कला संस्कृति विकास योजना: प्रदर्शन कला के लिए सरकारी सहायता

कला संस्कृति विकास योजना: प्रदर्शन कला के लिए सरकारी सहायता

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति  |  GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (रचनात्मक अर्थव्यवस्था)
  • Prelims: कला संस्कृति विकास योजना (KSVY), क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (ZCC), गुरु-शिष्य परंपरा, रचनात्मक भारत पहल, संस्कृति मंत्रालय, प्रदर्शन कलाएँ, केंद्रीय क्षेत्र योजना
  • Essay: भारत की सांस्कृतिक विविधता और उसका संरक्षण, कला और संस्कृति के माध्यम से आर्थिक विकास, सांस्कृतिक विरासत का महत्व और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) संस्कृति मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जो भारत की विविध कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित है, जिसमें ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ को बढ़ावा देना भी शामिल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी प्रदान की है। इस योजना के तहत, असम और हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में प्रदर्शन कलाओं में लगे पात्र सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों, जिनमें आदिवासी और ग्रामीण कलाकार शामिल हैं, को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह जानकारी योजना के दायरे, लाभार्थियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत वाला देश है, जिसमें विभिन्न प्रकार की प्रदर्शन कलाएँ, लोक परंपराएँ और आदिवासी कलाएँ शामिल हैं।
  • इन कला रूपों को अक्सर संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता होती है ताकि वे लुप्त न हों और अगली पीढ़ियों तक पहुँच सकें।
  • सरकार ने सांस्कृतिक क्षेत्र को बढ़ावा देने और कलाकारों को सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएँ और पहलें शुरू की हैं।
  • कलाकार, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में, अक्सर वित्तीय बाधाओं और मंच की कमी का सामना करते हैं, जिससे उनकी कला को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण न केवल पहचान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के माध्यम से आर्थिक विकास में भी योगदान देता है।
  • क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (ZCC) जैसे संस्थान देश भर में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) क्या है?

  • यह संस्कृति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसका उद्देश्य देश भर में कला और संस्कृति को बढ़ावा देना है।
  • यह योजना प्रदर्शन कलाओं में लगे पात्र सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों, जिनमें आदिवासी और ग्रामीण कलाकार शामिल हैं, को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • KSVY भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से आवंटित वार्षिक बजट के माध्यम से लाभार्थियों को धनराशि जारी करती है।
  • योजना का एक महत्वपूर्ण घटक ‘गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता’ है, जो नाट्य मंडलियों, रंगमंच समूहों और संगीत मंडलियों को समर्थन देती है।
  • KSVY आदिवासी कला, लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य, सांस्कृतिक उत्सवों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।
  • मंत्रालय ने ‘रचनात्मक भारत’ पहल भी तैयार की है, जिसका उद्देश्य रचनात्मक अर्थव्यवस्था के सतत विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें उभरते कलाकारों और रचनात्मक पेशेवरों के लिए समर्थन शामिल है।
  • यह योजना कलाकारों को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, उत्सवों, कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों में शामिल करके मंच प्रदान करती है, साथ ही उन्हें मानदेय, यात्रा भत्ता और आवास जैसी सुविधाएँ भी प्रदान करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
केंद्रीय क्षेत्र योजना यह योजना केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषित है, जो देश भर में कला और संस्कृति के विकास के लिए एक समान दृष्टिकोण सुनिश्चित करती है।
प्रदर्शन कलाओं पर केंद्रित नृत्य, संगीत, रंगमंच आदि जैसी प्रदर्शन कलाओं में लगे सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
आदिवासी और ग्रामीण कलाकारों को शामिल करना यह सुनिश्चित करती है कि हाशिए पर पड़े और पारंपरिक कला रूपों को बढ़ावा मिले, जिससे सांस्कृतिक विविधता और समावेशिता बनी रहे।
गुरु-शिष्य परंपरा का संवर्धन यह उप-योजना पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण और युवा पीढ़ी को कौशल हस्तांतरण को बढ़ावा देती है।
सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (ZCCs) देश भर में सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक संस्थागत ढाँचा प्रदान करते हैं, जिससे स्थानीय कला और कलाकारों को मंच मिलता है।
‘रचनात्मक भारत’ पहल सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण, बाजार पहुंच और डिजिटल सशक्तिकरण पर केंद्रित है।

महत्व

सांस्कृतिक महत्व

  • यह योजना भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • यह आदिवासी और लोक कला रूपों को एक मंच प्रदान करती है, जिससे उनकी पहचान और निरंतरता सुनिश्चित होती है।
  • गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से पारंपरिक कला रूपों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण सुनिश्चित होता है, जिससे सांस्कृतिक ज्ञान का संरक्षण होता है।

सामाजिक महत्व

  • यह कलाकारों, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाती है।
  • सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलता है।
  • युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और कला को एक स्थायी आजीविका के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

आर्थिक महत्व

  • कला और संस्कृति के क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, जिससे कलाकारों की आय में वृद्धि होती है।
  • ‘रचनात्मक भारत’ पहल के माध्यम से सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है, जिससे GDP में योगदान होता है।
  • सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होता है।

शासनिक महत्व

  • संस्कृति मंत्रालय द्वारा पूरे देश में कला और संस्कृति के विकास के लिए एक समन्वित और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया जाता है।
  • क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र विकेन्द्रीकृत तरीके से सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।
  • योजनाओं की जानकारी का सक्रिय प्रसार पारदर्शिता और अधिक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करता है।

चुनौतियाँ

1. सीमित पहुंच और जागरूकता

  • कई संभावित लाभार्थी, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, योजना के बारे में जानकारी से अनभिज्ञ रहते हैं।
  • आवेदन प्रक्रिया की जटिलता छोटे संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों के लिए एक बाधा हो सकती है।

2. वित्तीय संसाधनों का अभाव

  • कला और संस्कृति के विशाल क्षेत्र की तुलना में आवंटित बजट अक्सर अपर्याप्त होता है।
  • वित्तीय सहायता की राशि कई बार कलाकारों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती।

3. कला रूपों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण

  • कई लुप्तप्राय लोक और आदिवासी कला रूपों का पर्याप्त दस्तावेजीकरण नहीं किया गया है।
  • आधुनिक प्रभावों के कारण पारंपरिक कला रूपों के विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है।

4. कलाकारों के लिए स्थायी आजीविका

  • वित्तीय सहायता अक्सर अस्थायी होती है, जिससे कलाकारों के लिए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित नहीं हो पाती।
  • कला को एक व्यवहार्य करियर विकल्प के रूप में बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
योजना की जानकारी का प्रसार दूरदराज के क्षेत्रों में कलाकारों तक पहुंच का अभाव, जिससे पात्र लाभार्थी योजना का लाभ नहीं उठा पाते।
आवेदन प्रक्रिया की जटिलता छोटे और व्यक्तिगत कलाकारों के लिए आवेदन भरने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने में कठिनाई।
वित्तीय सहायता की अपर्याप्तता बढ़ती महंगाई और कलाकारों की बढ़ती जरूरतों के मुकाबले दी जाने वाली राशि का कम होना।
पारंपरिक कला रूपों का क्षरण आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण के प्रभाव से कई लोक और आदिवासी कला रूपों का लुप्त होना।
कलाकारों के लिए बाजार पहुंच कलाकारों को अपनी कलाकृतियों को बेचने और व्यापक दर्शकों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त मंचों का अभाव।
डेटा संग्रह और निगरानी जिलावार, श्रेणीवार डेटा की अनुपलब्धता योजना के प्रभाव का सटीक मूल्यांकन करने में बाधा डालती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • कला संस्कृति विकास योजना (KSVY)
  • रचनात्मक भारत पहल

आगे की राह

  • योजना की जानकारी का डिजिटल और स्थानीय भाषाओं में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में।
  • आवेदन प्रक्रिया को सरल और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाए, जिसमें ऑनलाइन पोर्टल और स्थानीय सहायता केंद्र शामिल हों।
  • कलाकारों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता की राशि की नियमित समीक्षा की जाए और उसे वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ाया जाए।
  • पारंपरिक कला रूपों के दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए विशेष परियोजनाएं शुरू की जाएं।
  • कलाकारों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने हेतु ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सांस्कृतिक मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए।
  • कलाकारों के लिए कौशल विकास और उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं ताकि उन्हें कला को एक स्थायी आजीविका के रूप में अपनाने में मदद मिल सके।
  • योजना के प्रभाव का बेहतर मूल्यांकन करने के लिए जिलावार और श्रेणीवार डेटा संग्रह प्रणाली को मजबूत किया जाए।
  • निजी क्षेत्र और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधियों को कला और संस्कृति के संवर्धन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कला संस्कृति विकास योजना · केंद्रीय क्षेत्र योजना · प्रदर्शन कलाएँ · सांस्कृतिक विरासत संरक्षण · क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र · रचनात्मक भारत पहल · गुरु-शिष्य परंपरा · सांस्कृतिक संवर्धन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51A (f): हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझना और उसका परिरक्षण करना।
  • अनुच्छेद 51A (j): व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करना।
  • अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण, जिसमें उनकी संस्कृति का संरक्षण भी शामिल है।

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) का कार्यान्वयन  →  पात्र सांस्कृतिक संगठनों और कलाकारों को वित्तीय सहायता  →  आदिवासी, लोक और प्रदर्शन कलाओं का संवर्धन व संरक्षण  →  कलाकारों की आजीविका में सुधार और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण  →  सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था का विकास  →  राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान का सुदृढ़ीकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. कला संस्कृति विकास योजना (केएसवीवाई) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह संस्कृति मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
2. यह योजना केवल आदिवासी और ग्रामीण कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
3. इसके तहत जिलावार और श्रेणीवार आंकड़े रखे जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है क्योंकि केएसवीवाई संस्कृति मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना पात्र सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों, जिनमें आदिवासी और ग्रामीण कलाकार शामिल हैं, सभी को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। कथन 3 गलत है क्योंकि केएसवीवाई के तहत जिलावार, श्रेणीवार और निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े नहीं रखे जाते हैं।

Q2. भारत में क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों (ZCC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इनकी स्थापना देश भर में लोक/आदिवासी कला और संस्कृति के विभिन्न रूपों की रक्षा, संवर्धन और संरक्षण के लिए की गई है।
2. ये केंद्र संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करते हैं और उन्हें वार्षिक अनुदान प्राप्त होता है।
3. पटियाला, नागपुर और तंजावुर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के मुख्यालयों में से हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि ZCCs का मुख्य उद्देश्य लोक/आदिवासी कला और संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन है। कथन 2 सही है क्योंकि ये केंद्र संस्कृति मंत्रालय के अधीन हैं और वार्षिक अनुदान प्राप्त करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि पटियाला, नागपुर और तंजावुर सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों में से हैं, जिनके मुख्यालय इन स्थानों पर स्थित हैं।

Q3. ‘रचनात्मक भारत’ पहल का उद्देश्य क्या है?

  1. केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देना।
  2. सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के प्रचार और विकास के लिए।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में केवल लोक कलाओं को पुनर्जीवित करना।
  4. अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों का आयोजन करना।

उत्तर: सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के प्रचार और विकास के लिए। — ‘रचनात्मक भारत’ पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के प्रचार और विकास के लिए क्षमता निर्माण, बाजार पहुंच, नवाचार, डिजिटल सशक्तिकरण और संस्थागत सुदृढीकरण को बढ़ावा देना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कला संस्कृति विकास योजना (केएसवीवाई) भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है? इस संदर्भ में, ‘रचनात्मक भारत’ पहल के उद्देश्यों और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के योगदान पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत कला संस्कृति विकास योजना (केएसवीवाई) का संक्षिप्त परिचय देकर करें और बताएं कि यह कैसे प्रदर्शन कलाओं, आदिवासी और ग्रामीण कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसके बाद, योजना के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा करें। फिर, ‘रचनात्मक भारत’ पहल के उद्देश्यों को स्पष्ट करें, जिसमें रचनात्मक अर्थव्यवस्था के सतत विकास और उभरते कलाकारों के समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अंत में, सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों की भूमिका और उनके द्वारा आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से कला और संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान पर प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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