आईसीएआर के स्वच्छता अभियान 6.0 में 4000 से अधिक अभियान, जानिए मुख्य उपलब्धियां

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स्वच्छता अभियान 6.0 प्रक्रियाअभियान शुरू2 अक्टूबर 2026स्थानीय अभियान2-31 अक्टूबर 2026जन-भागीदारीग्राम सभा, श्रमदानपरिणाम1.3 लाख वर्ग फुट सफाईराजस्व प्राप्ति10 लाख रुपये
स्वच्छता अभियान 6.0 प्रक्रिया

✎ स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर 2026) में ICAR और उसके संस्थानों ने लगभग 4,000 स्वच्छता अभियान चलाए, जो संस्थागत स्वच्छता, ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान और जन-भागीदारी का व्यावहारिक उदाहरण है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): सरकारी योजनाएं और हस्तक्षेप, जन-भागीदारी आधारित शासन  |  GS Paper III — पर्यावरण (Environment): ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ई-कचरे का निपटान, जैव-विविधता और हरियाली  |  GS Paper III — कृषि (Agriculture): कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा संस्थानों की भूमिका, ICAR की संरचना
  • Prelims: स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission), स्वच्छता विशेष अभियान (Swachhta Vishesh Abhiyan), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (ATARI), ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, वर्मीकम्पोस्टिंग (Vermicomposting), जलकुंभी (Water Hyacinth) की आक्रामक प्रकृति, सतत विकास लक्ष्य 6 और 11 (SDG 6 and SDG 11)
  • Essay: स्वच्छता केवल सफाई का नहीं, नागरिक व्यवहार और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रश्न है, सरकारी संस्थानों का स्वच्छ कार्यस्थल से सतत विकास तक का मार्ग

त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 (2–31 अक्टूबर 2026) में ICAR और उसके संस्थानों ने लगभग 4,000 स्वच्छता अभियान चलाए, जो संस्थागत स्वच्छता, ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान और जन-भागीदारी का व्यावहारिक उदाहरण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) ने 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत लगभग 4,000 स्वच्छता अभियान आयोजित किए हैं। इस अभियान में ICAR के 114 संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, ATARI और KVK भाग ले रहे हैं। अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती पर हुई और इसमें लगभग 1.3 लाख वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई, कूड़ेदानों का वितरण, वृक्षारोपण, श्रमदान तथा ई-कचरे और गैर-ई-कचरे के निपटान से लगभग 10 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होना बताया गया है। साथ ही जलकुंभी की वर्मीकम्पोस्टिंग और पुरानी फाइलों की छंटाई जैसी टिकाऊ पद्धतियों को भी अपनाया गया है। समाचार का मुख्य महत्व यह है कि सरकारी संस्थान स्वच्छता को अपने प्रशासनिक और अभिलेख-प्रबंधन ढांचे का हिस्सा बना रहे हैं।

पृष्ठभूमि

  • स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी। इसके दो प्रमुख घटक हैं: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय) और शहरी क्षेत्रों के लिए (आवास और शहरी कार्य मंत्रालय)।
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान का कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। ई-कचरे के निपटान को अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही करने का प्रावधान है।
  • ICAR की स्थापना 1929 में हुई थी। यह एक स्वायत्त निकाय है, जो देश में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और उसके समन्वय का कार्य करता है। यह कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत DARE के साथ मिलकर काम करता है।
  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की स्थापना पहली बार 1974 में पुडुचेरी में हुई थी। ये केंद्र अनुसंधान और किसानों के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।
  • सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में समय-समय पर स्वच्छता पखवाड़े और विशेष अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिनका उद्देश्य अभिलेख-प्रबंधन सहित प्रशासनिक स्वच्छता को बढ़ावा देना है।

स्वच्छता विशेष अभियान क्या है?

  • स्वच्छता विशेष अभियान एक समयबद्ध, संस्थान-आधारित अभियान है, जिसमें कार्यालयों, परिसरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के साथ जन-जागरूकता पर बल दिया जाता है।
  • इसमें श्रमदान, ग्राम सभाएं, स्वच्छता सभाएं और कूड़ेदानों का वितरण जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं, जिससे सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित हो।
  • ई-कचरे और गैर-ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान करने से संस्थान राजस्व भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन आर्थिक रूप से भी व्यवहार्य बनता है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन के टिकाऊ उपायों में जैविक अपशिष्ट का वर्मीकम्पोस्टिंग द्वारा खाद में परिवर्तन शामिल है। जलकुंभी जैसे जल-खरपतवार का उपयोग इस दृष्टि से उपयोगी है, क्योंकि यह जलाशयों में तेजी से फैलकर जल-पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है।
  • पुरानी फाइलों की समीक्षा और छंटाई से अभिलेखों का उचित निपटान होता है, जो प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता में सहायक है।
  • वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाने की पहल स्वच्छता को पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ती है, जो सतत विकास लक्ष्यों की भावना के अनुरूप है।
  • स्वच्छता संबंधी प्रयासों की सफलता का मापन पहले और बाद की तस्वीरों, गतिविधियों के दस्तावेज़ीकरण तथा सहभागिता के आंकड़ों से किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अवधि और दायरा 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला एक महीने का अभियान, जिसमें आईसीएआर के 114 संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, एटीएआरआई और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) शामिल हैं। इसका शुभारंभ 2 अक्टूबर 2026 को हुआ।
प्रमुख उपलब्धियां लगभग 4,000 स्वच्छता अभियान, लगभग 1.3 लाख वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई और इलेक्ट्रॉनिक एवं गैर-इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ के निपटान से लगभग 10 लाख रुपये का राजस्व। ये आंकड़े संस्थागत प्रयास का मापन हैं, किसी नई योजना का वित्तीय आवंटन नहीं।
सामुदायिक भागीदारी श्रमदान, विशेष ग्राम सभाएं, स्वच्छता सभाएं और जागरूकता कार्यक्रम। इनसे गांवों और सार्वजनिक स्थानों तक अभियान का विस्तार हुआ।
टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन जलकुंभी की वर्मीकम्पोस्टिंग और पुरानी फाइलों की समीक्षा व छंटाई। इनसे जैविक अपशिष्ट का उपयोग और अभिलेख प्रबंधन दोनों सुदृढ़ होते हैं।
हरियाली और सौंदर्यीकरण सीटीयू (स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों) में वृक्षारोपण, “एक पेड़ मां के नाम” पहल और सफाई के बाद दस्तावेज़ीकरण सहित स्थानों का सौंदर्यीकरण। इससे स्वच्छता को पर्यावरणीय स्थिरता से जोड़ा गया।
श्रमिक सम्मान सफाई मित्रों, स्वच्छता कर्मचारियों और स्वयंसेवकों का सम्मान। यह सफाई कार्य में लगे श्रमिकों की गरिमा और मान्यता का संकेत है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • परिसरों में वृक्षारोपण और जलकुंभी जैसी आक्रामक जलीय वनस्पति के जैविक उपयोग से पर्यावरणीय संतुलन को व्यावहारिक रूप मिलता है।
  • वर्मीकम्पोस्टिंग से जैविक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण होता है, जिससे भूमि की उर्वरता और मृदा स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।
  • कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा अपनाई गई पद्धतियां अन्य सरकारी और ग्रामीण परिसरों के लिए व्यावहारिक मॉडल बन सकती हैं।

प्रशासनिक महत्व

  • पुरानी फाइलों की समीक्षा और छंटाई से अभिलेख प्रबंधन और कार्यालय दक्षता में सुधार होता है।
  • कबाड़ निपटान से राजस्व प्राप्ति होती है, जो सरकारी संपत्ति के नियमबद्ध और पारदर्शी निपटान का एक तरीका है।
  • पहले और बाद की तस्वीरों के माध्यम से दस्तावेज़ीकरण से जवाबदेही और निगरानी का आधार बनता है।

सामाजिक महत्व

  • ग्राम सभाओं और स्वच्छता सभाओं के माध्यम से जन-भागीदारी और सामुदायिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होती है।
  • सफाई मित्रों और स्वच्छता कर्मचारियों के सम्मान से श्रमिक गरिमा का संदेश समाज तक जाता है।

नीतिगत महत्व

  • यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) की भावना से जुड़ा है। इसका विषय “स्वच्छ भारत, विकसित भारत” स्वच्छता को विकास लक्ष्यों से जोड़ता है।
  • यह पहल दर्शाती है कि अभियान-आधारित प्रयास नियमित व्यवस्था में कैसे बदल सकते हैं, जो सुशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. अभियान-आधारित प्रयासों की निरंतरता

  • एक महीने के विशेष अभियान के बाद स्वच्छता का स्तर बनाए रखना अक्सर कठिन होता है। नियमित सफाई व्यवस्था और जवाबदेही तय किए बिना परिणाम अस्थायी रहते हैं।
  • स्वच्छता को कर्मचारियों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

2. स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण का अभाव

  • संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर गीले और सूखे कचरे का स्रोत पर पृथक्करण पूरी तरह नहीं हो पाता, जिससे वर्मीकम्पोस्टिंग और पुनर्चक्रण की क्षमता घटती है।
  • कूड़ेदानों का वितरण तभी प्रभावी होता है जब उसके साथ जागरूकता और संग्रहण व्यवस्था भी हो।

3. ई-कचरे और कबाड़ का वैज्ञानिक निपटान

  • इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ में भारी धातुएं और खतरनाक पदार्थ होते हैं। असुरक्षित निपटान से मृदा और जल प्रदूषण का खतरा रहता है।
  • कबाड़ बिक्री से राजस्व प्राप्त करना उपयोगी है, पर इसके लिए ई-अपशिष्ट नियमों के अनुपालन और अधिकृत पुनर्चक्रकों की भूमिका पर ध्यान देना आवश्यक है।

4. सफाई कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और कार्य-दशाएं

  • अभियानों में सम्मान पर जोर महत्वपूर्ण है, लेकिन सफाई कर्मचारियों की नियमित सेवा शर्तें, सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य सुविधाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं।
  • अस्थायी और संविदा आधारित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का विस्तार एक चुनौती बना हुआ है।

5. आक्रामक प्रजातियों का प्रबंधन

  • जलकुंभी (Water Hyacinth) एक आक्रामक जलीय खरपतवार है, जो जलाशयों और नहरों में जल प्रवाह और जैव विविधता को प्रभावित करती है।
  • इसे हटाने के बाद उसका उपयोग (जैसे वर्मीकम्पोस्टिंग) सुनिश्चित करना और उसके पुनः फैलाव को रोकना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
अभियान से नियमित व्यवस्था तक अभियान समाप्त होने के बाद स्वच्छता का स्तर गिरने का खतरा
स्रोत पर कचरा पृथक्करण गीले और सूखे कचरे के मिश्रण से पुनर्चक्रण और खाद निर्माण की क्षमता घटती है
ई-कचरे का सुरक्षित निपटान अनधिकृत निपटान से खतरनाक पदार्थों का पर्यावरण में रिसाव
श्रमिकों की सेवा-शर्तें सम्मान कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
प्रभाव का मापन वृक्षारोपण और सफाई के परिणाम स्थायी हैं या नहीं, इसका दीर्घकालिक मूल्यांकन आवश्यक

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)

आगे की राह

  • स्वच्छता विशेष अभियान की उपलब्धियों को नियमित सफाई कैलेंडर और निगरानी तंत्र में बदला जाए, ताकि परिणाम अभियान समाप्त होने के बाद भी बने रहें।
  • संस्थानों में गीले और सूखे कचरे के स्रोत पर पृथक्करण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियमित प्रशिक्षण दिया जाए।
  • जलकुंभी और अन्य जैविक अपशिष्ट से वर्मीकम्पोस्ट के उत्पादन को संस्थागत खेती और ग्रामीण स्तर पर जैविक खाद के रूप में अपनाया जाए।
  • इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ का निपटान ई-अपशिष्ट नियमों के अनुरूप अधिकृत पुनर्चक्रकों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।
  • सफाई मित्रों और स्वच्छता कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा लाभों का नियमित प्रावधान किया जाए।
  • पुरानी फाइलों की समीक्षा को अभिलेख प्रबंधन की स्थायी प्रक्रिया बनाया जाए, जिसमें अभिलेख धारण अनुसूची (Record Retention Schedule) का पालन हो।
  • वृक्षारोपण पहल (जैसे “एक पेड़ मां के नाम”) में पौधों के जीवित रहने की दर और रख-रखाव की व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाए।
  • गांवों और स्थानीय समुदायों में ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वच्छता पर संवाद बढ़ाया जाए, ताकि जन-भागीदारी अभियान से आगे भी बनी रहे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
  • अनुच्छेद 243A: ग्राम सभा के माध्यम से जन-भागीदारी

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 की घोषणा और 2 अक्टूबर 2026 को संस्थानों में शुभारंभ  →  आईसीएआर के 114 संस्थानों, क्षेत्रीय केंद्रों, एटीएआरआई और कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक स्थानीय स्तर पर अभियान  →  श्रमदान, ग्राम सभाओं और जागरूकता कार्यक्रमों से जन-भागीदारी और सामुदायिक उत्तरदायित्व का विस्तार  →  सफाई, कबाड़ निपटान, वृक्षारोपण और जलकुंभी की वर्मीकम्पोस्टिंग से भौतिक और पर्यावरणीय परिणाम  →  लगभग 4,000 अभियानों, 1.3 लाख वर्ग फुट सफाई और लगभग 10 लाख रुपये राजस्व के रूप में मापन और दस्तावेज़ीकरण  →  सफाई मित्रों और स्वयंसेवकों के सम्मान से श्रमिक गरिमा और स्वच्छता की संस्कृति का सुदृढ़ीकरण  →  निरंतर निगरानी और नियमित व्यवस्था में परिवर्तन से स्वच्छता के दीर्घकालिक परिणाम

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में ही चलाया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता सुनिश्चित करना था।
2. इस अभियान में जलकुंभी की वर्मीकम्पोस्टिंग जैसी टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया गया।
3. ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल इस अभियान का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाना था।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह अभियान देशभर में ICAR के संस्थानों, क्षेत्रीय केंद्रों, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों (ATARI) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) द्वारा चलाया गया था, जिसमें गांवों और सार्वजनिक स्थानों पर भी स्वच्छता अभियान शामिल थे। कथन 2 सही है क्योंकि जलकुंभी की वर्मीकम्पोस्टिंग जैसी टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा दिया गया। कथन 3 सही है क्योंकि ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया गया था।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संगठन भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में एक शीर्ष निकाय है और स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है?

  1. भारतीय खाद्य निगम (FCI)
  2. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
  3. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)
  4. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)

उत्तर: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) — भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में भारत का एक शीर्ष निकाय है और इसने स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 में अपने संस्थानों और केंद्रों के माध्यम से सक्रिय रूप से भाग लिया।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के प्रमुख उद्देश्यों और परिणामों पर चर्चा कीजिए। यह अभियान स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसके आयोजक (DARE/ICAR) और अवधि का उल्लेख हो।
मुख्य भाग:
1. प्रमुख उद्देश्य: अभियान के मुख्य उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे स्वच्छ कार्यस्थल, जनभागीदारी, सतत स्वच्छता की संस्कृति, अपशिष्ट प्रबंधन, लंबित मामलों का निपटान आदि।
2. प्रमुख परिणाम: अभियान की उपलब्धियों और परिणामों को सूचीबद्ध करें, जैसे आयोजित अभियानों की संख्या, साफ किया गया क्षेत्र, राजस्व प्राप्ति, सामुदायिक भागीदारी में वृद्धि, पर्यावरणीय स्थिरता के साथ एकीकरण (वृक्षारोपण, वर्मीकम्पोस्टिंग), सफाई मित्रों का सम्मान आदि।
3. स्वच्छ भारत अभियान से संबंध: स्पष्ट करें कि यह अभियान स्वच्छ भारत अभियान के व्यापक लक्ष्यों (खुले में शौच मुक्त भारत, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, व्यवहार परिवर्तन, जनभागीदारी) को कैसे मजबूत करता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में ICAR के KVKs की भूमिका पर प्रकाश डालें।
निष्कर्ष: अभियान के महत्व को रेखांकित करें और भविष्य में सतत स्वच्छता प्रथाओं को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर संक्षिप्त टिप्पणी करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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