19 Sep सीबीआईसी का विशेष अभियान 6: स्वच्छता, ई-कचरा निपटान और लंबित मामलों पर ध्यान, 2 अक्टूबर से

✎ CBIC का विशेष अभियान 6 सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटान और ई-कचरे के प्रभावी प्रबंधन पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (ई-कचरा प्रबंधन)
- Prelims: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), विशेष अभियान 6, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022, स्वच्छता अभियान, लंबित मामलों का निपटान, अभिलेख प्रबंधन
- Essay: सुशासन और प्रशासनिक दक्षता में स्वच्छता एवं प्रभावी प्रबंधन की भूमिका, पर्यावरण संरक्षण में सरकारी निकायों की जिम्मेदारी
त्वरित पुनरावृत्ति: CBIC का विशेष अभियान 6 सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटान और ई-कचरे के प्रभावी प्रबंधन पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने अपने सभी जोन, निदेशालयों और क्षेत्रीय इकाइयों के साथ 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक ‘विशेष अभियान 6’ में सक्रिय रूप से भाग लेने की घोषणा की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाना, लंबित मामलों को कम करना और ई-कचरे के प्रभावी संग्रहण, पृथक्करण तथा निपटान पर विशेष ध्यान देना है। यह अभियान पिछले ‘विशेष अभियान 5.0’ की सफलताओं पर आधारित है, जिसमें CBIC ने विभिन्न लक्ष्यों को 100 प्रतिशत हासिल किया था।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में प्रशासनिक दक्षता, स्वच्छता और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाती है।
- ये अभियान आमतौर पर महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) से शुरू होते हैं, जो स्वच्छता के महत्व पर उनके दर्शन को दर्शाते हैं।
- पिछले ‘विशेष अभियान 5.0’ के दौरान, CBIC ने 41,055 भौतिक फाइलों की समीक्षा की, 23,743 फाइलों को गैर-जरूरी घोषित किया, और 43,009 वर्ग फुट कार्यालय स्थान खाली किया।
- इस अभियान में 22,728 किलोग्राम कचरे का निपटान किया गया, जिसमें 8,801 किलोग्राम ई-कचरा (E-waste) शामिल था, जो ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुसार किया गया।
- CBIC इकाइयों ने लगभग 250 किलोग्राम मादक दवाओं और मनोरोगी पदार्थों के साथ-साथ लगभग 26 लाख विदेशी सिगरेट और ई-सिगरेट का भी सुरक्षित निपटान किया था।
- इन अभियानों का उद्देश्य केवल तात्कालिक सफाई नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज में स्थायी रूप से स्वच्छता, कुशल अभिलेख प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार निपटान प्रथाओं को शामिल करना है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) का विशेष अभियान 6 क्या है?
- यह केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जाने वाला एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
- अभियान का प्राथमिक लक्ष्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाना और लंबित मामलों के शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करना है।
- इस वर्ष के अभियान में ‘ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान’ पर विशेष जोर दिया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह अभियान अभिलेख प्रबंधन (Record Management) और स्थान प्रबंधन (Space Management) में सुधार पर भी केंद्रित है, जिसका उद्देश्य कार्यालयों में अनावश्यक फाइलों और वस्तुओं को हटाकर कार्यस्थल को अधिक कुशल बनाना है।
- CBIC की सभी क्षेत्रीय इकाइयां, जोन और निदेशालय इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, ताकि लक्ष्यों को लक्षित और सार्थक तरीके से प्राप्त किया जा सके।
- यह अभियान पिछले सफल ‘विशेष अभियान 5.0’ की निरंतरता है, जिसमें CBIC ने स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान में उल्लेखनीय प्रगति की थी।
- अभियान का उद्देश्य संसद सदस्यों से प्राप्त संदर्भों, जन शिकायतों और जन शिकायत अपीलों का त्वरित और प्रभावी ढंग से निपटान करना भी है।
- यह पहल ‘ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022’ के प्रावधानों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे ई-कचरे का वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान हो सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अवधि | 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक चलने वाला एक दीर्घकालिक अभियान। |
| मुख्य उद्देश्य | सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाना और लंबित मामलों को कम करना। |
| केंद्र बिंदु | स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन, स्थान प्रबंधन, लंबित मामलों का शीघ्र निपटान और ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण तथा निपटान। |
| आधार | विशेष अभियान 5.0 की सफलता पर आधारित, जिसमें 100% लक्ष्य प्राप्ति हुई। |
| कार्यान्वयन | केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के सभी जोन, निदेशालय और क्षेत्रीय इकाइयां सक्रिय रूप से शामिल। |
महत्व
प्रशासनिक महत्व
- यह अभियान सरकारी कार्यालयों में कार्यकुशलता और पारदर्शिता में सुधार करेगा, जिससे नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा मिलेगा।
- लंबित मामलों के निपटान से प्रशासनिक बोझ कम होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी।
- स्वच्छता और सुव्यवस्थित कार्यस्थल कर्मचारियों के मनोबल और उत्पादकता में वृद्धि करते हैं।
पर्यावरणीय महत्व
- ई-कचरे के प्रभावी प्रबंधन पर विशेष जोर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों के अनुरूप है।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 का अनुपालन सुनिश्चित करता है, जिससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
- मादक दवाओं और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं का सुरक्षित निपटान सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक महत्व
- जन शिकायतों और संसद सदस्यों से प्राप्त संदर्भों का निपटान नागरिकों के प्रति जवाबदेही और विश्वास को बढ़ाता है।
- स्वच्छता अभियान एक स्वस्थ कार्य संस्कृति को बढ़ावा देता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव समाज पर भी पड़ता है।
- सरकारी कार्यालयों में सुशासन की स्थापना से जनता को बेहतर सेवाएं प्राप्त होती हैं।
चुनौतियाँ
1. दीर्घकालिक प्रतिबद्धता
- अभियान की गति को बनाए रखना और स्वच्छता तथा कुशल प्रबंधन को प्रशासनिक कामकाज का निरंतर हिस्सा बनाना एक चुनौती है।
- कर्मचारियों के बीच जागरूकता और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. संसाधन प्रबंधन
- ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी।
- कार्यालय स्थान खाली करने और कचरे के निपटान के लिए उचित बुनियादी ढांचा और प्रक्रियाएं सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी
3. तकनीकी एकीकरण
- लंबित मामलों के निपटान और अभिलेख प्रबंधन में डिजिटल समाधानों को प्रभावी ढंग से एकीकृत करना।
- ई-कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस, सूचना प्रौद्योगिकी
4. परिणामों का मापन
- अभियान के प्रभाव और सफलता को मापने के लिए स्पष्ट मेट्रिक्स और मूल्यांकन तंत्र स्थापित करना।
- पिछले अभियानों की तुलना में सुधारों को वस्तुनिष्ठ रूप से प्रस्तुत करना।
यूपीएससी लिंक: शासन व्यवस्था, प्रदर्शन मूल्यांकन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अभियान की निरंतरता | अल्पकालिक उत्साह के बाद दीर्घकालिक प्रतिबद्धता बनाए रखना। |
| ई-कचरा प्रबंधन | वैज्ञानिक तरीके से संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे की कमी। |
| मानव संसाधन प्रशिक्षण | कर्मचारियों को नए प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं के लिए प्रशिक्षित करना। |
| लंबित मामलों की जटिलता | कुछ मामलों की जटिल प्रकृति के कारण उनके त्वरित निपटान में बाधाएं। |
| अंतर-विभागीय समन्वय | विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों और निदेशालयों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना। |
आगे की राह
- अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी स्तरों पर कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी और स्वामित्व को प्रोत्साहित करना।
- ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे में निवेश करना।
- लंबित मामलों के त्वरित निपटान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों का उपयोग करना।
- स्वच्छता और कुशल अभिलेख प्रबंधन को दैनिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का एक अभिन्न अंग बनाना।
- अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना, साथ ही सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना।
- पर्यावरण के प्रति संवेदनशील निपटान प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
- जन शिकायतों और संसद सदस्यों के संदर्भों के निपटान के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध तंत्र स्थापित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) · विशेष अभियान · स्वच्छता अभियान · लंबित मामलों का निपटान · ई-कचरा प्रबंधन · अभिलेख प्रबंधन · स्थान प्रबंधन · पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार निपटान · सरकारी कार्यालयों में दक्षता · डिजिटल इंडिया पहल
अवधारणा प्रवाह
CBIC द्वारा विशेष अभियान 6 की शुरुआत → स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन और लंबित मामलों पर ध्यान → ई-कचरे के प्रभावी संग्रह और निपटान पर विशेष जोर → प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार → नागरिक-केंद्रित शासन और बेहतर सार्वजनिक सेवाएँ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के ‘विशेष अभियान 6’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान 2 अक्टूबर, 2026 से 31 अक्टूबर, 2026 तक संचालित किया जाएगा।
2. इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाना और लंबित मामलों को कम करना है।
3. इस अभियान में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुसार ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर विशेष जोर दिया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अभियान की अवधि 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक है। कथन 2 सही है क्योंकि स्वच्छता और लंबित मामलों का निपटान इसके प्रमुख उद्देश्य हैं। कथन 3 भी सही है क्योंकि ई-कचरा प्रबंधन इस वर्ष के अभियान का एक महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र है, जो ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के ‘विशेष अभियान 5.0’ के प्रमुख परिणामों में से एक नहीं था?
- 41,055 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई।
- 23,743 फाइलों को गैर-जरूरी घोषित किया गया।
- लगभग 250 किलोग्राम मादक दवाओं का सुरक्षित निपटान किया गया।
- 10,000 वर्ग फुट कार्यालय स्थान खाली किया गया।
उत्तर: 10,000 वर्ग फुट कार्यालय स्थान खाली किया गया। — विशेष अभियान 5.0 के दौरान, 43,009 वर्ग फुट कार्यालय स्थान खाली हुआ था, न कि 10,000 वर्ग फुट। अन्य सभी विकल्प अभियान के सही परिणाम हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सरकारी कार्यालयों में दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में ‘स्वच्छता अभियान’ जैसे प्रशासनिक सुधारों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ई-कचरा प्रबंधन के संदर्भ में ऐसे अभियानों की प्रासंगिकता पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: सरकारी कार्यालयों में दक्षता और पारदर्शिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ‘स्वच्छता अभियान’ जैसे प्रशासनिक सुधारों का संक्षिप्त परिचय।
मुख्य भाग:
1. प्रशासनिक सुधारों की भूमिका:
– लंबित मामलों का निपटान: फाइलों की समीक्षा और छंटाई से निर्णय प्रक्रिया में तेजी।
– स्थान प्रबंधन: कार्यालय स्थान का अनुकूलन, बेहतर कार्य वातावरण।
– अभिलेख प्रबंधन: डिजिटल और भौतिक अभिलेखों का व्यवस्थित रखरखाव, सूचना तक पहुँच में सुगमता।
– जन शिकायत निवारण: संसद सदस्यों से प्राप्त संदर्भों और जन शिकायतों का त्वरित समाधान।
– संस्थागत स्वच्छता: कार्य संस्कृति में सुधार, जवाबदेही में वृद्धि।
2. समालोचनात्मक परीक्षण:
– अल्पकालिक प्रभाव बनाम दीर्घकालिक संस्थागतकरण।
– केवल अभियान अवधि तक सीमित उत्साह की चुनौती।
– मानव संसाधन और तकनीकी सहायता की आवश्यकता।
– नियमित निगरानी और मूल्यांकन तंत्र का अभाव।
3. ई-कचरा प्रबंधन के संदर्भ में प्रासंगिकता:
– ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 का अनुपालन।
– पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों में योगदान।
– डिजिटल इंडिया पहल के साथ तालमेल, अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सुरक्षित निपटान।
– स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिमों को कम करना।
निष्कर्ष: दक्षता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देने में ऐसे अभियानों के महत्व को रेखांकित करते हुए, उनके दीर्घकालिक प्रभाव के लिए निरंतर प्रयासों और संस्थागत तंत्रों की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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