सिंहस्थ 2028: सब्जियों और फूलों की कमी रोकने की तैयारी, जानें पूरा प्लान

सिंहस्थ 2028: सब्जियों और फूलों की कमी रोकने की तैयारी, जानें पूरा प्लान

सिंहस्थ 2028: सब्जियों और फूलों की कमी रोकने की तैयारी, जानें पूरा प्लान

सिंहस्थ 2028 सब्जी-फूल आपूर्ति प्रक्रियामांग वृद्धिसिंहस्थ आयोजनयोजना निर्माणउद्यानिकी विभागक्षेत्र चिन्हित16 हजार हेक्टेयरकिसान चयन20 हजार किसानप्रशिक्षणतकनीकी मार्गदर्शनउत्पादन वृद्धिसंकर सब्जी-फूल
सिंहस्थ 2028 सब्जी-फूल आपूर्ति प्रक्रिया

✎ सिंहस्थ 2028 की आपूर्ति योजना मांग-आधारित उद्यानिकी उत्पादन का उदाहरण है, जिसमें क्लस्टर, संकर किस्में, किसान प्रशिक्षण और FPO जैसे साधनों से धार्मिक आयोजन की अल्पकालिक मांग पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति (सिंहस्थ/कुंभ मेले का सांस्कृतिक महत्त्व; कुंभ मेले को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया जाना)  |  GS Paper II — शासन (राज्य सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना का क्रियान्वयन; राज्य विषय के रूप में कृषि/उद्यानिकी का प्रबंधन)  |  GS Paper III — कृषि (फसल विविधीकरण, उद्यानिकी फसलें, संकर किस्में, किसान उत्पादक संगठन); अर्थव्यवस्था (कृषि विपणन और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन)
  • Prelims: सिंहस्थ कुंभ मेला और उज्जैन (शिप्रा/क्षिप्रा नदी तट), कुंभ मेला: UNESCO अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची (2017), राष्ट्रीय बागवानी मिशन और MIDH (मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर), संकर (हाइब्रिड) किस्में और उनकी उपज क्षमता, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और कंपनी अधिनियम, 2013 का भाग IXA, राज्य सूची में कृषि और उद्यानिकी का विषय-क्षेत्र, शीत शृंखला (Cold Chain) और फसलोपरांत प्रबंधन, बृहस्पति का सिंह राशि में प्रवेश और सिंहस्थ का संबंध
  • Essay: धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़ती मांग और खाद्य आपूर्ति प्रबंधन: क्षेत्रीय उत्पादन योजना की भूमिका, क्लस्टर आधारित कृषि: छोटे किसानों को संगठित बाज़ार से जोड़ने की चुनौतियाँ और संभावनाएँ

त्वरित पुनरावृत्ति: सिंहस्थ 2028 की आपूर्ति योजना मांग-आधारित उद्यानिकी उत्पादन का उदाहरण है, जिसमें क्लस्टर, संकर किस्में, किसान प्रशिक्षण और FPO जैसे साधनों से धार्मिक आयोजन की अल्पकालिक मांग पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश के उद्यानिकी विभाग ने सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के दौरान उज्जैन में सब्जियों और फूलों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसके अंतर्गत उज्जैन संभाग सहित लगभग 15 जिलों में कुल 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा देने तथा 20 हजार से अधिक किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सब्जियों के लिए लगभग 8 हजार हेक्टेयर में संकर (हाइब्रिड) किस्मों की खेती और फूलों के लिए लगभग 8 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित करने की योजना है। किसानों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, विशेष क्लस्टर बनाए जा रहे हैं और मौसम के अनुरूप रोग-प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। यह तैयारी इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में अल्प अवधि में बहुत अधिक मांग उत्पन्न होती है, जिसे स्थानीय बाज़ार अकेले पूरा नहीं कर सकता।

पृष्ठभूमि

  • सिंहस्थ कुंभ मेला उज्जैन में क्षिप्रा (शिप्रा) नदी के तट पर आयोजित होता है। यह भारत के चार कुंभ स्थलों (प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन) में से एक है और इसका आयोजन बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश से जुड़ा माना जाता है।
  • कुंभ मेले को वर्ष 2017 में UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया था, जिससे इसके सांस्कृतिक और सामाजिक महत्त्व को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली।
  • मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ 2028 की तैयारी के अंतर्गत सड़कों, पुलों और लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाटों के निर्माण जैसे अवसंरचना कार्य शुरू किए हैं।
  • भारत में उद्यानिकी फसलें (सब्जियाँ, फल, फूल, मसाले) कृषि की तुलना में प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक आय देती हैं, इसलिए इन्हें विविधीकरण और किसान आय बढ़ाने का प्रमुख साधन माना जाता है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन इसी उद्देश्य से केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू है।
  • कृषि राज्य सूची का विषय है, इसलिए फसल योजना और उद्यानिकी विकास का मुख्य दायित्व राज्य सरकारों का होता है, जबकि केंद्र सरकार नीतिगत ढाँचा और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।

उद्यानिकी आधारित आपूर्ति योजना क्या है?

  • उद्यानिकी (Horticulture) में फल, सब्जियाँ, फूल, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती और प्रबंधन शामिल है। यह पारंपरिक अनाज फसलों से भिन्न है और अधिक श्रम तथा निवेश की मांग करती है।
  • संकर (हाइब्रिड) किस्में दो भिन्न आनुवंशिक गुणों वाली किस्मों के संकरण से तैयार की जाती हैं। इनसे अधिक उपज, एकरूपता और रोग-प्रतिरोधकता मिलती है, किंतु इनके बीज हर बार नए खरीदने पड़ते हैं।
  • क्लस्टर आधारित खेती में एक भौगोलिक क्षेत्र के किसान एक ही फसल उगाते हैं, जिससे बीज, कीटनाशक, प्रशिक्षण, परिवहन और विपणन की लागत घटती है तथा सामूहिक सौदेबाज़ी संभव होती है।
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों का ऐसा संगठन है जो कंपनी अधिनियम, 2013 के भाग IXA के तहत पंजीकृत किया जा सकता है। यह उत्पादन, खरीद और विपणन में छोटे किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ाता है।
  • मांग-आधारित उत्पादन योजना में मौसम, फसल-चक्र और उपभोक्ता मांग का पूर्वानुमान लगाकर बुवाई का समय तय किया जाता है। इसी से किसी विशेष आयोजन के समय आपूर्ति का संतुलन बनाए रखा जाता है।
  • फसल-रोग प्रबंधन में समेकित कीट प्रबंधन (IPM) और मौसम-आधारित सलाह अपनाई जाती है। गर्मी और वर्षा ऋतु में सब्जियों और फूलों में फफूंद और कीट रोग अधिक होते हैं, इसलिए प्रशिक्षण का यह पक्ष महत्त्वपूर्ण है।
  • फसलोपरांत प्रबंधन जैसे छँटाई, पैकिंग, शीत भंडारण और शीत शृंखला (Cold Chain) फूलों और सब्जियों की नाशवानता घटाकर बाज़ार में आपूर्ति को स्थिर रखते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
लक्ष्य क्षेत्र कुल 16,000 हेक्टेयर क्षेत्र। इसमें लगभग 8,000 हेक्टेयर में संकर (Hybrid) सब्जियाँ और 8,000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में फूलों की खेती प्रस्तावित है
भौगोलिक विस्तार उज्जैन संभाग के उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच और मंदसौर जिले सब्जी उत्पादन में शामिल हैं। फूलों के लिए उज्जैन, इंदौर, देवास, आगर मालवा, खंडवा, छतरपुर, मैहर और दतिया जिले चुने गए हैं। उज्जैन, देवास और आगर मालवा दोनों सूचियों में हैं
लाभार्थी किसान 20,000 से अधिक किसानों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य है। पहले चरण में किसानों का चयन हो चुका है और उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है
फसल-चयन सब्जियों में संकर किस्में और फूलों में गुलाब सहित अन्य फूल शामिल हैं, ताकि मेले की मांग पूरी हो सके
आपूर्ति-लक्ष्य सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय बाजारों की मांग पूरी करना। समाचार के संकेत के अनुसार प्रतिदिन लगभग 13,000 टन सब्जियों की आवश्यकता का अनुमान है
संगठन-ढाँचा समूह (Cluster) आधारित उत्पादन और उद्यानिकी (Horticulture) विभाग की नोडल भूमिका। योजना पर लगभग दो वर्ष पहले से काम शुरू हो चुका है

महत्व

आर्थिक

  • उत्पादन बढ़ने से किसानों को एक निश्चित और बड़े बाजार (मेला-मांग) से जुड़ने का अवसर मिलता है।
  • पूर्व-नियोजित आपूर्ति से आयोजन-काल में कीमतों के अचानक बढ़ने का जोखिम घटता है।
  • फूल और सब्जी दोनों फसलों से बागवानी आय में विविधता आती है।

प्रशासनिक और नीति-प्रक्रिया

  • बड़े धार्मिक आयोजन के लिए आपूर्ति-प्रबंधन को पहले से नियोजित करने का व्यावहारिक उदाहरण है।
  • एक से अधिक जिलों में फैली योजना के लिए अंतर-जिला समन्वय आवश्यक होता है।
  • चयन, प्रशिक्षण और समूह निर्माण का क्रम सरकारी योजना-क्रियान्वयन की सामान्य प्रक्रिया को दर्शाता है।

खाद्य-पोषण और सेवा-आपूर्ति

  • भीड़ वाले आयोजन में ताज़ी सब्जियों की निरंतर उपलब्धता से खाद्य-आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ती है।
  • स्थानीय उत्पादन से परिवहन दूरी घटती है, जिससे उपज की ताज़गी बनी रहती है।

कृषि-तकनीक और फसल-सुरक्षा

  • संकर (Hybrid) किस्मों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने की संभावना रहती है।
  • गर्मी और वर्षा ऋतु में रोग-प्रबंधन का प्रशिक्षण फसल-हानि कम करने का उपाय है।

चुनौतियाँ

1. मूल्य-अस्थिरता और बाजार-जोखिम

  • आयोजन की तिथि निश्चित है, इसलिए मांग अचानक बढ़ेगी और उसके बाद अधिक उपज से कीमतें गिर सकती हैं।
  • बाजार-सम्पर्क और अग्रिम अनुबंध न होने पर किसान को मूल्य-जोखिम उठाना पड़ सकता है।

2. जल और भूमि-उपयोग का दबाव

  • 16,000 हेक्टेयर अतिरिक्त खेती से सिंचाई की माँग बढ़ेगी, जबकि कई क्षेत्रों में भूजल पहले से दबाव में है।
  • फूल और सब्जी फसलों के लिए फसल-प्रतिरूप (Cropping Pattern) बदलने से परंपरागत फसलों का क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।

3. रोग और मौसम-जोखिम

  • गर्मी और वर्षा ऋतु में फसल-रोगों का खतरा बढ़ता है, इसलिए प्रशिक्षण का प्रभाव क्षेत्र में व्यावहारिक रूप से परखा जाना चाहिए।
  • एक ही प्रकार की संकर किस्मों पर अधिक निर्भरता से रोग-प्रकोप का जोखिम एक साथ बढ़ जाता है।

4. लघु किसानों का संगठन और ऋण-पहुँच

  • छोटे किसानों को समूह (Cluster) में संगठित करने के लिए विश्वास, प्रशिक्षण और साझा अवसंरचना की आवश्यकता होती है।
  • कृषक उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation) के बिना सौदेबाज़ी की शक्ति सीमित रहती है।

5. आपूर्ति शृंखला, भंडारण और परिवहन

  • प्रतिदिन लगभग 13,000 टन की आवश्यकता पूरी करने के लिए संग्रहण, छँटाई और परिवहन की कुशल आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) चाहिए।
  • सड़क और भीड़-यातायात के कारण उपज के समय पर पहुँचने में बाधा आ सकती है।

6. हाइब्रिड बीज पर निर्भरता और जैव-विविधता

  • संकर बीजों की लागत प्रायः अधिक होती है और किसान को हर मौसम में नया बीज खरीदना पड़ता है।
  • देशी किस्मों के क्षेत्र घटने से स्थानीय जैव-विविधता और आनुवंशिक संसाधनों पर असर पड़ सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
मूल्य-जोखिम आयोजन के बाद अधिक आपूर्ति से किसानों की आय घट सकती है
जल-दबाव अतिरिक्त खेती से सिंचाई और भूजल पर बोझ बढ़ सकता है
रोग और मौसम गर्मी व वर्षा में रोग-प्रकोप से उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है
आपूर्ति शृंखला प्रतिदिन लगभग 13,000 टन की माँग के लिए भंडारण और परिवहन पर्याप्त होने चाहिए
बीज-निर्भरता संकर बीजों पर अधिक निर्भरता से लागत और जैव-विविधता दोनों पर दबाव पड़ सकता है

आगे की राह

  • चयनित 20,000 से अधिक किसानों का नियमित तकनीकी परामर्श और रोग-निगरानी उद्यानिकी विभाग के माध्यम से सुनिश्चित की जाए।
  • समूह (Cluster) स्तर पर कृषक उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation) बनाकर सामूहिक विपणन और मूल्य-सौदेबाज़ी को मजबूत किया जाए।
  • आयोजन से पहले अग्रिम क्रय-अनुबंध और मूल्य-सूचना प्रणाली अपनाई जाए, ताकि मूल्य-अस्थिरता कम हो।
  • सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) और जल-बचत तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भूजल पर दबाव न बढ़े।
  • संकर बीजों के साथ स्थानीय और देशी किस्मों के संरक्षण की व्यवस्था रखी जाए।
  • तुड़ाई के बाद छँटाई, भंडारण और शीत-भंडारण की सुविधा का आकलन कर उसे समय पर उपलब्ध कराया जाए।
  • आयोजन-पूर्व, आयोजन-काल और आयोजन-पश्चात की आपूर्ति का डेटा संग्रह कर भविष्य की योजना में उसका उपयोग किया जाए।
  • रोग-प्रबंधन प्रशिक्षण को मौसम-आधारित पाठ्यक्रम बनाकर नियमित अंतराल पर दोहराया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उद्यानिकी (Horticulture) · मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) · क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण · उत्पादक संगठन (FPO) · हाइब्रिड बीज · फसल विविधीकरण · मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) · ऑपरेशन ग्रीन्स (Operation Greens) · राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (e-NAM) · खाद्य सुरक्षा · आपूर्ति शृंखला प्रबंधन · अवसर-आधारित उत्पादन योजना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 14: कृषि और पौध-संरक्षण राज्य का विषय

अवधारणा प्रवाह

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के कारण उज्जैन में सब्जियों और फूलों की मांग में बड़ी वृद्धि का अनुमान  →  उद्यानिकी विभाग द्वारा दो वर्ष पूर्व योजना तैयार कर 15 जिलों में 16,000 हेक्टेयर क्षेत्र चिन्हित करना  →  20,000 से अधिक किसानों का चयन और उन्हें समूह (Cluster) में संगठित करना  →  संकर सब्जियों और गुलाब सहित फूलों के उत्पादन के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, जिसमें रोग-प्रबंधन शामिल है  →  उत्पादन, परिवहन और भंडारण के माध्यम से उज्जैन तक निरंतर आपूर्ति  →  मांग-आपूर्ति संतुलन से मूल्य-स्थिरता और किसान की बाजार-आय में सुधार की संभावना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) एक केंद्र प्रवर्तित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका क्रियान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के माध्यम से होता है।
2. ऑपरेशन ग्रीन्स के अंतर्गत प्रारंभ में टमाटर, प्याज़ और आलू (TOP) को शामिल किया गया था।
3. उद्यानिकी संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची (Union List) का विषय है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: MIDH केंद्र प्रवर्तित योजना है और इसका क्रियान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है। कथन 2 सही है: ऑपरेशन ग्रीन्स की शुरुआत TOP (टमाटर, प्याज़, आलू) से हुई थी। कथन 3 गलत है: कृषि राज्य सूची की प्रविष्टि 14 में आती है और उद्यानिकी को सामान्यतः इसी के अंतर्गत राज्य का विषय माना जाता है, इसलिए इसे संघ सूची का विषय नहीं कहा जा सकता।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): सब्जियों और फूलों की खेती में क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण से छोटे किसानों की उत्पादन-लागत और बाज़ार तक पहुंच की समस्या को कम किया जा सकता है।
कारण (R): उत्पादक संगठन (FPO) को कंपनी अधिनियम, 2013 के भाग IXA के अंतर्गत उत्पादक कंपनी (Producer Company) के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण में किसान समूह बनाकर सामूहिक खरीद, प्रशिक्षण और विपणन करते हैं, जिससे लागत घटती है और बाज़ार तक पहुंच बढ़ती है। उत्पादक संगठन को कंपनी अधिनियम, 2013 के भाग IXA के अंतर्गत उत्पादक कंपनी के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है, जो इस सामूहिक ढांचे का कानूनी आधार देता है। कारण (R) सही है और वही (A) की व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलन (Match the following) पर विचार कीजिए:

सूची I (संवैधानिक प्रावधान)
A. अनुच्छेद 282
B. सातवीं अनुसूची की राज्य सूची, प्रविष्टि 14
C. अनुच्छेद 243G
D. ग्यारहवीं अनुसूची

सूची II (विषय/प्रावधान)
1. कृषि (कृषि-विस्तार सहित)
2. संघ या राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान
3. पंचायतों को शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंपना
4. पंचायतों के 29 विषयों की सूची

सही सुमेलन का चयन कीजिए:

  1. A-2, B-1, C-3, D-4
  2. A-1, B-2, C-4, D-3
  3. A-3, B-4, C-1, D-2
  4. A-2, B-3, C-1, D-4

उत्तर: A-2, B-1, C-3, D-4 — अनुच्छेद 282 संघ या राज्य को सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनुदान देने की शक्ति देता है, इसलिए A-2। राज्य सूची की प्रविष्टि 14 में कृषि आती है, इसलिए B-1। अनुच्छेद 243G पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों पर शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंपने का प्रावधान करता है, इसलिए C-3। ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के 29 विषय हैं, इसलिए D-4।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए निर्धारित समयसीमा में कृषि उत्पादन बढ़ाना कृषि-नीति के सामने नई चुनौती प्रस्तुत करता है। सिंहस्थ 2028 के लिए मध्य प्रदेश के 15 जिलों में लगभग 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों और फूलों की खेती को क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण से बढ़ावा देने की योजना के संदर्भ में चर्चा कीजिए कि ऐसी अवसर-आधारित (event-linked) उत्पादन योजना किस सीमा तक खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय, दोनों के उद्देश्यों को साध सकती है। साथ ही बताइए कि मांग-आधारित उत्पादन में बाज़ार मूल्य के अचानक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए कौन-से संस्थागत उपाय आवश्यक हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना (Model-Answer Skeleton):

1. भूमिका: सिंहस्थ जैसे आयोजन में कुछ सप्ताह के भीतर सब्जियों और फूलों की असाधारण मांग बनती है। उद्यानिकी विभाग की योजना के तथ्य रखें: 15 जिले (उज्जैन संभाग के उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच, मंदसौर सहित), लगभग 8,000 हेक्टेयर में हाइब्रिड सब्जियां और लगभग 8,000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में फूल (गुलाब सहित), कुल 16,000 हेक्टेयर; 20,000 से अधिक किसान; प्रशिक्षण और क्लस्टर निर्माण। योजना दो वर्ष पहले से शुरू होने का तथ्य भी दें।

2. योजना का संस्थागत ढांचा: मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के अंतर्गत क्लस्टर विकास और हाइब्रिड बीज सहायता; संवैधानिक आधार: कृषि राज्य सूची (प्रविष्टि 14) का विषय है, अनुच्छेद 282 के अंतर्गत केंद्र की वित्तीय सहायता और अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों की भूमिका (ग्यारहवीं अनुसूची, कृषि विस्तार सहित)। संघवाद के संदर्भ में राज्य-केंद्र समन्वय पर टिप्पणी करें।

3. अवसर-आधारित उत्पादन के पक्ष में तर्क: (क) मांग का पूर्वानुमान और बुवाई की समय-सारणी से बाज़ार-जोखिम घटता है; (ख) उत्पादक संगठन (FPO), जो कंपनी अधिनियम, 2013 के भाग IXA में पंजीकृत हो सकते हैं, और सामूहिक विपणन से किसानों की सौदेबाजी क्षमता बढ़ती है; (ग) फसल विविधीकरण से एक ही फसल पर निर्भरता घटती है; (घ) अमर्त्य सेन के हक-दृष्टिकोण (Entitlement Approach) के अनुसार खाद्य सुरक्षा केवल उपलब्धता नहीं, बल्कि लोगों की पहुंच का प्रश्न है।

4. आलोचनात्मक पक्ष: (क) एक आयोजन के लिए बोई गई फसल की मांग आयोजन के बाद घट सकती है, जिससे किसानों को नुकसान; (ख) पानी-गहन उत्पादन और भूजल दोहन की चिंता, विशेषकर मालवा क्षेत्र में; (ग) हाइब्रिड बीजों पर लागत और निर्भरता; (घ) स्वामीनाथन आयोग (राष्ट्रीय किसान आयोग) की सिफारिशों के अनुसार लागत-आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाज़ार-समर्थन की आवश्यकता।

5. मूल्य-जोखिम से निपटने के उपाय: मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) का उपयोग नाशवान उपजों के लिए; ऑपरेशन ग्रीन्स (TOP) का अनुभव; राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (e-NAM) से मंडी-स्तर पर मूल्य की पारदर्शिता; कृषि उपज विपणन समितियों (APMC) की भूमिका; कोल्ड चेन और भंडारण में निवेश; कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के माध्यम से प्रशिक्षण और रोग-प्रबंधन।

6. निष्कर्ष/संतुलन: योजना तभी टिकाऊ होगी जब अल्पकालिक आयोजन-मांग को दीर्घकालिक बाज़ार-अनुबंध (contract farming) और उत्पादक संगठनों के स्थायी ढांचे में बदला जाए। सार्थक निष्कर्ष: अवसर-आधारित योजना खाद्य उपलब्धता बढ़ा सकती है, पर किसान की आय की स्थिरता के लिए मांग-पूर्वानुमान, भंडारण और मूल्य-समर्थन का संस्थागत समन्वय अनिवार्य है।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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