25 Sep हिमाचल में 70+ बुजुर्गों के लिए घर-घर स्वास्थ्य अभियान: 1 अक्टूबर से शुरू, जानें पूरी योजना
✎ हिमाचल प्रदेश का घर-द्वार स्वास्थ्य जाँच अभियान 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को उनके घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हो सके।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय (Social Justice): स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ। | GS Paper II — शासन (Governance): स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन। | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी व्यय, सामाजिक क्षेत्र की पहलें।
- Prelims: हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग, घर-द्वार स्वास्थ्य जाँच अभियान, बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), सिविल अस्पताल, आदर्श स्वास्थ्य संस्थान
- Essay: भारत में बुजुर्गों के स्वास्थ्य और कल्याण की चुनौतियाँ एवं समाधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने में सरकार की भूमिका, डिजिटल स्वास्थ्य और दूरस्थ चिकित्सा का भविष्य
त्वरित पुनरावृत्ति: हिमाचल प्रदेश का घर-द्वार स्वास्थ्य जाँच अभियान 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को उनके घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित हो सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने 1 अक्तूबर से 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए घर-द्वार स्वास्थ्य जाँच अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य बुजुर्गों को उनके घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है, जिससे उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने की आवश्यकता न पड़े। यह कदम राज्य सरकार के बजट भाषण में की गई घोषणा को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
पृष्ठभूमि
- भारत में बुजुर्ग आबादी का एक बड़ा हिस्सा है, जिनकी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएँ विशिष्ट होती हैं।
- अस्पतालों तक पहुँच, विशेषकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में, बुजुर्गों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
- कई बुजुर्गों को उम्र या आवाजाही की समस्याओं के कारण नियमित स्वास्थ्य जाँच कराने में कठिनाई होती है।
- सरकारें विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से बुजुर्गों के स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने का प्रयास करती रही हैं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना और अंतिम मील तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना एक प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता है।
- कोविड-19 महामारी ने घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाओं और टेलीमेडिसिन (Telemedicine) के महत्व को और उजागर किया है।
हिमाचल प्रदेश का घर-द्वार स्वास्थ्य जाँच अभियान क्या है?
- यह अभियान हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए शुरू की गई एक पहल है।
- इसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को उनके घर पर ही सामान्य स्वास्थ्य जाँच और आवश्यक उपचार प्रदान करना है।
- अभियान के तहत, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), सिविल अस्पतालों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के स्तर पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें गठित की जाएँगी।
- ये टीमें बुजुर्गों के घर जाकर रक्तचाप (BP), शुगर (Sugar) जैसी सामान्य स्वास्थ्य जाँच करेंगी और उनकी बीमारी व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की जानकारी जुटाएँगी।
- जाँच के दौरान बीमारी के लक्षण पाए जाने पर मौके पर ही आवश्यक उपचार और दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
- गंभीर बीमारी वाले या अस्पताल में उपचार की आवश्यकता वाले मामलों को संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाएगा।
- यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में बुजुर्गों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच सीमित है।
- यह पहल समय रहते बीमारियों की पहचान करने और बुजुर्गों को समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान करने में मदद करेगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए | यह योजना विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को लक्षित करती है, जो स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में अधिक कठिनाई का सामना करते हैं। |
| घर-द्वार पर स्वास्थ्य परीक्षण | बुजुर्गों को अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनकी आवाजाही की परेशानी कम होगी और समय पर स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित होगी। |
| डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), सिविल अस्पतालों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों से प्रशिक्षित टीमें गठित की जाएंगी, जो गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करेंगी। |
| सामान्य जांच और दवाइयां | रक्तचाप (BP), शुगर (Sugar) जैसी सामान्य जांचें घर पर ही की जाएंगी और आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। |
| गंभीर मामलों को रेफर करना | यदि किसी बुजुर्ग को गंभीर बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं, तो उन्हें आगे के उपचार के लिए संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाएगा। |
| ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों पर विशेष ध्यान | यह अभियान ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और भी कठिन होती है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार: घर पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से बुजुर्गों को सम्मानजनक और आरामदायक जीवन जीने में मदद मिलेगी, क्योंकि उन्हें अस्पताल जाने की कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी।
- स्वास्थ्य असमानता में कमी: ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करके क्षेत्रीय स्वास्थ्य असमानताओं को कम किया जा सकेगा।
- समय पर बीमारियों की पहचान और उपचार: नियमित घर-द्वार जांच से बीमारियों का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाया जा सकेगा, जिससे गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकेगा और उपचार अधिक प्रभावी होगा।
शासन और नीतिगत महत्व
- बजट घोषणा का क्रियान्वयन: यह योजना मुख्यमंत्री के बजट भाषण में की गई घोषणा को धरातल पर उतारती है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- नागरिक-केंद्रित शासन: यह पहल नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-centric governance) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ सरकार नागरिकों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार सेवाएं प्रदान करती है।
- प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करना: घर-द्वार स्वास्थ्य जांच प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (Primary healthcare) प्रणाली को मजबूत करती है, जो समग्र स्वास्थ्य प्रणाली की नींव है।
आर्थिक महत्व
- स्वास्थ्य देखभाल लागत में कमी: प्रारंभिक पहचान और उपचार से गंभीर बीमारियों के लिए महंगे अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता कम हो सकती है, जिससे व्यक्तियों और सरकार दोनों के लिए स्वास्थ्य देखभाल लागत में कमी आएगी।
- कार्यबल की उत्पादकता में वृद्धि: स्वस्थ बुजुर्ग परिवार के सदस्यों पर कम बोझ डालते हैं, जिससे युवा कार्यबल अपनी उत्पादकता पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाता है।
- स्वास्थ्य पर्यटन पर निर्भरता में कमी: स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से लोगों की बड़े शहरों या अन्य राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाने की निर्भरता कम होगी।
चुनौतियाँ
1. मानव संसाधन की कमी
- डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता: दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी एक बड़ी चुनौती हो सकती है, जिससे टीमों के गठन और निरंतर संचालन में बाधा आ सकती है।
- प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: घर-द्वार सेवाओं के लिए स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी, जिसमें बुजुर्गों की देखभाल, पोर्टेबल उपकरणों का उपयोग और डेटा संग्रह शामिल है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/स्वास्थ्य
2. बुनियादी ढाँचा और उपकरण
- पोर्टेबल उपकरणों की उपलब्धता: रक्तचाप मापने वाले उपकरण, ग्लूकोमीटर और अन्य नैदानिक किट जैसे पोर्टेबल चिकित्सा उपकरणों की पर्याप्त आपूर्ति और रखरखाव सुनिश्चित करना।
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स: ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों तक टीमों और उपकरणों को पहुँचाने के लिए मजबूत परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा/स्वास्थ्य
3. डेटा प्रबंधन और निगरानी
- स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण: बुजुर्गों के स्वास्थ्य डेटा को प्रभावी ढंग से एकत्र, संग्रहीत और विश्लेषण करने के लिए एक मजबूत डिजिटल प्रणाली की आवश्यकता होगी।
- योजना का मूल्यांकन: योजना की प्रभावशीलता का नियमित मूल्यांकन और प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करना ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस/स्वास्थ्य
4. जागरूकता और स्वीकार्यता
- बुजुर्गों और परिवारों में जागरूकता: योजना के लाभों के बारे में बुजुर्गों और उनके परिवारों को जागरूक करना ताकि वे इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।
- विश्वास और स्वीकार्यता: घर पर स्वास्थ्य जांच के प्रति बुजुर्गों और समुदायों में विश्वास और स्वीकार्यता विकसित करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/स्वास्थ्य
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| चिकित्सा स्टाफ की कमी | दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, जिससे सेवाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है। |
| लॉजिस्टिक्स और परिवहन | ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य टीमों और आवश्यक उपकरणों को समय पर पहुँचाना, विशेषकर खराब मौसम की स्थिति में, एक जटिल कार्य है। |
| डेटा प्रबंधन | बड़ी संख्या में बुजुर्गों के स्वास्थ्य डेटा को प्रभावी ढंग से एकत्र करना, संग्रहीत करना और विश्लेषण करना, साथ ही गोपनीयता सुनिश्चित करना। |
| गुणवत्ता नियंत्रण | घर-द्वार पर प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मानकीकरण बनाए रखना, ताकि अस्पताल जैसी देखभाल सुनिश्चित हो सके। |
| फंडिंग की निरंतरता | योजना के दीर्घकालिक संचालन के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission – NHM)
आगे की राह
- स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती और प्रशिक्षण: डॉक्टरों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं सहित पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती की जाए और उन्हें घर-द्वार देखभाल के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
- डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली: बुजुर्गों के स्वास्थ्य डेटा को ट्रैक करने, विश्लेषण करने और साझा करने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली विकसित की जाए।
- मोबाइल मेडिकल यूनिट्स का उपयोग: दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए सुसज्जित मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (Mobile Medical Units) का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।
- सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता: स्थानीय समुदायों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों को शामिल करके योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए और स्वीकार्यता सुनिश्चित की जाए।
- टेलीमेडिसिन सेवाओं का एकीकरण: विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श के लिए टेलीमेडिसिन (Telemedicine) सेवाओं को घर-द्वार जांच के साथ एकीकृत किया जाए।
- नियमित मूल्यांकन और प्रतिक्रिया तंत्र: योजना की प्रभावशीलता का नियमित मूल्यांकन किया जाए और प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी: स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) के अवसरों का पता लगाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल · घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाएँ · सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज · प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल · आयुष्मान भारत · सामाजिक न्याय · कल्याणकारी राज्य · स्वास्थ्य नीति
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वास्थ्य का अधिकार, गरिमापूर्ण जीवन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘बेरोजगारी, बुढ़ापे में सहायता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर, लोक स्वास्थ्य सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
बुजुर्गों को अस्पताल पहुँचने में कठिनाई → सरकार द्वारा घर-द्वार स्वास्थ्य जांच अभियान की घोषणा → स्वास्थ्य टीमों का गठन और प्रशिक्षण → बुजुर्गों के घर पर स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार → समय पर बीमारियों की पहचान और प्रबंधन → बुजुर्गों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 स्वास्थ्य के अधिकार को जीवन के अधिकार के एक अंतर्निहित भाग के रूप में मान्यता देता है।
2. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का उद्देश्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करना है।
3. हिमाचल प्रदेश की ‘घर-द्वार स्वास्थ्य जांच’ योजना 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों पर केंद्रित है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है: सर्वोच्च न्यायालय ने कई निर्णयों में अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य के अधिकार को जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग माना है। कथन 2 सही है: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का मुख्य उद्देश्य सभी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण के उच्चतम संभव स्तर को प्राप्त करना है, जिसमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज शामिल है। कथन 3 सही है: हिमाचल प्रदेश सरकार की यह नई पहल विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को उनके घर पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने पर केंद्रित है।
Q2. आयुष्मान भारत योजना के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह योजना प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को कवर करती है।
2. इसके दो मुख्य घटक हैं: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) और स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWCs)।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: 1 और 2 दोनों — कथन 1 सही है: आयुष्मान भारत योजना एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाती है जो प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के माध्यम से और माध्यमिक तथा तृतीयक देखभाल के लिए PMJAY के माध्यम से हस्तक्षेप करती है। कथन 2 सही है: आयुष्मान भारत के दो प्रमुख स्तंभ PMJAY (जो अस्पताल में भर्ती होने पर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है) और स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करते हैं) हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बुजुर्ग आबादी के लिए घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश सरकार की पहल को ध्यान में रखते हुए, इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में बुजुर्ग आबादी के बढ़ते अनुपात और उनकी विशिष्ट स्वास्थ्य आवश्यकताओं का संक्षिप्त उल्लेख। घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाओं की अवधारणा और आवश्यकता को परिभाषित करें।
2. घर-द्वार स्वास्थ्य सेवाओं का महत्व: बुजुर्गों के लिए इन सेवाओं के लाभों पर प्रकाश डालें, जैसे पहुँच में सुधार, अस्पताल के बोझ को कम करना, समय पर निदान, भावनात्मक समर्थन और जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि।
3. हिमाचल प्रदेश की पहल का संदर्भ: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए शुरू की गई ‘घर-द्वार स्वास्थ्य जांच’ अभियान का उल्लेख करें, जिसमें डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमों द्वारा घर पर ही जांच, उपचार और रेफरल शामिल हैं।
4. प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:
क. दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच: पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन और कनेक्टिविटी की समस्या।
ख. मानव संसाधन: डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
ग. वित्तीय संसाधन: इन सेवाओं को बनाए रखने के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण।
घ. प्रौद्योगिकी का उपयोग: दूरस्थ निगरानी और डेटा प्रबंधन के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी।
ङ. जागरूकता और स्वीकृति: बुजुर्गों और उनके परिवारों के बीच इन सेवाओं के बारे में जागरूकता की कमी।
च. गुणवत्ता नियंत्रण: प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवत्ता और मानकीकरण सुनिश्चित करना।
5. संभावित समाधान:
क. सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण और उपयोग।
ख. टेलीमेडिसिन (Telemedicine) और मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों का विस्तार।
ग. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना।
घ. स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के साथ एकीकरण।
ङ. जागरूकता अभियान और स्थानीय निकायों की भागीदारी।
च. नियमित निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली स्थापित करना।
6. निष्कर्ष: बुजुर्गों के लिए समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में घर-द्वार सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराएँ और एक कल्याणकारी राज्य के रूप में सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दें।
स्रोत: amarujala.com
Himachal Pradesh PCS (HPPSC (HAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू किए जा रहे ‘घर पहुंचेगा अस्पताल’ अभियान के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में लागू होगा
- B. अभियान 1 अक्टूबर 2023 से शुरू किया जाएगा
- C. इसका उद्देश्य केवल बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करना है
- D. यह अभियान हिमाचल प्रदेश में पहली बार शुरू किया जा रहा है
उत्तर: B. अभियान 1 अक्टूबर 2023 से शुरू किया जाएगा — अभियान 1 अक्टूबर 2023 से शुरू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों के घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
Mains: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ‘घर पहुंचेगा अस्पताल’ अभियान शुरू करने के पीछे प्रमुख उद्देश्यों एवं चुनौतियों का वर्णन कीजिए। इसके अलावा, इस अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु सुझाव प्रस्तुत कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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