31 Oct ग्राम पंचायतों में ईवी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन: सीईएसएल की पहल
✎ ग्राम पंचायतें अपनी भूमि पर विद्युत वाहन आवेशन व बैटरी विनिमय केंद्रों से स्वस्रोत राजस्व बढ़ा सकती हैं, और यह पहल अनुच्छेद 243G व 243H में निहित पंचायती वित्तीय स्वायत्तता के उद्देश्य से जुड़ी है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (Governance): स्थानीय शासन, पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्वायत्तता, 73वाँ संविधान संशोधन | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): अवसंरचना विकास, स्वच्छ ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की भूमिका | GS Paper III — पर्यावरण (Environment): जलवायु परिवर्तन शमन, कार्बन उत्सर्जन में कमी, संक्रमण-आधारित ऊर्जा नीति
- Prelims: 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 और भाग IX (ग्राम पंचायतें), अनुच्छेद 243G (पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और दायित्व), अनुच्छेद 243H (पंचायतों को कर, शुल्क आदि लगाने और वसूलने की शक्ति), ग्यारहवीं अनुसूची (पंचायतों के 29 विषय), स्वस्रोत राजस्व (Own Source Revenue), ऊर्जा दक्षता सेवाएँ लिमिटेड (EESL) और कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL): विद्युत मंत्रालय के अधीन, पीएम ई-बस सेवा (PM e-Bus Sewa): भारी उद्योग मंत्रालय की योजना, बैटरी विनिमय नीति (Battery Swapping Policy): विद्युत मंत्रालय
- Essay: स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता: क्या पंचायतें विकास की स्वावलंबी इकाई बन सकती हैं?, स्वच्छ गतिशीलता का विकेन्द्रीकरण: ग्रामीण भारत और ऊर्जा संक्रमण
त्वरित पुनरावृत्ति: ग्राम पंचायतें अपनी भूमि पर विद्युत वाहन आवेशन व बैटरी विनिमय केंद्रों से स्वस्रोत राजस्व बढ़ा सकती हैं, और यह पहल अनुच्छेद 243G व 243H में निहित पंचायती वित्तीय स्वायत्तता के उद्देश्य से जुड़ी है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने ग्राम पंचायतों को अपनी भूमि पर विद्युत वाहन आवेशन केंद्र और बैटरी विनिमय केंद्र विकसित करने में सक्षम बनाने की पहल की है। पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) और कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के बीच इस संबंध में सहयोग की रूपरेखा तय करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। CESL ऊर्जा दक्षता सेवाएँ लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जो विद्युत मंत्रालय के अधीन है। इस पहल का उद्देश्य ग्राम, खंड और जिला पंचायतों के कम उपयोग या अनुपयोगी सार्वजनिक संपत्तियों को उत्पादक आर्थिक संसाधन में बदलना है। इन केंद्रों से होने वाली आय पंचायतों के स्वस्रोत राजस्व को बढ़ा सकती है, और इससे स्वच्छ गतिशीलता के संक्रमण में ग्रामीण स्थानीय निकायों की भूमिका भी सुदृढ़ होगी। मंत्रालय ने शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में CESL के योगदान को पीएम ई-बस सेवा के संदर्भ में सराहा है।
पृष्ठभूमि
- भारत में पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन (1992) से मिला, जिसके तहत संविधान में भाग IX और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई। अनुच्छेद 243G राज्य विधानमंडल को पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ सौंपने का अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 243H के अंतर्गत राज्य विधानमंडल पंचायतों को कर, शुल्क, पथकर और शुल्क वसूलने के अधिकार दे सकते हैं। इसी से स्वस्रोत राजस्व की संवैधानिक नींव बनती है, किंतु पंचायतों की अधिकांश आय अब भी राज्य और केंद्र के हस्तांतरण पर निर्भर रहती है।
- वित्तीय हस्तांतरण की व्यवस्था अनुच्छेद 243I (राज्य वित्त आयोग) और अनुच्छेद 280 (वित्त आयोग) से जुड़ी है। राज्य वित्त आयोग राज्य की संचित निधि से स्थानीय निकायों के लिए संसाधनों के बँटवारे की सिफारिश करता है।
- विद्युत वाहन क्षेत्र में विद्युत मंत्रालय ने आवेशन अवसंरचना के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं और बैटरी विनिमय नीति के माध्यम से बैटरी-विनिमय मॉडल को बढ़ावा दिया है। इससे निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के लिए निवेश का नियामक ढाँचा तैयार हुआ है।
- EESL और CESL जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएँ ऊर्जा दक्षता और स्वच्छ गतिशीलता में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की भूमिका निभाती रही हैं। पीएम ई-बस सेवा के अंतर्गत शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती इसका प्रमुख उदाहरण है।
ग्राम पंचायतों द्वारा विद्युत वाहन आवेशन व बैटरी विनिमय अवसंरचना क्या है?
- यह पहल ग्राम पंचायतों को उनकी स्वामित्व वाली भूमि पर विद्युत वाहन आवेशन केंद्र और बैटरी विनिमय केंद्र स्थापित करने की सुविधा देती है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वच्छ गतिशीलता अवसंरचना को विकसित करना है।
- इस सहयोग के अंतर्गत ग्राम, खंड और जिला पंचायतों, तीनों स्तरों पर ऐसी सुविधाएँ विकसित करने की संभावना खोजी जा रही है।
- केंद्रों के संचालन से होने वाली आय पंचायतों के स्वस्रोत राजस्व में जुड़ती है, जिससे उनकी राजकोषीय निर्भरता कम होने की अपेक्षा है।
- पंचायती राज मंत्रालय नीति, समन्वय और ग्राम पंचायतों की भूमिका का ढाँचा तैयार करता है, जबकि CESL तकनीकी और परिचालन सहायता देने वाली संस्था के रूप में कार्य करती है।
- बैटरी विनिमय मॉडल में वाहन की खाली बैटरी के बदले चार्ज की हुई बैटरी उपलब्ध कराई जाती है। इससे चार्जिंग में लगने वाला समय घटता है, विशेषकर दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए यह उपयोगी माना जाता है।
- सार्वजनिक संपत्तियों के सदुपयोग के साथ यह अवसंरचना स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और कार्बन उत्सर्जन में कमी के राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी जुड़ती है।
- संवैधानिक दृष्टि से यह पहल पंचायतों के अनुच्छेद 243G के अधिकार-क्षेत्र और उनकी राजस्व क्षमता के सुदृढ़ीकरण से संबंधित है। भूमि और परिसंपत्ति का प्रबंधन राज्य के कानूनों और नियमों के अनुसार ही होगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संस्थागत व्यवस्था | पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) और ऊर्जा दक्षता सेवाएँ लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से ढाँचा तय किया गया |
| भूमि का उपयोग | ग्राम पंचायतों की स्वामित्व वाली भूमि पर विद्युत वाहन (Electric Vehicle, EV) चार्जिंग और बैटरी बदलने की सुविधा (Battery Swapping) स्थापित करने की अनुमति |
| राजस्व सृजन | चार्जिंग और बैटरी बदलने की सुविधा के संचालन से होने वाली आय स्व-स्रोत राजस्व (Own Source Revenue, OSR) में जुड़ेगी, जिससे पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ेगी |
| प्रशासनिक स्तर | ग्राम, खंड और जिला तीनों स्तर की पंचायतों को परियोजना के दायरे में रखा गया है |
| सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग | कम उपयोग या अप्रयुक्त सार्वजनिक संपत्तियों को उत्पादक आर्थिक संसाधन में बदलने का अवसर |
| जलवायु और ऊर्जा संक्रमण | परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ गतिशीलता की ओर संक्रमण को ग्रामीण स्तर तक ले जाना |
महत्व
आर्थिक
- पंचायतों के स्व-स्रोत राजस्व में वृद्धि से ग्रामीण स्थानीय निकायों की केंद्र और राज्य अंतरणों पर निर्भरता कम होने की संभावना है।
- निष्क्रिय सार्वजनिक संपत्ति के उत्पादक उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए राजस्व स्रोत बनते हैं और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर खुल सकते हैं।
पंचायती राज और शासन
- ग्राम पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयनकर्ता के बजाय राजस्व-सृजन करने वाली संस्थाओं के रूप में देखा जा रहा है, जो 73वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप है।
- समझौता ज्ञापन के आधार पर बनने वाला ढाँचा केंद्र, राज्य और पंचायत के बीच समन्वित भूमिका का उदाहरण है।
ऊर्जा और पर्यावरण
- विद्युत गतिशीलता को गाँवों तक पहुँचाने से परिवहन क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में प्रगति होगी।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लक्ष्यों में योगदान देगी।
संस्थागत एवं सार्वजनिक उपक्रम
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CESL और EESL) की तकनीकी और परिचालन क्षमता का उपयोग पंचायत स्तर पर किया जा रहा है, जिससे राज्य-उपक्रम और स्थानीय निकाय के बीच साझेदारी का नया मॉडल सामने आता है।
चुनौतियाँ
1. भूमि और संपत्ति का स्वामित्व
- पंचायत की भूमि के रिकॉर्ड अनेक राज्यों में अद्यतन नहीं हैं, जिससे परियोजना के लिए भूमि की स्पष्ट उपलब्धता तय करना कठिन हो सकता है।
- भूमि के उपयोग हेतु पट्टा या अनुबंध की शर्तें स्पष्ट न होने पर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: ग्रामीण स्थानीय शासन; 73वाँ संविधान संशोधन; भूमि सुधार
2. बिजली आपूर्ति और ग्रिड अवसंरचना
- ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति और वितरण नेटवर्क की कमी चार्जिंग सुविधाओं के संचालन को प्रभावित कर सकती है।
- विद्युत एक समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच नियामकीय समन्वय आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: ऊर्जा सुरक्षा; विद्युत क्षेत्र सुधार; संघवाद और समवर्ती सूची
3. पंचायतों की वित्तीय और तकनीकी क्षमता
- अनेक ग्राम पंचायतों के पास परिसंपत्ति प्रबंधन, व्यावसायिक अनुबंध और तकनीकी निगरानी का सीमित अनुभव है।
- चार्जिंग स्टेशनों का रखरखाव, बिलिंग और शिकायत निवारण पंचायत स्तर पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: पंचायतों की क्षमता निर्माण; राज्य वित्त आयोग; स्थानीय निकाय वित्त
4. प्रौद्योगिकी और मानक
- बैटरी बदलने की सुविधा के लिए बैटरी के मानकीकरण पर अभी व्यापक सहमति विकसित हो रही है, जिससे अंतर-संचालनीयता (interoperability) की समस्या आ सकती है।
- तेज़ी से बदलती बैटरी तकनीक के कारण लंबी अवधि के निवेश में अनिश्चितता बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी; मानकीकरण; नवीकरणीय ऊर्जा
5. आर्थिक व्यवहार्यता
- ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत वाहनों की संख्या सीमित होने से प्रारंभिक वर्षों में राजस्व कम रह सकता है।
- सार्वजनिक निधि और निजी निवेश के बीच जोखिम का बँटवारा स्पष्ट न होने पर परियोजनाओं की गति धीमी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक-निजी भागीदारी; स्थानीय राजस्व; आर्थिक नीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| भूमि रिकॉर्ड | पंचायत भूमि का स्पष्ट स्वामित्व और उपयोग-अधिकार सुनिश्चित करना |
| विद्युत आपूर्ति | ग्रामीण ग्रिड की क्षमता और विश्वसनीयता पर निर्भरता |
| पंचायत क्षमता | तकनीकी, वित्तीय और अनुबंध प्रबंधन में अनुभव की कमी |
| मानकीकरण | बैटरी बदलने की प्रणाली में तकनीकी और अंतर-संचालनीयता के मानक |
| वित्तीय जोखिम | प्रारंभिक वर्षों में कम मांग के कारण राजस्व की अनिश्चितता |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री ई-बस सेवा (PM e-Bus Sewa) — स्रोत में CESL की भूमिका के संदर्भ में उल्लिखित; यह मुख्यतः शहरी इलेक्ट्रिक बसों से संबंधित है
आगे की राह
- पंचायत भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड अद्यतन करके चार्जिंग एवं बैटरी बदलने के स्थलों की पहचान की जाए।
- भूमि उपयोग, राजस्व हिस्सेदारी और रखरखाव की जिम्मेदारी के लिए मानक अनुबंध-प्रारूप तैयार किया जाए।
- पंचायत प्रतिनिधियों और पंचायत सचिवों को परिसंपत्ति प्रबंधन और सार्वजनिक-निजी अनुबंध की क्षमता निर्माण प्रशिक्षण दिया जाए।
- ग्रामीण वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिए विद्युत वितरण कंपनियों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए।
- बैटरी बदलने की प्रणाली के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी मानक और अंतर-संचालनीयता के नियम विकसित किए जाएँ।
- स्व-स्रोत राजस्व के आँकड़ों की नियमित निगरानी की जाए ताकि परियोजना के आर्थिक प्रभाव का मूल्यांकन हो सके।
- राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों में ऐसी आय को पंचायतों के राजस्व-सृजन के एक स्पष्ट घटक के रूप में शामिल किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पंचायती राज संस्थाएँ (Panchayati Raj Institutions) · स्व-स्रोत राजस्व (Own Source Revenue) · अनुच्छेद 243H (Article 243H) · अनुच्छेद 243G (Article 243G) · ग्यारहवीं अनुसूची (Eleventh Schedule) · वित्त आयोग (Finance Commission) · राजकोषीय विकेंद्रीकरण (Fiscal Decentralisation) · स्वच्छ गतिशीलता (Clean Mobility) · बैटरी स्वैपिंग (Battery Swapping) · सार्वजनिक परिसंपत्तियों का उत्पादक उपयोग (Productive Use of Public Assets) · ग्राम सभा (Gram Sabha) · सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243G — पंचायतों की शक्तियाँ और दायित्व
- अनुच्छेद 243H — पंचायतों का कर और शुल्क लगाने का अधिकार
- अनुच्छेद 243I — राज्य वित्त आयोग की वित्तीय सिफारिशें
- ग्यारहवीं अनुसूची — गैर-पारंपरिक ऊर्जा और सामुदायिक परिसंपत्ति
अवधारणा प्रवाह
पंचायत-स्वामित्व वाली निष्क्रिय सार्वजनिक भूमि और संपत्ति की पहचान → मंत्रालय और सार्वजनिक उपक्रम के बीच समझौता ज्ञापन द्वारा ढाँचे का निर्धारण → पंचायत भूमि पर विद्युत वाहन चार्जिंग और बैटरी बदलने की सुविधा की स्थापना → सुविधा के संचालन से उपयोगकर्ता शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्ति → स्व-स्रोत राजस्व में वृद्धि से पंचायत की वित्तीय स्वायत्तता और विकास क्षमता में सुधार → परिवहन में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने से कार्बन उत्सर्जन में कमी और जलवायु लक्ष्यों में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 243H राज्य विधानमंडल को यह शक्ति देता है कि वह पंचायतों को कर, शुल्क, पथकर और फीस लगाने, वसूलने और उनका विनियोजन करने के लिए प्राधिकृत कर सकता है।
2. संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के लिए सौंपे जा सकने वाले 29 विषय सूचीबद्ध हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 243I के अंतर्गत पंचायतों के लिए वित्त आयोग का गठन राज्यपाल द्वारा प्रत्येक तीन वर्ष पर किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 243H पंचायतों की कर-शक्ति और निधियों से संबंधित है। कथन 2 सही है: ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय हैं, जिन्हें अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों को सौंपा जा सकता है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 243I के अनुसार वित्त आयोग का गठन प्रत्येक पाँच वर्ष पर होता है, तीन वर्ष पर नहीं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए, जिनमें एक कथन (A) और एक तर्क (R) दिया गया है:
कथन (A): ग्राम पंचायतों की भूमि पर ईवी चार्जिंग और बैटरी-स्वैपिंग केंद्र स्थापित करने से उनकी स्व-स्रोत आय बढ़ सकती है।
तर्क (R): पंचायत-स्वामित्व वाली कम उपयोग में आने वाली सार्वजनिक परिसंपत्तियों को सेवा-आधारित संचालन से राजस्व-उत्पादक संसाधनों में बदला जा सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — (A) सही है, क्योंकि चार्जिंग और स्वैपिंग सुविधाओं से पंचायतों को शुल्क-आधारित आय मिल सकती है। (R) भी सही है और वही कारण बताता है कि अनुत्पादक परिसंपत्तियाँ राजस्व का स्रोत कैसे बन सकती हैं, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I
A. कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज़ लिमिटेड (CESL)
B. ऊर्जा दक्षता सेवाएँ लिमिटेड (EESL)
C. PM e-Bus Sewa
D. ग्राम पंचायत की स्व-स्रोत आय
सूची II
1. ऊर्जा मंत्रालय के अधीन कंपनी, जो EESL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है
2. ऊर्जा मंत्रालय के अधीन ऊर्जा-दक्षता सेवाएँ देने वाली कंपनी
3. भारी उद्योग मंत्रालय की इलेक्ट्रिक बस योजना, जो बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में सहायता करती है
4. पंचायतों द्वारा अपनी संपत्ति और सेवाओं से अर्जित राजस्व
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-3, B-2, C-1, D-4
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — CESL, EESL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है (1), और EESL ऊर्जा-दक्षता सेवाएँ देने वाली कंपनी है (2)। PM e-Bus Sewa भारी उद्योग मंत्रालय की योजना है, जो बड़े शहरों में ई-बसें तैनात करने में सहायता करती है (3)। स्व-स्रोत आय पंचायतों के अपने संसाधनों से अर्जित राजस्व है (4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ग्राम पंचायतों की भूमि पर ईवी चार्जिंग और बैटरी-स्वैपिंग अवसंरचना विकसित करने की पहल को पंचायतों की स्व-स्रोत आय बढ़ाने का प्रभावी उपाय माना जा रहा है। इस पहल का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि यह संवैधानिक राजकोषीय विकेंद्रीकरण के उद्देश्य को किस सीमा तक पूरा कर सकती है। साथ ही बताइए कि इस मॉडल को व्यावहारिक बनाने के लिए किन विधिक, वित्तीय और शासकीय सुरक्षा-उपायों की आवश्यकता होगी। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु: (1) परिचय: 73वें संविधान संशोधन (1992) के बाद पंचायतों को संवैधानिक दर्जा; भाग IX, अनुच्छेद 243 से 243O; पहल का तथ्य कि MoPR और CESL (EESL की सहायक कंपनी, ऊर्जा मंत्रालय के अधीन) के बीच MoU से ग्राम, खंड और जिला पंचायतों की भूमि पर सुविधाएँ विकसित होंगी। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 243G के अंतर्गत आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ तथा ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषय, जिनमें गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत और सामुदायिक परिसंपत्तियों का रखरखाव शामिल हैं; अनुच्छेद 243H के अंतर्गत कर, शुल्क, पथकर और फीस की शक्ति; अनुच्छेद 243I के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग का गठन। (3) समर्थन में तर्क: स्व-स्रोत आय पर निर्भरता घटेगी; अनुत्पादक सार्वजनिक परिसंपत्तियों का उपयोग; के. संथानम समिति (1963), अशोक मेहता समिति (1978), जी.वी.के. राव समिति (1985) और एल.एम. सिंघवी समिति (1986) द्वारा पंचायतों की वित्तीय कमजोरी पर उठाए गए प्रश्नों का समाधान; स्वच्छ गतिशीलता और कार्बन उत्सर्जन में कमी का पर्यावरणीय लाभ। (4) विरोधी या सावधानी वाले पक्ष: भूमि राज्य का विषय है, इसलिए राज्य कानूनों और पंचायत अधिनियमों की भूमिका निर्णायक है; पंचायतों की तकनीकी और प्रबंधन क्षमता सीमित है; सार्वजनिक-निजी व्यवस्था में अनुबंध-जोखिम, राजस्व-रिसाव और पारदर्शिता की समस्या; ग्राम सभा (अनुच्छेद 243A) की सहमति और सार्वजनिक सुरक्षा-मानक; बिजली अधिनियम, 2003 के अंतर्गत शुल्क-आधारित सेवा का नियामकीय स्पष्टता। (5) शासकीय उपाय: राज्य सरकारों द्वारा भूमि-उपयोग के स्पष्ट नियम; राज्य वित्त आयोग के माध्यम से निगरानी; क्षमता-निर्माण; पारदर्शी ई-गवर्नेंस और लेखापरीक्षा; बैटरी स्वैपिंग नीति, 2022 (भारी उद्योग मंत्रालय) जैसी केंद्रीय नीतियों के साथ तालमेल। (6) निष्कर्ष: यह मॉडल स्व-स्रोत आय का व्यावहारिक स्रोत बन सकता है, पर इसकी सफलता संवैधानिक शक्तियों के हस्तांतरण, राज्य-स्तरीय नीति और पंचायत-क्षमता पर निर्भर है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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