11 Aug समर्थ योजना: वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार सृजन का सफल मॉडल

✎ समर्थ योजना वस्त्र मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार सृजन के माध्यम से क्षमता निर्माण करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, मानव संसाधन | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, कौशल विकास
- Prelims: समर्थ योजना, वस्त्र मंत्रालय, कौशल विकास, रोजगार सृजन, वस्त्र मूल्य श्रृंखला, क्षमता निर्माण
- Essay: भारत में कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वस्त्र उद्योग का योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: समर्थ योजना वस्त्र मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार सृजन के माध्यम से क्षमता निर्माण करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि समर्थ योजना (Scheme for Capacity Building in Textile Sector) के तहत निधि सीधे कार्यान्वयन भागीदारों (Implementing Partners) को आवंटित की जाती है, न कि राज्य या जिलावार। उन्होंने योजना के अंतर्गत आवंटित, जारी और खर्च की गई निधि का विवरण भी प्रस्तुत किया, साथ ही बताया कि मार्च 2026 तक कुल 6.17 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 5.17 लाख को रोजगार मिला है।
पृष्ठभूमि
- भारत का वस्त्र उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- इस क्षेत्र में कुशल कार्यबल की कमी एक प्रमुख चुनौती रही है, जो उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करती है।
- सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया है।
- कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
- वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण से निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
समर्थ योजना क्या है?
- समर्थ योजना वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) द्वारा शुरू की गई एक मांग-आधारित (demand-driven) और प्लेसमेंट-उन्मुख (placement-oriented) कौशल विकास योजना है।
- इसका उद्देश्य संगठित वस्त्र और संबंधित क्षेत्रों में वस्त्रों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (value chain) को कवर करते हुए क्षमता निर्माण करना है, जिसमें बुनाई और कताई शामिल नहीं है।
- यह योजना अखिल भारतीय आधार पर लागू की जाती है, जिसका अर्थ है कि प्रशिक्षण केंद्र देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में स्थापित किए जा सकते हैं।
- योजना के तहत प्रशिक्षण लक्ष्य सीधे कार्यान्वयन भागीदारों (जैसे वस्त्र उद्योग, उद्योग संघ, राज्य/केंद्र सरकार की एजेंसियां) को आवंटित किए जाते हैं।
- इसका मुख्य लक्ष्य युवाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें वस्त्र उद्योग में स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
- मार्च 2026 तक, योजना के तहत 6.17 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 5.17 लाख से अधिक को रोजगार मिला है।
- योजना महिला सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान देती है, जिसमें बड़ी संख्या में महिला लाभार्थियों को प्रशिक्षित और नियोजित किया गया है।
- यह योजना अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणियों के लाभार्थियों के कौशल विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अखिल भारतीय आधार | यह योजना पूरे देश में वस्त्र क्षेत्र के कौशल विकास को बढ़ावा देती है। |
| बुनाई और कताई को छोड़कर वस्त्र मूल्य श्रृंखला | यह वस्त्र क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण उप-क्षेत्रों में कौशल अंतराल को संबोधित करती है। |
| मांग-आधारित और प्लेसमेंट-उन्मुख कौशल कार्यक्रम | यह सुनिश्चित करती है कि प्रशिक्षित व्यक्तियों को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार रोजगार मिले। |
| सीधे कार्यान्वयन भागीदारों को निधि आवंटन | यह राज्य या जिला-वार आवंटन के बजाय परियोजना-आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, जिससे लचीलापन आता है। |
| महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों पर विशेष ध्यान | यह सामाजिक समावेशन और कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण में योगदान करती है। |
| वस्त्र उद्योग/उद्योग संघों को कार्यान्वयन भागीदार के रूप में शामिल करना | यह उद्योग की भागीदारी और प्रशिक्षण की प्रासंगिकता सुनिश्चित करती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह वस्त्र क्षेत्र में कुशल कार्यबल की कमी को पूरा करके भारत के वस्त्र उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती है।
- यह रोजगार सृजन को बढ़ावा देती है, विशेषकर महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए, जिससे आय में वृद्धि होती है और गरीबी कम होती है।
- यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल को समर्थन देती है, क्योंकि कुशल श्रमिक घरेलू उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सामाजिक महत्व
- यह महिलाओं, अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के व्यक्तियों को कौशल प्रदान करके उनके सशक्तिकरण में सहायक है।
- यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके सामाजिक स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।
- यह कौशल विकास के माध्यम से सामाजिक असमानताओं को कम करने में मदद करती है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच खाई पटती है।
शासनिक महत्व
- यह मांग-आधारित और प्लेसमेंट-उन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाती है।
- यह कार्यान्वयन भागीदारों के माध्यम से विकेन्द्रीकृत तरीके से कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिससे योजना का कार्यान्वयन अधिक कुशल होता है।
- यह प्रशिक्षण लक्ष्यों के युक्तिकरण और धीमी प्रगति वाले भागीदारों के लक्ष्यों को रद्द करने के माध्यम से जवाबदेही और प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देती है।
चुनौतियाँ
1. कौशल और रोजगार के बीच तालमेल
- प्रशिक्षित लाभार्थियों को वास्तविक उद्योग की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले और स्थायी रोजगार के अवसर प्रदान करना एक चुनौती है।
- बदलती हुई प्रौद्योगिकियों और बाजार की आवश्यकताओं के साथ कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अद्यतन रखना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
2. निधि का प्रभावी उपयोग और निगरानी
- आवंटित निधियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना और यह देखना कि वे सही लाभार्थियों तक पहुँचें, महत्वपूर्ण है।
- कार्यान्वयन भागीदारों के प्रदर्शन की निरंतर निगरानी और मूल्यांकन आवश्यक है ताकि धीमी प्रगति वाले भागीदारों की पहचान की जा सके।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
3. क्षेत्रीय असमानताएं और पहुंच
- योजना का अखिल भारतीय आधार होने के बावजूद, दूरदराज के क्षेत्रों और वंचित समुदायों तक प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- विभिन्न राज्यों और जिलों में वस्त्र उद्योग की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: क्षेत्रीय असंतुलन, समावेशी विकास
4. उद्योग की बदलती प्रकृति
- वस्त्र उद्योग में स्वचालन और नई तकनीकों के आगमन के साथ, श्रमिकों को नए कौशल सीखने और मौजूदा कौशल को उन्नत करने की आवश्यकता है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा और व्यापार नीतियों में बदलाव का भी कौशल विकास की मांग पर प्रभाव पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: औद्योगिक नीतियां, आर्थिक विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कौशल-रोजगार बेमेल | प्रशिक्षित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त और स्थायी रोजगार के अवसरों की कमी। |
| निधि उपयोग की दक्षता | आवंटित निधियों का पूर्ण और प्रभावी ढंग से उपयोग न हो पाना। |
| गुणवत्ता नियंत्रण | प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता और उद्योग मानकों के साथ उनके तालमेल को बनाए रखना। |
| कार्यान्वयन भागीदारों का प्रदर्शन | कुछ भागीदारों द्वारा धीमी प्रगति या प्रशिक्षण गतिविधियों को शुरू न करना। |
| डिजिटल साक्षरता और प्रौद्योगिकी | वस्त्र क्षेत्र में बढ़ती डिजिटलीकरण और स्वचालन के लिए श्रमिकों को तैयार करना। |
| पलायन और अवधारण | प्रशिक्षित श्रमिकों का वस्त्र क्षेत्र में बने रहना सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- समर्थ (वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना)
आगे की राह
- प्रशिक्षण मॉड्यूल को उद्योग की उभरती हुई आवश्यकताओं और नई प्रौद्योगिकियों के साथ नियमित रूप से अद्यतन किया जाए।
- प्लेसमेंट दर में सुधार के लिए उद्योग के साथ मजबूत संबंध स्थापित किए जाएं और नियमित रूप से प्लेसमेंट मेलों का आयोजन किया जाए।
- निधि के प्रभावी उपयोग और कार्यान्वयन भागीदारों के प्रदर्शन की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाए।
- महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए विशेष प्रोत्साहन और सहायता प्रणाली को और मजबूत किया जाए।
- दूरदराज के क्षेत्रों में प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ाने के लिए मोबाइल प्रशिक्षण इकाइयों और डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाए।
- प्रशिक्षित श्रमिकों के लिए उद्यमिता विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए ताकि वे स्वरोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
- योजना के प्रभाव का आकलन करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए नियमित रूप से स्वतंत्र मूल्यांकन किए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समर्थ योजना · वस्त्र क्षेत्र · कौशल विकास · क्षमता निर्माण · रोजगार सृजन · मांग-आधारित प्रशिक्षण · प्लेसमेंट-उन्मुख कार्यक्रम · वस्त्र मंत्रालय · अखिल भारतीय योजना · सामाजिक समावेशन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम पाने और सार्वजनिक सहायता का अधिकार।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा।’}
अवधारणा प्रवाह
वस्त्र क्षेत्र में कौशल अंतराल → समर्थ योजना का शुभारंभ → मांग-आधारित कौशल प्रशिक्षण → कार्यान्वयन भागीदारों द्वारा प्रशिक्षण → रोजगार सृजन और सशक्तिकरण → आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. समर्थ योजना (वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना वस्त्रों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को कवर करती है, जिसमें बुनाई और कताई भी शामिल है।
2. यह एक मांग-आधारित और प्लेसमेंट-उन्मुख कौशल विकास कार्यक्रम है।
3. इस योजना के तहत निधि का आवंटन सीधे कार्यान्वयन भागीदारों को किया जाता है, न कि राज्य या जिलावार।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि समर्थ योजना बुनाई और कताई को छोड़कर वस्त्रों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को कवर करती है। कथन 2 सही है क्योंकि यह योजना मांग-आधारित और प्लेसमेंट-उन्मुख कौशल कार्यक्रम प्रदान करती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि निधि सीधे कार्यान्वयन भागीदारों को आवंटित की जाती है और राज्य या जिलावार आवंटन नहीं होता है।
Q2. समर्थ योजना का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- वस्त्र क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा देना
- वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण और रोजगार सृजन करना
- कपास किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना
- वस्त्र उद्योग में नई तकनीक का अनुसंधान और विकास करना
उत्तर: वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण और रोजगार सृजन करना — समर्थ योजना का मुख्य उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी क्षमता का निर्माण करना और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में वस्त्र क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, ‘समर्थ’ योजना जैसे कौशल विकास कार्यक्रमों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ये योजनाएँ समावेशी विकास और रोजगार सृजन में किस प्रकार योगदान करती हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत की अर्थव्यवस्था में वस्त्र क्षेत्र का महत्व (GDP में योगदान, रोजगार सृजन, निर्यात)।
2. **समर्थ योजना का परिचय:** वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (समर्थ) का उद्देश्य, कार्यप्रणाली (मांग-आधारित, प्लेसमेंट-उन्मुख, बुनाई-कताई छोड़कर संपूर्ण मूल्य श्रृंखला)।
3. **योजना की भूमिका और सफलता:**
* कौशल अंतर को पाटना।
* रोजगार सृजन में योगदान (5.17 लाख से अधिक लाभार्थियों को रोजगार)।
* महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जैसे कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण (डेटा का उल्लेख)।
* उद्योग की मांग के अनुरूप कार्यबल तैयार करना।
4. **समावेशी विकास में योगदान:**
* सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करना।
* ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर।
* महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
5. **चुनौतियाँ और आलोचनात्मक परीक्षण:**
* प्रशिक्षण लक्ष्यों का युक्तिकरण/रद्दीकरण (97 आईपी के लक्ष्य युक्तिसंगत, 32 के रद्द)।
* निधियों के आवंटन में क्षेत्रीय असंतुलन की संभावना (राज्य/जिलावार आवंटन न होना)।
* प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के साथ तालमेल।
* दीर्घकालिक रोजगार स्थायित्व की चुनौती।
6. **निष्कर्ष:** वस्त्र क्षेत्र के सतत विकास और समावेशी समाज के निर्माण में कौशल विकास कार्यक्रमों का महत्व, भविष्य की राह।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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