स्व-सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण: डीएवाई-एनआरएलएम की भूमिका

स्व-सहायता समूहों के लिए लागू की गई ग्रामीण योजनाएं — concept mind map

स्व-सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण: डीएवाई-एनआरएलएम की भूमिका

DAY-NRLM कार्यान्वयन संरचनाग्रामीण विकास मंत्रालययोजना कार्यान्वयनDAY-NRLMमिशन उद्देश्यस्वयं सहायता समूह (SHG)10.08 करोड़ महिलाएंवित्तीय समावेशनRBI/NABARD दिशानिर्देशकौशल विकासRSETI/CMTCआजीविका वृद्धि49% आय वृद्धि
DAY-NRLM कार्यान्वयन संरचना

✎ दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जो स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के वित्तीय समावेशन, आजीविका संवर्धन और समग्र सशक्तिकरण पर केंद्रित है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशन
  • Prelims: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), स्वयं सहायता समूह (SHG), वित्तीय समावेशन, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (CMTC), नाबार्ड (NABARD), ग्रामीण विकास मंत्रालय, महिला सशक्तिकरण
  • Essay: ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, समावेशी विकास के लिए सरकारी योजनाओं का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जो स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के वित्तीय समावेशन, आजीविका संवर्धन और समग्र सशक्तिकरण पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से ग्रामीण परिवारों के सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला है। मंत्रालय ने बताया कि इस मिशन के तहत 10.08 करोड़ महिलाओं को 92.30 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पृष्ठभूमि

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करना और उन्हें वित्तीय सहायता व क्षमता निर्माण के माध्यम से सशक्त बनाना है।
  • मिशन का लक्ष्य ग्रामीण गरीबों के लिए स्व-प्रबंधित और वित्तीय रूप से टिकाऊ सामुदायिक संस्थाओं का निर्माण करना, वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देना, टिकाऊ आजीविका के अवसर प्रदान करना और सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) व सामाजिक विकास में निवेश करना है।
  • यह मिशन देश भर के 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में (दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर) लागू किया गया है।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण तक पहुंच प्रदान की जाती है, जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के दिशानिर्देशों के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों से जमानत-मुक्त ऋण शामिल है।
  • ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) और सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (CMTC) स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को कौशल विकास, उद्यमशीलता प्रशिक्षण और आजीविका संवर्धन में सहायता प्रदान करते हैं।
  • 3ie प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन (2025) और नीति आयोग (NITI Aayog) के मूल्यांकन (2025) जैसे स्वतंत्र अध्ययनों ने DAY-NRLM की प्रभावशीलता और ग्रामीण परिवारों की आय वृद्धि, महिला सशक्तिकरण तथा समग्र कल्याण में इसके योगदान को रेखांकित किया है।

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) क्या है?

  • यह ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित करके उनकी आजीविका में सुधार करना है।
  • मिशन का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण गरीबों की स्व-प्रबंधित और वित्तीय रूप से टिकाऊ सामुदायिक संस्थाओं का सामाजिक संचालन, संवर्धन और सुदृढ़ीकरण करना है।
  • यह ग्रामीण गरीबों के वित्तीय समावेशन पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है, उन्हें संस्थागत ऋण तक पहुंच प्रदान करता है।
  • मिशन टिकाऊ आजीविका के अवसरों के सृजन और सामाजिक समावेशन व सामाजिक विकास में निवेश को बढ़ावा देता है।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को भारतीय रिज़र्व बैंक और नाबार्ड के दिशानिर्देशों के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों से जमानत-मुक्त ऋण प्राप्त होता है।
  • ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) और सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (CMTC) कौशल विकास, उद्यमशीलता प्रशिक्षण और आजीविका सहायता प्रदान करते हैं।
  • इस योजना के तहत अब तक 10.08 करोड़ महिलाओं को 92.30 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है।
  • अध्ययनों से पता चला है कि इस मिशन से परिवारों की आय में वृद्धि, प्रति व्यक्ति उपभोग में सुधार, महिला सशक्तिकरण और आजीविका विविधीकरण हुआ है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
10.08 करोड़ महिलाएँ ग्रामीण महिलाओं का व्यापक स्तर पर स्वयं सहायता समूहों में एकीकरण।
92.30 लाख स्वयं सहायता समूह ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण और आजीविका संवर्धन।
वित्तीय समावेशन महिलाओं को संस्थागत ऋण तक पहुँच प्रदान करना, आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना।
कौशल विकास एवं उद्यमशीलता प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना।
सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (CMTC) क्षमता निर्माण, सहकर्मी अधिगम और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।

महत्व

सामाजिक सशक्तिकरण

  • महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) महिलाओं को एक साथ आने, सामूहिक निर्णय लेने और सामाजिक मुद्दों पर आवाज़ उठाने का मंच प्रदान करते हैं।
  • महिलाओं में आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और वे परिवार तथा समुदाय में अधिक सम्मान प्राप्त करती हैं।
  • सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिलता है, विशेषकर हाशिए पर पड़े वर्गों की महिलाओं के लिए।

आर्थिक संवृद्धि और आजीविका

  • स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है (औसत 49% की वृद्धि)।
  • आजीविका के अवसरों का विविधीकरण होता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  • संस्थागत ऋण तक पहुँच से छोटे उद्यमों और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे गरीबी कम होती है।

वित्तीय समावेशन

  • ग्रामीण गरीबों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ा जाता है, जिससे साहूकारों पर निर्भरता कम होती है।
  • जमानत-मुक्त ऋण की उपलब्धता से महिलाओं को बिना किसी बाधा के पूंजी तक पहुँच मिलती है।
  • वित्तीय साक्षरता में सुधार होता है, जिससे महिलाएं अपने वित्त का बेहतर प्रबंधन कर पाती हैं।

शासन और विकास

  • स्वयं सहायता समूह स्थानीय शासन और विकास पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
  • सामुदायिक संस्थाएँ जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायक होती हैं।
  • नीति आयोग और 3ie जैसे स्वतंत्र अध्ययनों ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है।

चुनौतियाँ

1. सामाजिक बाधाएँ

  • लैंगिक असमानता, प्रवासन और निम्न साक्षरता दर स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं की भागीदारी और समावेशन को बाधित करती है।
  • पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचनाएँ महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

2. विपणन और प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुँच

  • स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं के लिए पर्याप्त विपणन सुविधाओं का अभाव है।
  • आधुनिक प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुँच से उत्पादकता और गुणवत्ता प्रभावित होती है।

3. बाहरी झटके और संवेदनशीलता

  • प्राकृतिक आपदाएँ, स्वास्थ्य आपातस्थितियाँ, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक मंदी स्वयं सहायता समूहों की स्थिरता को प्रभावित करती हैं।
  • इन झटकों से आजीविका और आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

4. क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण

  • सभी सदस्यों के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास प्रशिक्षण की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • प्रशिक्षण के बाद व्यापक हैंडहोल्डिंग और निरंतर समर्थन की आवश्यकता होती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
लैंगिक असमानता महिलाओं की भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव।
निम्न साक्षरता वित्तीय और व्यावसायिक ज्ञान की कमी, जिससे समूह के संचालन में बाधा।
विपणन सुविधाओं का अभाव उत्पादों के लिए उचित बाजार तक पहुँच की कमी, जिससे आय प्रभावित।
प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुँच उत्पादकता और दक्षता में सुधार के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग न कर पाना।
प्राकृतिक आपदाएँ आजीविका और वित्तीय स्थिरता पर अप्रत्याशित नकारात्मक प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)

आगे की राह

  • स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजारों के साथ बेहतर जुड़ाव स्थापित करना।
  • महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता और वित्तीय प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए स्वयं सहायता समूहों को अनुकूलन रणनीतियों और टिकाऊ आजीविका विकल्पों में प्रशिक्षित करना।
  • बैंकों और स्वयं सहायता समूहों के बीच ऋण संबद्धता प्रक्रिया को और सुगम बनाना तथा ऋण की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्रों (CMTC) को और मजबूत करना ताकि वे क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण के प्रभावी केंद्र बन सकें।
  • सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ स्वयं सहायता समूहों के अभिसरण को बढ़ावा देना ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।
  • सामाजिक बाधाओं को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘राज्य द्वारा अनुसरणीय नीति के सिद्धांत’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण परिवारों का स्वयं सहायता समूहों में संगठन  →  वित्तीय समावेशन और संस्थागत ऋण तक पहुँच  →  कौशल विकास और उद्यमशीलता प्रशिक्षण  →  टिकाऊ आजीविका और आय में वृद्धि  →  महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित करने और उन्हें विकसित करने के उद्देश्य से कार्यान्वित किया जा रहा है।
2. यह मिशन देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वित किया जा रहा है।
3. इस कार्यक्रम के अंतर्गत, महिला स्वयं सहायता समूह केवल सहकारी बैंकों से जमानत-मुक्त ऋण प्राप्त करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि DAY-NRLM का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को SHG में संगठित करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह मिशन दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर देश भर में 28 राज्यों और 6 संघ-राज्य क्षेत्रों में कार्यान्वित किया जा रहा है। कथन 3 गलत है क्योंकि महिला स्वयं सहायता समूह अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों दोनों से जमानत-मुक्त ऋण प्राप्त करते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संस्थान DAY-NRLM के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता प्रशिक्षण प्रदान करता है?

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
  2. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)
  3. ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI)
  4. नीति आयोग

उत्तर: ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) — ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) DAY-NRLM के तहत स्वयं सहायता समूहों सहित ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास और उद्यमशीलता प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण परिवारों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और उन चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए जिनका सामना स्वयं सहायता समूह (SHG) करते हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में DAY-NRLM का संक्षिप्त परिचय और उसके उद्देश्यों का उल्लेख करें। मुख्य भाग में, मिशन की सफलता और ग्रामीण परिवारों के सशक्तिकरण में इसकी भूमिका का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें आय वृद्धि, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण, आजीविका विविधीकरण और सामुदायिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे बिंदुओं को शामिल करें। 3ie प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन (2025) और नीति आयोग के मूल्यांकन (2025) के निष्कर्षों का उल्लेख करें। इसके बाद, स्वयं सहायता समूहों द्वारा सामना की जाने वाली प्रमुख चुनौतियों, जैसे लैंगिक असमानता, प्रवासन, निम्न साक्षरता, विपणन सुविधाओं का अभाव, प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता पर चर्चा करें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो मिशन की उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों को स्वीकार करता हो तथा आगे के सुधारों के लिए सुझाव दे। संविधान के अनुच्छेद 39 (क) और 46 का संदर्भ दिया जा सकता है जो राज्य को नागरिकों के लिए आजीविका के पर्याप्त साधन सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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