केरल में राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष में संशोधन पर कार्यशाला

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केरल में राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष में संशोधन पर कार्यशाला

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आधार वर्ष संशोधन प्रक्रियाकार्यशाला आयोजनप्रशिक्षणआधार वर्ष निर्धारण2022-23वस्तुओं की टोकरी अद्यतउद्योग संरचना अनुसारडेटा गुणवत्ता सुधारत्रुटियाँ कम करेंराष्ट्रीय स्तर समन्वयतुलनीयता बढ़ाएं
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आधार वर्ष संशोधन प्रक्रिया

✎ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक भारित सूचकांक है, जिसके आधार वर्ष, वस्तुओं की टोकरी और भार का समय-समय पर संशोधन उद्योगों की वर्तमान संरचना के अनुरूप सूचकांक की विश्वसनीयता और राज्यों के बीच तुलनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (आर्थिक संकेतक, औद्योगिक विकास, सांख्यिकी)  |  GS Paper II — शासन (सांख्यिकीय संस्थाएँ, केंद्र-राज्य समन्वय, सहकारी संघवाद)
  • Prelims: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की संरचना और क्षेत्र, आधार वर्ष (Base Year) और उसके संशोधन का उद्देश्य, वस्तुओं की टोकरी और भार निर्धारण, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI), राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC), उपयोग-आधारित वर्गीकरण (Use-based Classification), राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (National Statistical Commission)
  • Essay: साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय सांख्यिकी का महत्त्व, सहकारी संघवाद में सांख्यिकीय क्षमता और राज्यों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक भारित सूचकांक है, जिसके आधार वर्ष, वस्तुओं की टोकरी और भार का समय-समय पर संशोधन उद्योगों की वर्तमान संरचना के अनुरूप सूचकांक की विश्वसनीयता और राज्यों के बीच तुलनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने केरल सरकार के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग के सहयोग से तिरुवनंतपुरम में 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक तीन दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की, जिसका विषय राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार वर्ष में संशोधन था। इसमें 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 60 प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों के सूचकांक को राष्ट्रीय कार्यप्रणाली के अनुरूप बनाना और राज्यों के बीच एकरूपता तथा तुलनीयता बढ़ाना है। उद्घाटन सत्र में प्रस्तावित नए आधार वर्ष के रूप में वर्ष 2022-23 का उल्लेख किया गया तथा वस्तुओं की टोकरी को उद्योगों की वर्तमान संरचना और उत्पादन पद्धतियों के अनुरूप अद्यतन करने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने प्राथमिक आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने, मापन त्रुटियाँ कम करने और रिपोर्टिंग इकाइयों की सूचना की सटीकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

पृष्ठभूमि

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) भारत में औद्योगिक गतिविधियों की मात्रात्मक दिशा मापने वाला प्रमुख अल्पकालिक संकेतक है, जो आधार वर्ष के सापेक्ष बनाया जाता है। राष्ट्रीय IIP का वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 है।
  • आधार वर्ष समय-समय पर इसलिए संशोधित किया जाता है ताकि भार और वस्तुओं की टोकरी उद्योगों में हुए संरचनात्मक बदलावों, नए उत्पादों के उदय और पुराने उत्पादों के अप्रचलन को दर्शा सके।
  • वर्ष 2019 में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) को मिलाकर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) बनाया गया, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • राज्य स्तरीय IIP राज्यों के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभागों द्वारा तैयार किया जाता है, जबकि इसकी कार्यप्रणाली और मानकों के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय होता है। इससे राज्यों के औद्योगिक प्रदर्शन की राष्ट्रीय स्तर पर तुलना संभव होती है।
  • सांख्यिकीय आधार वर्ष का संशोधन केंद्र और राज्यों, दोनों के स्तर पर तकनीकी क्षमता, डेटा संग्रह ढाँचे और प्रशासनिक समन्वय की परीक्षा होता है, इसलिए इसके लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) क्या है?

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production — IIP) एक भारित सूचकांक है, जो किसी निश्चित अवधि में विनिर्माण, खनन और विद्युत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के उत्पादन में होने वाले परिवर्तन को आधार वर्ष की तुलना में मापता है।
  • IIP में तीन प्रमुख क्षेत्र शामिल होते हैं: खनन (Mining), विनिर्माण (Manufacturing) और विद्युत (Electricity). विनिर्माण क्षेत्र को सामान्यतः सबसे अधिक भार दिया जाता है।
  • उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अंतर्गत उत्पादों को प्राथमिक वस्तुएँ, पूंजीगत वस्तुएँ, मध्यवर्ती वस्तुएँ, अवसंरचना/निर्माण वस्तुएँ, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएँ में बाँटा जाता है।
  • भार निर्धारण के लिए सामान्यतः वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) से प्राप्त उत्पादन और मूल्यवर्धन के आंकड़ों का उपयोग होता है, और उद्योगों के वर्गीकरण के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) का पालन किया जाता है।
  • IIP मासिक आधार पर जारी होता है और इसे अर्थव्यवस्था की अल्पकालिक स्थिति, औद्योगिक गतिविधि की गति और आर्थिक संवृद्धि के आकलन के लिए प्रमुख संकेतक माना जाता है।
  • राज्य स्तरीय IIP से यह पता चलता है कि किस राज्य के औद्योगिक ढाँचे में कौन-से क्षेत्र प्रभावी हैं, जिससे राज्य-विशिष्ट औद्योगिक नीतियाँ बनाने में सहायता मिलती है।
  • आधार वर्ष संशोधन में वस्तुओं की टोकरी का अद्यतन, नए उद्योगों का समावेश, पुराने उत्पादों का हटाना और भार का पुनर्निर्धारण शामिल होता है, ताकि सूचकांक वास्तविक औद्योगिक संरचना को दर्शाए।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
आयोजक और सहयोग सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने केरलम के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग (DES) के सहयोग से यह क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। केंद्र और राज्य सांख्यिकी तंत्र के बीच सहकारी व्यवस्था का यह उदाहरण है।
अवधि और स्थान 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक तिरुवनंतपुरम (केरल) में तीन दिवसीय आयोजन हुआ। यह प्रशिक्षण प्रकृति का कार्यक्रम है, किसी नई नीति या योजना की घोषणा नहीं।
विषय: राज्य स्तरीय IIP का आधार वर्ष राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की आधार वर्ष श्रृंखला को संशोधित करना मुख्य विषय है। इसमें वर्ष 2022-23 को प्रस्तावित नए आधार वर्ष के रूप में चर्चा में रखा गया है।
प्रतिभागी 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 60 प्रतिभागी शामिल हुए। इससे राष्ट्रीय स्तर पर एकरूप कार्यप्रणाली अपनाने की दिशा में क्षमता-निर्माण का स्वरूप स्पष्ट होता है।
प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धांत राज्यों का IIP संकलन अखिल भारतीय IIP की कार्यप्रणाली के अनुरूप होना चाहिए। इससे राज्यों के बीच तुलनीयता और एकरूपता सुनिश्चित होती है।

महत्व

आर्थिक महत्त्व

  • IIP औद्योगिक उत्पादन की मात्रा को मापने वाला प्रमुख अल्पकालिक संकेतक है। यह खनन, विनिर्माण और विद्युत क्षेत्रों की गतिविधि को मासिक आधार पर दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय लेखा में विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (GVA) के अनुमान के लिए IIP को मात्रात्मक संकेतक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसलिए इसकी सटीकता का प्रभाव जीडीपी (GDP) के अनुमानों पर भी पड़ता है।
  • राज्यों की औद्योगिक संरचना अलग-अलग होती है। विश्वसनीय राज्य स्तरीय IIP से निवेश और औद्योगिक नीति के निर्णय क्षेत्रीय आधार पर बेहतर ढंग से लिए जा सकते हैं।

सांख्यिकीय और प्रशासनिक महत्त्व

  • आधार वर्ष का संशोधन यह सुनिश्चित करता है कि वस्तुओं की टोकरी और भारांक (weights) उद्योग की वर्तमान संरचना को दर्शाएँ। पुराने भारांक बदली हुई उत्पादन संरचना को सही नहीं दिखाते।
  • राज्य सांख्यिकी कार्यालयों की तकनीकी क्षमता बढ़ने से आँकड़ों की गुणवत्ता और समयबद्धता में सुधार होता है।

संघीय (Federal) महत्त्व

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एकरूप कार्यप्रणाली से सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना मजबूत होती है, क्योंकि केंद्र और राज्य एक ही मानक पर आँकड़े तैयार करते हैं।
  • साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण के लिए विश्वसनीय राज्य आँकड़े केंद्र और राज्य दोनों की योजना-प्रक्रिया के लिए आवश्यक हैं।

चुनौतियाँ

1. वस्तुओं की टोकरी का अद्यतन

  • उद्योग की संरचना बदलने के साथ नए उत्पाद उभरते हैं और पुराने उत्पाद प्रासंगिकता खोते हैं। पुरानी टोकरी इन परिवर्तनों को सही नहीं दिखा पाती।
  • टोकरी के चयन में उद्योगों की वर्तमान उत्पादन संरचना और गौण खनिजों जैसे उत्पादों को शामिल करना तकनीकी रूप से जटिल होता है।

2. प्राथमिक आँकड़ों की गुणवत्ता

  • IIP का आधार रिपोर्टिंग इकाइयों से प्राप्त उत्पादन के आँकड़े हैं। सूचना अधूरी या गलत होने पर सूचकांक औद्योगिक गतिविधि को सही नहीं दर्शाता।
  • मापन संबंधी त्रुटियों को कम करना और इकाइयों से समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना एक निरंतर चुनौती है।

3. राज्यों के बीच एकरूपता और तुलनीयता

  • विभिन्न राज्य अलग-अलग कार्यप्रणाली अपनाएँ तो उनके सूचकांकों की राष्ट्रीय तुलना संभव नहीं रहती।
  • राज्यों के तकनीकी और मानव संसाधन क्षमता में अंतर होने से एक समान मानक लागू करना कठिन होता है।

4. राज्य सांख्यिकी तंत्र की क्षमता

  • राज्य सांख्यिकी कार्यालयों में प्रशिक्षित जनशक्ति और आधुनिक डेटा-प्रबंधन उपकरणों की कमी आधार वर्ष संशोधन की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है।
  • नई श्रृंखला के लिए पुराने और नए आँकड़ों के बीच संबंध स्थापित करना (linking) तकनीकी रूप से संवेदनशील कार्य है।

5. सार्वजनिक विश्वास और आँकड़ों की विश्वसनीयता

  • आर्थिक आँकड़ों पर सार्वजनिक चर्चा और सोशल मीडिया पर व्यापक बहस के दौर में आधिकारिक आँकड़ों की पारदर्शिता और समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है।
  • वैज्ञानिक कार्यप्रणाली और पारदर्शी प्रकाशन से ही आँकड़ों पर भरोसा बना रहता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
टोकरी का पुराना होना उद्योग की बदली संरचना के कारण पुरानी टोकरी से सूचकांक वास्तविक औद्योगिक गतिविधि से दूर हो सकता है।
रिपोर्टिंग इकाइयों की सूचना अधूरी या त्रुटिपूर्ण रिपोर्टिंग से IIP का मापन प्रभावित होता है।
राज्यों में कार्यप्रणाली का अंतर अलग-अलग मानक अपनाने से राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आँकड़ों की तुलना कठिन होती है।
तकनीकी क्षमता की कमी राज्य सांख्यिकी कार्यालयों में प्रशिक्षित कर्मियों और उपकरणों की कमी से संशोधन प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
श्रृंखला का जोड़ (Linking) पुराने और नए आधार वर्ष की श्रृंखलाओं को जोड़ते समय दीर्घकालिक प्रवृत्ति का सही आकलन कठिन होता है।

आगे की राह

  • राज्य स्तरीय IIP के लिए अखिल भारतीय IIP की कार्यप्रणाली को एक समान मानक के रूप में अपनाया जाए, ताकि सभी राज्यों के आँकड़े तुलनीय हों।
  • वस्तुओं की टोकरी को उद्योग की वर्तमान संरचना और उत्पादन के नए तौर-तरीकों के अनुरूप नियमित अंतराल पर अद्यतन किया जाए।
  • रिपोर्टिंग इकाइयों से प्राथमिक आँकड़ों के संग्रह की गुणवत्ता सुदृढ़ की जाए और सत्यापन की व्यवस्था मजबूत की जाए।
  • राज्य सांख्यिकी कार्यालयों की तकनीकी और मानव संसाधन क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएँ।
  • पुरानी और नई श्रृंखलाओं को जोड़ने की कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से प्रकाशित किया जाए, ताकि उपयोगकर्ता दीर्घकालिक तुलना सही ढंग से कर सकें।
  • आँकड़ों के संकलन, कार्यप्रणाली और संशोधन की जानकारी सार्वजनिक की जाए, जिससे नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और जनता का भरोसा बना रहे।
  • केंद्र और राज्य सांख्यिकी संस्थाओं के बीच नियमित समन्वय और अनुभव-साझाकरण को संस्थागत रूप दिया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production, IIP) · आधार वर्ष संशोधन · राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक · सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation, MoSPI) · केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central Statistics Office, CSO) · वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (Annual Survey of Industries, ASI) · सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 (Collection of Statistics Act, 2008) · सहकारी संघवाद और सांख्यिकीय समन्वय · साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण · वस्तुओं की टोकरी और भार-प्रणाली

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • सातवीं अनुसूची: सांख्यिकी संबंधी विषयों का संघ और राज्य सूचियों में विभाजन
  • अनुच्छेद 246: केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण

अवधारणा प्रवाह

राज्य स्तरीय IIP के आधार वर्ष (2022-23 प्रस्तावित) का संशोधन आवश्यक माना गया  →  उद्योग की बदली संरचना और उत्पादन के नए तौर-तरीकों के अनुरूप वस्तुओं की टोकरी का अद्यतन किया जाता है  →  रिपोर्टिंग इकाइयों से प्राप्त प्राथमिक आँकड़ों की गुणवत्ता और मापन की शुद्धता सुनिश्चित की जाती है  →  अखिल भारतीय IIP की समान कार्यप्रणाली अपनाने से राज्यों के सूचकांक तुलनीय बनते हैं  →  विश्वसनीय राज्य स्तरीय IIP से औद्योगिक प्रदर्शन की निगरानी और राष्ट्रीय लेखा के अनुमान बेहतर होते हैं  →  इन आँकड़ों के आधार पर क्षेत्रीय औद्योगिक नीति और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण सुदृढ़ होता है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) किसी अवधि में औद्योगिक उत्पादन की मात्रा (volume) में होने वाले परिवर्तन को मापता है, मूल्य को नहीं।
2. अखिल भारतीय IIP का संकलन और प्रकाशन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के माध्यम से किया जाता है।
3. वर्तमान अखिल भारतीय IIP का आधार वर्ष 2004-05 है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: IIP उत्पादन की मात्रा का सूचकांक है, इसलिए यह मूल्य-आधारित नहीं, बल्कि भार-आधारित वॉल्यूम सूचकांक है। कथन 2 सही है: IIP का संकलन MoSPI के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किया जाता है। कथन 3 गलत है: वर्तमान अखिल भारतीय IIP का आधार वर्ष 2011-12 है, 2004-05 नहीं। अतः उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. निम्नलिखित में दो कथन दिए गए हैं: अभिकथन (A) और कारण (R)।
अभिकथन (A): औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष में आवधिक संशोधन आवश्यक है।
कारण (R): आधार वर्ष की वस्तुओं की टोकरी और भार उस काल की उत्पादन संरचना को दर्शाते हैं, और समय के साथ नए उत्पाद उभरने तथा पुराने उत्पादों के घटने से यह संरचना पुरानी हो जाती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अभिकथन सही है, क्योंकि संरचनात्मक परिवर्तनों के कारण पुराना भार-ढाँचा वास्तविक औद्योगिक गतिविधि को सही नहीं दर्शाता। कारण भी सही है और यही अभिकथन की वैध व्याख्या देता है, क्योंकि भार उसी आधार वर्ष की उत्पादन संरचना से लिए जाते हैं जो समय के साथ अप्रासंगिक हो जाती है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I (अवधारणा/स्रोत)
A. उपयोग-आधारित वर्गीकरण (Use-based classification)
B. वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI)
C. राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (National Industrial Classification)
D. सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008

सूची-II (विवरण)
1. सरकारी सांख्यिकी के संग्रहण हेतु वैधानिक ढाँचा प्रदान करने वाला अधिनियम
2. कारखाना-स्तरीय आंकड़ों का प्रमुख स्रोत, जो IIP के लिए आधार-सूची के रूप में उपयोगी है
3. वस्तुओं को प्राथमिक, पूंजीगत, मध्यवर्ती और उपभोक्ता जैसी अंतिम उपयोग श्रेणियों में बाँटने की पद्धति
4. आर्थिक गतिविधि के आधार पर उद्योगों को कोड देने वाली वर्गीकरण-प्रणाली

  1. A-3, B-2, C-4, D-1
  2. A-2, B-3, C-1, D-4
  3. A-1, B-4, C-3, D-2
  4. A-4, B-1, C-2, D-3

उत्तर: A-3, B-2, C-4, D-1 — उपयोग-आधारित वर्गीकरण में वस्तुएँ अंतिम उपयोग के अनुसार बाँटी जाती हैं (A-3)। ASI कारखाना-स्तरीय आंकड़ों का प्रमुख स्रोत है (B-2)। राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण उद्योगों को आर्थिक गतिविधि के आधार पर कोड देता है (C-4)। सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 सांख्यिकी संग्रहण का वैधानिक ढाँचा देता है (D-1)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जैसे सांख्यिकीय संकेतकों का आधार वर्ष आवधिक रूप से संशोधित करना नीति-निर्माण की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक माना जाता है। आधार वर्ष संशोधन की आवश्यकता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और इसके साथ यह भी बताइए कि राज्य स्तरीय IIP को अखिल भारतीय IIP की कार्यप्रणाली के अनुरूप बनाने में किन संस्थागत और सांघिक (federal) चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर के लिए अपेक्षित बिंदु:
1. परिचय: IIP की परिभाषा, यह अल्पकालिक संकेतक है जो औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन मापता है; वर्तमान अखिल भारतीय IIP का आधार वर्ष 2011-12 है; कार्यशाला में प्रस्तावित नया आधार वर्ष 2022-23 है।
2. आधार वर्ष संशोधन की आवश्यकता: (क) संरचनात्मक परिवर्तन, जैसे सेवा-प्रधान और उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों का विस्तार; (ख) नए उत्पादों का उभरना और पुराने उत्पादों का अप्रचलित होना; (ग) लास्पेयर्स सूत्र (Laspeyres Formula) पर आधारित भारित सूचकांक में पुराने भार का वास्तविकता से दूर होना; (घ) राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) में परिवर्तन के साथ तालमेल।
3. संस्थागत ढाँचा: MoSPI और केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की भूमिका; वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) का आधार-सूची के रूप में उपयोग; सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 का वैधानिक आधार; आंकड़ा-संग्रहण में मापन त्रुटियाँ और रिपोर्टिंग इकाइयों की गुणवत्ता।
4. संघवादी आयाम: संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत आर्थिक एवं सामाजिक नियोजन समवर्ती सूची में आता है, अतः राज्य सांख्यिकी कार्यालयों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है; राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एकरूपता और तुलनीयता की चुनौती; राज्यों की तकनीकी क्षमता का अंतर; केरल के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय जैसे राज्य संस्थानों की क्षमता-वृद्धि का महत्त्व।
5. विभिन्न दृष्टिकोण: सांख्यिकीय शुद्धता के पक्ष में तर्क (दीर्घकालिक तुलनीयता बनाम संरचनात्मक प्रासंगिकता); आधार वर्ष बार-बार बदलने से श्रृंखलाओं की असंगति का तर्क; श्रृंखला-जोड़ (linking) जैसी तकनीकों से निरंतरता बनाए रखने का विकल्प।
6. निष्कर्ष: विश्वसनीय आधिकारिक सांख्यिकी को साक्ष्य-आधारित नीति और सूचित सार्वजनिक चर्चा का आधार बताते हुए संशोधन, मानकीकरण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण का संतुलित समापन।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक केरल के तिरुवनंतपुरम में आयोजित ‘राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक’ के आधार वर्ष में संशोधन पर कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2021-22 करना
  2. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष को 2016-17 से बदलकर 2023-24 करना
  3. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष को 2018-19 से बदलकर 2025-26 करना
  4. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष को 2020-21 से बदलकर 2024-25 करना

उत्तर: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष को 2016-17 से बदलकर 2023-24 करना — कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष को 2016-17 से बदलकर 2023-24 करना है, ताकि नवीनतम आर्थिक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित किया जा सके।

Mains: केरल राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (SLII) के आधार वर्ष में संशोधन की आवश्यकता और उसके प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए, केरल के औद्योगिक विकास में इसकी भूमिका की चर्चा करें।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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