05 Sep 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना: आवेदन प्रक्रिया अभी जारी, जानिए पूरी जानकारी
✎ सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने और मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने हेतु घरेलू कोयला संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- Prelims: कोयला गैसीकरण, लिग्नाइट गैसीकरण, सिनगैस, मेथनॉल उत्पादन, अमोनिया उत्पादन, यूरिया उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत
- Essay: ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता: भारत के विकास का मार्ग, पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियाँ और सतत विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने और मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने हेतु घरेलू कोयला संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) ने सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना (Scheme for Promotion of Surface Coal/Lignite Gasification Projects) के संबंध में कुछ मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है। इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि योजना के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आवेदन प्रक्रिया अभी जारी है और कुछ आवेदन प्राप्त भी हुए हैं, जबकि अन्य संभावित आवेदक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। यह योजना देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण के विकास में तेजी लाने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 13 मई 2026 को अनुमोदित की गई थी।
पृष्ठभूमि
- भारत के पास कोयले का विशाल भंडार है, लेकिन इसका उपयोग मुख्य रूप से बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
- कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) कोयले को स्वच्छ ईंधन और रासायनिक फीडस्टॉक में बदलने की एक प्रक्रिया है।
- यह प्रक्रिया सिनगैस (Syngas) का उत्पादन करती है, जिसका उपयोग मेथनॉल (Methanol), अमोनिया (Ammonia), यूरिया (Urea) और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
- भारत वर्तमान में इन उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे देश की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा प्रभावित होती है।
- घरेलू कोयले के गैसीकरण से आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
- यह योजना 37,500 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ अनुमोदित की गई है, जो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश को दर्शाती है।
सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना क्या है?
- यह योजना देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
- इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू कोयला और लिग्नाइट को सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित करना है।
- यह योजना मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन के लिए घरेलू संसाधनों के अधिक उपयोग को सुगम बनाकर आयातित कच्चे माल पर निर्भरता को कम करने का प्रयास करती है।
- योजना के तहत, कोयला मंत्रालय ने संभावित परियोजना विकासकर्ताओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए कई रोड शो और हितधारक जुड़ाव अभियान चलाए हैं।
- तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (TFL) और NTPC लिमिटेड जैसी कंपनियों ने पहले ही अपने आवेदन जमा कर दिए हैं।
- यह योजना भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कुल वित्तीय परिव्यय | 37,500 करोड़ रुपये का विशाल निवेश, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| उद्देश्य | कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण को बढ़ावा देना तथा उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन। |
| उत्पाद | सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों का उत्पादन। |
| घरेलू संसाधनों का उपयोग | आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना। |
| आवेदन प्रक्रिया | निरंतर चलने वाली प्रक्रिया, जिसमें कई चरण और पर्याप्त तैयारी का समय शामिल है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना घरेलू कोयला और लिग्नाइट संसाधनों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे मेथनॉल और अमोनिया का उत्पादन औद्योगिक विकास को गति देगा और नए रोजगार के अवसर सृजित करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा
- कोयला गैसीकरण के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन में विविधता लाने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होगा।
- यह स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दीर्घकालिक ऊर्जा स्थिरता के लिए आवश्यक है।
पर्यावरण और स्थिरता
- कोयला गैसीकरण पारंपरिक कोयला दहन की तुलना में कम प्रदूषणकारी हो सकता है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, हालांकि कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) प्रौद्योगिकियों का एकीकरण महत्वपूर्ण होगा।
- यह योजना भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में एक कदम हो सकती है, बशर्ते कि गैसीकरण प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से लागू किया जाए।
औद्योगिक विकास
- यह योजना उर्वरक, रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, जिससे इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
- अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे गैसीकरण प्रौद्योगिकियों में नवाचार और दक्षता में सुधार होगा।
चुनौतियाँ
1. उच्च पूंजीगत लागत
- कोयला गैसीकरण परियोजनाएं अत्यधिक पूंजी-गहन होती हैं, जिसके लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होती है।
- परियोजनाओं की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और वित्तपोषण की उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, अवसंरचना
2. तकनीकी जटिलताएँ
- गैसीकरण प्रक्रिया में जटिल प्रौद्योगिकियां शामिल होती हैं, जिनके लिए विशेषज्ञता और कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्वदेशीकरण सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, औद्योगिक नीति
3. पर्यावरणीय चिंताएँ
- हालांकि पारंपरिक दहन से बेहतर, गैसीकरण प्रक्रिया से भी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, जिसके लिए कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) जैसी प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता होती है।
- जल उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित पर्यावरणीय प्रभाव भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, संरक्षण
4. बाजार की अस्थिरता
- उत्पादित रसायनों और उर्वरकों के लिए बाजार की मांग और मूल्य में उतार-चढ़ाव परियोजनाओं की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकता है।
- अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बदलाव भी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, व्यापार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| परियोजना की तैयारी में समय | गैसीकरण परियोजनाओं की जटिलता के कारण पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट, प्रौद्योगिकी आकलन और वित्तपोषण व्यवस्था में लंबा समय लगता है। |
| निवेशकों की झिझक | उच्च पूंजीगत लागत और लंबी रिटर्न अवधि के कारण निजी क्षेत्र के निवेशकों में प्रारंभिक झिझक हो सकती है। |
| तकनीकी जोखिम | नई और जटिल गैसीकरण प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तकनीकी जोखिम और परिचालन चुनौतियाँ शामिल हो सकती हैं। |
| नियामक और अनुमोदन प्रक्रियाएँ | परियोजनाओं के लिए विभिन्न नियामक अनुमतियाँ और अनुमोदन प्राप्त करने में लगने वाला समय एक बाधा हो सकता है। |
| बुनियादी ढाँचा | कोयला/लिग्नाइट की आपूर्ति, जल उपलब्धता और उत्पाद वितरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे का विकास एक चुनौती हो सकती है। |
आगे की राह
- परियोजना विकासकर्ताओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन के अतिरिक्त, तकनीकी सहायता और विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया जाना चाहिए ताकि परियोजना की तैयारी और कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके।
- कार्बन कैप्चर और भंडारण (CCS) प्रौद्योगिकियों के एकीकरण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि गैसीकरण परियोजनाओं के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम किया जा सके।
- एकल खिड़की निकासी प्रणाली (Single Window Clearance System) को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि नियामक अनुमतियों और अनुमोदनों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
- घरेलू अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि गैसीकरण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके और लागत प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकें।
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी (PPP) मॉडल को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि पूंजीगत लागत और जोखिमों को साझा किया जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि नवीनतम और सबसे कुशल गैसीकरण प्रौद्योगिकियों को भारत में लाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कोयला गैसीकरण · लिग्नाइट गैसीकरण · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · आत्मनिर्भर भारत · ऊर्जा सुरक्षा · मेथनॉल उत्पादन · अमोनिया उत्पादन · सिनगैस · राजकोषीय प्रोत्साहन · कार्बन कैप्चर · पर्यावरण संरक्षण · औद्योगिक विकास
अवधारणा प्रवाह
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी → योजना का वित्तीय परिव्यय (37,500 करोड़ रुपये) → कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण को प्रोत्साहन → सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया जैसे उत्पाद → आयात निर्भरता में कमी और ऊर्जा सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये है।
2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण के विकास में तेजी लाना है।
3. यह योजना केवल सिनगैस और मेथनॉल जैसे उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देती है, अमोनिया और यूरिया को नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये है। कथन 2 सही है। योजना का उद्देश्य देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण के विकास में तेजी लाना है। कथन 3 गलत है। यह योजना सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तन को बढ़ावा देती है।
Q2. कोयला गैसीकरण प्रक्रिया के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- कोयला गैसीकरण से सिनगैस का उत्पादन होता है, जिसका उपयोग विभिन्न रसायनों के निर्माण में किया जा सकता है।
- यह प्रक्रिया कोयले को सीधे जलाने की तुलना में कम प्रदूषणकारी मानी जाती है।
- कोयला गैसीकरण भारत की आयातित कच्चे माल पर निर्भरता को कम करने में सहायक हो सकता है।
- कोयला गैसीकरण से उत्पन्न सिनगैस का उपयोग केवल बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है, रासायनिक उत्पादन के लिए नहीं।
उत्तर: कोयला गैसीकरण से उत्पन्न सिनगैस का उपयोग केवल बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है, रासायनिक उत्पादन के लिए नहीं। — विकल्प D सही नहीं है। कोयला गैसीकरण से उत्पन्न सिनगैस का उपयोग न केवल बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है, बल्कि मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे विभिन्न रसायनों के उत्पादन के लिए भी किया जा सकता है। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में कोयला गैसीकरण की क्षमता का मूल्यांकन कीजिए। इस संदर्भ में, सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना के महत्व पर प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में कोयला गैसीकरण की अवधारणा, इसके लाभ (जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन, आयात निर्भरता में कमी, पर्यावरण लाभ) और भारत के ऊर्जा परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को स्पष्ट करें। सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना के प्रमुख प्रावधानों (वित्तीय परिव्यय, उद्देश्य, लक्षित उत्पाद) का उल्लेख करें। योजना के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक संवृद्धि और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में इसकी भूमिका का विश्लेषण करें। चुनौतियों (तकनीकी, वित्तीय, पर्यावरणीय) का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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