हिमाचल की मुख्यमंत्री सहारा योजना: 10 हजार लाभार्थियों को मिलेगी आर्थिक मदद, डीसी करेंगे सत्यापन

हिमाचल की मुख्यमंत्री सहारा योजना: 10 हजार लाभार्थियों को मिलेगी आर्थिक मदद, डीसी करेंगे सत्यापन

हिमाचल की मुख्यमंत्री सहारा योजना: 10 हजार लाभार्थियों को मिलेगी आर्थिक मदद, डीसी करेंगे सत्यापन

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मुख्यमंत्री सहारा योजना प्रक्रिया

✎ मुख्यमंत्री सहारा योजना हिमाचल प्रदेश की राज्य स्तरीय नकद सहायता योजना है, जिसमें गंभीर बीमारी से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को प्रतिमाह 3000 रुपये दिए जाते हैं और पात्रता का सत्यापन जिला उपायुक्त करते हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — Polity और शासन (Governance): राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएँ, योजना का प्रशासनिक ढाँचा और विभागीय हस्तांतरण  |  GS Paper II — Polity: राज्य नीति के निदेशक तत्व (DPSP) और मौलिक अधिकार के संदर्भ में स्वास्थ्य का अधिकार  |  GS Paper II — Social Justice: गंभीर बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपाय
  • Prelims: अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य), अनुच्छेद 41 (बीमारी आदि की स्थिति में लोक सहायता का अधिकार, DPSP), अनुच्छेद 21 और स्वास्थ्य का अधिकार (सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या), सातवीं अनुसूची: राज्य सूची की प्रविष्टि 6 (लोक स्वास्थ्य और सफ़ाई) तथा समवर्ती सूची की प्रविष्टि 23 (सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और नकद सहायता बनाम बीमा आधारित योजना का अंतर, केंद्र प्रायोजित योजना और पूर्णतः राज्य वित्त पोषित योजना का अंतर
  • Essay: कल्याणकारी योजनाओं में लक्षित वितरण बनाम सार्वभौमिक पहुँच: पात्रता सत्यापन की चुनौतियाँ और समाधान, स्वास्थ्य व्यय और गरीबी का चक्र: राज्य की भूमिका और नागरिक के अधिकार

त्वरित पुनरावृत्ति: मुख्यमंत्री सहारा योजना हिमाचल प्रदेश की राज्य स्तरीय नकद सहायता योजना है, जिसमें गंभीर बीमारी से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को प्रतिमाह 3000 रुपये दिए जाते हैं और पात्रता का सत्यापन जिला उपायुक्त करते हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सहारा योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता के लिए लगभग 10 हजार लोगों ने आवेदन किया है। इन आवेदनों का सत्यापन जिला उपायुक्तों के माध्यम से किया जा रहा है और सत्यापन के बाद पात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों को राशि जारी की जाएगी। योजना का संचालन स्वास्थ्य विभाग से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंपे जाने के बाद लाभार्थियों के रिकॉर्ड और आवेदन प्रक्रिया को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की पुरानी सूची में शामिल लोगों को भी नियमों के अनुसार पोर्टल पर नया आवेदन करना होगा। वर्तमान में राज्य में लगभग 4500 लोगों को इस योजना के तहत सहायता मिल रही है। इस समाचार का मुख्य महत्व यह है कि यह राज्य स्तर पर प्रशासनिक हस्तांतरण, पात्रता सत्यापन और लाभ वितरण की प्रक्रिया को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 41 और अनुच्छेद 47 राज्य को बीमारी में सहायता और लोक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में कार्य करने का निर्देश देते हैं। ये प्रावधान न्यायोचित नहीं हैं, किंतु नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य के अधिकार को सम्मिलित माना है। पररमानंद कटारा मामले (1989) में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा को जीवन के अधिकार से जोड़ा गया था।
  • भारत में स्वास्थ्य सेवाओं पर परिवारों का प्रत्यक्ष (out-of-pocket) व्यय अधिक रहता है, जिससे गंभीर बीमारी गरीबी का कारण बन सकती है। इसी कारण राज्य स्तर पर लक्षित सहायता योजनाएँ बनाई जाती हैं।
  • स्वास्थ्य को राज्य सूची में रखा गया है, इसलिए राज्य सरकारें अपनी वित्तीय क्षमता और प्राथमिकताओं के अनुसार ऐसी योजनाएँ चलाती हैं।
  • सत्यापन आधारित लक्षित योजनाओं में समावेशन त्रुटि (अपात्र को लाभ) और बहिष्करण त्रुटि (पात्र को लाभ से वंचित) दोनों का खतरा रहता है, जिसे कम करने के लिए पोर्टल आधारित आवेदन और सत्यापन को अपनाया जाता है।

मुख्यमंत्री सहारा योजना क्या है?

  • यह हिमाचल प्रदेश सरकार की राज्य स्तरीय योजना है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
  • सहायता का उद्देश्य बीमारी के इलाज, दवाओं और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए मरीज को आर्थिक सहारा देना है।
  • पात्र लाभार्थियों को प्रतिमाह 3000 रुपये दिए जाते हैं, अर्थात् वार्षिक 36000 रुपये की सहायता।
  • योजना के दायरे में कैंसर, पार्किंसंस, पक्षाघात (लकवा), मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और किडनी फेलियर जैसी बीमारियाँ आती हैं।
  • आवेदन पोर्टल के माध्यम से होता है और जिला उपायुक्त आवेदकों की पात्रता का सत्यापन करते हैं; सत्यापन के बाद ही राशि जारी की जाती है।
  • प्रशासनिक रूप से योजना का संचालन स्वास्थ्य विभाग से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंपा गया है।
  • यह योजना बीमा योजना से भिन्न है, क्योंकि इसमें नकद सहायता प्रत्यक्ष रूप से लाभार्थी को दी जाती है, न कि किसी बीमा कंपनी के माध्यम से इलाज का भुगतान होता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लक्षित समूह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के वे मरीज़ जो कैंसर, पार्किंसंस, पक्षाघात, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं।
सहायता का स्वरूप पात्र लाभार्थियों को हर महीने 3,000 रुपये दिए जाते हैं, जिससे सालाना सहायता 36,000 रुपये होती है। यह राशि इलाज, दवाओं और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए है।
संचालन का दायित्व योजना का संचालन स्वास्थ्य विभाग से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (Department of Social Justice and Empowerment) को सौंपा गया है। इससे लाभार्थियों के रिकॉर्ड और आवेदन प्रक्रिया को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है।
आवेदन प्रणाली सभी आवेदन पोर्टल (Portal) के माध्यम से होते हैं। स्वास्थ्य विभाग की पूर्व सूची में शामिल व्यक्तियों को भी नए नियमों के अंतर्गत फिर से आवेदन करना होगा।
सत्यापन की व्यवस्था आवेदकों की पात्रता की जाँच उपायुक्त (Deputy Commissioner) के स्तर पर जिला-वार की जा रही है। सत्यापन के बाद ही सहायता राशि जारी होगी।
वर्तमान स्थिति लगभग 10 हजार लोगों ने आवेदन किया है, जबकि वर्तमान में करीब 4500 लोगों को सहायता मिल रही है। सत्यापन पूरा होने पर लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

महत्व

सामाजिक सुरक्षा

  • गंभीर बीमारी की स्थिति में आय का नुकसान अक्सर परिवार को गरीबी की ओर धकेल देता है। नियमित मासिक सहायता इस जोखिम को कुछ हद तक कम करती है।
  • यह योजना सामाजिक सुरक्षा की उस अवधारणा से जुड़ती है जिसमें राज्य कमजोर वर्गों की बीमारी से उत्पन्न आर्थिक असुरक्षा को संबोधित करता है।

स्वास्थ्य नीति

  • सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त, लंबे और महंगे इलाज वाले रोगों के लिए नकद सहायता इलाज की निरंतरता सुनिश्चित करने में सहायक हो सकती है।
  • दीर्घकालिक रोगों की सूची यह संकेत देती है कि राज्य किन बीमारियों को आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक भारी मानता है।

प्रशासनिक शासन

  • योजना का विभागीय हस्तांतरण यह दर्शाता है कि राज्य कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में विभागों के बीच दायित्व का पुनर्निर्धारण कर सकता है।
  • पोर्टल-आधारित आवेदन और उपायुक्त स्तर का सत्यापन पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाने के उपाय के रूप में देखे जा सकते हैं।

लक्षित लाभ और संसाधन उपयोग

  • पात्रता सत्यापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमित राज्य संसाधन वास्तव में जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुँचें।
  • सत्यापन की प्रक्रिया से अपात्र या दोहरे लाभार्थियों की पहचान में मदद मिल सकती है।

चुनौतियाँ

1. सत्यापन में विलंब

  • लगभग 10 हजार आवेदनों की जाँच उपायुक्तों के स्तर पर होने से प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
  • सत्यापन पूरा होने तक पात्र मरीज़ों को समय पर सहायता न मिलना, गंभीर बीमारी की स्थिति में विशेष रूप से कठिन होता है।

2. विभागीय हस्तांतरण से संक्रमण

  • संचालन स्वास्थ्य विभाग से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंपे जाने से रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का पुनर्गठन करना पड़ा है।
  • पुराने लाभार्थियों के आँकड़ों का नए विभाग में सही स्थानांतरण न होने पर पात्र व्यक्ति सहायता से वंचित रह सकते हैं।

3. डिजिटल पहुँच की बाधा

  • पोर्टल पर अनिवार्य पुनः आवेदन से वे लोग प्रभावित हो सकते हैं जिन्हें डिजिटल साक्षरता या इंटरनेट की सुविधा सीमित है।
  • ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में दस्तावेज़ जुटाना और ऑनलाइन आवेदन करना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है।

4. सीमित सहायता और वित्तीय भार

  • मासिक 3,000 रुपये की सहायता गंभीर बीमारी के उपचार की वास्तविक लागत की तुलना में सीमित हो सकती है।
  • लाभार्थियों की संख्या बढ़ने पर राज्य के बजट पर दीर्घकालिक दायित्व बढ़ेगा, जिसके लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था आवश्यक है।

5. रोग-सूची का सीमित दायरा

  • योजना में केवल कुछ चुनी हुई गंभीर बीमारियाँ शामिल हैं, इसलिए अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित परिवार इस सहायता से बाहर रह जाते हैं।
  • सूची में बदलाव का निर्णय नीति-स्तर पर संतुलित आवश्यकताओं और संसाधनों के आधार पर होना चाहिए।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सत्यापन की गति करीब 10 हजार आवेदनों की जाँच में देरी होने पर पात्र मरीज़ों की सहायता रुक सकती है।
रिकॉर्ड का हस्तांतरण पुराने लाभार्थियों का डेटा नए विभाग में सटीक रूप से न आने से गलत बहिष्करण हो सकता है।
पुनः आवेदन की बाध्यता पहले से सूचीबद्ध लोगों को फिर से आवेदन करना पड़ रहा है, जिससे अनावश्यक प्रशासनिक बोझ और असुविधा बढ़ सकती है।
डिजिटल पहुँच पोर्टल आधारित प्रक्रिया से ग्रामीण और कम साक्षर परिवार सहायता से दूर रह सकते हैं।
सहायता की पर्याप्तता मासिक 3,000 रुपये की राशि इलाज की वास्तविक लागत के सामने अपर्याप्त पड़ सकती है।
वित्तीय स्थिरता लाभार्थियों की संख्या बढ़ने पर राज्य के वार्षिक बजट में स्थायी प्रावधान बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मुख्यमंत्री सहारा योजना (Mukhyamantri Sahara Yojana)

आगे की राह

  • सत्यापन के लिए उपायुक्त स्तर पर समय-सीमा तय की जाए और उसकी नियमित निगरानी हो, ताकि पात्र मरीज़ों को सहायता में अनावश्यक देरी न हो।
  • स्वास्थ्य विभाग से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को लाभार्थी रिकॉर्ड के सत्यापित हस्तांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए।
  • पुनः आवेदन के दौरान पूर्व सूचीबद्ध लाभार्थियों की स्वचालित पहचान की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें बार-बार दस्तावेज़ न देने पड़ें।
  • पंचायत और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ऑफ़लाइन सहायता केंद्र चलाए जाएँ, जिससे डिजिटल रूप से कमजोर परिवार भी आवेदन कर सकें।
  • सहायता राशि की समीक्षा नियमित रूप से की जाए, ताकि बढ़ती इलाज लागत के अनुरूप सहायता की पर्याप्तता बनी रहे।
  • योजना के लाभ, पात्रता मानदंड और आवेदन की प्रक्रिया को स्थानीय भाषा में व्यापक रूप से प्रचारित किया जाए।
  • सत्यापित लाभार्थियों की राशि का भुगतान समयबद्ध और पारदर्शी माध्यम से हो, और उसका नियमित लेखा-परीक्षण किया जाए।
  • लाभार्थियों की संख्या और बीमारी-वार वितरण के आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि योजना की प्रभावशीलता का मूल्यांकन संभव हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मुख्यमंत्री सहारा योजना (Mukhyamantri Sahara Yojana) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) · पात्रता सत्यापन (Eligibility Verification) · समावेशन और बहिष्करण त्रुटियाँ (Inclusion and Exclusion Errors) · स्वास्थ्य का अधिकार (Right to Health) · अनुच्छेद 21 और जीवन का अधिकार · राज्य नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy) · अनुच्छेद 41 और अनुच्छेद 47 · सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) · सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) · सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का प्रशासनिक हस्तांतरण · कल्याणकारी राज्य (Welfare State)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 41: कुछ मामलों में लोक सहायता का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 47: पोषण और लोक स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 162: राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार

अवधारणा प्रवाह

गंभीर बीमारी से परिवार की आय और बचत पर आर्थिक दबाव पड़ता है।  →  राज्य की मुख्यमंत्री सहारा योजना के अंतर्गत पात्र मरीज़ों को हर महीने 3,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है।  →  संचालन स्वास्थ्य विभाग से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंपा जाता है, जिससे रिकॉर्ड और प्रक्रिया का पुनर्गठन होता है।  →  नए नियमों के अनुसार सभी आवेदक, पुरानी सूची वाले सहित, पोर्टल पर आवेदन करते हैं।  →  उपायुक्त स्तर पर आवेदकों की पात्रता का सत्यापन होता है।  →  सत्यापन के बाद पात्र पाए गए लाभार्थियों को सहायता राशि जारी की जाती है।  →  सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या करीब 4500 से बढ़ने की दिशा में आगे बढ़ती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 41 राज्य को बीमारी, बुढ़ापे और अन्य अपात्रता की स्थिति में, अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमाओं के भीतर, लोक सहायता का प्रभावी उपबंध करने का निर्देश देता है।
2. संविधान का अनुच्छेद 47 पोषाहार का स्तर ऊँचा करना और लोक स्वास्थ्य में सुधार करना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य मानता है।
3. लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं: अनुच्छेद 41 लोक सहायता से जुड़ा है और अनुच्छेद 47 में पोषाहार, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य सुधार को प्राथमिक कर्तव्य कहा गया है। कथन 3 गलत है, क्योंकि लोक स्वास्थ्य राज्य सूची (State List) की प्रविष्टि 6 में आता है, समवर्ती सूची में नहीं।

Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
कथन (A): भारत में स्वास्थ्य का अधिकार भाग III में अलग से मौलिक अधिकार के रूप में उल्लिखित है, फिर भी उच्चतम न्यायालय ने इसे जीवन के अधिकार का अंग माना है।
कारण (R): उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की व्याख्या में चिकित्सीय सुविधा और स्वास्थ्य को जीवन के अधिकार के भीतर शामिल किया है।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — स्वास्थ्य का अधिकार भाग III में अलग से शब्दशः उल्लिखित नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने Consumer Education & Research Centre v. Union of India (1995) जैसे निर्णयों में अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वास्थ्य को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।

Q3. संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत संघ या राज्य ऐसे लोक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकते हैं, जो उसकी विधायी क्षमता के विषय में न आता हो?

  1. अनुच्छेद 275
  2. अनुच्छेद 280
  3. अनुच्छेद 282
  4. अनुच्छेद 293

उत्तर: अनुच्छेद 282 — अनुच्छेद 282 संघ या राज्य को ऐसे लोक प्रयोजन के लिए अनुदान देने की अनुमति देता है, भले ही वह प्रयोजन उनकी विधायी क्षमता में न हो। अनुच्छेद 275 संसद द्वारा सहायता-अनुदान से, अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से और अनुच्छेद 293 राज्यों के उधार से संबंधित है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राज्य द्वारा गंभीर बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को प्रत्यक्ष नकद सहायता देना स्वास्थ्य का अधिकार सुनिश्चित करने का प्रभावी साधन है। इस कथन का परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि जिला स्तर पर पात्रता सत्यापन में बहिष्करण त्रुटियाँ बड़े पैमाने पर हों, तो इसके क्या परिणाम होंगे। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु:
1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 में जीवन के अधिकार की व्याख्या में स्वास्थ्य और चिकित्सीय सुविधा का समावेश; Parmanand Katara v. Union of India (1989) में आपातकालीन चिकित्सा की राज्य की बाध्यता; Consumer Education & Research Centre v. Union of India (1995)। अनुच्छेद 41 (बीमारी में लोक सहायता, आर्थिक क्षमता की सीमा के भीतर) और अनुच्छेद 47 (लोक स्वास्थ्य सुधार का प्राथमिक कर्तव्य)। लोक स्वास्थ्य राज्य सूची की प्रविष्टि 6 में है, इसलिए राज्य सरकार की विधायी और प्रशासनिक जिम्मेदारी स्पष्ट है।
2. योजना का विवरण: मुख्यमंत्री सहारा योजना में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के गंभीर रोगियों (कैंसर, पार्किंसंस, पक्षाघात, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, किडनी फेलियर) को प्रति माह 3,000 रुपये, अर्थात वार्षिक 36,000 रुपये; वर्तमान में लगभग 4,500 लाभार्थी और लगभग 10,000 नए आवेदन; जिला उपायुक्तों (DC) द्वारा सत्यापन; संचालन की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को हस्तांतरित; पुरानी सूची के लाभार्थियों को भी पोर्टल पर नए सिरे से आवेदन करना।
3. पक्ष में तर्क: लक्षित अंतरण (Targeting) से सीमित संसाधन सबसे जरूरतमंद तक पहुँचते हैं; प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से बिचौलियों की भूमिका घटती है; रोग-विशिष्ट सहायता दीर्घकालिक और महँगे इलाज के बोझ को कम करती है; नकद सहायता का उपयोग मरीज स्वयं दवाओं और परिवहन पर कर सकता है।
4. विपक्ष और सीमाएँ: नकद सहायता स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता (अस्पताल, विशेषज्ञ, दवा आपूर्ति) का विकल्प नहीं है; सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) बनाम लक्षित सहायता की बहस; प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat PM-JAY, 2018) जैसी बीमा-आधारित व्यवस्था से तुलना और अधिव्यापन का प्रश्न; विभाग परिवर्तन के दौरान रिकॉर्ड का पुनर्गठन।
5. परिणाम उप-प्रश्न: समावेशन त्रुटि (अपात्र को लाभ) से राजकोषीय दबाव और लक्ष्य-विचलन; बहिष्करण त्रुटि (पात्र को वंचन) से अनुच्छेद 21 और 41 की भावना का उल्लंघन और गंभीर रोगी के परिवार पर आर्थिक संकट; डिजिटल पोर्टल और दस्तावेज़ी शर्तों से तकनीकी बहिष्करण; उपाय के रूप में सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit), शिकायत निवारण तंत्र, पोर्टल पर सहायता केंद्र, और स्पष्ट, सार्वजनिक पात्रता मानदंड।
6. निष्कर्ष: संतुलित मत कि प्रत्यक्ष सहायता अनुच्छेद 21, 41 और 47 की दिशा में एक उपयोगी उपकरण है, परंतु स्वास्थ्य का अधिकार तभी सार्थक होगा जब सत्यापन पारदर्शी हो, त्रुटियाँ न्यूनतम हों और सहायता को स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता से जोड़ा जाए।

स्रोत: amarujala.com

Himachal Pradesh PCS (HPPSC (HAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: मुख्यमंत्री सहारा योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में कितने लाभार्थियों को शामिल किए जाने की घोषणा की गई है?

  1. 5 हजार
  2. 10 हजार
  3. 15 हजार
  4. 20 हजार

उत्तर: 10 हजार — मुख्यमंत्री सहारा योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में 10 हजार लाभार्थियों को शामिल किए जाने की घोषणा की गई है।

Mains: मुख्यमंत्री सहारा योजना के उद्देश्यों एवं इसकी पात्रता मानदंडों का वर्णन करते हुए, हिमाचल प्रदेश में इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए सुझाव दीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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