11 Aug स्व-सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण: डीएवाई-एनआरएलएम की सफलता
✎ दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से संगठित कर, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन द्वारा सशक्त बनाने की एक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप, विकास प्रक्रियाएं और विकास उद्योग | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशन, सरकारी बजटिंग
- Prelims: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्रामीण विकास मंत्रालय, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (CMTC), नाबार्ड (NABARD), RBI, केंद्र प्रायोजित योजना
- Essay: ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, समावेशी विकास के लिए सरकारी योजनाओं का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से संगठित कर, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन द्वारा सशक्त बनाने की एक प्रमुख सरकारी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए लागू की गई ग्रामीण योजनाओं पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है। इस विज्ञप्ति में मिशन के उद्देश्यों, कार्यान्वयन, महिला स्वयं सहायता समूहों को दिए जा रहे समर्थन, और उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में प्राप्त सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डाला गया है। यह ग्रामीण परिवारों की आय वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार के लिए SHG की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में ग्रामीण गरीबी उन्मूलन और आजीविका संवर्धन के लिए स्वयं सहायता समूह (SHG) एक महत्वपूर्ण रणनीति रही है।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करना और उन्हें वित्तीय तथा तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
- मिशन का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना और उनकी आय में वृद्धि करके उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है।
- अब तक, 10.08 करोड़ से अधिक महिलाओं को 92.30 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है।
- यह मिशन देश के 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है।
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) क्या है?
- यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करना है।
- मिशन के चार मुख्य घटक हैं: सामाजिक संचालन, संवर्धन एवं सुदृढ़ीकरण; वित्तीय समावेशन; टिकाऊ आजीविका; तथा सामाजिक समावेशन एवं सामाजिक विकास में निवेश।
- यह महिला स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण तक पहुंच प्रदान करता है, जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के दिशानिर्देशों के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों से जमानत-मुक्त ऋण शामिल हैं।
- ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) ग्रामीण युवाओं और SHG सदस्यों को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जिसमें महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया जाता है।
- सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (CMTC) क्षमता निर्माण, सहकर्मी अधिगम और ज्ञान के आदान-प्रदान के केंद्र के रूप में कार्य करते हैं।
- यह योजना लैंगिक असमानता, निम्न साक्षरता, विपणन सुविधाओं तक सीमित पहुंच और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन | 10.08 करोड़ महिलाओं को 92.30 लाख SHG में संगठित किया गया, जो ग्रामीण महिलाओं के बड़े पैमाने पर सशक्तिकरण को दर्शाता है। |
| वित्तीय समावेशन | SHG को संस्थागत ऋण तक पहुँच प्रदान करना, जिससे वे अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों से जमानत-मुक्त ऋण प्राप्त कर सकें। |
| कौशल विकास एवं उद्यमिता प्रशिक्षण | ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) और सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (CMTC) के माध्यम से ग्रामीण युवाओं, विशेषकर महिलाओं को प्रशिक्षित करना। |
| बहुआयामी रणनीति | सामाजिक संचालन, वित्तीय समावेशन, टिकाऊ आजीविका और सामाजिक विकास में निवेश के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का समग्र सशक्तिकरण। |
| आय में वृद्धि | अध्ययनों से पता चला है कि NRLM ब्लॉकों में परिवारों की आय में 9.5% की वृद्धि हुई है, और परिपक्व सामुदायिक संस्था समूहों में यह वृद्धि 12% से 33% के बीच रही है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि और गरीबी उन्मूलन में योगदान।
- वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बचत और निवेश की संस्कृति विकसित हो।
- आजीविका के अवसरों का विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना।
सामाजिक महत्व
- महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) को बढ़ावा देना, जिससे महिलाओं में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि हो।
- सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) में सुधार, विशेषकर वंचित समूहों के लिए।
- सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत करना, जिससे स्थानीय स्तर पर शासन और विकास में भागीदारी बढ़े।
शासनिक महत्व
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) की प्रभावशीलता का प्रदर्शन।
- ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) की नीतियों का सफल कार्यान्वयन।
- नीति आयोग (NITI Aayog) जैसे संस्थानों द्वारा कार्यक्रम की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता की पुष्टि।
चुनौतियाँ
1. सामाजिक बाधाएँ
- लैंगिक असमानता (Gender Inequality) और निम्न साक्षरता (Low Literacy) दर, जो महिलाओं की भागीदारी को सीमित करती है।
- प्रवासन (Migration) की समस्या, जिससे SHG की निरंतरता प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण
2. विपणन एवं प्रौद्योगिकी तक पहुँच
- उत्पादों के लिए पर्याप्त विपणन सुविधाओं का अभाव।
- आधुनिक प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुँच, जिससे उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, ग्रामीण विकास
3. बाहरी झटके
- प्राकृतिक आपदाएँ (Natural Disasters), स्वास्थ्य आपातस्थितियाँ और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का प्रभाव।
- आर्थिक मंदी (Economic Recession) के प्रति संवेदनशीलता, जिससे आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था
4. क्षमता निर्माण की आवश्यकता
- SHG सदस्यों के लिए निरंतर कौशल विकास और उद्यमशीलता प्रशिक्षण की आवश्यकता।
- वित्तीय प्रबंधन और ऋण उपयोग की समझ में सुधार की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, ग्रामीण विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सामाजिक बाधाएँ | लैंगिक असमानता, निम्न साक्षरता और प्रवासन SHG में भागीदारी और समावेशन को बाधित करते हैं। |
| विपणन सुविधाएँ | SHG उत्पादों के लिए पर्याप्त विपणन चैनलों और बाजारों तक पहुँच का अभाव। |
| प्रौद्योगिकी तक पहुँच | आधुनिक उत्पादन तकनीकों और सूचना तक सीमित पहुँच, जो प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है। |
| बाहरी झटके | प्राकृतिक आपदाएँ, स्वास्थ्य आपातस्थितियाँ और आर्थिक मंदी SHG की स्थिरता और आजीविका को प्रभावित करती हैं। |
| क्षमता निर्माण | प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और उद्यमशीलता कौशल में निरंतर सुधार की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
आगे की राह
- SHG सदस्यों की वित्तीय साक्षरता और डिजिटल कौशल को बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएँ।
- SHG उत्पादों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजारों के साथ मजबूत संबंध स्थापित किए जाएँ।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए SHG को अनुकूलन और शमन रणनीतियों में प्रशिक्षित किया जाए।
- SHG को प्रौद्योगिकी तक पहुँच प्रदान करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सहायता प्रदान की जाए।
- सामाजिक बाधाओं, विशेषकर लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान और सामुदायिक संवाद को बढ़ावा दिया जाए।
- प्राकृतिक आपदाओं और स्वास्थ्य आपातस्थितियों के प्रति SHG की संवेदनशीलता को कम करने के लिए बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए।
- ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETI) की क्षमता और पहुँच का विस्तार किया जाए ताकि अधिक ग्रामीण युवाओं को लाभ मिल सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) · स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) · ग्रामीण विकास मंत्रालय · महिला सशक्तिकरण · वित्तीय समावेशन · आजीविका विविधीकरण · सामुदायिक संस्थाएं · ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) · नाबार्ड · सामाजिक समावेशन · गरीबी उन्मूलन · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 38’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि करेगा’}
- {‘अनुच्छेद 39’: ‘राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति सिद्धांत’}
- {‘अनुच्छेद 43’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
- {‘अनुच्छेद 46’: ‘दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}
अवधारणा प्रवाह
ग्रामीण परिवारों का SHG में संगठन → SHG को संस्थागत ऋण तक पहुँच → कौशल विकास एवं उद्यमिता प्रशिक्षण → आजीविका के अवसरों का सृजन → पारिवारिक आय में वृद्धि → जीवन स्तर में सुधार एवं महिला सशक्तिकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
2. यह मिशन केवल महिला स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण तक पहुंच प्रदान करता है।
3. ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) इस मिशन के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि डीएवाई-एनआरएलएम ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि मिशन विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण तक पहुंच प्रदान करता है। कथन 3 सही है क्योंकि आरसेटी ग्रामीण युवाओं और एसएचजी को कौशल विकास और उद्यमशीलता प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) का एक मुख्य घटक नहीं है?
- ग्रामीण गरीबों की स्व-प्रबंधित एवं वित्तीय रूप से टिकाऊ सामुदायिक संस्थाओं का सामाजिक संचालन
- ग्रामीण गरीबों का वित्तीय समावेशन
- टिकाऊ आजीविका
- शहरी गरीबों के लिए आवास सुविधा
उत्तर: शहरी गरीबों के लिए आवास सुविधा — डीएवाई-एनआरएलएम ग्रामीण गरीबों पर केंद्रित है और इसके मुख्य घटकों में सामुदायिक संस्थाओं का संवर्धन, वित्तीय समावेशन और टिकाऊ आजीविका शामिल हैं। शहरी गरीबों के लिए आवास सुविधा इसका घटक नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और उन चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए जिनका सामना स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को करना पड़ता है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत डीएवाई-एनआरएलएम का संक्षिप्त परिचय और इसके उद्देश्यों से करें। ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में इसकी भूमिका का विस्तार से वर्णन करें, जिसमें आय वृद्धि, वित्तीय समावेशन, आजीविका विविधीकरण, महिला आत्मविश्वास में वृद्धि और सामुदायिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे सकारात्मक परिणाम शामिल हों। 3ie प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन (2025) और नीति आयोग के मूल्यांकन (2025) के निष्कर्षों का उल्लेख करें। इसके बाद, स्वयं सहायता समूहों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे लैंगिक असमानता, प्रवासन, निम्न साक्षरता, विपणन सुविधाओं की कमी, प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने और मिशन की प्रभावशीलता को और बढ़ाने के लिए आगे की राह सुझाते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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