सुप्रीम कोर्ट का आदेश: न्यायिक कार्यवाही के वीडियो/ऑडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करना होगा प्रतिबंधित

Order dated 24.07.2026 of Hon'ble Supreme Court of India in the matter of Harshita Grover Vs Union Of India and others(W — labelled illustration

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: न्यायिक कार्यवाही के वीडियो/ऑडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करना होगा प्रतिबंधित

✎ न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो-विडियो प्रसारण पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है।

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प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: Polity

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स्रोत: portal.mphc.gov.in

अभ्यास प्रश्न

Q1. 24 जुलाई, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार, न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड, साझा या प्रसारित करने पर क्या प्रतिबंध लगाया गया है?

  1. न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर साझा किया जा सकता है, लेकिन केवल न्यायालय की अनुमति से।
  2. न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड, साझा या प्रसारित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
  3. न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को केवल न्यायालय के कर्मचारियों द्वारा ही प्रसारित किया जा सकता है।
  4. न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को केवल सरकारी वेबसाइटों पर अपलोड किया जा सकता है।
उत्तर

न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड, साझा या प्रसारित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। — 24 जुलाई, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड, साझा या प्रसारित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। यह आदेश ‘हर्षिता ग्रोवर बनाम भारत संघ एवं अन्य’ मामले में पारित किया गया था।

Q2. उपरोक्त आदेश के अनुसार, न्यायिक कार्यवाही के रिकॉर्डिंग को किसके द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए?

  1. सोशल मीडिया प्लेटफार्मों द्वारा स्वयं
  2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार
  3. केवल राज्य सरकारों द्वारा
  4. निजी मीडिया संगठनों द्वारा
उत्तर

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार — सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में न्यायिक कार्यवाही के रिकॉर्डिंग को नियंत्रित करने के लिए स्वयं न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य किया गया है।


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