कर्नाटक में गारंटी योजनाओं से बढ़ा राजकोषीय दबाव: उपमुख्यमंत्री

कर्नाटक में गारंटी योजनाओं से बढ़ा राजकोषीय दबाव: उपमुख्यमंत्री

कर्नाटक में गारंटी योजनाओं से बढ़ा राजकोषीय दबाव: उपमुख्यमंत्री

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✎ गारंटी योजनाएँ, यद्यपि सामाजिक कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं, राज्य के वित्त पर दबाव डाल सकती हैं और राजकोषीय विवेक के साथ संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान और राजव्यवस्था  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था
  • Prelims: राज्य वित्त, राजकोषीय घाटा, गारंटी योजनाएँ, राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, लोक कल्याणकारी योजनाएँ, राजस्व व्यय
  • Essay: लोक कल्याणकारी योजनाओं का वित्तीय स्थिरता पर प्रभाव, राजकोषीय विवेक और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: गारंटी योजनाएँ, यद्यपि सामाजिक कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं, राज्य के वित्त पर दबाव डाल सकती हैं और राजकोषीय विवेक के साथ संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने हाल ही में स्वीकार किया है कि राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई गारंटी योजनाओं के कारण राज्य के वित्त पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं पर अनुमानित व्यय ₹40,000-₹45,000 करोड़ से बढ़कर ₹50,000 करोड़ से अधिक हो गया है। यह स्वीकारोक्ति कई विधायकों और मंत्रियों द्वारा इन योजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली वित्तीय चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करने के बाद आई है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में, राज्य सरकारें विभिन्न सामाजिक और आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कई योजनाएँ शुरू करती हैं, जिनमें से कुछ ‘गारंटी योजनाएँ’ होती हैं जो नागरिकों को विशिष्ट लाभ या सेवाएँ सुनिश्चित करती हैं।
  • ये योजनाएँ अक्सर चुनाव घोषणापत्रों का हिस्सा होती हैं और इनका उद्देश्य मतदाताओं को आकर्षित करना और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना होता है।
  • हालांकि, ऐसी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिससे राज्य के बजट और राजकोषीय स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम (Fiscal Responsibility and Budget Management Act) राज्यों को राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और ऋण-से-GDP अनुपात को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।
  • गारंटी योजनाओं के कारण राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) में वृद्धि हो सकती है, जिससे पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए उपलब्ध धन कम हो सकता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों की पात्रता मानदंड में बदलाव भी वित्तीय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जैसा कि कर्नाटक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के संबंध में देखा गया है।

गारंटी योजनाएँ और राज्य वित्त

  • गारंटी योजनाएँ वे योजनाएँ होती हैं जहाँ सरकार नागरिकों को कुछ लाभ या सेवाएँ प्रदान करने का वादा करती है, जैसे मुफ्त बिजली, मुफ्त यात्रा, या नकद हस्तांतरण।
  • इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करना और समाज के कमजोर वर्गों को सहायता प्रदान करना होता है।
  • हालांकि, इन योजनाओं के लिए आवश्यक धन अक्सर राज्य के राजस्व से आता है, जिससे राज्य के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
  • यदि इन योजनाओं के लिए पर्याप्त राजस्व सृजन नहीं होता है, तो राज्य को ऋण लेना पड़ सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है।
  • उच्च राजकोषीय घाटा राज्य की ऋण चुकाने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है और भविष्य में विकास परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता को सीमित कर सकता है।
  • राजकोषीय विवेक (Fiscal Prudence) बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि वर्तमान की कल्याणकारी आवश्यकताओं और भविष्य की वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
  • इन योजनाओं के कार्यान्वयन में लाभार्थियों की पहचान और पात्रता मानदंड का सटीक निर्धारण भी महत्वपूर्ण है ताकि संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग हो सके और दुरुपयोग को रोका जा सके।
  • केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय संबंध और केंद्रीय वित्त आयोग (Central Finance Commission) की सिफारिशें भी राज्य वित्त की स्थिति को प्रभावित करती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
गारंटी योजनाएँ राज्य सरकारों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए दी जाने वाली मुफ्त सेवाएँ या लाभ।
राजकोषीय दबाव राज्य के वित्त पर बढ़ता बोझ, जो राजस्व और व्यय के बीच असंतुलन पैदा करता है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली योजनाएँ।
आय सीमा में वृद्धि अधिक लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाने का प्रयास।
राजकोषीय उत्तरदायित्व राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए विवेकपूर्ण व्यय और राजस्व प्रबंधन।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • गारंटी योजनाओं के कारण राज्य के बजट पर बढ़ता वित्तीय बोझ, जिससे विकास परियोजनाओं के लिए संसाधनों की कमी हो सकती है।
  • राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) में वृद्धि की संभावना, जो राज्य की ऋणग्रस्तता को बढ़ा सकती है।
  • मुद्रास्फीति (Inflation) पर संभावित प्रभाव, यदि इन योजनाओं के लिए अत्यधिक धन मुद्रित किया जाता है या बाजार में तरलता (Liquidity) बढ़ जाती है।

सामाजिक महत्व

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से कमजोर वर्गों को सहायता, जिससे गरीबी और असमानता कम हो सकती है।
  • लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि से सामाजिक कल्याण में सुधार की संभावना, विशेषकर आय सीमा में वृद्धि के बाद।
  • हालांकि, यदि योजनाओं का कार्यान्वयन त्रुटिपूर्ण है, तो वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ न पहुँचने का जोखिम भी है।

शासनिक महत्व

  • राज्य सरकारों के लिए वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय विवेक बनाए रखने की चुनौती।
  • नीति निर्माण में दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और तात्कालिक राजनीतिक लाभ के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता।
  • योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और लाभार्थियों की पहचान में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ

1. राजकोषीय स्थिरता पर दबाव

  • गारंटी योजनाओं पर अनुमानित व्यय में वृद्धि, जिससे राज्य के राजस्व पर भारी दबाव पड़ रहा है।
  • विकास परियोजनाओं और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए उपलब्ध संसाधनों में कमी की संभावना।

2. ऋणग्रस्तता में वृद्धि

  • बढ़ते व्यय को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को अधिक ऋण लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • उच्च ऋणग्रस्तता भविष्य की पीढ़ियों पर वित्तीय बोझ डाल सकती है और राज्य की वित्तीय साख (Creditworthiness) को प्रभावित कर सकती है।

3. संसाधनों का कुशल आवंटन

  • गारंटी योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च से अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए संसाधनों की कमी हो सकती है।
  • संसाधनों के कुशल और न्यायसंगत आवंटन की चुनौती।

4. लाभार्थियों की पहचान और अपात्रता

  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे योजनाओं में अपात्र लाभार्थियों की पहचान और उन्हें सूची से हटाना एक चुनौती है।
  • आय सीमा में वृद्धि के बाद भी, सही लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाना सुनिश्चित करना।

5. दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन

  • तात्कालिक राजनीतिक लाभ के लिए शुरू की गई योजनाओं का दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करना।
  • राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
गारंटी योजनाओं का बढ़ता खर्च राज्य के वित्त पर ₹50,000 करोड़ से अधिक का दबाव।
राजकोषीय घाटा व्यय में वृद्धि से राजकोषीय घाटे के बढ़ने की संभावना।
विकास परियोजनाओं पर प्रभाव गारंटी योजनाओं के कारण अन्य विकास कार्यों के लिए धन की कमी।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन में त्रुटियाँ लगभग 23 लाख लाभार्थियों के नाम हटाए गए, हालांकि आय सीमा बढ़ने से कई वापस आ सकते हैं।
अपात्र लाभार्थियों की पहचान योजनाओं का लाभ सही व्यक्तियों तक पहुँचाने में चुनौती।

आगे की राह

  • राज्य सरकारों को राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) बनाए रखने और राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के लक्ष्यों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
  • गारंटी योजनाओं के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी वित्तीय ढाँचा विकसित किया जाए, जिसमें दीर्घकालिक वित्तीय प्रभावों का आकलन शामिल हो।
  • लाभार्थियों की पहचान के लिए मजबूत तंत्र स्थापित किए जाएं ताकि केवल पात्र व्यक्तियों को ही योजनाओं का लाभ मिल सके और अपात्रता को रोका जा सके।
  • राजस्व जुटाने के वैकल्पिक स्रोतों की खोज की जाए और कर आधार (Tax Base) को व्यापक बनाने के उपायों पर विचार किया जाए।
  • सार्वजनिक व्यय की प्राथमिकता तय की जाए, जिसमें पूंजीगत व्यय और उत्पादक निवेश को बढ़ावा दिया जाए ताकि दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) सुनिश्चित हो सके।
  • केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय संबंधों को मजबूत किया जाए ताकि राज्यों को वित्तीय चुनौतियों का सामना करने में सहायता मिल सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राजकोषीय उत्तरदायित्व · गारंटी योजनाएँ · राज्य वित्त · राजकोषीय घाटा · लोक कल्याणकारी योजनाएँ · राजकोषीय समेकन · राजस्व व्यय · पूंजीगत व्यय · राजकोषीय नीति · आर्थिक स्थिरता · सब्सिडी · सार्वजनिक ऋण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन और कार्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 293’, ‘note’: ‘राज्यों द्वारा उधार लेना’}

अवधारणा प्रवाह

राज्य सरकार द्वारा गारंटी योजनाओं की घोषणा  →  योजनाओं के कार्यान्वयन से व्यय में वृद्धि  →  राज्य के वित्त पर राजकोषीय दबाव  →  राजकोषीय घाटे और ऋणग्रस्तता में वृद्धि की संभावना  →  विकास परियोजनाओं के लिए संसाधनों की कमी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 293 के तहत, राज्य सरकारें केंद्र सरकार की सहमति के बिना उधार नहीं ले सकती हैं यदि उनके पास केंद्र सरकार के प्रति कोई बकाया ऋण है।
2. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 का उद्देश्य भारत में राजकोषीय अनुशासन स्थापित करना है।
3. राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) राज्य के वित्त पर केंद्र सरकार के नियंत्रण को सुनिश्चित करता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 293(3) के अनुसार, यदि किसी राज्य पर केंद्र सरकार का कोई ऋण बकाया है, तो वह केंद्र की सहमति के बिना और उधार नहीं ले सकता। कथन 2 सही है। FRBM अधिनियम का मुख्य उद्देश्य राजकोषीय घाटे को कम करना और राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। कथन 3 गलत है। राज्य वित्त आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243I के तहत राज्यपाल द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्य कार्य पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना और राज्य सरकार को सिफारिशें देना है, न कि केंद्र सरकार के नियंत्रण को सुनिश्चित करना।

Q2. अभिकथन (A): गारंटी योजनाएं अक्सर राज्य के राजस्व व्यय में वृद्धि करती हैं।
कारण (R): ये योजनाएं आमतौर पर नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण या सब्सिडी के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि गारंटी योजनाएं जैसे मुफ्त बिजली, पानी, परिवहन या प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण राज्य के लिए आवर्ती व्यय होते हैं, जो राजस्व व्यय की श्रेणी में आते हैं। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है। ये योजनाएं सीधे नागरिकों को वित्तीय लाभ या सब्सिडी के रूप में दी जाती हैं, जिससे राज्य के राजस्व व्यय में वृद्धि होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल के समय में राज्य सरकारों द्वारा शुरू की गई गारंटी योजनाओं के वित्तीय निहितार्थों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन योजनाओं के कारण उत्पन्न होने वाले राजकोषीय दबाव को कम करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: उत्तर को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाना चाहिए।
भाग 1: गारंटी योजनाओं के वित्तीय निहितार्थों का आलोचनात्मक परीक्षण।
* परिचय: गारंटी योजनाओं की संक्षिप्त परिभाषा और उनके उद्देश्य।
* सकारात्मक निहितार्थ: आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन, मांग में वृद्धि, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा।
* नकारात्मक निहितार्थ (आलोचनात्मक परीक्षण):
* राजकोषीय घाटे में वृद्धि: राजस्व व्यय में भारी वृद्धि और पूंजीगत व्यय पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
* सार्वजनिक ऋण में वृद्धि: ऋण चुकाने की क्षमता पर दबाव।
* मुद्रास्फीति (Inflation) का दबाव: क्रय शक्ति में वृद्धि से मांग-प्रेरित मुद्रास्फीति की संभावना।
* निवेश पर प्रभाव: निजी निवेश के लिए संसाधनों की कमी।
* राजकोषीय अनुशासन का उल्लंघन: FRBM अधिनियम के लक्ष्यों से विचलन।
* दीर्घकालिक संवृद्धि पर प्रभाव: उत्पादक निवेश के बजाय उपभोग-आधारित व्यय।
भाग 2: राजकोषीय दबाव को कम करने के उपाय।
* राजस्व वृद्धि के उपाय: कर आधार का विस्तार, कर अनुपालन में सुधार, गैर-कर राजस्व स्रोतों की पहचान।
* व्यय युक्तिकरण: अनावश्यक व्यय में कटौती, सब्सिडी का युक्तिकरण, लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करना।
* राजकोषीय समेकन: FRBM लक्ष्यों का पालन, ऋण-GDP अनुपात को नियंत्रित करना।
* केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध: केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता या बेहतर राजस्व बंटवारे की मांग।
* दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि: पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देना, निवेश का माहौल सुधारना।
* पारदर्शिता और जवाबदेही: योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रभावों की नियमित निगरानी।
* निष्कर्ष: लोक कल्याण और राजकोषीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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