यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण: किशोर मकवाना को मिला एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026 से सम्मानित किय — diagram

यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण: किशोर मकवाना को मिला एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026

NCSC StructureChairpersonKishor Makwana2026Constitutional BodyArticle 338SC/ST rightsFunctionsMonitor rightsEnsure welfareAwardsAPJ Kalam PrizeSocial justice
NCSC Structure

✎ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) एक संवैधानिक निकाय है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 338 में है, और यह अनुसूचित जातियों के अधिकारों और हितों की रक्षा तथा उनके सामाजिक-आर्थिक विकास की निगरानी के लिए कार्य करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना  |  GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व; संघवाद से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ; स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ  |  GS Paper II — विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय  |  GS Paper II — कमजोर वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन कमजोर वर्गों की सुरक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय
  • Prelims: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC), संवैधानिक निकाय, अनुच्छेद 338, सामाजिक न्याय, अनुसूचित जातियाँ, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार, संसद रत्न पुरस्कार
  • Essay: भारत में सामाजिक न्याय की अवधारणा और संवैधानिक प्रावधानों का महत्व, कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण में सांविधानिक निकायों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) एक संवैधानिक निकाय है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 338 में है, और यह अनुसूचित जातियों के अधिकारों और हितों की रक्षा तथा उनके सामाजिक-आर्थिक विकास की निगरानी के लिए कार्य करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Castes – NCSC) के अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना को उनकी समर्पित सेवा और सामाजिक न्याय में उनके योगदान के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राजधानी दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित 16वें संसद रत्न पुरस्कार 2026 समारोह के दौरान प्रदान किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह पुरस्कार अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और हितों की रक्षा तथा उनके लिए न्याय, अधिकार, गरिमा एवं सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने की दिशा में आयोग के प्रयासों को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय संविधान में अनुसूचित जातियों (Scheduled Castes) के हितों की रक्षा और उनके उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
  • इन प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने और अनुसूचित जातियों के अधिकारों की निगरानी के लिए एक संवैधानिक निकाय की आवश्यकता महसूस की गई।
  • मूल रूप से, संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए एक विशेष अधिकारी (Special Officer) का प्रावधान था।
  • 65वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1990 द्वारा एक बहु-सदस्यीय राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for SCs and STs) की स्थापना की गई।
  • 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा इस आयोग को दो अलग-अलग निकायों में विभाजित किया गया: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (अनुच्छेद 338A)।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का मुख्य कार्य अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और अन्य कानूनी सुरक्षा उपायों की निगरानी करना तथा उनके कल्याण के लिए कार्य करना है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) क्या है?

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) एक संवैधानिक निकाय (Constitutional body) है जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत स्थापित किया गया है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जातियों के संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की निगरानी करना और उनकी जांच करना है।
  • आयोग अनुसूचित जातियों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित करने से संबंधित विशिष्ट शिकायतों की जांच करता है।
  • यह अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेता है और सलाह देता है तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधीन उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करता है।
  • आयोग अनुसूचित जातियों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट और अन्य विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
  • राष्ट्रपति इन रिपोर्टों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं।
  • आयोग के पास सिविल न्यायालय (Civil Court) की सभी शक्तियाँ होती हैं, जैसे कि किसी भी व्यक्ति को समन करना और उसकी उपस्थिति को लागू करना, दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता, शपथ पर साक्ष्य प्राप्त करना आदि।
  • आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुहर के तहत वारंट द्वारा की जाती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026 यह पुरस्कार सामाजिक न्याय और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है, जो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के आदर्शों को दर्शाता है।
श्री किशोर मकवाना को सम्मान राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष के रूप में अनुसूचित जातियों के अधिकारों और गरिमा को सुनिश्चित करने में उनके समर्पित नेतृत्व को स्वीकार किया गया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) यह आयोग अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एक प्रतिबद्ध और प्रभावी संस्था के रूप में कार्य करता है।
सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण पुरस्कार का उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों के लिए न्याय, अधिकार, गरिमा और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
संसद रत्न पुरस्कार 2026 समारोह यह पुरस्कार 16वें संसद रत्न पुरस्कार समारोह के दौरान प्रदान किया गया, जो सार्वजनिक सेवा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाले मंच का हिस्सा है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह पुरस्कार अनुसूचित जातियों के उत्थान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को सार्वजनिक मान्यता प्रदान करता है, जिससे समाज में इन मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
  • यह सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करता है, जिससे हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए बेहतर भविष्य की नींव रखी जाती है।
  • यह समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करता है, जो भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांत हैं।

संस्थागत महत्व

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) जैसे संवैधानिक निकायों की भूमिका और महत्व को रेखांकित करता है, जो कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा के लिए स्थापित किए गए हैं।
  • यह आयोग के अध्यक्ष के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों के लिए न्याय, अधिकार और गरिमा सुनिश्चित करने में आयोग की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
  • यह आयोग को अपने संवैधानिक जनादेश को और अधिक प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।

नैतिक महत्व

  • यह सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी, समर्पण और सामाजिक प्रतिबद्धता के महत्व पर जोर देता है, जो सिविल सेवकों और जन प्रतिनिधियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
  • यह डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जन सेवा के आदर्शों को जीवित रखता है और भावी पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए प्रेरित करता है।

चुनौतियाँ

1. अनुसूचित जातियों के विरुद्ध भेदभाव

  • समाज के विभिन्न स्तरों पर अनुसूचित जातियों के प्रति भेदभाव अभी भी एक गंभीर चुनौती है, जो उनके सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालता है।
  • भेदभाव के कारण शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित हो जाती है, जिससे असमानता बनी रहती है।

2. न्याय तक पहुंच

  • अनुसूचित जातियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में न्याय सुनिश्चित करना अक्सर एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें देरी और अपर्याप्त अभियोजन जैसी चुनौतियाँ शामिल हैं।
  • कानूनी जागरूकता की कमी और संसाधनों तक सीमित पहुंच भी न्याय प्राप्त करने में बाधा डालती है।

3. आर्थिक सशक्तिकरण का अभाव

  • भूमिहीनता, कम आय वाले रोजगार और उद्यमिता के अवसरों की कमी के कारण अनुसूचित जातियों में आर्थिक असमानता बनी हुई है।
  • सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ भी आर्थिक सशक्तिकरण को बाधित करती हैं।

4. संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी कार्यान्वयन

  • संविधान में अनुसूचित जातियों के लिए कई सुरक्षात्मक प्रावधान हैं, लेकिन उनका पूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना एक निरंतर चुनौती है।
  • नीति निर्माण और कार्यान्वयन के बीच अंतर को पाटना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव अनुसूचित जातियों को अभी भी सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी गरिमा और समानता का अधिकार प्रभावित होता है।
अत्याचार और हिंसा अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार और हिंसा के मामले अभी भी सामने आते हैं, जो कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव के लिए चिंता का विषय है।
शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुंच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में असमानता बनी हुई है, जिससे उनके मानव विकास संकेतक प्रभावित होते हैं।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता प्रतिनिधित्व के बावजूद, अनुसूचित जाति के प्रतिनिधियों की आवाज और प्रभावशीलता को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि उनके मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।
जागरूकता और सशक्तिकरण अपने अधिकारों और उपलब्ध योजनाओं के बारे में जागरूकता की कमी उन्हें सशक्तिकरण के अवसरों का लाभ उठाने से रोकती है।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) को और अधिक सशक्त बनाना चाहिए, ताकि वह अपने संवैधानिक जनादेश को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके और अनुसूचित जातियों के अधिकारों की रक्षा कर सके।
  • अनुसूचित जातियों के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार को रोकने के लिए कानूनों का कड़ाई से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक अनुसूचित जातियों की पहुंच में सुधार के लिए लक्षित कार्यक्रम और नीतियां तैयार की जानी चाहिए, ताकि उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
  • सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि पात्र लाभार्थी उनका लाभ उठा सकें।
  • सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने और भेदभाव को कम करने के लिए जन जागरूकता अभियान और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • अनुसूचित जातियों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कौशल विकास, उद्यमिता और वित्तीय समावेशन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग · संवैधानिक निकाय · सामाजिक न्याय · अनुसूचित जातियों के अधिकार · अनुच्छेद 338 · सशक्तिकरण · भेदभाव · अत्याचार निवारण · कल्याणकारी योजनाएँ · मानवाधिकार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 338’, ‘note’: ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का गठन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 17’, ‘note’: ‘अस्पृश्यता का उन्मूलन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘अनुसूचित जातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}

अवधारणा प्रवाह

सामाजिक न्याय और सार्वजनिक सेवा में योगदान  →  डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार से सम्मान  →  राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष का नेतृत्व  →  अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और हितों की रक्षा  →  न्याय, अधिकार, गरिमा और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना  →  समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) एक संवैधानिक निकाय है जिसका उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 में किया गया है।
2. आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
3. आयोग अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों और कानूनी सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और निगरानी करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग एक संवैधानिक निकाय है और इसका प्रावधान अनुच्छेद 338 में है। कथन 2 सही है क्योंकि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि आयोग का मुख्य कार्य अनुसूचित जातियों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जांच व निगरानी करना है।

Q2. अभिकथन (A): राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) को अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा के लिए व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं।
कारण (R): आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त हैं, जो इसे साक्ष्य एकत्र करने और किसी भी व्यक्ति को समन जारी करने में सक्षम बनाती हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि NCSC को अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा के लिए व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त हैं, जो उसे जांच और निगरानी के दौरान साक्ष्य एकत्र करने और समन जारी करने में सक्षम बनाती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के संवैधानिक प्रावधानों और कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए। अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और न्याय सुनिश्चित करने में आयोग की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर की रूपरेखा:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का संक्षिप्त परिचय, इसकी संवैधानिक स्थिति और स्थापना का उल्लेख।
2. **संवैधानिक प्रावधान:**
* अनुच्छेद 338 का विस्तृत वर्णन: आयोग की संरचना (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, तीन सदस्य), नियुक्ति (राष्ट्रपति द्वारा), सेवा शर्तें और कार्यकाल (राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित)।
* आयोग के कार्य और शक्तियाँ: अनुसूचित जातियों के संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और निगरानी, उनके अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित करने से संबंधित विशिष्ट शिकायतों की जांच, अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना, उनके विकास की प्रगति पर केंद्र और राज्य सरकारों को रिपोर्ट प्रस्तुत करना, राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट अन्य कार्य।
* सिविल न्यायालय की शक्तियाँ: साक्ष्य एकत्र करने, समन जारी करने, शपथ पर गवाही लेने, किसी भी दस्तावेज़ की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता, आदि।
3. **सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और न्याय में भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन:**
* **सकारात्मक भूमिका:** भेदभाव और अत्याचार के मामलों में हस्तक्षेप, कानूनी सहायता और जागरूकता प्रदान करना, सरकार को नीतिगत सिफारिशें देना, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना, कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी।
* **चुनौतियाँ और सीमाएँ (आलोचनात्मक पक्ष):** सीमित स्टाफ और संसाधनों की कमी, सिफारिशों का बाध्यकारी न होना, राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप, मामलों के निपटान में देरी, जागरूकता की कमी, कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ समन्वय की समस्याएँ, आयोग की स्वायत्तता पर प्रश्न।
4. **निष्कर्ष:** आयोग की भूमिका का महत्व और इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुधारों का सुझाव (जैसे अधिक स्वायत्तता, पर्याप्त संसाधन, सिफारिशों को अधिक बाध्यकारी बनाना)।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment