हिमाचल में उड़ान योजना का विस्तार: 10 साल के लिए त्रिपक्षीय करार, जानिए पूरी डिटेल्स

संशोधित उड़ान योजना: हिमाचल में हवाई संपर्क को विस्तार, 10 साल के लिए हुआ त्रिपक्षीय करार — diagram

हिमाचल में उड़ान योजना का विस्तार: 10 साल के लिए त्रिपक्षीय करार, जानिए पूरी डिटेल्स

Map of Himachal Pradesh highlighted on the map of India — उड़ान योजना हिमाचल विस्तार त्रिपक्षीय करार
मानचित्र व माइंड-मैप: हिमाचल में उड़ान योजना: त्रिपक्षीय समझौता और हवाई संपर्क विस्तार

✎ उड़ान योजना क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने और हवाई यात्रा को किफायती बनाने के लिए भारत सरकार की एक पहल है, जिसमें व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) के माध्यम से विमानन कंपनियों को सहायता प्रदान की जाती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): बुनियादी ढाँचा (Infrastructure), निवेश मॉडल (Investment Models)  |  GS Paper II — शासन (Governance): सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप (Government Policies and Interventions)
  • Prelims: उड़ान योजना, क्षेत्रीय संपर्क योजना, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF), नागर विमानन मंत्रालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन, हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क
  • Essay: भारत में क्षेत्रीय विकास में बुनियादी ढाँचे की भूमिका, पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: उड़ान योजना क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने और हवाई यात्रा को किफायती बनाने के लिए भारत सरकार की एक पहल है, जिसमें व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) के माध्यम से विमानन कंपनियों को सहायता प्रदान की जाती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क और संबंधित सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए हिमाचल सरकार, नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India – AAI) के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (Tripartite Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता संशोधित क्षेत्रीय संपर्क योजना-उड़ान (Regional Connectivity Scheme – UDAN) के तहत 10 वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा, जिसका उद्देश्य राज्य के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं का विस्तार करना है।

पृष्ठभूमि

  • उड़ान (UDAN) योजना को 2016 में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने और आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा को किफायती बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
  • यह योजना क्षेत्रीय हवाई अड्डों के पुनरुद्धार और अविकसित हवाई पट्टियों के विकास पर केंद्रित है।
  • योजना के तहत, विमानन कंपनियों को व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding – VGF) प्रदान किया जाता है ताकि निर्धारित क्षेत्रीय मार्गों पर किराया किफायती बना रहे।
  • वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, राज्य सरकारें आमतौर पर VGF का 20 प्रतिशत योगदान करती हैं, जबकि शेष 80 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती है।
  • हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में हवाई सेवाओं के संचालन की लागत अधिक होती है, जिससे VGF अनुपात में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जाती है।
  • हाल ही में, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नागर विमानन मंत्री से VGF के लिए संशोधित 90:10 का अनुपात लागू करने का आग्रह किया है, जिसमें केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत वित्तीय सहायता दे।
  • यह त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन मौजूदा और नई उड़ान हवाई सेवाओं के साथ हवाई संपर्क और संबंधित सुविधाओं के विकास और संचालन के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है।

उड़ान (UDAN) योजना क्या है?

  • उड़ान का पूर्ण रूप ‘उड़े देश का आम नागरिक’ है, जो क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई मार्गों पर हवाई यात्रा को किफायती और सुलभ बनाना है, जिससे आम नागरिक भी हवाई यात्रा कर सकें।
  • यह योजना क्षेत्रीय हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करने और देश के गैर-सेवारत या कम-सेवारत हवाई अड्डों को जोड़ने पर केंद्रित है।
  • योजना के तहत, विमानन कंपनियों को कुछ क्षेत्रीय मार्गों पर सीटों का एक निश्चित प्रतिशत रियायती दरों पर प्रदान करना होता है।
  • इन रियायती सीटों से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए विमानन कंपनियों को व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) प्रदान किया जाता है।
  • VGF को केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारें साझा करती हैं, जिसका अनुपात आमतौर पर 80:20 होता है, लेकिन विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए यह 90:10 हो सकता है।
  • योजना के तहत, हवाई अड्डों के विकास, सुरक्षा और अग्निशमन सेवाओं के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है।
  • उड़ान योजना भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा कार्यान्वित की जाती है, जो हवाई अड्डों के विकास और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन हिमाचल सरकार, नागर विमानन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के बीच सहयोग का ढाँचा।
संशोधित क्षेत्रीय संपर्क योजना-उड़ान यह समझौता इसी योजना के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देना है।
10 वर्ष की अवधि समझौते की दीर्घकालिक प्रकृति हवाई सेवाओं के सतत विकास और संचालन को सुनिश्चित करती है।
व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) वर्तमान में राज्य सरकार 20% और केंद्र सरकार 80% VGF वहन करती है, जो हवाई सेवाओं की लागत को कम करता है।
90:10 VGF अनुपात की मांग हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राज्य सरकार ने केंद्र से 90% VGF की मांग की है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
  • स्थानीय उत्पादों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे व्यापार और वाणिज्य को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, विशेषकर पर्यटन और विमानन क्षेत्रों में।

सामाजिक महत्व

  • दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुँच आसान होगी, जिससे निवासियों के लिए यात्रा सुगम होगी।
  • आपातकालीन सेवाओं, जैसे चिकित्सा सहायता, की पहुँच में सुधार होगा।
  • लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा, क्योंकि कनेक्टिविटी बढ़ने से सुविधाओं तक पहुँच आसान हो जाएगी।

रणनीतिक महत्व

  • सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुरक्षा और निगरानी में सहायक होगी।
  • क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में मदद मिलेगी, क्योंकि दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

चुनौतियाँ

1. उच्च परिचालन लागत

  • हिमाचल प्रदेश की पर्वतीय और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ हवाई सेवाओं के संचालन की लागत को बढ़ाती हैं।
  • कम यात्री भार और सीमित बुनियादी ढाँचा भी लागत वृद्धि का कारण बनता है।

2. बुनियादी ढाँचे का विकास

  • नए हवाई अड्डों का निर्माण और मौजूदा हवाई अड्डों का उन्नयन एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए पर्याप्त भूमि और निवेश की आवश्यकता होती है।
  • मौसम संबंधी चुनौतियाँ, जैसे कोहरा और बर्फबारी, हवाई संचालन को प्रभावित करती हैं, जिसके लिए उन्नत नेविगेशन प्रणालियों की आवश्यकता है।

3. व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) का मुद्दा

  • राज्य सरकार द्वारा 90:10 VGF अनुपात की मांग केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर दबाव डाल सकती है।
  • VGF का उचित और कुशल उपयोग सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि सब्सिडी का दुरुपयोग न हो।

4. पर्यावरणीय प्रभाव

  • नए हवाई अड्डों के निर्माण और हवाई सेवाओं के विस्तार से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन और प्रबंधन आवश्यक है।
  • पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सतत विकास सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पहाड़ी भूभाग हवाई अड्डों के निर्माण और संचालन की उच्च लागत, सीमित विस्तार क्षमता।
मौसम की प्रतिकूलता कोहरा, बर्फबारी और खराब दृश्यता के कारण उड़ानों में देरी या रद्द होना।
कम यात्री घनत्व कुछ मार्गों पर आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने में कठिनाई।
पर्यावरण संतुलन विकास परियोजनाओं का नाजुक पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर VGF का बढ़ता बोझ, विशेषकर यदि 90:10 अनुपात लागू न हो।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • क्षेत्रीय संपर्क योजना-उड़ान (Regional Connectivity Scheme-UDAN)

आगे की राह

  • हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए VGF अनुपात को संशोधित कर 90:10 करने पर विचार किया जाना चाहिए।
  • हवाई अड्डों के बुनियादी ढाँचे के विकास और उन्नयन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • उन्नत नेविगेशन और लैंडिंग प्रणालियों (जैसे RNP-AR) का उपयोग करके प्रतिकूल मौसम में भी सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्री भार बढ़ाने के लिए लक्षित विपणन रणनीतियाँ अपनाई जानी चाहिए।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को सख्ती से लागू किया जाए और सतत विकास सिद्धांतों का पालन किया जाए।
  • हवाई सेवाओं को अन्य परिवहन माध्यमों, जैसे सड़क और रेल, के साथ एकीकृत किया जाए ताकि मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उड़ान योजना · क्षेत्रीय हवाई संपर्क · व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) · नागर विमानन मंत्रालय · भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) · पर्वतीय क्षेत्र विकास · बुनियादी ढाँचा · आर्थिक संवृद्धि · पर्यटन संवर्धन · संघवाद

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा अनुदान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ सूची में विमानन’}

अवधारणा प्रवाह

हिमाचल में हवाई संपर्क की आवश्यकता  →  संशोधित उड़ान योजना के तहत त्रिपक्षीय समझौता  →  VGF के माध्यम से वित्तीय सहायता  →  हवाई सेवाओं का विस्तार और संचालन  →  पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उड़ान (UDAN) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य देश के दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई संपर्क को बढ़ावा देना है।
3. व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) क्षेत्रीय मार्गों पर एयरलाइंस के नुकसान को कम करने के लिए प्रदान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि उड़ान योजना में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) प्रदान किया जाता है। कथन 2 सही है, इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देना है। कथन 3 भी सही है, VGF एयरलाइंस को क्षेत्रीय मार्गों पर परिचालन लागत को कवर करने में मदद करता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान’ के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है?

  1. रेल मंत्रालय
  2. नागर विमानन मंत्रालय
  3. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
  4. पर्यटन मंत्रालय

उत्तर: नागर विमानन मंत्रालय — उड़ान योजना नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) द्वारा कार्यान्वित की जाती है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान’ भारत में समावेशी विकास और पर्यटन संवर्धन में किस प्रकार सहायक है? पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: उड़ान योजना का संक्षिप्त परिचय और इसका मुख्य उद्देश्य (क्षेत्रीय हवाई संपर्क)।
2. समावेशी विकास में भूमिका: आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना।
3. पर्यटन संवर्धन में भूमिका: दूरदराज के पर्यटन स्थलों तक पहुंच, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
4. पर्वतीय क्षेत्रों में चुनौतियाँ: कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ, उच्च परिचालन लागत, सीमित बुनियादी ढाँचा, मौसम संबंधी बाधाएँ।
5. समाधान: व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) में केंद्र-राज्य अनुपात का समायोजन (जैसे 90:10), उन्नत विमानन प्रौद्योगिकी का उपयोग, छोटे हवाई अड्डों का विकास, हेलीकॉप्टर सेवाओं का विस्तार, राज्य सरकारों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के बीच सहयोग।
6. निष्कर्ष: योजना के महत्व और भविष्य की संभावनाओं पर संतुलित दृष्टिकोण।

स्रोत: amarujala.com

Himachal Pradesh PCS (HPPSC (HAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हिमाचल प्रदेश में ‘उड़ान योजना’ के अंतर्गत हाल ही में हुए त्रिपक्षीय करार का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. राज्य में 10 वर्षों तक हवाई संपर्क का विस्तार करना
  2. राज्य के सभी जिलों में अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवाओं की शुरुआत करना
  3. राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को सीधी हवाई सेवाओं से जोड़ना
  4. राज्य में निजी हवाई अड्डों का निर्माण कराना

उत्तर: राज्य में 10 वर्षों तक हवाई संपर्क का विस्तार करना — त्रिपक्षीय करार का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में अगले 10 वर्षों तक हवाई संपर्क का विस्तार करना है, जिससे राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों तक बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

Mains: हिमाचल प्रदेश में ‘उड़ान योजना’ के तहत हुए त्रिपक्षीय करार के प्रमुख लाभों और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य के हवाई संपर्क विकास में इसके संभावित प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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