कारण देश और विदेश के लाखों छात्रों को प्रभावित होना पड़ा, जिससे उनमें व्यापक ‘निराशा’ उत्पन्न हुई।
  • राकेश बिंजोला नामक एक याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की, जिसमें OSM मूल्यांकन प्रणाली में ‘स्पष्ट अनियमितताओं’ की निष्पक्ष और उचित जांच की मांग की गई।
  • याचिका में व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई, क्योंकि यह विफलता बड़ी संख्या में छात्रों को प्रभावित कर रही थी।
  • केंद्र सरकार ने इन विसंगतियों को स्वीकार करते हुए, तकनीकी दोषों के कारणों की जांच के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति का गठन किया था।

ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली क्या है?

  • ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित किया जाता है।
  • इन डिजिटल उत्तर पुस्तिकाओं को फिर मूल्यांकनकर्ताओं (शिक्षकों) को कंप्यूटर स्क्रीन पर मूल्यांकन करने के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
  • यह पारंपरिक भौतिक उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन प्रणाली का एक विकल्प है, जिसका उद्देश्य दक्षता, पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाना है।
  • OSM प्रणाली में, मूल्यांकनकर्ता सीधे स्क्रीन पर अंक दर्ज करते हैं, टिप्पणियां जोड़ते हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकता है।
  • इसका उपयोग बड़े पैमाने पर परीक्षाओं के मूल्यांकन में किया जाता है, जिससे परिणाम घोषित करने में लगने वाले समय को कम करने में मदद मिलती है।
  • इस प्रणाली के माध्यम से मूल्यांकन की गुणवत्ता में सुधार, त्रुटियों को कम करने और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा जाता है।
  • यह प्रणाली मूल्यांकनकर्ताओं को किसी भी स्थान से मूल्यांकन करने की सुविधा प्रदान करती है, बशर्ते उनके पास इंटरनेट कनेक्टिविटी हो।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
डिजिटल मूल्यांकन भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं के प्रबंधन और परिवहन की आवश्यकता को समाप्त करता है, जिससे लागत और समय की बचत होती है।
दूरस्थ मूल्यांकन मूल्यांकनकर्ता किसी भी स्थान से मूल्यांकन कर सकते हैं, जिससे भौगोलिक बाधाएं दूर होती हैं और अधिक मूल्यांकनकर्ताओं को शामिल किया जा सकता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही मूल्यांकन प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकता है, जिससे मूल्यांकनकर्ताओं के प्रदर्शन की निगरानी और किसी भी विसंगति की पहचान करना आसान हो जाता है।
डेटा सुरक्षा और अभिलेखागार डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से संग्रहीत किए जा सकते हैं, जिससे भविष्य के संदर्भ और ऑडिट के लिए आसान पहुंच सुनिश्चित होती है।
तेज परिणाम मूल्यांकन प्रक्रिया को गति प्रदान करता है, जिससे परीक्षा परिणाम जल्दी घोषित किए जा सकते हैं।
मानकीकरण मूल्यांकन दिशानिर्देशों को डिजिटल रूप से लागू किया जा सकता है, जिससे मूल्यांकन में एकरूपता और मानकीकरण सुनिश्चित होता है।

महत्व

शिक्षा क्षेत्र में

  • OSM प्रणाली शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मूल्यांकन प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने का प्रयास करती है।
  • यह प्रणाली मूल्यांकन की दक्षता और गति में सुधार करके छात्रों को समय पर परिणाम प्रदान करने में मदद कर सकती है, जिससे उनके आगे के शैक्षणिक नियोजन में सुविधा होती है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि से मूल्यांकन प्रक्रिया पर छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बढ़ सकता है, जिससे शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होती है।

शासन और न्यायपालिका के लिए

  • सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने और नागरिकों, विशेषकर छात्रों के अधिकारों की रक्षा करने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
  • यह मामला ई-गवर्नेंस पहलों के सफल कार्यान्वयन के लिए मजबूत तकनीकी बुनियादी ढांचे, पर्याप्त प्रशिक्षण और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • सरकार द्वारा जांच समिति का गठन और न्यायालय को रिपोर्ट प्रस्तुत करने की सहमति सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए कार्यकारी और न्यायिक शाखाओं के बीच सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

सामाजिक प्रभाव

  • परीक्षा परिणामों में अनियमितताएं छात्रों में अत्यधिक तनाव, चिंता और ‘निराशा’ पैदा कर सकती हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • इस मुद्दे का समाधान करके, सरकार और शिक्षा बोर्ड छात्रों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं, जिससे समाज में विश्वास और स्थिरता बढ़ती है।
  • प्रणालीगत विफलताओं की पहचान और सुधार से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी बुनियादी ढांचा

  • अपर्याप्त सर्वर क्षमता और नेटवर्क बैंडविड्थ के कारण उत्तर पुस्तिकाओं को अपलोड करने और एक्सेस करने में समस्याएँ।
  • पुराने या असंगत हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के कारण मूल्यांकन प्रक्रिया में बाधाएँ।

2. मानव संसाधन और प्रशिक्षण

  • मूल्यांकनकर्ताओं को OSM प्रणाली के उपयोग के लिए औपचारिक प्रशिक्षण की कमी, जिससे त्रुटियां और अक्षमताएं होती हैं।
  • डिजिटल उपकरणों से अपरिचितता के कारण मूल्यांकनकर्ताओं का प्रतिरोध या सीखने की धीमी गति।

3. प्रणालीगत त्रुटियां और जवाबदेही

  • अस्पष्ट स्कैनिंग, उत्तर पुस्तिकाओं का मिश्रण, या कुछ उत्तरों का अचिह्नित रहना जैसी ‘प्रणालीगत लापरवाही/विफलता’।
  • इन विफलताओं के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने में कठिनाई, जिससे जवाबदेही की कमी होती है।

4. डेटा सुरक्षा और गोपनीयता

  • छात्रों के संवेदनशील डेटा को साइबर हमलों या अनधिकृत पहुंच से बचाने में चुनौतियाँ।
  • डिजिटल मूल्यांकन रिकॉर्ड की अखंडता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।

5. नीति निर्माण और कार्यान्वयन

  • नई OSM नीति को बिना पर्याप्त पायलट परीक्षण या हितधारक परामर्श के लागू करना।
  • नीति और उसके जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच अंतर, जैसा कि ‘टीथिंग प्रॉब्लम्स’ से पता चलता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अस्पष्ट स्कैनिंग मूल्यांकनकर्ताओं के लिए उत्तरों को पढ़ना और सही ढंग से मूल्यांकन करना मुश्किल बनाता है, जिससे गलत मूल्यांकन की संभावना बढ़ती है।
अचिह्नित उत्तर छात्रों के प्रयासों को अनदेखा करता है और उन्हें उन अंकों से वंचित करता है जिनके वे हकदार हैं, जिससे अन्याय होता है।
उत्तर पुस्तिका मिश्रण छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का गलत मिलान या गुम होना, जिससे उनके परिणाम प्रभावित होते हैं और पहचान संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
प्रशिक्षण की कमी मूल्यांकनकर्ताओं को नई प्रणाली का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में असमर्थ बनाता है, जिससे त्रुटियां और अक्षमताएं होती हैं।
तकनीकी ग्लिच प्रणाली की विश्वसनीयता को कम करते हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी का कारण बनते हैं, जिससे छात्रों में ‘निराशा’ बढ़ती है।
जवाबदेही का अभाव प्रणालीगत विफलताओं के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराने में विफलता, जिससे भविष्य में सुधार की प्रेरणा कम होती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • डिजिटल इंडिया
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020
  • ई-गवर्नेंस योजना
  • स्वयं (SWAYAM)
  • दीक्षा (DIKSHA)
  • राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा वास्तुकला (NDEAR)

आगे की राह

  • एक मजबूत और स्केलेबल तकनीकी बुनियादी ढांचा विकसित करना, जिसमें उच्च क्षमता वाले सर्वर और सुरक्षित नेटवर्क शामिल हों।
  • OSM प्रणाली के प्रभावी उपयोग के लिए मूल्यांकनकर्ताओं को व्यापक और अनिवार्य प्रशिक्षण प्रदान करना, जिसमें तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी दोनों पहलू शामिल हों।
  • प्रणालीगत विफलताओं की पहचान करने और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र स्थापित करना।
  • नई नीतियों को लागू करने से पहले पायलट परीक्षण और हितधारक परामर्श आयोजित करना ताकि ‘टीथिंग प्रॉब्लम्स’ को पहले ही पहचाना जा सके।
  • डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करना और साइबर सुरक्षा उपायों को लागू करना ताकि छात्रों के डेटा की गोपनीयता और अखंडता सुनिश्चित हो सके।
  • छात्रों और अभिभावकों के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना ताकि वे अपनी चिंताओं को आसानी से उठा सकें।
  • नियमित ऑडिट और प्रदर्शन मूल्यांकन के माध्यम से OSM प्रणाली की निरंतर निगरानी और सुधार सुनिश्चित करना।
  • शिक्षा में प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति विकसित करना, जिसमें गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही के स्पष्ट प्रावधान हों।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

न्यायिक सक्रियता · शासन में जवाबदेही · डिजिटल शिक्षा · तकनीकी एकीकरण · छात्र कल्याण · प्रणालीगत विफलता · ई-गवर्नेंस चुनौतियाँ · नीति कार्यान्वयन · मानव संसाधन विकास · डेटा सुरक्षा · पारदर्शिता · शिकायत निवारण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 32: मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार।
  • अनुच्छेद 136: सर्वोच्च न्यायालय की विशेष अनुमति याचिका (SLP) का अधिकार।
  • अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने का अधिकार।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: डिजिटल डेटा और साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रावधान।

अवधारणा प्रवाह

CBSE द्वारा OSM प्रणाली का कार्यान्वयन  →  तकनीकी खामियां और अनियमितताएं (अस्पष्ट स्कैन, अचिह्नित उत्तर)  →  छात्रों में ‘निराशा’ और अन्याय की भावना  →  सर्वोच्च न्यायालय में याचिका और न्यायिक हस्तक्षेप  →  सरकार द्वारा जांच समिति का गठन और स्थिति रिपोर्ट की मांग  →  सुधारों का कार्यान्वयन और भविष्य के लिए सबक

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया में दक्षता और पारदर्शिता लाना है।
2. CBSE ने OSM प्रणाली को पहली बार 2026 में कक्षा 12 की परीक्षाओं के लिए लागू किया था।
3. एस. राधा चौहान समिति का गठन OSM प्रणाली में तकनीकी दोषों की जांच के लिए किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। OSM प्रणाली का उद्देश्य दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाना है। CBSE ने इसे 2026 में पहली बार लागू किया और एस. राधा चौहान समिति इसकी जांच कर रही है।

Q2. भारत में न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. यह संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखने में मदद करता है।
  2. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों दोनों के पास न्यायिक समीक्षा की शक्ति है।
  3. यह केवल विधायी अधिनियमों तक ही सीमित है, कार्यकारी आदेशों तक नहीं।
  4. यह संविधान के मूल ढांचे का एक हिस्सा है।

उत्तर: यह केवल विधायी अधिनियमों तक ही सीमित है, कार्यकारी आदेशों तक नहीं। — न्यायिक समीक्षा केवल विधायी अधिनियमों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कार्यकारी आदेश, प्रशासनिक निर्णय और संवैधानिक संशोधन भी शामिल हैं। यह संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है और सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालयों दोनों के पास यह शक्ति है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में हालिया तकनीकी खामियों ने शिक्षा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण से जुड़ी चुनौतियों को उजागर किया है। इस संदर्भ में, भारत में डिजिटल शिक्षा के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक प्रमुख चुनौतियों और आगे की राह पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, OSM प्रणाली में आई चुनौतियों (जैसे तकनीकी बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण की कमी, प्रणालीगत त्रुटियां, डेटा सुरक्षा) का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, डिजिटल शिक्षा के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक उपायों (जैसे मजबूत बुनियादी ढांचा, व्यापक प्रशिक्षण, प्रभावी निगरानी, नीति निर्माण में हितधारक परामर्श, जवाबदेही तंत्र) पर विस्तार से चर्चा करें। निष्कर्ष में, छात्रों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रौद्योगिकी और शिक्षा के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण पर जोर दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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