पंचायती राज मंत्रालय का विशेष अभियान 6.0: 14 अक्टूबर को स्वच्छता एवं निपटान अभियान

पंचायती राज मंत्रालय का विशेष अभियान 6.0: 14 अक्टूबर को स्वच्छता एवं निपटान अभियान

पंचायती राज मंत्रालय का विशेष अभियान 6.0: 14 अक्टूबर को स्वच्छता एवं निपटान अभियान

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✎ विशेष अभियान 6.0 (SCDPM; 2–31 अक्टूबर 2026, नोडल विभाग DARPG) के अंतर्गत पंचायती राज मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2026 को PRI/RLB के लिए स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान का एक दिवसीय अभियान तय किया है; पंचायतें संविधान के भाग IX…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन: सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही, ई-गवर्नेंस, नागरिक चार्टर और शिकायत निवारण  |  GS Paper II — संविधान: 73वाँ संविधान संशोधन, पंचायती राज संस्थाएँ और विकेंद्रीकरण  |  GS Paper II — सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप: ग्रामीण स्वच्छता तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)  |  GS Paper III — पर्यावरण: ठोस, जैव और ई-अपशिष्ट प्रबंधन
  • Prelims: विशेष अभियान 6.0 (SCDPM 6.0), प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), पंचायती राज मंत्रालय, अनुच्छेद 243 से 243O (संविधान का भाग IX), 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992, ग्यारहवीं अनुसूची (29 विषय), ग्रामीण स्थानीय निकाय (RLB), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), ई-ऑफिस, ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022, श्रमदान
  • Essay: स्वच्छता केवल अभियान नहीं, आदत: संस्थागत सुधार और जन-भागीदारी की भूमिका, विलंबित निर्णय, बाधित शासन: लंबित मामलों का निपटान और जवाबदेह प्रशासन

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 (SCDPM; 2–31 अक्टूबर 2026, नोडल विभाग DARPG) के अंतर्गत पंचायती राज मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2026 को PRI/RLB के लिए स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान का एक दिवसीय अभियान तय किया है; पंचायतें संविधान के भाग IX (अनुच्छेद 243–243O) और ग्यारहवीं अनुसूची के ‘स्वास्थ्य और स्वच्छता’ विषय से जुड़ी हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

पंचायती राज मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2026 को एक दिवसीय स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान का विशेष अभियान आयोजित करने की घोषणा की है। यह विशेष अभियान 6.0 (SCDPM 6.0) के कार्यान्वयन चरण का हिस्सा है, जो 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है। मंत्रालय ने 12 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज विभागों को परामर्श जारी किया। इसमें पंचायती राज संस्थाओं (PRI) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLB) से इस दिन स्वच्छता श्रमदान, अनुपयोगी सामग्री हटाने, सार्वजनिक स्थानों के सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण तथा लंबित शिकायतों, आपत्तियों और आवेदनों के निपटान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया है। स्वच्छता कर्मियों को सम्मानित करने की भी योजना है। मंत्रालय ने अपने कर्मचारियों के लिए ई-ऑफिस प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया, जिसमें फाइल वर्कफ़्लो और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन पर ध्यान दिया गया।

पृष्ठभूमि

  • विशेष अभियान की शुरुआत अक्टूबर 2021 में हुई थी। तब से इसे हर वर्ष अक्टूबर में आयोजित किया जाता है, और इसका नोडल विभाग प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) है। इसमें केंद्र सरकार के मंत्रालय और विभाग, उनके अधीनस्थ तथा संबद्ध कार्यालय भाग लेते हैं।
  • अभियान की संरचना दो चरणों में होती है: तैयारी चरण, जिसमें लक्ष्य और लंबित मामले चिह्नित किए जाते हैं, और कार्यान्वयन चरण, जो 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से 31 अक्टूबर तक चलता है। निपटान की प्रगति की निगरानी समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर की जाती है।
  • अभियान के दो मुख्य उद्देश्य हैं: कार्यस्थलों पर स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, यानी इसे नियमित प्रशासनिक संस्कृति का अंग बनाना, और लंबित मामलों (जैसे संदर्भ, शिकायतें, अभिलेख प्रबंधन) को कम करना। साथ ही अनुपयोगी सामग्री (स्क्रैप) के निपटान से कार्यालय स्थान मुक्त करना भी इसका लक्ष्य है।
  • संविधान के भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243O) में पंचायतों के प्रावधान हैं, जो 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़े गए। यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ, जिसकी स्मृति में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
  • ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय हैं, जिनमें स्वास्थ्य और स्वच्छता भी शामिल है। अनुच्छेद 243G के अंतर्गत राज्य विधानमंडल पंचायतों को ऐसी शक्तियाँ और अधिकार दे सकता है जिससे वे स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य कर सकें। ‘स्थानीय शासन’ राज्य सूची का विषय है, इसलिए पंचायतों की वास्तविक शक्तियाँ राज्य के कानूनों पर निर्भर करती हैं।
  • ग्रामीण स्वच्छता के क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 2 अक्टूबर 2014 से चल रहा है। इसके दूसरे चरण में खुले में शौच से मुक्ति (ODF) को बनाए रखने और ODF प्लस दर्जा प्राप्त करने पर बल है। ग्राम पंचायतें ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

विशेष अभियान (SCDPM) क्या है?

  • यह केंद्र सरकार का वार्षिक अभियान है, जिसका पूरा नाम ‘सरकार में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने तथा लंबित मामलों को न्यूनतम करने का विशेष अभियान’ (Special Campaign for Institutionalising Swachhata and Minimising Pendency in Government) है। इसका संक्षिप्त रूप SCDPM है।
  • इसका समन्वय DARPG करता है, जो कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत आता है। प्रत्येक मंत्रालय अपने लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर लक्ष्य तय करता है।
  • निपटान के लिए चिह्नित लंबित मामलों में सामान्यतः सांसदों के संदर्भ, राज्य सरकारों के संदर्भ, अंतर-मंत्रालयी संदर्भ, संसदीय आश्वासन, जन शिकायतें और अपील तथा अभिलेखों की समीक्षा जैसी श्रेणियाँ शामिल होती हैं। इसका उद्देश्य निर्णय-प्रक्रिया की गति बढ़ाना है।
  • स्वच्छता पक्ष में कार्यालयों की सफाई, अव्यवस्था हटाना, स्क्रैप और अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान, तथा पुरानी फाइलों की छँटाई और अभिलेख प्रबंधन आता है। इससे कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग होता है।
  • इस वर्ष पंचायती राज मंत्रालय की गतिविधियों में जैव-अपशिष्ट प्रबंधन पर मार्गदर्शन, ई-अपशिष्ट का संग्रह, पृथक्करण और निपटान, श्रमदान, जन शिकायत निवारण तथा सफाई मित्रों के साथ संवाद शामिल हैं। ई-अपशिष्ट के निपटान का विधिक ढाँचा ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में है।
  • इस अभियान का अनूठा पक्ष 14 अक्टूबर 2026 को PRI और RLB की भागीदारी है। इससे यह अभियान केंद्रीय कार्यालयों से आगे बढ़कर ग्राम स्तर तक पहुँचता है और ग्राम पंचायतों में सेवा-प्रदाय तथा जवाबदेही को बल मिलता है।
  • ई-ऑफिस राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित डिजिटल फाइल-प्रबंधन प्रणाली है, जो राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत आती है। यह फाइलों की गति की निगरानी संभव बनाती है और कागज़ पर निर्भरता घटाकर लंबित मामलों में कमी लाती है।
  • चुनौतियाँ: अभियान-आधारित (एक माह की) कार्यप्रणाली के स्थायी न बन पाने का जोखिम रहता है। पंचायतों में कर्मचारियों, वित्त और तकनीकी क्षमता की कमी है। ऐसे में निपटान की संख्या के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता और स्थायी सुधार पर ध्यान देना आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
विशेष अभियान 6.0 (SCDPM 6.0) का कार्यान्वयन चरण: 2 से 31 अक्टूबर 2026 स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों को घटाने का यह प्रयास अब वार्षिक प्रशासनिक चक्र का भाग बन चुका है। एक दिन का अभियान पूरे माह की गतिविधियों का सघन चरण है।
14 अक्टूबर 2026 को पंचायती राज संस्थाओं (PRI) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLB) की समर्पित भागीदारी अभियान केंद्रीय मंत्रालय के कार्यालयों तक सीमित न रहकर ग्रामीण शासन की सबसे निचली इकाई तक पहुँचता है। इससे सहकारी संघवाद के साथ-साथ जमीनी भागीदारी भी मजबूत होती है।
12 अक्टूबर 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पंचायती राज विभागों को परामर्श पंचायत राज्य सूची का विषय है, इसलिए मंत्रालय निर्देश देने के बजाय परामर्श जारी करता है। यह संघीय ढाँचे में केंद्र-राज्य समन्वय का तरीका दिखाता है।
स्वच्छता श्रमदान, अनुपयोगी सामग्री हटाना, स्क्रैप निपटान, जैव-अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट प्रबंधन कार्यस्थल पर अपशिष्ट पृथक्करण और निपटान की आदत विकसित होती है। साथ ही कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग संभव होता है।
जन शिकायत निवारण तथा पंचायतों में लंबित शिकायतों, आपत्तियों और आवेदनों की समीक्षा लंबित मामलों के निपटान को नागरिक-केंद्रित बनाता है। इससे पंचायतों की जवाबदेही और सेवा-प्रदायगी की विश्वसनीयता बढ़ती है।
सफाई मित्रों से संवाद और सम्मान; ई-ऑफिस प्रशिक्षण स्वच्छता कर्मियों की गरिमा को मान्यता मिलती है। ई-ऑफिस से फाइल-निपटान तेज और पारदर्शी होता है तथा डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन सुदृढ़ होता है।

महत्व

शासन और प्रशासनिक सुधार

  • लंबित मामलों का नियमित निपटान प्रशासनिक दक्षता का सूचक है। अभियान इसे वार्षिक अभ्यास बनाकर कार्यसंस्कृति में बदलने का प्रयास करता है।
  • ई-ऑफिस और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन से फाइल की गति पर नज़र रखना, उत्तरदायित्व तय करना और अभिलेखों को सुरक्षित रखना सरल होता है।
  • अनावश्यक अभिलेखों और स्क्रैप के निपटान से कार्यालय स्थान मुक्त होता है। यह बिना नए व्यय के संसाधनों का बेहतर उपयोग है।

स्थानीय स्वशासन और संघवाद

  • पंचायती राज संस्थाओं को सीधे अभियान से जोड़ने से उन्हें केवल योजनाओं के कार्यान्वयनकर्ता नहीं, बल्कि स्वशासन की संस्थाओं के रूप में सक्रिय भूमिका मिलती है।
  • राज्यों को परामर्श देने की पद्धति राज्य सूची के विषय में केंद्र की सीमित भूमिका और सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप है।
  • पंचायत कार्यालय गाँव में शासन का पहला संपर्क-बिंदु हैं। वहाँ स्वच्छता और शीघ्र सेवा से जनता का सरकार में विश्वास बढ़ता है।

सामाजिक और पर्यावरणीय पक्ष

  • जैव-अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट के उचित संग्रह, पृथक्करण और निपटान की सीख ग्रामीण स्तर पर स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन की नींव रखती है।
  • सामुदायिक भागीदारी से वृक्षारोपण और स्थानीय संसाधनों से सार्वजनिक स्थानों का सौंदर्यीकरण पर्यावरण के साथ सामुदायिक स्वामित्व की भावना भी बढ़ाता है।
  • सफाई मित्रों का सम्मान और उनसे संवाद श्रम की गरिमा और सामाजिक समावेशन का संदेश देता है।

जवाबदेही और नागरिक सेवा

  • पंचायतों में आवेदनों और आपत्तियों का समय पर निपटान नागरिकों के अधिकार-आधारित शासन की अपेक्षा को पूरा करता है।
  • प्रगति की नियमित समीक्षा से लक्ष्य-आधारित प्रशासन की प्रवृत्ति मजबूत होती है।

चुनौतियाँ

1. अभियान का औपचारिकता में सिमटना

  • एक दिवसीय या एक माह का अभियान प्रतीकात्मक आयोजन बन सकता है। फोटो और रिपोर्ट पर ध्यान रहने से स्थायी व्यवहार-परिवर्तन छूट सकता है।
  • लंबित मामलों की संख्या घटाने के दबाव में मामलों का गुणवत्ताहीन निपटान या केवल फाइल बंद करना संभव है।

2. पंचायतों की क्षमता और संसाधन की कमी

  • अनेक पंचायतों में स्थायी कर्मचारी, तकनीकी सहायता और अभिलेख रखने की व्यवस्था सीमित है।
  • अपशिष्ट पृथक्करण, ई-अपशिष्ट निपटान और स्क्रैप बिक्री के लिए आवश्यक अवसंरचना और वित्त हर पंचायत के पास नहीं है।

3. डिजिटल अंतराल और ई-ऑफिस का सीमित प्रसार

  • ई-ऑफिस जैसी प्रणालियाँ केंद्रीय कार्यालयों में अपेक्षाकृत आसान हैं, पर ग्रामीण स्तर पर कनेक्टिविटी, बिजली और डिजिटल कौशल की समस्या बनी रहती है।
  • प्रशिक्षण एक बार का आयोजन न रहकर निरंतर क्षमता-निर्माण का हिस्सा बने, यह सुनिश्चित करना कठिन है।

4. अपशिष्ट प्रबंधन की दीर्घकालिक व्यवस्था

  • जैव-अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट के लिए अधिकृत संग्रह और पुनर्चक्रण केंद्र तक पहुँच ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित है।
  • अभियान के बाद नियमित संग्रह-तंत्र न होने पर साफ किए गए स्थान फिर गंदे हो सकते हैं।

5. संघीय समन्वय और राज्यों की भिन्न क्षमता

  • पंचायत राज्य का विषय है, इसलिए अभियान की सफलता राज्यों की रुचि और पंचायती राज विभागों की तत्परता पर निर्भर है।
  • राज्यों के बीच पंचायतों को हस्तांतरित कार्य, कोष और कर्मचारी असमान हैं, जिससे प्रभाव में अंतर आता है।

6. सफाई कर्मियों की स्थिति

  • सम्मान समारोह के बावजूद कई सफाई कर्मियों की सुरक्षा, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा की समस्याएँ बनी हुई हैं।
  • प्रतीकात्मक सम्मान को ठोस सुरक्षा उपायों और अधिकारों के संरक्षण से जोड़ना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
टिकाऊपन एक माह या एक दिन की सक्रियता के बाद स्वच्छता और निपटान की गति बनी रहेगी या नहीं
मामलों की गुणवत्ता संख्या घटाने की होड़ में शिकायतों का वास्तविक समाधान दब सकता है
पंचायतों की क्षमता कर्मचारी, तकनीकी ज्ञान और अवसंरचना की कमी से कार्यान्वयन प्रभावित होता है
डिजिटल अंतराल ई-ऑफिस और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए ग्रामीण स्तर पर संपर्क और कौशल सीमित है
अपशिष्ट निपटान तंत्र पृथक्करण के बाद संग्रह, परिवहन और पुनर्चक्रण की श्रृंखला अपूर्ण है
निगरानी और मूल्यांकन केवल गतिविधियों की गणना होती है, परिणाम और नागरिक संतुष्टि का स्वतंत्र आकलन कम है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) (Swachh Bharat Mission-Grameen): ग्रामीण स्वच्छता और ठोस व द्रव अपशिष्ट प्रबंधन से सीधा संबंध
  • केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS): जन शिकायत निवारण का राष्ट्रीय मंच
  • ई-ऑफिस (e-Office): फाइल वर्कफ़्लो और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए, जिसका प्रशिक्षण स्रोत में उल्लिखित है
  • ई-ग्राम स्वराज (eGramSwaraj): पंचायतों की योजना, लेखा और प्रगति रिपोर्टिंग का डिजिटल पोर्टल
  • ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan): पंचायतों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार स्वच्छता और सार्वजनिक स्थान संबंधी कार्यों की योजना

आगे की राह

  • अभियान के कार्यों को नियमित मासिक या त्रैमासिक दिनचर्या में बदला जाए, ताकि स्वच्छता और लंबित मामलों का निपटान वर्षभर चले।
  • लंबित मामलों का मूल्यांकन केवल निपटान की संख्या से नहीं, बल्कि निपटान की गुणवत्ता, समय-सीमा और नागरिक संतुष्टि से किया जाए।
  • पंचायतों के लिए ई-ऑफिस, ई-ग्राम स्वराज और अभिलेख प्रबंधन पर निरंतर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की व्यवस्था हो।
  • राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों और 15वें वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना के लिए प्राथमिकता से किया जाए।
  • जैव-अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट के लिए ब्लॉक या जिला स्तर पर अधिकृत संग्रह और पुनर्चक्रण तंत्र बनाया जाए।
  • ग्राम सभा को सामाजिक अंकेक्षण और शिकायत-समीक्षा में शामिल करके नागरिक निगरानी मजबूत की जाए।
  • सफाई मित्रों के लिए सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान सुनिश्चित हों।
  • राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाकर पंचायतों को कार्य, कोष और कर्मचारी (3F) का वास्तविक हस्तांतरण आगे बढ़ाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विशेष अभियान 6.0 (SCDPM 6.0) · स्वच्छता का संस्थागतकरण · लंबित मामलों का निपटान · पंचायती राज संस्थाएँ (PRI) / ग्रामीण स्थानीय निकाय (RLB) · 73वाँ संविधान संशोधन और अनुच्छेद 243G · ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषय · कार्य, वित्त और कार्यकर्ता (3F) का विकेंद्रीकरण · श्रमदान और सामुदायिक भागीदारी · ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जैव-अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट · ई-ऑफिस और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन · जन शिकायत निवारण · जवाबदेह और उत्तरदायी शासन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
  • ग्यारहवीं अनुसूची, प्रविष्टि 23: स्वास्थ्य और स्वच्छता
  • ग्यारहवीं अनुसूची, प्रविष्टि 29: सामुदायिक संपत्तियों का रखरखाव
  • ग्यारहवीं अनुसूची, प्रविष्टि 6: सामाजिक वानिकी (वृक्षारोपण)
  • अनुच्छेद 243A: ग्राम सभा की शक्तियाँ और कार्य
  • अनुच्छेद 51A(g): पर्यावरण संरक्षण का मूल कर्तव्य
  • अनुच्छेद 48A: राज्य द्वारा पर्यावरण संरक्षण का निदेशक तत्त्व

अवधारणा प्रवाह

विशेष अभियान 6.0: 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान का वार्षिक चक्र  →  पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श  →  14 अक्टूबर 2026 को पंचायत कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता, श्रमदान और वृक्षारोपण  →  अपशिष्ट पृथक्करण, स्क्रैप निपटान और लंबित शिकायतों, आपत्तियों व आवेदनों की समीक्षा  →  ई-ऑफिस और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन से फाइल-निपटान में तेजी  →  सफाई मित्रों का सम्मान और प्रगति की समीक्षा  →  कुशल, जवाबदेह और उत्तरदायी शासन की ओर संस्थागत सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत में पंचायती राज संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग IX में अनुच्छेद 243 से 243O तक पंचायतों से संबंधित प्रावधान हैं।
2. ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के लिए 29 विषय सूचीबद्ध हैं।
3. ‘पंचायती राज’ संघ सूची का विषय है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: 73वें संशोधन ने भाग IX (अनुच्छेद 243–243O) जोड़ा। कथन 2 सही है: ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय हैं, जैसे स्वास्थ्य एवं स्वच्छता तथा सामुदायिक परिसंपत्तियों का रखरखाव। कथन 3 गलत है: स्थानीय शासन राज्य सूची की प्रविष्टि 5 में आता है, इसलिए यह राज्य का विषय है।

Q2. अभिकथन (A): पंचायतों को स्वच्छता जैसी स्थानीय सेवाओं के प्रभावी वितरण के लिए राज्य विधानमंडल द्वारा अधिकार और उत्तरदायित्व सौंपे जाने आवश्यक हैं।
कारण (R): अनुच्छेद 243G राज्य विधानमंडल को पंचायतों को ऐसी शक्तियाँ और प्राधिकार देने में समर्थ बनाता है, जिनसे वे स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य कर सकें, जिसमें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ तैयार करना और ग्यारहवीं अनुसूची के विषयों पर उनका क्रियान्वयन शामिल है।
निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, किंतु R गलत है
  4. A गलत है, किंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है — अनुच्छेद 243G राज्य विधानमंडल के माध्यम से पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपने का संवैधानिक आधार है। इसलिए R कथन A की सीधी व्याख्या करता है। विषयों का वास्तविक हस्तांतरण राज्यों के विवेक पर निर्भर है, इसीलिए राज्यों के बीच विकेंद्रीकरण में अंतर दिखता है।

Q3. स्तंभ-I (अनुच्छेद) को स्तंभ-II (विषय) से सुमेलित कीजिए:
स्तंभ-I: (A) अनुच्छेद 243D (B) अनुच्छेद 243G (C) अनुच्छेद 243I (D) अनुच्छेद 243K
स्तंभ-II: 1. स्थानों का आरक्षण 2. पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व 3. वित्त आयोग का गठन 4. पंचायतों के निर्वाचन

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-2, B-1, C-4, D-3
  3. A-1, B-3, C-2, D-4
  4. A-3, B-2, C-1, D-4

उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — अनुच्छेद 243D पंचायतों में स्थानों का आरक्षण (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाएँ) सुनिश्चित करता है। 243G शक्तियाँ और उत्तरदायित्व, 243I राज्य वित्त आयोग का गठन तथा 243K राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन का प्रावधान करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विशेष अभियान 6.0 (SCDPM 6.0) के अंतर्गत पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायती राज संस्थाओं को स्वच्छता अभियान और लंबित शिकायतों के निपटान में भाग लेने को कहा है। इस संदर्भ में विश्लेषण कीजिए कि अभियान-आधारित पहलें ग्रामीण स्थानीय शासन में स्वच्छता और जवाबदेही को किस सीमा तक संस्थागत रूप दे सकती हैं। 73वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप पंचायतों को सुदृढ़ करने के उपाय भी सुझाइए। (15 Marks)

रूपरेखा: भूमिका (2-3 पंक्तियाँ): SCDPM 6.0 का क्रियान्वयन चरण 2–31 अक्टूबर 2026 है। 14 अक्टूबर को PRI/RLB के लिए समर्पित दिन रखा गया है। गतिविधियाँ: पंचायत कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई, अनुपयोगी सामग्री हटाना, वृक्षारोपण, लंबित शिकायतों, आपत्तियों और आवेदनों का निपटान, सफाई कर्मियों का सम्मान। मंत्रालय स्तर पर ई-ऑफिस प्रशिक्षण भी हुआ।

भाग 1 – अभियान-आधारित दृष्टिकोण की उपयोगिता: (i) श्रमदान और सामुदायिक भागीदारी से जन-जागरूकता बनती है, जैसा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में दिखा; (ii) समयबद्ध लक्ष्य से लंबित मामलों पर प्रशासनिक ध्यान केंद्रित होता है; (iii) ई-ऑफिस और डिजिटल रिकॉर्ड से पारदर्शिता बढ़ती है; (iv) सफाई मित्रों को सम्मान देने से श्रम की गरिमा स्थापित होती है; (v) जैव-अपशिष्ट, ई-अपशिष्ट और स्क्रैप निपटान से कार्यालय परिसर में अपशिष्ट प्रबंधन की आदत बनती है।

भाग 2 – सीमाएँ: (i) एक-दिवसीय या मासिक आयोजन के बाद व्यवहार का टिकाऊ न रहना; (ii) ऊपर से निर्देशित (परामर्श) ढाँचे में ग्राम सभा की स्वायत्त भूमिका का कमज़ोर पड़ना; (iii) पंचायतों के पास अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्थायी वित्त, तकनीकी क्षमता और कर्मचारियों की कमी; (iv) सफाई कर्मियों की सामाजिक-आर्थिक असुरक्षा; (v) लंबित मामलों की संख्या घटाने पर ज़ोर से गुणवत्तापूर्ण निपटान की उपेक्षा का जोखिम।

भाग 3 – संवैधानिक और संस्थागत आयाम: भाग IX (अनुच्छेद 243–243O); अनुच्छेद 243G और ग्यारहवीं अनुसूची (प्रविष्टि 23 स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, प्रविष्टि 29 सामुदायिक परिसंपत्तियों का रखरखाव); स्थानीय शासन राज्य सूची का विषय है, इसलिए राज्यों में हस्तांतरण असमान है। 3F (कार्य, वित्त, कार्यकर्ता) की कमी; अनुच्छेद 243I (राज्य वित्त आयोग) और 243K (राज्य निर्वाचन आयोग)। पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिलते हैं, जिनका लगभग आधा हिस्सा पेयजल, वर्षा जल संचयन और स्वच्छता के लिए बंधित है।

भाग 4 – आगे की राह: (i) अभियान को ग्राम सभा और पंचायत विकास योजना (सबकी योजना सबका विकास) से जोड़ना; (ii) अपशिष्ट प्रबंधन की संपत्तियों के संचालन और रखरखाव का स्थायी वित्त; (iii) eGramSwaraj और पंचायत उन्नति सूचकांक में स्वच्छता और शिकायत निपटान के परिणाम-आधारित संकेतकों को शामिल करना; (iv) क्षमता निर्माण और सफाई कर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा तथा अधिकारों की सुरक्षा; (v) शिकायत निवारण के लिए CPGRAMS जैसी प्रणाली से समन्वय और सामाजिक अंकेक्षण; (vi) द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की स्थानीय शासन संबंधी सिफ़ारिशों के अनुरूप सच्चा विकेंद्रीकरण।

निष्कर्ष: अभियान जन-गति देते हैं, किंतु टिकाऊ स्वच्छता और जवाबदेही तभी संभव है जब पंचायतें संवैधानिक दर्जे के अनुरूप वित्तीय और प्रशासनिक रूप से सशक्त हों।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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