2030 तक भारत में दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों की 8220 मीट्रिक टन मांग: सरकारी योजना का आकलन

2030 तक भारत में दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों की 8220 मीट्रिक टन मांग: सरकारी योजना का आकलन — वर्ष 2030 के लिए रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (आरईपीएम) की अनुमानित श्रेणीवार आ

2030 तक भारत में दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों की 8220 मीट्रिक टन मांग: सरकारी योजना का आकलन

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (संसाधन वितरण)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (औद्योगिक नीति, खनिज संसाधन, आत्मनिर्भरता)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियाँ)
  • Prelims: रेयर अर्थ तत्व (REE), रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REPM), सिंटर्ड एनडीएफईबी आरईएम, खनिज और धातु विकास तथा विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2015, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), IREL (इंडिया) लिमिटेड, रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC)
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका, सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी और संसाधन प्रबंधन का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REPM) की बढ़ती मांग को पूरा करने और आयात निर्भरता को कम करने के लिए, सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये की एक योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य घरेलू मिडस्ट्रीम विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है, ताकि वर्ष 2030 तक विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों की 8,220 MTPA की अनुमानित मांग को पूरा किया जा सके।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारी उद्योग राज्य मंत्री ने लोकसभा में बताया कि भारत में रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REPM) की बढ़ती मांग का आकलन किया गया है और इसकी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक योजना को मंजूरी दी गई है। यह जानकारी आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड, रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL) और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा किए गए आकलन के आधार पर दी गई है, जिसमें वर्ष 2030 तक विभिन्न क्षेत्रों में आरईपीएम की अनुमानित आवश्यकता 8,220 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) बताई गई है।

पृष्ठभूमि

  • रेयर अर्थ तत्व (REE) 17 धात्विक तत्वों का एक समूह है जो आधुनिक प्रौद्योगिकियों, विशेषकर स्थायी चुंबक (Permanent Magnets) के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • भारत में 767 मिलियन टन REE अयस्क संसाधनों का अनुमान है, जो खनिज और धातु विकास तथा विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2015 (MMDR Amendment Act, 2015) के बाद से बढ़ा है।
  • भारत के पास REE के खनन, पृथक्करण और ऑक्साइड शोधन में अपस्ट्रीम क्षमताएं हैं, लेकिन ऑक्साइड-से-धातु, धातु-से-मिश्रधातु और मिश्रधातु-से-चुंबक रूपांतरण के लिए औद्योगिक पैमाने की मिडस्ट्रीम क्षमताओं की कमी है।
  • इस कमी के कारण, भारत वर्तमान में अपनी सभी सिंटर्ड एनडीएफईबी आरईएम (Sintered NdFeB REM) मांग का आयात करता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में भेद्यता बनी रहती है।
  • इस आयात निर्भरता को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर, 2025 को 7,280 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ सिंटर्ड दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी, जिसे 15 दिसंबर, 2025 को अधिसूचित किया गया था।
  • वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहन (EV), पवन टरबाइन, औद्योगिक मोटर, स्मार्टफोन और सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप जैसे क्षेत्रों में REPM की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है।

रेयर अर्थ तत्व (REE) और रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REPM) क्या हैं?

  • रेयर अर्थ तत्व (Rare Earth Elements – REE) रासायनिक तत्वों का एक समूह है जिसमें 15 लैंथेनाइड्स, स्कैंडियम और इट्रियम शामिल हैं। इन्हें ‘दुर्लभ’ कहा जाता है क्योंकि इन्हें पृथ्वी की पपड़ी से आर्थिक रूप से निकालने योग्य सांद्रता में खोजना और संसाधित करना मुश्किल होता है, हालांकि ये वास्तव में पृथ्वी में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • इन तत्वों में अद्वितीय चुंबकीय, उत्प्रेरक और ऑप्टिकल गुण होते हैं, जो उन्हें विभिन्न उच्च-तकनीकी अनुप्रयोगों के लिए अपरिहार्य बनाते हैं।
  • रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (Rare Earth Permanent Magnets – REPM) विशेष प्रकार के स्थायी चुंबक होते हैं जो REE, विशेष रूप से नियोडिमियम (Neodymium), समेरियम (Samarium) और डिस्प्रोसियम (Dysprosium) का उपयोग करके बनाए जाते हैं।
  • ये चुंबक अपनी उच्च चुंबकीय शक्ति और छोटे आकार के लिए जाने जाते हैं, जो उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों, पवन टरबाइन जनरेटर, स्मार्टफोन, कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, मेडिकल इमेजिंग उपकरण और रक्षा प्रणालियों जैसे अनुप्रयोगों के लिए आदर्श बनाते हैं।
  • सिंटर्ड एनडीएफईबी आरईएम (Sintered NdFeB REM) नियोडिमियम, आयरन और बोरॉन से बने सबसे शक्तिशाली स्थायी चुंबकों में से एक हैं, जिनका उपयोग आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में व्यापक रूप से होता है।
  • भारत में REE के विशाल भंडार हैं, लेकिन ऑक्साइड-से-धातु और धातु-से-चुंबक रूपांतरण जैसी मिडस्ट्रीम प्रसंस्करण क्षमताओं की कमी के कारण देश को तैयार चुंबकों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना का उद्देश्य इस अंतर को भरना और भारत को REPM के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए एक सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित हो सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
रेयर अर्थ तत्व (REE) संसाधन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, भारत में 767 मिलियन टन REE अयस्क संसाधन हैं, जो देश की आत्मनिर्भरता की क्षमता को दर्शाता है।
अपस्ट्रीम क्षमताएँ भारत के पास REE के खनन, पृथक्करण और ऑक्साइड शोधन की क्षमताएँ मौजूद हैं, जो प्रारंभिक प्रसंस्करण में मजबूती प्रदान करती हैं।
मिडस्ट्रीम क्षमताओं की कमी ऑक्साइड-से-धातु, धातु-से-मिश्रधातु और मिश्रधातु-से-चुंबक रूपांतरण के लिए औद्योगिक पैमाने की क्षमताओं का अभाव है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ती है।
डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों के लिए आयात मिडस्ट्रीम क्षमताओं की कमी के कारण भारत वर्तमान में सिंटर्ड एनडीएफईबी रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REM) की अपनी पूरी मांग का आयात करता है।
रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REM) निर्माण योजना केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7,280 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ REM निर्माण को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REM) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और व्यापार घाटा कम होगा।
  • यह योजना उच्च-तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करेगी, जिससे रोजगार सृजन होगा और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicle), पवन टरबाइन (Wind Turbine) और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में REM की बढ़ती मांग को पूरा करने से भारत इन उद्योगों में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।

सामरिक महत्व

  • REM के घरेलू उत्पादन से महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन आएगा, जिससे भू-राजनीतिक जोखिमों और आपूर्ति व्यवधानों से बचाव होगा।
  • रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL) जैसे संस्थानों की भागीदारी रक्षा और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण सामग्रियों की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करती है।
  • यह योजना भारत को वैश्विक रेयर अर्थ मूल्य श्रृंखला में एक मजबूत स्थिति प्रदान करेगी, जिससे देश की सामरिक स्वायत्तता बढ़ेगी।

पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा

  • REM का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन टरबाइनों में होता है, जो स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, इस प्रकार जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलती है।
  • सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों और BLDC पंखों में REM का उपयोग ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है।
  • घरेलू उत्पादन से खनिजों के स्थायी प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. मिडस्ट्रीम प्रसंस्करण क्षमता का अभाव

  • भारत में ऑक्साइड-से-धातु, धातु-से-मिश्रधातु और मिश्रधातु-से-चुंबक रूपांतरण के लिए औद्योगिक पैमाने की क्षमताओं की कमी है।
  • यह कमी डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भरता का कारण बनती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला कमजोर होती है।

2. प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता

  • रेयर अर्थ प्रसंस्करण और चुंबक निर्माण में उन्नत प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो भारत में सीमित है।
  • इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना और कुशल कार्यबल तैयार करना एक चुनौती है।

3. पर्यावरण संबंधी चिंताएँ

  • रेयर अर्थ खनन और प्रसंस्करण पर्यावरणीय रूप से गहन प्रक्रियाएँ हैं, जिनमें अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण एक बड़ी चुनौती है।
  • स्थायी खनन और प्रसंस्करण प्रथाओं को अपनाना आवश्यक है।

4. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता

  • वर्तमान में, भारत अपनी अधिकांश REM मांग का आयात करता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों और भू-राजनीतिक तनावों के प्रति संवेदनशीलता बनी रहती है।
  • आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए इस निर्भरता को कम करना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मिडस्ट्रीम प्रसंस्करण ऑक्साइड-से-धातु और धातु-से-चुंबक रूपांतरण के लिए औद्योगिक क्षमता का अभाव।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण उन्नत रेयर अर्थ प्रसंस्करण और चुंबक निर्माण प्रौद्योगिकियों तक पहुँच और उनका स्वदेशीकरण।
पर्यावरणीय प्रभाव रेयर अर्थ खनन और प्रसंस्करण से जुड़े प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ।
वित्तीय निवेश बड़े पैमाने पर विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय परिव्यय की आवश्यकता।
कुशल कार्यबल रेयर अर्थ क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और उत्पादन के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सिंटर्ड दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (REM) के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना

आगे की राह

  • मिडस्ट्रीम प्रसंस्करण क्षमताओं को विकसित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को प्रोत्साहित करना और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाना।
  • रेयर अर्थ क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग बढ़ाना।
  • स्थायी खनन और प्रसंस्करण प्रथाओं को लागू करने के लिए कड़े पर्यावरणीय नियमों और निगरानी तंत्रों को स्थापित करना।
  • REM के घरेलू उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सुरक्षित और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक साझेदारी विकसित करना।
  • रेयर अर्थ मूल्य श्रृंखला में कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और कौशल विकास पहल शुरू करना।
  • घरेलू REM निर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन, कर लाभ और आसान ऋण सुविधाएँ प्रदान करना ताकि निवेश को बढ़ावा मिल सके।
  • इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना ताकि मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल बिठाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रेयर अर्थ तत्व (Rare Earth Elements – REE) · स्थायी चुंबक (Permanent Magnets) · राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) · आत्मनिर्भर भारत (Self-Reliant India) · विनिर्माण क्षमता (Manufacturing Capability) · आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) · खनिज सुरक्षा (Mineral Security) · इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicles – EV) · नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) · औद्योगिक विकास (Industrial Development) · भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey) · तकनीकी आत्मनिर्भरता (Technological Self-Reliance)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 38’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
  • {‘अनुच्छेद 39 (ख)’: ‘भौतिक संसाधनों का समान वितरण’}
  • {‘अनुच्छेद 39 (ग)’: ‘धन के संकेंद्रण को रोकना’}
  • {‘अनुच्छेद 48क’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}

अवधारणा प्रवाह

भारत में रेयर अर्थ तत्व (REE) के विशाल संसाधन  →  खनन और ऑक्साइड शोधन में अपस्ट्रीम क्षमताएँ  →  ऑक्साइड-से-धातु और धातु-से-चुंबक रूपांतरण में मिडस्ट्रीम क्षमताओं की कमी  →  सिंटर्ड REM के लिए आयात पर निर्भरता  →  केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा REM निर्माण को बढ़ावा देने की योजना की मंजूरी  →  घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के पास दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के खनन और पृथक्करण की अपस्ट्रीम क्षमताएं हैं।
2. भारत वर्तमान में अपनी सिंटर्ड एनडीएफईबी आरईएम (NdFeB REM) की मांग का अधिकांश आयात करता है।
3. भारत में वर्ष 2030 तक पवन टरबाइन क्षेत्र में आरईपीएम की सर्वाधिक मांग होने का अनुमान है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। भारत के पास खनन, पृथक्करण और ऑक्साइड शोधन में अपस्ट्रीम क्षमताएं हैं। कथन 2 सही है। भारत वर्तमान में डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों के लिए अपनी सभी सिंटर्ड एनडीएफईबी आरईएम मांग का आयात करता है। कथन 3 गलत है। वर्ष 2030 के लिए इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में आरईपीएम की सर्वाधिक मांग (3250 एमटीपीए) होने का अनुमान है, जबकि पवन टरबाइन क्षेत्र में यह मांग 1800 एमटीपीए है।

Q2. भारत में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2025 में अनुमोदित किया था।
2. इसका उद्देश्य ऑक्साइड-से-धातु और धातु-से-मिश्रधातु रूपांतरण जैसी मिडस्ट्रीम क्षमताओं में कमी को दूर करना है।
3. यह योजना भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाएगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर, 2025 को इस योजना को मंजूरी दी थी। कथन 2 सही है। भारत में ऑक्साइड-से-धातु, धातु-से-मिश्रधातु और मिश्रधातु-से-चुंबक रूपांतरण के लिए आवश्यक औद्योगिक पैमाने की मिडस्ट्रीम क्षमताओं में उल्लेखनीय कमी है, जिसे यह योजना संबोधित करेगी। कथन 3 सही है। यह योजना भारी उद्योग मंत्रालय के तहत आती है, जैसा कि लोकसभा में दिए गए उत्तर से स्पष्ट है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) की बढ़ती मांग और इसके विनिर्माण से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, सरकार द्वारा सिंटर्ड दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना के महत्व और संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भारत में आरईपीएम की बढ़ती मांग के प्रमुख क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, पवन टरबाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स) और इसके विनिर्माण में आने वाली चुनौतियों (जैसे मिडस्ट्रीम क्षमताओं की कमी, आयात पर निर्भरता) का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, सरकार की योजना (वित्तीय परिव्यय, अनुमोदन की तिथि) का संक्षिप्त विवरण दें और इसके महत्व (आत्मनिर्भरता, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, औद्योगिक विकास) तथा संभावित प्रभावों (आयात प्रतिस्थापन, रोजगार सृजन, रणनीतिक क्षेत्रों को बढ़ावा) पर प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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