आईपीयू 153वीं सभा: हरिवंश ने अरुशा में रखा भारत का पक्ष, अध्यक्ष चुने गए मिल्टन डिक

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आईपीयू 153वीं सभा: हरिवंश ने अरुशा में रखा भारत का पक्ष, अध्यक्ष चुने गए मिल्टन डिक

आईपीयू सभा में भारत की भूमिकाभारतीय टीम अरुशा पहुंच08 अक्टूबर 2026वैश्विक मुद्दों पर चर्जलवायु आपदा, सुशासनभारत ने अपना पक्ष रखानए अध्यक्ष चुनावद्विपक्षीय-बहुपक्षीय ससंसदीय सहयोगभारत की भूमिका मजबूत हवैश्विक लोकतंत्र
आईपीयू सभा में भारत की भूमिका

✎ अंतर-संसदीय संघ (IPU) राष्ट्रीय संसदों का एक वैश्विक संगठन है जो संसदीय कूटनीति के माध्यम से शांति, लोकतंत्र और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper II — भारतीय संविधान और राजव्यवस्था
  • Prelims: अंतर-संसदीय संघ (IPU), राज्यसभा के उप-सभापति, संसदीय प्रतिनिधिमंडल, जलवायु-संबंधी आपदाएँ, लोकतंत्र और मानवाधिकार, संयुक्त राष्ट्र मामले, सतत विकास, संसद का बजट, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
  • Essay: लोकतंत्र के वैश्विक सुदृढीकरण में संसदीय कूटनीति की भूमिका, जलवायु परिवर्तन: एक वैश्विक चुनौती और बहुपक्षीय समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: अंतर-संसदीय संघ (IPU) राष्ट्रीय संसदों का एक वैश्विक संगठन है जो संसदीय कूटनीति के माध्यम से शांति, लोकतंत्र और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

राज्यसभा के माननीय उप-सभापति श्री हरिवंश के नेतृत्व में एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने तंजानिया के अरुशा में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union – IPU) की 153वीं सभा में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस सभा में जलवायु-संबंधी आपदाओं, सुशासन, लोकतंत्र एवं मानवाधिकार, संयुक्त राष्ट्र मामलों और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न चर्चाओं में भारत का पक्ष रखा और IPU के नए अध्यक्ष के चुनाव में भी भाग लिया।

पृष्ठभूमि

  • अंतर-संसदीय संघ (IPU) राष्ट्रीय संसदों का एक वैश्विक संगठन है, जिसकी स्थापना 1889 में हुई थी। यह संसदीय कूटनीति और संवाद के माध्यम से शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • IPU सदस्य देशों के सांसदों को वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने और समाधान खोजने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • भारत IPU का एक सक्रिय सदस्य रहा है और विभिन्न वैश्विक मंचों पर संसदीय सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • IPU की सभाएँ नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं, जहाँ सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर प्रस्तावों पर चर्चा करते हैं और उन्हें अपनाते हैं।
  • हाल ही में, IPU की 153वीं सभा में ‘हिमालयी क्षेत्र तथा अन्य संवेदनशील इलाकों में जलवायु-संबंधी आपदाओं से निपटने और प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने हेतु तत्काल संसदीय कार्रवाई’ जैसे आपातकालीन विषयों पर चर्चा की गई।
  • भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने ‘समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के माध्यम से सुशासन को प्रोत्साहन और समुदायों का सशक्तिकरण’ जैसे विषयों पर भी अपनी राय रखी।

अंतर-संसदीय संघ (IPU) क्या है?

  • अंतर-संसदीय संघ (IPU) दुनिया भर के राष्ट्रीय संसदों का एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। इसकी स्थापना 1889 में हुई थी और यह सबसे पुराने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में से एक है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य संसदीय कूटनीति और संवाद के माध्यम से शांति, लोकतंत्र, मानवाधिकार और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
  • IPU संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है और संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।
  • यह विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर सांसदों को एक साथ लाता है ताकि वे विचारों का आदान-प्रदान कर सकें, अनुभव साझा कर सकें और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दे सकें।
  • IPU की संरचना में एक अध्यक्ष, एक शासी परिषद, कार्यकारी समिति और विभिन्न स्थायी समितियाँ शामिल हैं जो विशिष्ट विषयों पर काम करती हैं।
  • यह संसदों की क्षमता निर्माण में भी सहायता करता है और लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 153वीं सभा वैश्विक संसदीय मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
जलवायु-संबंधी आपदाओं पर चर्चा जलवायु परिवर्तन के वैश्विक मुद्दे पर भारत की प्रतिबद्धता और नेतृत्व को रेखांकित करता है।
सुशासन और समुदायों का सशक्तिकरण भारत के आंतरिक शासन मॉडल और विकास दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर।
लोकतंत्र एवं मानवाधिकार पर स्थायी समिति लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के संरक्षण में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
संयुक्त राष्ट्र मामलों की स्थायी समिति संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार और वैश्विक शांति स्थापना में भारत के योगदान पर चर्चा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और काम का भविष्य तकनीकी प्रगति और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर भारत के दृष्टिकोण को साझा करना।

महत्व

कूटनीतिक महत्व

  • अंतर-संसदीय संघ (IPU) जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक कूटनीति में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
  • भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति विभिन्न देशों के सांसदों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद को बढ़ावा देती है, जिससे आपसी समझ और सहयोग बढ़ता है।
  • जलवायु परिवर्तन, सुशासन और मानवाधिकार जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत होती है।

संसदीय महत्व

  • यह भारतीय सांसदों को अन्य देशों की सर्वोत्तम संसदीय प्रथाओं और विधायी प्रक्रियाओं से सीखने का अवसर प्रदान करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को प्रदर्शित करता है, जिससे वैश्विक लोकतंत्र को मजबूती मिलती है।
  • विभिन्न स्थायी समितियों में भागीदारी भारतीय संसद को वैश्विक विधायी एजेंडे को प्रभावित करने और उसमें योगदान करने में सक्षम बनाती है।

वैश्विक शासन में योगदान

  • जलवायु-संबंधी आपदाओं, संघर्ष समाधान और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा में भारत की भागीदारी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में इसके योगदान को दर्शाती है।
  • संयुक्त राष्ट्र मामलों पर चर्चा में भागीदारी संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को मजबूत करने और वैश्विक शांति व सुरक्षा को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों को रेखांकित करती है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण साझा करना वैश्विक तकनीकी शासन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

चुनौतियाँ

1. जलवायु परिवर्तन से निपटने में वैश्विक सहयोग

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विभिन्न देशों के बीच आम सहमति और प्रभावी कार्रवाई का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
  • विकासशील देशों को जलवायु अनुकूलन और शमन के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता की आवश्यकता है, जिसकी उपलब्धता अक्सर अपर्याप्त होती है।

2. लोकतंत्र और मानवाधिकारों का संरक्षण

  • विश्व के कई हिस्सों में लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के हनन की घटनाएं देखी जा रही हैं, जिससे इन मुद्दों पर वैश्विक सहमति बनाना कठिन हो जाता है।
  • आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और संप्रभुता के सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित करना एक जटिल चुनौती है।

3. संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अंगों में सुधार की आवश्यकता है ताकि वे वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सकें।
  • वीटो शक्ति का दुरुपयोग और सदस्य देशों के बीच राजनीतिक मतभेद अक्सर संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता को बाधित करते हैं।

4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नैतिक और सामाजिक प्रभाव

  • AI के तेजी से विकास के साथ, इसके नैतिक निहितार्थों, रोजगार पर प्रभाव और डेटा गोपनीयता जैसे मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर नियामक ढांचा विकसित करना एक चुनौती है।
  • AI के लाभों को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना और डिजिटल विभाजन को कम करना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
जलवायु-संबंधी आपदाएँ हिमालयी क्षेत्र जैसे संवेदनशील इलाकों में बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता, जिससे जीवन और आजीविका को खतरा।
सुशासन का अभाव भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही का अभाव, जिससे समुदायों का सशक्तिकरण बाधित होता है।
लोकतंत्र और मानवाधिकार दुनिया भर में लोकतांत्रिक सिद्धांतों का क्षरण और मानवाधिकारों के उल्लंघन की बढ़ती घटनाएँ।
संघर्ष समाधान संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की सीमाओं के कारण संघर्षों को रोकने और सुलझाने में चुनौतियाँ।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) AI के नैतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव, विशेषकर रोजगार के भविष्य पर चिंताएँ।
संसदीय वित्तपोषण संसद के लिए पर्याप्त और पारदर्शी वित्तपोषण सुनिश्चित करना, विशेषकर विकासशील देशों में।

आगे की राह

  • अंतर-संसदीय संघ (IPU) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी जारी रखी जाए ताकि वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने हेतु भारत को अपनी नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए और विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों को बढ़ावा देने में भारत को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
  • संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधारों के लिए भारत को अपनी मांग को दोहराना चाहिए, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक और सामाजिक प्रभावों पर वैश्विक संवाद में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए और एक समावेशी AI शासन ढांचा विकसित करने में योगदान देना चाहिए।
  • संसदीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए अन्य देशों की सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन और उन्हें अपनाना चाहिए।
  • भारतीय संसद को अपने बजट आवंटन और व्यय प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अंतर-संसदीय संघ (IPU) · संसदीय कूटनीति · जलवायु परिवर्तन · सतत विकास · सुशासन · लोकतंत्र और मानवाधिकार · संयुक्त राष्ट्र मामले · संसद का बजट · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · बहुपक्षीय मंच

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 253’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करना’}

अवधारणा प्रवाह

भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल IPU सभा में भाग लेता है।  →  जलवायु परिवर्तन, सुशासन, मानवाधिकार जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होती है।  →  भारत अपना पक्ष प्रस्तुत करता है और वैश्विक सहयोग का आह्वान करता है।  →  अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक और संसदीय भूमिका मजबूत होती है।  →  वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत का योगदान बढ़ता है।  →  अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंध सुदृढ़ होते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. अंतर-संसदीय संघ (IPU) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. IPU एक वैश्विक संगठन है जो दुनिया के संसदों को एक साथ लाता है।
2. यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक विशेष अभिकरण है।
3. इसका उद्देश्य लोकतंत्र, मानवाधिकार और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि IPU वास्तव में दुनिया के संसदों को एक साथ लाने वाला एक वैश्विक संगठन है। कथन 2 गलत है क्योंकि IPU संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का विशेष अभिकरण नहीं है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करने वाला एक स्वतंत्र संगठन है। कथन 3 सही है क्योंकि IPU के प्रमुख उद्देश्यों में लोकतंत्र, मानवाधिकार और सतत विकास को बढ़ावा देना शामिल है।

Q2. अभिकथन (A): भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के हितों और दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करता है।
कारण (R): यह संसदीय कूटनीति के माध्यम से वैश्विक मुद्दों पर आम सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि संसदीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के राष्ट्रीय हितों और दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि संसदीय कूटनीति वैश्विक चुनौतियों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आम सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो अभिकथन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अंतर-संसदीय संघ (IPU) जैसे बहुपक्षीय मंचों में संसदीय कूटनीति के महत्व का परीक्षण कीजिए। वैश्विक शासन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में भारतीय संसद की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** संसदीय कूटनीति और अंतर-संसदीय संघ (IPU) का संक्षिप्त परिचय। IPU के गठन और उद्देश्यों पर प्रकाश डालें।
2. **संसदीय कूटनीति का महत्व:**
* अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर राष्ट्रीय दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व।
* लोकतंत्र और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना।
* जलवायु परिवर्तन, सतत विकास जैसे वैश्विक चुनौतियों पर आम सहमति बनाना।
* संसदों के बीच अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान।
* अंतर्राष्ट्रीय संधियों और समझौतों के अनुसमर्थन में भूमिका।
3. **वैश्विक शासन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में भारतीय संसद की भूमिका:**
* IPU जैसी संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी।
* भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों का प्रदर्शन।
* विकासशील देशों के मुद्दों को उठाना।
* ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत के अनुरूप वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना।
* विभिन्न स्थायी समितियों (जैसे लोकतंत्र एवं मानवाधिकार, संयुक्त राष्ट्र मामले, सतत विकास) में योगदान।
* भारत की विदेश नीति को संसदीय समर्थन प्रदान करना।
4. **निष्कर्ष:** संसदीय कूटनीति की बढ़ती प्रासंगिकता और भारत की वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षाओं में इसकी भूमिका का सारांश।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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