11 Sep संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट: आतंकवादियों की ऑनलाइन प्रचार रणनीति सरकारों से आगे निकल रही
✎ आतंकवादी दुष्प्रचार अब केवल संदेशों से कहीं अधिक है; यह आतंकवादी समूहों की परिचालन संरचना का एक अभिन्न अंग बन गया है, जो भर्ती, धन उगाही और ऑनलाइन कट्टरता को बढ़ावा देने के लिए तेजी से अनुकूलित डिजिटल रणनीतियों का उपयोग करता है…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- Prelims: आतंकवादी दुष्प्रचार, ऑनलाइन कट्टरता, संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-रोधी समिति (CTED), साइबर सुरक्षा, युवाओं का लक्ष्यीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का दुरुपयोग
- Essay: आतंकवाद और आधुनिक समाज: चुनौतियाँ और समाधान, डिजिटल युग में सुरक्षा: अवसर और खतरे
त्वरित पुनरावृत्ति: आतंकवादी दुष्प्रचार अब केवल संदेशों से कहीं अधिक है; यह आतंकवादी समूहों की परिचालन संरचना का एक अभिन्न अंग बन गया है, जो भर्ती, धन उगाही और ऑनलाइन कट्टरता को बढ़ावा देने के लिए तेजी से अनुकूलित डिजिटल रणनीतियों का उपयोग करता है, जिससे वैश्विक आतंकवाद-रोधी प्रयासों को चुनौती मिल रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आतंकवादी समूह दुष्प्रचार के माध्यम से भर्ती, धन उगाही और यहाँ तक कि अभियानों की योजना बना रहे हैं, जो अब उनके काम के हर चरण में ‘अंतर्निहित’ हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारें इस चुनौती का सामना करने में पिछड़ रही हैं, क्योंकि आतंकवादी समूह अपनी दुष्प्रचार रणनीतियों को तेजी से अपना रहे हैं, जिससे सदस्य देशों के कानूनों और नीतियों के बीच ‘त्वरण अंतर’ (acceleration gap) पैदा हो गया है।
पृष्ठभूमि
- आतंकवादी दुष्प्रचार (terrorist propaganda) लंबे समय से आतंकवादी रणनीतियों का एक अभिन्न अंग रहा है, लेकिन इसका उपयोग और पैमाना काफी विकसित हुआ है।
- अल-कायदा (Al Qaeda) जैसे समूहों ने केंद्रीकृत संदेशों पर भरोसा किया, जो मुख्य रूप से भौतिक माध्यमों से वितरित किए जाते थे, जबकि ISIL (जिसे दाएश भी कहा जाता है) के उदय ने ‘उच्च-मात्रा, बहुभाषी, डिजिटल रूप से वितरित दुष्प्रचार पारिस्थितिकी तंत्र’ को जन्म दिया।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी समिति (Counter-Terrorism Committee) के सचिवालय CTED की रिपोर्ट बताती है कि दुष्प्रचार अब केवल संदेशों से कहीं आगे निकल गया है और इन समूहों की परिचालन संरचना का हिस्सा बन गया है।
- आतंकवादी समूह अब युवाओं को निशाना बना रहे हैं, न केवल सोशल मीडिया पर बल्कि गेमिंग प्लेटफॉर्म और साझा हितों के इर्द-गिर्द बने ऑनलाइन समुदायों के माध्यम से भी।
- रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के उपयोग, गेमिंग प्लेटफॉर्म और डिस्कॉर्ड (Discord), ट्विच (Twitch) और स्ट्रीम (Stream) जैसे वैकल्पिक ऑनलाइन स्थानों के शोषण सहित कई उभरते रुझानों की पहचान की गई है।
- हिंसक चरमपंथी विचारधाराओं का डिजिटल स्पेस में बढ़ता अभिसरण (convergence) भी एक चिंताजनक प्रवृत्ति है, जहाँ सामग्री विभिन्न संदर्भों से आख्यानों, प्रतीकों और शिकायतों को मिलाकर बनाई जाती है।
आतंकवादी दुष्प्रचार क्या है?
- आतंकवादी दुष्प्रचार से तात्पर्य उन सभी संचार प्रयासों से है जो आतंकवादी समूह अपने उद्देश्यों को बढ़ावा देने, नए सदस्यों की भर्ती करने, धन जुटाने और अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए करते हैं।
- यह केवल संदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वीडियो, ऑडियो, ग्राफिक्स, लेख और इंटरैक्टिव सामग्री शामिल हो सकती है, जिसे विभिन्न डिजिटल और भौतिक माध्यमों से वितरित किया जाता है।
- आजकल, दुष्प्रचार आतंकवादी समूहों की परिचालन संरचना का एक केंद्रीय हिस्सा बन गया है, जो उनकी भर्ती, धन उगाही और यहाँ तक कि ‘शासन गतिविधियों’ को भी प्रभावित करता है।
- यह युवाओं को लक्षित करने के लिए सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन समुदायों का उपयोग करता है, अक्सर हिंसक चरमपंथी-थीम वाले गेम डिजाइन करके या मौजूदा गेम्स को संशोधित करके।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ग्राफिक हिंसक सामग्री (‘गोर’ – gore) का उपयोग कट्टरता (radicalisation) के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है।
- इसका उद्देश्य स्थानीय शिकायतों का फायदा उठाना, वैधता का निर्माण करना, धन उगाही की सुविधा प्रदान करना और अधिकार की धारणाओं को आकार देना है।
- आतंकवादी समूह दुष्प्रचार को केवल सामग्री के रूप में नहीं, बल्कि आतंकवाद के एक मुख्य परिचालन प्रवर्तक (operational enabler) के रूप में देखते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| प्रचार का तीव्र अनुकूलन | आतंकवादी समूह अपनी प्रचार रणनीतियों को तेजी से अनुकूलित कर रहे हैं, जिससे सदस्य देशों के कानूनों और नीतियों के साथ ‘त्वरण अंतर’ (acceleration gap) पैदा हो रहा है। |
| युवाओं को निशाना बनाना | सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन समुदायों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को तेजी से लक्षित किया जा रहा है। |
| AI और गेमिंग का उपयोग | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) का उपयोग और गेमिंग प्लेटफॉर्म (जैसे डिस्कॉर्ड, ट्विच) का शोषण कट्टरता फैलाने के लिए किया जा रहा है। |
| हिंसक सामग्री का प्रसार | ग्राफिक हिंसक सामग्री (‘गोर’) और शून्यवादी ऑनलाइन उपसंस्कृतियाँ (nihilistic online subcultures) युवाओं के कट्टरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। |
| प्रचार और शासन का विलय | आतंकवादी समूह अपने शासन संबंधी गतिविधियों को सुदृढ़ करने, स्थानीय शिकायतों का फायदा उठाने और वैधता बनाने के लिए प्रचार का उपयोग कर रहे हैं। |
महत्व
राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
- आतंकवादी संगठन ऑनलाइन प्रचार के माध्यम से भर्ती, धन उगाही और संचालन की योजना बना रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
- युवाओं का कट्टरता में शामिल होना देश के सामाजिक ताने-बाने और भविष्य की स्थिरता के लिए खतरा है।
कानून प्रवर्तन और नीति निर्माण
- आतंकवादी समूहों की तीव्र अनुकूलन क्षमता के कारण सरकारों के लिए प्रभावी कानून और नीतियां बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
- साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि प्रचार को रोका जा सके।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- आतंकवादी प्रचार एक वैश्विक समस्या है जिसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझाकरण की आवश्यकता है।
- संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की रिपोर्ट इस खतरे की गंभीरता को उजागर करती है और सदस्य देशों को मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करती है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी अंतर (Technological Gap)
- आतंकवादी समूह AI, गेमिंग और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपनी प्रचार रणनीतियों को तेजी से बदल रहे हैं।
- सरकारों की नीतियां और कानून इन तकनीकी परिवर्तनों के साथ तालमेल बिठाने में पीछे रह जाते हैं, जिससे ‘त्वरण अंतर’ पैदा होता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा
2. युवाओं का लक्ष्यीकरण
- आतंकवादी समूह सोशल मीडिया, गेमिंग और साझा हितों पर आधारित ऑनलाइन समुदायों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को निशाना बना रहे हैं।
- युवाओं के बीच कट्टरता को बढ़ावा देने वाली हिंसक सामग्री और शून्यवादी उपसंस्कृतियाँ एक बड़ी चिंता का विषय हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, आंतरिक सुरक्षा
3. प्रचार का परिचालन एकीकरण
- प्रचार अब केवल संदेश भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आतंकवादी समूहों की भर्ती, धन उगाही और यहां तक कि शासन संबंधी गतिविधियों का एक अभिन्न अंग बन गया है।
- इससे प्रचार को केवल ‘सामग्री’ के रूप में नहीं, बल्कि आतंकवाद के एक ‘मुख्य परिचालन प्रवर्तक’ के रूप में संबोधित करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा
4. वैचारिक अभिसरण (Ideological Convergence)
- विभिन्न हिंसक चरमपंथी विचारधाराएँ डिजिटल स्पेस में एक साथ आ रही हैं, जिससे विभिन्न संदर्भों से आख्यान, प्रतीक और शिकायतें मिलकर व्यापक दर्शकों तक पहुँच रही हैं।
- यह विभिन्न आतंकवादी समूहों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा दे सकता है।
यूपीएससी लिंक: आतंकवाद, कट्टरता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ऑनलाइन प्रचार की गति | आतंकवादी समूह सरकारों की प्रतिक्रियाओं की तुलना में तेजी से अपनी प्रचार रणनीतियों को अनुकूलित कर रहे हैं। |
| युवाओं का लक्ष्यीकरण | सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन समुदायों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। |
| AI और नई तकनीकों का दुरुपयोग | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग हिंसक चरमपंथी आख्यानों को फैलाने के लिए किया जा रहा है। |
| हिंसक सामग्री का प्रसार | ग्राफिक हिंसक सामग्री और शून्यवादी ऑनलाइन उपसंस्कृतियाँ कट्टरता को बढ़ावा दे रही हैं। |
| प्रचार का परिचालन एकीकरण | प्रचार अब आतंकवादी समूहों के भर्ती, धन उगाही और शासन संबंधी कार्यों का एक केंद्रीय हिस्सा बन गया है। |
आगे की राह
- आतंकवादी समूहों की बदलती प्रचार रणनीतियों का मुकाबला करने के लिए कानून और नीतियों को तेजी से अद्यतन (update) करना।
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (सोशल मीडिया, गेमिंग) के साथ मिलकर काम करना ताकि आपत्तिजनक सामग्री को हटाया जा सके और युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- युवाओं को कट्टरता से बचाने के लिए शिक्षा, जागरूकता अभियान और वैकल्पिक सकारात्मक आख्यानों को बढ़ावा देना।
- साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और ऑनलाइन निगरानी प्रणालियों में सुधार करना।
- आतंकवादी प्रचार को केवल ‘सामग्री’ के रूप में नहीं, बल्कि आतंकवाद के एक ‘मुख्य परिचालन प्रवर्तक’ के रूप में संबोधित करने के लिए व्यापक रणनीति विकसित करना।
- आतंकवाद विरोधी उपायों को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के अनुरूप सुनिश्चित करना।
- आतंकवादी प्रचार का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझाकरण को बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आतंकवादी दुष्प्रचार · ऑनलाइन कट्टरता · सोशल मीडिया का दुरुपयोग · गेमिंग प्लेटफॉर्म · कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग · युवाओं को लक्षित करना · आतंकवाद का वित्तपोषण · संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट · कानूनी और नीतिगत अंतराल · मानवाधिकार कानून
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19 (2)’, ‘note’: ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध’}
अवधारणा प्रवाह
आतंकवादी समूह ऑनलाइन प्रचार का उपयोग करते हैं। → प्रचार तेजी से अनुकूलित होता है और युवाओं को लक्षित करता है। → AI, गेमिंग और हिंसक सामग्री का उपयोग बढ़ता है। → सरकारों की नीतियां और कानून पीछे रह जाते हैं (त्वरण अंतर)। → युवाओं में कट्टरता और भर्ती बढ़ती है। → राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को खतरा पैदा होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी समूह अब केवल संदेशों के माध्यम से दुष्प्रचार नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसे अपनी परिचालन संरचना का हिस्सा बना रहे हैं।
2. अल-कायदा जैसे समूहों ने ISIL (दाएश) के विपरीत, मुख्य रूप से भौतिक माध्यमों से केंद्रीकृत संदेशों पर भरोसा किया।
3. रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग और गेमिंग प्लेटफॉर्म के शोषण को उभरते रुझानों के रूप में पहचाना गया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि रिपोर्ट बताती है कि दुष्प्रचार अब आतंकवादी समूहों के काम के हर चरण में ‘एम्बेडेड’ है। कथन 2 सही है क्योंकि रिपोर्ट में अल-कायदा के केंद्रीकृत भौतिक माध्यमों और ISIL के उच्च-मात्रा वाले डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के बीच अंतर बताया गया है। कथन 3 सही है क्योंकि रिपोर्ट AI, गेमिंग प्लेटफॉर्म और वैकल्पिक ऑनलाइन स्थानों के उपयोग को नए रुझानों के रूप में उजागर करती है।
Q2. आतंकवादी दुष्प्रचार के संदर्भ में, ‘त्वरण अंतराल’ (acceleration gap) शब्द का क्या अर्थ है?
- आतंकवादी समूहों द्वारा दुष्प्रचार फैलाने की गति और सरकारों की प्रतिक्रिया की गति के बीच का अंतर।
- आतंकवादी समूहों द्वारा धन जुटाने की गति और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा इसे रोकने की गति के बीच का अंतर।
- आतंकवादी हमलों की आवृत्ति और सुरक्षा बलों की उन्हें रोकने की क्षमता के बीच का अंतर।
- आतंकवादी विचारधाराओं के प्रसार की गति और शिक्षा प्रणालियों द्वारा उनका मुकाबला करने की गति के बीच का अंतर।
उत्तर: आतंकवादी समूहों द्वारा दुष्प्रचार फैलाने की गति और सरकारों की प्रतिक्रिया की गति के बीच का अंतर। — रिपोर्ट में ‘त्वरण अंतराल’ को आतंकवादी समूहों द्वारा अपनी दुष्प्रचार रणनीतियों को अनुकूलित करने की गति और सदस्य देशों के कानून और नीतियों के बीच के अंतर के रूप में परिभाषित किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि आतंकवादी दुष्प्रचार वैश्विक प्रयासों से आगे निकल रहा है, विशेष रूप से युवाओं को ऑनलाइन लक्षित करने में। इस संदर्भ में, भारत में ऑनलाइन कट्टरता (online radicalisation) के बढ़ते खतरे का विश्लेषण करें और इससे निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों तथा आवश्यक अतिरिक्त उपायों पर चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए ऑनलाइन कट्टरता के बढ़ते खतरे को परिभाषित करें।
2. **ऑनलाइन कट्टरता का बढ़ता खतरा:**
* युवाओं को लक्षित करना: सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म, साझा हितों वाले ऑनलाइन समुदाय।
* दुष्प्रचार के तरीके: AI का उपयोग, ग्राफिक हिंसक सामग्री (‘गोर’), nihilistic ऑनलाइन उपसंस्कृतियाँ।
* विचारधाराओं का विलय: विभिन्न संदर्भों से आख्यानों, प्रतीकों और शिकायतों का मिश्रण।
* परिचालन संरचना का हिस्सा: भर्ती, धन उगाही, संचालन की योजना।
3. **भारत में ऑनलाइन कट्टरता के प्रभाव:**
* आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव।
* सीमा पार आतंकवाद से संबंध।
* सामाजिक सद्भाव पर प्रभाव।
* युवाओं के बीच भेद्यता।
4. **सरकार द्वारा उठाए गए कदम:**
* कानूनी ढांचा: गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कानून।
* साइबर सुरक्षा पहल: भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In)।
* जागरूकता कार्यक्रम और सामुदायिक सहभागिता।
* अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सूचना साझाकरण।
* सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय।
5. **आवश्यक अतिरिक्त उपाय:**
* ‘त्वरण अंतराल’ को कम करना: कानून और नीतियों का तेजी से अनुकूलन।
* तकनीकी समाधान: AI-आधारित सामग्री मॉडरेशन और पहचान।
* शिक्षा और डिजिटल साक्षरता: युवाओं को महत्वपूर्ण सोच के लिए सशक्त बनाना।
* मनोवैज्ञानिक परामर्श और डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम।
* मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए प्रभावी प्रति-प्रचार रणनीतियाँ।
* बहु-हितधारक दृष्टिकोण: सरकार, नागरिक समाज, तकनीकी कंपनियों और परिवारों की भूमिका।
6. **निष्कर्ष:** ऑनलाइन कट्टरता से निपटने के लिए एक व्यापक, गतिशील और मानवाधिकार-अनुरूप दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: news.un.org
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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