31 Aug वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका पहुंचीं, जी20 बैठक में भाग लेंगी
✎ G20 वैश्विक आर्थिक सहयोग और वित्तीय स्थिरता के लिए एक प्रमुख मंच है, जहाँ भारत वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: G20, वित्त ट्रैक, वैश्विक आर्थिक असंतुलन, संप्रभु ऋण, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, ईरान संघर्ष के आर्थिक प्रभाव
- Essay: वैश्विक आर्थिक सहयोग में G20 की भूमिका और भारत के हित, बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच वैश्विक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना
त्वरित पुनरावृत्ति: G20 वैश्विक आर्थिक सहयोग और वित्तीय स्थिरता के लिए एक प्रमुख मंच है, जहाँ भारत वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में भाग लेने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका पहुंचीं। यह बैठक वैश्विक आर्थिक संवृद्धि, आर्थिक असंतुलन, संप्रभु ऋण (Sovereign Debt) और ईरान संघर्ष के परिणामों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होगी। भारत इस मंच पर अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं और वैश्विक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रस्तुत करेगा।
पृष्ठभूमि
- G20 (Group of Twenty) विश्व की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी मंच है।
- यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 85%, वैश्विक व्यापार का 75% से अधिक और विश्व जनसंख्या का दो-तिहाई प्रतिनिधित्व करता है।
- G20 का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन शमन और सतत विकास से संबंधित वैश्विक मुद्दों को संबोधित करना है।
- वित्त ट्रैक (Finance Track) G20 की एक प्रमुख कार्यधारा है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था, वित्तीय विनियमन, राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों पर केंद्रित है।
- भारत G20 का एक सक्रिय सदस्य रहा है और वैश्विक आर्थिक शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- हाल के वर्षों में, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन (Resilience) और संप्रभु ऋण संकटों का समाधान G20 के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रहे हैं।
G20 क्या है?
- G20 बीस वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों का एक समूह है, जिसमें 19 देश, यूरोपीय संघ (European Union) और अफ्रीकी संघ (African Union) शामिल हैं।
- इसका गठन 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद हुआ था, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देना था।
- G20 के सदस्य देश हैं: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ।
- यह मंच सदस्य देशों के बीच नीतिगत समन्वय के माध्यम से वैश्विक आर्थिक मुद्दों को हल करने का प्रयास करता है।
- G20 की अध्यक्षता प्रतिवर्ष सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से होती है, और अध्यक्षता करने वाला देश एजेंडा निर्धारित करता है।
- G20 में दो मुख्य कार्यधाराएँ हैं: वित्त ट्रैक, जिसका नेतृत्व वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर करते हैं, और शेरपा ट्रैक, जिसका नेतृत्व शेरपा करते हैं जो राष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों के व्यक्तिगत प्रतिनिधि होते हैं।
- G20 शिखर सम्मेलन (Summit) राष्ट्राध्यक्षों/शासनाध्यक्षों की वार्षिक बैठक होती है, जो समूह के निर्णयों को अंतिम रूप देती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर चर्चा | सदस्य देशों के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण। |
| आर्थिक असंतुलन का समाधान | व्यापार अधिशेष और घाटे जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श, जिसका उद्देश्य अधिक संतुलित वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाना है। |
| संप्रभु ऋण चुनौतियों का समाधान | कमजोर देशों पर ऋण के बोझ को कम करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतियाँ तैयार करना। |
| ईरान संघर्ष के आर्थिक परिणाम | ऊर्जा की कीमतों पर प्रभाव और व्यापार मार्गों में व्यवधानों पर चर्चा, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकते हैं। |
| लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास | भविष्य के झटकों के प्रति अधिक प्रतिरोधी वैश्विक व्यापार नेटवर्क बनाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करना। |
| भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाएँ | भारत को वैश्विक विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- G20 वित्त मंत्रियों की बैठक वैश्विक आर्थिक नीतियों के समन्वय, आर्थिक असंतुलन को दूर करने और संप्रभु ऋण चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
- यह बैठक वैश्विक आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देने में मदद करती है।
- भारत के लिए, यह बैठक वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और देश को वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है।
सामरिक महत्व
- G20 मंच भारत को प्रमुख वैश्विक आर्थिक शक्तियों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय चर्चाओं में शामिल होने का अवसर देता है, जिससे उसके भू-आर्थिक हितों को बढ़ावा मिलता है।
- ईरान संघर्ष के आर्थिक प्रभावों पर चर्चा, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार मार्गों की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।
- यह बैठक भारत को वैश्विक आर्थिक शासन में अपनी भूमिका को मजबूत करने और विकासशील देशों के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम बनाती है।
कूटनीतिक महत्व
- केंद्रीय वित्त मंत्री की उपस्थिति भारत की वैश्विक आर्थिक कूटनीति में सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती स्थिति को रेखांकित करती है।
- यह बैठक सदस्य देशों के बीच सहयोग और समझ को बढ़ावा देती है, जिससे वैश्विक चुनौतियों के लिए साझा समाधान खोजने में मदद मिलती है।
- भारत के लिए, यह मंच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
1. वैश्विक आर्थिक असंतुलन
- कुछ देशों में बड़े व्यापार अधिशेष और अन्य में घाटे वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम पैदा करते हैं।
- इन असंतुलनों को दूर करने के लिए सदस्य देशों के बीच नीतिगत समन्वय और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता होती है, जो अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वैश्विक आर्थिक मुद्दे
2. संप्रभु ऋण संकट
- कई विकासशील देशों पर बढ़ता ऋण बोझ उनकी आर्थिक स्थिरता और विकास को बाधित कर रहा है।
- ऋण पुनर्गठन और राहत के लिए एक समन्वित वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें लेनदार और देनदार दोनों देशों की भागीदारी शामिल है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: ऋण और वित्तीय स्थिरता
3. भू-राजनीतिक संघर्षों का आर्थिक प्रभाव
- ईरान संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापार मार्गों को बाधित कर सकते हैं, जिससे मुद्रास्फीति और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ जाता है।
- इन प्रभावों को कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा रणनीतियों की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था
4. संरक्षणवाद और व्यापार बाधाएँ
- कुछ देशों द्वारा लगाए गए व्यापार प्रतिबंध और शुल्क मुक्त व्यापार को बाधित करते हैं और वैश्विक आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं।
- एक व्यापक आम सहमति दस्तावेज़ तक पहुँचना मुश्किल हो सकता है, खासकर प्रतिबंधों और व्यापार नीतियों पर मतभेदों के कारण।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
5. जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
- जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव, जैसे चरम मौसम की घटनाएँ और संसाधन की कमी, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक चुनौतियाँ पेश करते हैं।
- सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और हरित वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त निवेश और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वैश्विक आर्थिक मंदी का जोखिम | उच्च मुद्रास्फीति, बढ़ती ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं। |
| आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान | संघर्षों, प्राकृतिक आपदाओं और व्यापार प्रतिबंधों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान जारी है। |
| ऊर्जा मूल्य अस्थिरता | ईरान संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। |
| बढ़ता संप्रभु ऋण | कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर ऋण का बढ़ता बोझ वित्तीय संकटों और विकास में बाधा डाल सकता है। |
| व्यापार संरक्षणवाद | कुछ देशों द्वारा लगाए गए व्यापार शुल्क और प्रतिबंध वैश्विक व्यापार और निवेश को बाधित करते हैं। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अभाव | प्रमुख आर्थिक शक्तियों के बीच नीतिगत मतभेद वैश्विक चुनौतियों के लिए समन्वित समाधान खोजने में बाधा डाल सकते हैं। |
आगे की राह
- वैश्विक आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों के बीच व्यापक आर्थिक नीतियों का समन्वय करना।
- संप्रभु ऋण संकट का सामना कर रहे देशों के लिए प्रभावी ऋण राहत और पुनर्गठन तंत्र विकसित करना।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने के लिए निवेश को बढ़ावा देना और व्यापार बाधाओं को कम करना।
- ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा मूल्य अस्थिरता को कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
- भारत के विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल नीतिगत माहौल बनाए रखना।
- वैश्विक आर्थिक शासन में भारत की भूमिका को और मजबूत करना और विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करना।
- अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को मजबूत करना ताकि वे वैश्विक आर्थिक स्थिरता में अधिक प्रभावी ढंग से योगदान दे सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
G20 वित्त मंत्री बैठक · वैश्विक आर्थिक असंतुलन · संप्रभु ऋण संकट · आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन · ऊर्जा मूल्य अस्थिरता · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · भारत की आर्थिक कूटनीति · संरक्षणवाद · बहुपक्षवाद · राजकोषीय नीति समन्वय
अवधारणा प्रवाह
G20 वित्त मंत्रियों की बैठक का आयोजन → वैश्विक आर्थिक वृद्धि, असंतुलन और ऋण पर चर्चा → ईरान संघर्ष के आर्थिक प्रभावों पर विचार-विमर्श → लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित → भारत द्वारा वैश्विक निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा देना → वैश्विक आर्थिक नीतियों और सहयोग पर आम सहमति का प्रयास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. G20 एक अंतर-सरकारी मंच है जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
2. G20 शिखर सम्मेलन में केवल वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर ही भाग लेते हैं।
3. भारत ने हाल ही में G20 की अध्यक्षता की है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। G20 में 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। कथन 2 गलत है। G20 शिखर सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्ष/शासनाध्यक्ष भी भाग लेते हैं, जबकि वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठकें भी होती हैं। कथन 3 सही है। भारत ने 1 दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक G20 की अध्यक्षता की थी।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से G20 वित्त मंत्रियों की बैठक के संभावित एजेंडा आइटम हो सकते हैं?
1. वैश्विक आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देना।
2. संप्रभु ऋण चुनौतियों का समाधान करना।
3. आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाना।
4. ऊर्जा मूल्यों की अस्थिरता पर चर्चा करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प G20 वित्त मंत्रियों की बैठक के संभावित एजेंडा आइटम हैं। ये वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर G20 जैसे मंचों पर चर्चा की जाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ G20 जैसे बहुपक्षीय मंच वैश्विक आर्थिक शासन में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? भारत के लिए इन मंचों पर सक्रिय भागीदारी के महत्व का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: G20 का संक्षिप्त परिचय और वैश्विक आर्थिक शासन में इसकी भूमिका।
2. G20 की भूमिका: वैश्विक आर्थिक शासन में G20 की महत्वपूर्ण भूमिका के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करें:
क. आर्थिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा देना (उदाहरण: 2008 का वित्तीय संकट)।
ख. नीति समन्वय (राजकोषीय, मौद्रिक, व्यापार नीतियां)।
ग. अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार।
घ. विकासशील देशों की चिंताओं को उठाना।
ङ. जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे नए वैश्विक मुद्दों पर सहयोग।
3. भारत के लिए G20 भागीदारी का महत्व:
क. वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन।
ख. अपनी विकास प्राथमिकताओं और चिंताओं को वैश्विक एजेंडे पर रखना (जैसे संप्रभु ऋण, जलवायु वित्त, खाद्य सुरक्षा)।
ग. निवेश आकर्षित करना और व्यापार संबंधों को मजबूत करना।
घ. बहुपक्षीय संस्थानों में सुधारों को प्रभावित करना।
ङ. द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक मंच।
च. वैश्विक चुनौतियों के समाधान में रचनात्मक योगदानकर्ता के रूप में भारत की छवि।
4. निष्कर्ष: भारत की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से वैश्विक आर्थिक शासन को मजबूत करने और अपने राष्ट्रीय हितों को साधने की क्षमता पर बल।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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