06 Sep रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीन दिवसीय श्रीलंका यात्रा: प्रमुख मुद्दों पर चर्चा
✎ रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा भारत की 'पड़ोसी सर्वोपरि' नीति और 'सागर' दृष्टिकोण के तहत द्विपक्षीय संबंधों, विशेषकर रक्षा और समुद्री साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — सुरक्षा
- Prelims: पड़ोसी सर्वोपरि नीति, SAGAR दृष्टिकोण, भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आर्थिक संकट में मानवीय सहायता
- Essay: भारत की विदेश नीति में ‘पड़ोसी प्रथम’ का महत्व, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा भारत की ‘पड़ोसी सर्वोपरि’ नीति और ‘सागर’ दृष्टिकोण के तहत द्विपक्षीय संबंधों, विशेषकर रक्षा और समुद्री साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 8 से 10 सितंबर, 2026 तक श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस यात्रा के दौरान, वे श्रीलंका के नेतृत्व के साथ विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे और कोलंबो में भारतीय प्रवासियों से बातचीत करेंगे। यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी सर्वोपरि’ नीति और ‘सागर’ (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करना है, जिसमें समुद्री और रक्षा साझेदारी भी शामिल है।
पृष्ठभूमि
- भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध और बहुआयामी साझेदारी है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तथा सुदृढ़ जन-संबंधों पर आधारित है।
- भारत ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिली।
- वर्ष 2025 में आए चक्रवात दितवाह के बाद राहत कार्यों में भारत अग्रणी देशों में से एक था, जिसने मानवीय सहायता में अपनी भूमिका को रेखांकित किया।
- दोनों देश एक मजबूत समुद्री और रक्षा साझेदारी साझा करते हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- रक्षा मंत्री के साथ रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी यात्रा पर रहेगा।
- भारतीय प्रवासियों से बातचीत करना भी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो जन-संबंधों को मजबूत करता है।
भारत की ‘पड़ोसी सर्वोपरि’ नीति और ‘सागर’ दृष्टिकोण
- **पड़ोसी सर्वोपरि नीति (Neighbourhood First Policy):** यह भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है।
- इस नीति के तहत, भारत अपने पड़ोसियों के साथ व्यापार, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
- यह नीति संकट के समय मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रदान करने में भी भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है, जैसा कि श्रीलंका के आर्थिक संकट और चक्रवात दितवाह के दौरान देखा गया।
- यह दृष्टिकोण समुद्री डकैती, आतंकवाद और अवैध मछली पकड़ने जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
- इसका लक्ष्य हिंद महासागर को एक सुरक्षित और स्थिर क्षेत्र बनाए रखना है, जहाँ व्यापार और वाणिज्य स्वतंत्र रूप से संचालित हो सकें।
- श्रीलंका जैसे समुद्री पड़ोसी देशों के साथ रक्षा और समुद्री साझेदारी को मजबूत करना ‘सागर’ दृष्टिकोण का एक अभिन्न अंग है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल | रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति भारत की समग्र कूटनीतिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं को दर्शाती है। |
| गहरे सभ्यतागत संबंध | भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध द्विपक्षीय संबंधों की नींव हैं। |
| बहुआयामी साझेदारी | क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तथा जन-संबंधों को कवर करती है। |
| आर्थिक संकट में सहायता | भारत ने श्रीलंका को आर्थिक संकट से उबरने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की, जिससे द्विपक्षीय विश्वास बढ़ा। |
| चक्रवात दितवाह राहत कार्य | 2025 में आए चक्रवात के बाद भारत की त्वरित मानवीय सहायता ‘पड़ोसी सर्वोपरि’ नीति का प्रमाण है। |
| मजबूत समुद्री और रक्षा साझेदारी | हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। |
महत्व
सामरिक महत्व
- श्रीलंका हिंद महासागर में भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी सर्वोपरि’ नीति और SAGAR (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) दृष्टिकोण को मजबूत करती है।
- रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के हितों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।
आर्थिक और व्यापारिक संबंध
- दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देना, जिससे परस्पर लाभ हो।
- भारत ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास और मजबूती आई।
जन-संबंध और सांस्कृतिक संबंध
- कोलंबो में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत से जन-संबंधों को बढ़ावा मिलेगा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान मजबूत होगा।
- गहरे सभ्यतागत संबंध दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधन को रेखांकित करते हैं।
आपदा राहत और मानवीय सहायता
- चक्रवात दितवाह के बाद भारत की सहायता ने एक विश्वसनीय और जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उसकी भूमिका को मजबूत किया।
- आपदा प्रबंधन में सहयोग क्षेत्रीय लचीलेपन को बढ़ाता है।
चुनौतियाँ
1. भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
- हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, विशेष रूप से बाहरी शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति।
- श्रीलंका की तटस्थता बनाए रखने और सभी भागीदारों के साथ संतुलन बनाने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत के पड़ोसी संबंध
2. आर्थिक स्थिरता
- श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को अभी भी पूरी तरह से उबरने में समय लगेगा, जिससे भारत के लिए निरंतर सहायता और निवेश की आवश्यकता होगी।
- ऋण पुनर्गठन और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, आर्थिक कूटनीति
3. रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी और खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग को गहरा करने की आवश्यकता।
- दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों और प्रशिक्षण में समन्वय बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
4. मछुआरा मुद्दा
- पाक जलडमरूमध्य में भारतीय और श्रीलंकाई मछुआरों के बीच सीमा पार करने और मछली पकड़ने के अधिकारों से संबंधित मुद्दे।
- इस संवेदनशील मुद्दे का स्थायी समाधान खोजना।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत के पड़ोसी संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| भू-राजनीतिक संतुलन | श्रीलंका पर बाहरी शक्तियों के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना। |
| आर्थिक सुधार | श्रीलंका की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और भारत की भूमिका। |
| समुद्री सुरक्षा | हिंद महासागर में साझा सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना। |
| मछुआरा विवाद | पाक जलडमरूमध्य में मछुआरों के मुद्दों का मानवीय और स्थायी समाधान। |
| द्विपक्षीय व्यापार और निवेश | व्यापार बाधाओं को दूर करना और निवेश के अवसरों को बढ़ाना। |
आगे की राह
- रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना, जिसमें संयुक्त अभ्यास और सूचना साझाकरण शामिल है।
- श्रीलंका की आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए निरंतर सहायता और निवेश को बढ़ावा देना।
- आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता में सहयोग को संस्थागत बनाना।
- दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
- मछुआरा मुद्दे जैसे संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों के लिए स्थायी और मानवीय समाधान खोजना।
- बहुपक्षीय मंचों पर क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना।
- जन-संबंधों को मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-श्रीलंका संबंध · पड़ोसी प्रथम नीति · सागर दृष्टिकोण · क्षेत्रीय सुरक्षा · रक्षा सहयोग · आर्थिक कूटनीति · हिंद महासागर क्षेत्र · द्विपक्षीय सहयोग · आपदा राहत · सामुद्रिक साझेदारी
अवधारणा प्रवाह
रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा → श्रीलंका नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श → द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती → रक्षा और समुद्री साझेदारी का सुदृढ़ीकरण → हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का उद्देश्य दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध बनाए रखना है।
2. ‘सागर’ (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) दृष्टिकोण भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
3. भारत ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान और 2025 के चक्रवात ‘दितवाह’ के बाद मानवीय सहायता प्रदान की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका लक्ष्य क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना है। कथन 2 भी सही है, ‘सागर’ दृष्टिकोण हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक सोच और जुड़ाव को दर्शाता है, जिसमें सुरक्षा और विकास दोनों शामिल हैं। कथन 3 भी सही है, भारत ने श्रीलंका को आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान की है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाता है।
Q2. भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध हैं।
2. रक्षा सहयोग दोनों देशों की बहुआयामी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
3. भारत ने हाल के वर्षों में श्रीलंका को आर्थिक और मानवीय सहायता प्रदान की है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बहुत पुराने हैं। रक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है, विशेषकर समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में। भारत ने श्रीलंका को उसके आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है, जो ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के अनुरूप है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘सागर’ दृष्टिकोण के संदर्भ में, श्रीलंका के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत-श्रीलंका संबंधों को मजबूत करने में रक्षा कूटनीति की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत-श्रीलंका संबंधों का संक्षिप्त परिचय, उनकी ऐतिहासिक और सभ्यतागत जड़ों पर प्रकाश डालते हुए।
2. **’पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘सागर’ दृष्टिकोण:** इन नीतियों के मूल सिद्धांतों और उद्देश्यों की व्याख्या करें, विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों के संदर्भ में।
3. **द्विपक्षीय संबंधों का महत्व:**
* **आर्थिक सहयोग:** व्यापार, निवेश और भारत द्वारा श्रीलंका को आर्थिक संकट के दौरान दी गई सहायता का उल्लेख।
* **मानवीय सहायता:** चक्रवात ‘दितवाह’ जैसी आपदाओं में भारत की भूमिका।
* **सांस्कृतिक और जन-संबंध:** गहरे सभ्यतागत संबंधों और भारतीय प्रवासियों की भूमिका।
* **क्षेत्रीय स्थिरता:** हिंद महासागर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में दोनों देशों की भूमिका।
4. **रक्षा कूटनीति की भूमिका:**
* **समुद्री सुरक्षा:** हिंद महासागर में साझा सुरक्षा चुनौतियों और सहयोग पर चर्चा।
* **संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण:** दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच सहयोग।
* **क्षमता निर्माण:** श्रीलंका की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में भारत का योगदान।
* **उच्च-स्तरीय यात्राएँ:** रक्षा मंत्रियों और अन्य अधिकारियों की यात्राओं का महत्व, जैसा कि वर्तमान समाचार में है।
5. **चुनौतियाँ और आगे का मार्ग:** संबंधों में संभावित चुनौतियों (जैसे मछुआरों का मुद्दा, चीन का प्रभाव) का संक्षिप्त उल्लेख और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव।
6. **निष्कर्ष:** भारत-श्रीलंका संबंधों के रणनीतिक महत्व और भविष्य की संभावनाओं का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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